मशीन शॉप क्या है?
मशीन शॉप वह कारख़ाना है जहाँ धातु को काम के पुर्ज़ों में बदला जाता है। इसे धातु की रसोई समझिए। कच्चा माल छड़, चादर या पिघली धातु होता है। नतीजा बोल्ट, गियर, पाइप का फ्रेम या मोटर का खोल होता है।
काम दो चरणों में होता है। पहले मोटा आकार जल्दी बनता है (ढलाई, फोर्जिंग, मोड़ना, वेल्डिंग)। फिर सही माप धीरे-धीरे आती है (मशीनिंग और हाथ की फ़िनिशिंग)। मोटा पहले, सही माप बाद में, क्योंकि अंतिम आकार के पास से शुरू करना सस्ता पड़ता है।
ढलाई और फोर्जिंग
ढलाई (Casting)। धातु भट्ठी में पिघलाकर साँचे (mould) में डाली जाती है। साँचा पुर्ज़े के आकार का खोखला स्थान होता है। रेत की ढलाई में रेत को पैटर्न (पुर्ज़े की नकल) के चारों ओर दबाकर साँचा बनता है। पैटर्न पुर्ज़े से थोड़ा बड़ा बनाते हैं, क्योंकि ठंडी होकर धातु सिकुड़ती है। इंजन ब्लॉक, पंप की बॉडी और घंटियाँ ढलाई से बनती हैं।
फोर्जिंग। धातु की छड़ को नरम (लाल गरम) करके हथौड़े या प्रेस से आकार देते हैं। धातु पिघलती नहीं और कम नहीं होती। रिंच और क्रैंकशाफ़्ट जैसे फोर्ज किए पुर्ज़े मज़बूत होते हैं। गाँव का लोहार हाथ से फोर्ज करता है; कारख़ानों में पावर हैमर और प्रेस होते हैं।
दोनों काम गरम और ख़तरनाक हैं। दस्ताने, एप्रन, फ़ेस शील्ड और चमड़े के जूते पहनें।
शीट-मेटल का काम
शीट पतली धातु होती है, आमतौर पर 3 मिमी से कम। यह ठंडा काम है। मुख्य चरण:
- स्क्राइबर और स्केल से आकार अंकित करना।
- स्निप या शियरिंग मशीन से काटना।
- बेंडिंग मशीन पर या किनारे पर मोड़ना, जिससे डिब्बे, नलिकाएँ और ट्रे बनती हैं।
- रिवेट, मुड़ी सीम या स्पॉट वेल्ड से जोड़ना।
ध्यान दें: मोड़ने पर बाहर की परत खिंचती है और अंदर की दबती है। इसलिए सपाट लंबाई में थोड़ा बेंड अलाउंस जोड़ते हैं। टिन, लॉकर, पंखे और कार की बॉडी सब सपाट चादर से शुरू होते हैं।
वेल्डिंग और कटाई
वेल्डिंग जोड़ को पिघलाकर धातु जोड़ती है। प्रकार:
- आर्क वेल्डिंग: छड़ और प्लेट के बीच बिजली की चिंगारी 3000 °C से ऊपर गरमी देती है। छड़ पिघलकर जोड़ में भरती है।
- गैस वेल्डिंग: ऑक्सीजन में जलती एसिटिलीन की लौ किनारे पिघलाती है।
- स्पॉट वेल्डिंग: दो चादरें तांबे की नोकों के बीच दबती हैं और तेज़ धारा एक छोटा बिंदु पिघला देती है।
कटाई में ऑक्सी-ईंधन लौ या प्लाज़्मा टॉर्च प्लेट में पतली रेखा जलाकर या पिघलाकर काटती है।
सुरक्षा: आर्क सूरज जितना चमकीला होता है। हमेशा गहरे काँच वाला वेल्डिंग हेलमेट, चमड़े के दस्ताने और एप्रन पहनें। नंगी आँख से आर्क कभी न देखें। जगह सूखी रखें, पास में ईंधन न हो और अग्निशामक रखें।
मशीनिंग: सही माप के लिए धातु छीलना
मशीनिंग में कठोर कटिंग टूल धातु छीलता है। मुख्य मशीनें:
- लेथ: जॉब घूमता है और टूल स्थिर रहकर चलता है। इससे शाफ़्ट, बोल्ट जैसे गोल पुर्ज़े बनते हैं (टर्निंग, फ़ेसिंग, ड्रिलिंग, चूड़ी)।
- मिलिंग मशीन: कटर घूमता है और जॉब उसके नीचे चलता है। समतल सतह, खाँचे और गियर बनते हैं।
- ड्रिलिंग मशीन: घूमता ड्रिल बिट गोल छेद बनाता है।
- शेपर और ग्राइंडर: शेपर समतल सतह काटता है; ग्राइंडर बहुत चिकनी और सटीक फ़िनिश देता है।
कट को तीन बातें तय करती हैं: कटिंग स्पीड (सतह टूल के सामने कितनी तेज़ गुज़रती है), फ़ीड (हर चक्कर में टूल कितना आगे बढ़ता है) और कट की गहराई (कितनी मोटी परत उतरती है)। कूलेंट तेल टूल और जॉब को गरम होने से बचाता है। घूमते जॉब के पास ढीले कपड़े और दस्ताने न पहनें, लंबे बाल बाँध लें और छीलन को नंगे हाथ न छुएँ।
हाथ की फ़िनिशिंग और असेंबली
मशीन के बाद तेज़ किनारे और छोटे निशान रह जाते हैं। फ़िटर पुर्ज़े को हाथ से पूरा करता है:
- रेती से तेज़ किनारे और थोड़ी धातु हटती है। स्क्रेपर और एमरी कपड़ा सतह चिकनी करते हैं।
- आरी और छेनी फ़ालतू धातु काटती हैं।
- टैपिंग और डाई से हाथ से अंदर और बाहर की चूड़ियाँ बनती हैं।
- मापन स्टील रूल, वर्नियर कैलिपर या माइक्रोमीटर से होता है, ताकि माप सही निकले।
असेंबली में पुर्ज़े जुड़ते हैं: बोल्ट-नट, रिवेट, की, प्रेस फ़िट या वेल्ड। अच्छी असेंबली आराम से घूमती है, डगमगाती नहीं और हर बोल्ट सही कसाव से कसा होता है।
करके देखें: कागज़-मिट्टी की शॉप
घर पर सुरक्षित चीज़ों से हर काम महसूस करें। ढलाई: मिट्टी में सिक्का दबाकर हटाएँ और खोखले में गरम मोम भरें (बड़ों की मदद से)। फोर्जिंग: मिट्टी की गेंद को दबाकर चपटा करें। क्या मिट्टी कम हुई? मोड़ना: गत्ते को एक रेखा पर मोड़ें। वेल्डिंग: कागज़ की दो पट्टियाँ किनारे पर गोंद से जोड़ें। मशीनिंग: मिट्टी की छड़ घुमाएँ और लकड़ी से छीलें। ऊपर के 3D में पहले अंदाज़ा लगाएँ कि स्लाइडर क्या करेगा, फिर चलाकर जाँचें।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- कटिंग स्पीड v = π × d × N / 1000 (मी/मिनट), d मिमी में, N चक्कर प्रति मिनट (rpm)
- मशीनिंग समय t = L / (f × N), L = कट की लंबाई (मिमी), f = फ़ीड (मिमी प्रति चक्कर)
- एक पास के बाद व्यास = पुराना व्यास − 2 × कट की गहराई
- पैटर्न का माप ≈ ढलाई का माप × (1 + संकुचन); कई धातुओं में संकुचन लगभग 1 से 2 %
- फोर्जिंग में आयतन समान रहता है: पहले लंबाई × क्षेत्रफल = बाद में लंबाई × क्षेत्रफल
हल किए गए उदाहरण
1. 40 मिमी व्यास की गोल छड़ को लेथ पर 2 मिमी कट की गहराई से छीला गया। एक पास के बाद व्यास कितना होगा?
टूल हर तरफ़ से 2 मिमी हटाता है। नया व्यास = 40 − 2 × 2 = 36 मिमी।
2. 40 मिमी की छड़ 500 rpm पर घूमती है। कटिंग स्पीड निकालें। π = 3.14 लें।
v = π d N / 1000 = 3.14 × 40 × 500 / 1000 = 62.8 मी/मिनट।
3. ढलाई 200 मिमी लंबी चाहिए। ठंडे होने में धातु 2 % सिकुड़ती है। पैटर्न कितना लंबा बनाएँ?
पैटर्न ≈ 200 × 1.02 = 204 मिमी। अतिरिक्त 4 मिमी सिकुड़कर ख़त्म हो जाएगा।
4. शाफ़्ट 120 मिमी लंबा है। जॉब 600 rpm पर घूमता है और टूल 0.2 मिमी प्रति चक्कर फ़ीड करता है। एक पास कितनी देर में पूरा होगा?
समय = L / (f × N) = 120 / (0.2 × 600) = 120 / 120 = 1 मिनट।
5. 100 मिमी लंबी और 20 मिमी व्यास की गरम छड़ को फोर्ज करके 25 मिमी व्यास किया गया। नई लंबाई निकालें (आयतन समान)।
लंबाई 1/d² के समानुपाती है। नई लंबाई = 100 × (20/25)² = 100 × 0.64 = 64 मिमी।
6. 50 मिमी व्यास की छड़ को 2 मिमी कट की गहराई वाले पास से 42 मिमी करना है। कितने पास चाहिए?
हर पास व्यास 4 मिमी घटाता है। 50 − 42 = 8 मिमी हटाना है, इसलिए 8 / 4 = 2 पास।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि फोर्जिंग में धातु पिघलती है। वह सिर्फ़ नरम और लाल गरम होती है; पिघलाना ढलाई में होता है।
- पैटर्न को ढलाई के बराबर बनाना। ठंडी होकर धातु सिकुड़ती है, इसलिए पैटर्न थोड़ा बड़ा चाहिए।
- व्यास में कमी = कट की गहराई मान लेना। लेथ अक्ष के दोनों तरफ़ काटता है, इसलिए व्यास कट की गहराई का दोगुना घटता है।
- बिना हेलमेट वेल्डिंग आर्क देखना, या घूमती मशीन के पास दस्ताने और ढीली आस्तीन पहनना। शॉप की सबसे आम चोटें यही हैं।