औद्योगिक पदार्थों की मशीनन-क्षमता
मशीनन-क्षमता बताती है कि किसी पदार्थ को काटकर आकार देना कितना आसान है। अच्छी मशीनन-क्षमता वाला पदार्थ लंबा औज़ार-जीवन, चिकनी सतह, कम काटने का बल और सुघड़ छिलके (chips) देता है।
- नरम, तन्य धातुएँ (एल्युमिनियम, पीतल, फ़्री-कटिंग स्टील): आसानी से कटती हैं। पीतल और खास फ़्री-कटिंग स्टील के छिलके छोटे टुकड़ों में टूटते हैं।
- कठोर या दृढ़ धातुएँ (कठोरित स्टील, स्टेनलेस स्टील, टाइटेनियम): औज़ार गर्म होकर जल्दी घिसता है, और काटते समय धातु और कड़ी हो सकती है। मशीनन-क्षमता कम।
- ढलवाँ लोहा: भंगुर है, इसलिए छोटे टूटे छिलके बनते हैं; अंदर का ग्रेफ़ाइट चिकनाई का काम करता है।
- प्लास्टिक और लकड़ी: आसानी से कटते हैं पर औज़ार गर्म या कुंद हो तो पिघल या फट सकते हैं।
- सिरेमिक: आम औज़ार के लिए बहुत कठोर। इन्हें हीरे से घिसकर या पकाने से पहले आकार दिया जाता है।
बेहतर काटने के लिए ज़्यादा कठोर औज़ार लेते हैं, अच्छी कटाई गति, फ़ीड और कट की गहराई रखते हैं और शीतलक (coolant) लगाते हैं।
प्रमुख प्रसंस्करण विधियाँ
प्रसंस्करण विधियाँ चार परिवारों में आती हैं।
- ढलाई: तरल पदार्थ साँचे में डालना (इंजन ब्लॉक, घंटियाँ, प्लास्टिक के पुर्ज़े)।
- रूपण (आकार बदलना, कुछ हटता नहीं): फोर्जिंग (गर्म गुटके को हथौड़े या प्रेस से पीटना), रोलिंग (बेलनों के बीच दबाकर चादर बनाना), ड्रॉइंग (डाई से खींचकर तार बनाना), एक्सट्रूज़न (डाई से धकेलकर लंबा आकार बनाना), चादर का दबाना और मोड़ना।
- कटाई (मशीनिंग): टर्निंग (काम घूमता है, औज़ार चलता है), मिलिंग (कटर घूमता है), ड्रिलिंग (छेद), ग्राइंडिंग (घिसाई वाले पहिए से महीन फ़िनिश)। CNC मशीनें यही काम कंप्यूटर के नियंत्रण में करती हैं।
- जोड़ना: वेल्डिंग (पिघलाकर मिलाना), ब्रेज़िंग और सोल्डरिंग (भराव धातु पिघलती है, पर जोड़े जाने वाले भाग नहीं), बोल्ट, रिवेट और चिपकाने वाले पदार्थ।
इसके अलावा: ऊष्मा-उपचार (एनीलिंग, कठोरीकरण, टेम्परिंग), सतह-परिष्करण (पॉलिश, पेंट, परत चढ़ाना) और योगात्मक निर्माण (3D प्रिंटिंग, परत-दर-परत)।
चुनाव: रूपण में सामग्री कम बर्बाद होती है; कटाई सबसे सटीक नाप देती है; ढलाई जटिल आकारों और बड़ी संख्या के लिए ठीक है; जोड़ने से छोटे भागों से बड़े ढाँचे बनते हैं।
करके देखो: मिट्टी की गेंद को हथेलियों में दबाओ (रूपण), फिर प्लास्टिक के चाकू से उसके टुकड़े काटो (कटाई)। रूपण के बाद वज़न वही रहता है, कटाई के बाद घट जाता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- कटाई गति v = π × D × N ÷ 1000 (m/min; D mm में, N चक्कर/मिनट)
- टर्निंग समय T = L ÷ (f × N) (मिनट; L लंबाई, f प्रति चक्कर फ़ीड)
- पदार्थ निष्कासन दर = v × f × d (mm³/min, v mm/min में)
- फोर्जिंग: आयतन वही रहता है, इसलिए क्षेत्रफल × ऊँचाई = स्थिर
- रोलिंग में कमी % = (t₀ − t₁) ÷ t₀ × 100
हल किए गए उदाहरण
1. 50 mm व्यास की छड़ 400 चक्कर/मिनट पर घूमती है। कटाई गति ज्ञात करो।
v = π × 50 × 400 ÷ 1000 = 62.8 m/min.
2. 120 mm लंबा कट 0.2 mm/चक्कर फ़ीड और 300 चक्कर/मिनट पर लगाया जाता है। कितना समय लगेगा?
T = L ÷ (f × N) = 120 ÷ (0.2 × 300) = 120 ÷ 60 = 2 मिनट.
3. 100 mm × 100 mm × 200 mm ऊँचे फोर्जिंग गुटके को दबाकर 100 mm ऊँचा किया गया। नया आधार-क्षेत्रफल ज्ञात करो।
आयतन = 100 × 100 × 200 = 2 000 000 mm³. नया क्षेत्रफल = 2 000 000 ÷ 100 = 20 000 mm² (आधार बढ़ गया)।
4. एक पट्टी 20 mm से 15 mm मोटाई तक बेली गई। कमी % ज्ञात करो।
(20 − 15) ÷ 20 × 100 = 25%.
5. टर्निंग कट में v = 100 m/min, फ़ीड 0.25 mm/चक्कर और गहराई 2 mm है। पदार्थ निष्कासन दर ज्ञात करो।
v = 100 m/min = 100 000 mm/min. MRR = 100 000 × 0.25 × 2 = 50 000 mm³/min.
आम गलतियाँ
- सोचना कि ज़्यादा कठोर धातु हमेशा आसानी से मशीन होती है। कठोर धातुएँ आम तौर पर औज़ार को जल्दी घिसती हैं।
- कटाई गति के सूत्र में D मिलीमीटर में लेकर ÷ 1000 भूल जाना।
- सोचना कि फोर्जिंग पदार्थ काटकर हटाती है। वह सिर्फ़ आकार बदलती है, आयतन वही रहता है।
- ब्रेज़िंग और वेल्डिंग को मिला देना। ब्रेज़िंग में मूल धातुएँ नहीं पिघलतीं।