कार किससे बनती है
डिज़ाइनर हर पुर्ज़े के लिए सामग्री चुनते समय पूछते हैं: कितनी मज़बूत, कितनी भारी, कितनी महँगी, कितनी सुरक्षित, और क्या आसानी से ढल सकती है?
- स्टील: मज़बूत और सस्ता। बॉडी, फ़्रेम, एक्सल, स्प्रिंग।
- एल्युमिनियम: स्टील का लगभग एक-तिहाई वज़न। इंजन ब्लॉक, पहिए, कुछ बॉडी पैनल।
- प्लास्टिक: हल्का और साँचे में ढालना आसान। बंपर, डैशबोर्ड, ईंधन टंकी।
- रबर: पकड़ देता और झटके सोखता है। टायर, पाइप, सील।
- काँच: पारदर्शी। खिड़कियों में सुरक्षा काँच (टूटने पर विंडस्क्रीन जुड़ी रहती है)।
- ताँबा तारों में बिजली ले जाता है।
प्रसंस्करण: आकार देना और जोड़ना
कच्ची सामग्री इन चरणों से पुर्ज़ा बनती है:
- काटना: शियर, आरी, लेज़र या प्लाज़्मा कटर।
- मोड़ना और प्रेस करना: प्रेस चादर को साँचे में दबाकर दरवाज़ा या बोनट बनाता है।
- ढलाई (कास्टिंग): पिघली धातु साँचे में डाली जाती है, जैसे इंजन ब्लॉक।
- फ़ोर्जिंग: गर्म धातु को हथौड़े से आकार देते हैं, जैसे क्रैंकशाफ़्ट। इससे वह बहुत मज़बूत होती है।
- मशीनिंग: लेथ और ड्रिल धातु को ठीक नाप में काटते हैं।
- मोल्डिंग: गर्म प्लास्टिक साँचे में दबाते हैं।
- जोड़ना: वेल्डिंग, रिवेट, बोल्ट और गोंद।
- ऊष्मा उपचार और कोटिंग: गर्म करने से पुर्ज़े सख़्त होते हैं; पेंट, जिंक की परत और तेल जंग रोकते हैं।
कार की देखभाल के औज़ार और तरीक़े
हर काम के लिए सही औज़ार, सही तरीक़े से:
- हाथ के औज़ार: स्पैनर, सॉकेट, पेचकस, प्लास, हथौड़ी।
- टॉर्क रिंच: बोल्ट को ठीक मरोड़ बल (टॉर्क, N·m) पर कसता है। ढीला हो तो गिर सकता है; ज़्यादा कसा हो तो टूट सकता है।
- नापने के औज़ार: पैमाना, वर्नियर कैलिपर, माइक्रोमीटर, फ़ीलर गेज, टायर गेज।
- उठाने के औज़ार: जैक, जैक स्टैंड, लिफ़्ट। सिर्फ़ जैक पर टिकी कार के नीचे कभी काम न करें।
- बिजली के औज़ार: ड्रिल, ग्राइंडर, इम्पैक्ट रिंच।
- जाँच यंत्र: मल्टीमीटर, कंप्रेशन गेज, स्कैन टूल।
सुरक्षा: आँखों का चश्मा, दस्ताने, पहिए के नीचे रोक, साफ़ फ़र्श और हर बोल्ट के लिए सही स्पैनर (ग़लत स्पैनर सिर घिस देता है)।
ऑटोमोटिव सामग्री का पुनर्चक्रण
उम्र पूरी कर चुकी कार को एंड-ऑफ़-लाइफ़ वाहन कहते हैं। रीसायकल के चरण:
- निकालना: ईंधन, तेल, कूलेंट, ब्रेक तरल और रेफ़्रिजरेंट निकालें। बैटरी हटाएँ। सबको सुरक्षित रखें।
- हटाना: जो पुर्ज़े दोबारा काम आ सकें (इंजन, टायर, काँच, सीट) उन्हें निकालें।
- कुचलना और टुकड़े करना: बॉडी के टुकड़े होते हैं। चुंबक स्टील खींचता है; दूसरी मशीनें एल्युमिनियम, ताँबा और प्लास्टिक अलग करती हैं।
- पिघलाकर दोबारा बनाना: स्टील और एल्युमिनियम पिघलाए जाते हैं। रीसायकल एल्युमिनियम में नए से लगभग दसवाँ हिस्सा ऊर्जा लगती है।
बैटरी निर्माता को लौटती है (सीसा बार-बार रीसायकल होता है)। टायर का चूरा सड़क और फ़र्श में काम आता है। अच्छे डिज़ाइन में पुर्ज़े आसानी से खुलते हैं और प्लास्टिक का प्रकार लिखा रहता है।
करके देखिए: टॉर्क और छँटाई
3D में टॉर्क स्लाइडर चलाइए। हरा क्षेत्र ढूँढिए। फिर घर की पाँच चीज़ें लिखिए और बताइए कि हर एक स्टील, एल्युमिनियम, प्लास्टिक, रबर या काँच की है, और कैसे रीसायकल हो सकती है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- टॉर्क (N·m) = बल (N) × स्पैनर की लंबाई (m)
- द्रव्यमान = घनत्व × आयतन
- रीसायकल दर (%) = रीसायकल द्रव्यमान ÷ कुल द्रव्यमान × 100
- मुख्य शब्द: मिश्र धातु, ढलाई, फ़ोर्जिंग, मशीनिंग, टॉर्क, एंड-ऑफ़-लाइफ़ वाहन
हल किए गए उदाहरण
1. आप बोल्ट से 0.2 मी दूर स्पैनर पर 50 N बल लगाते हैं। टॉर्क कितना है?
टॉर्क = 50 × 0.2 = 10 N·m।
2. बोल्ट को 60 N·m चाहिए। स्पैनर 0.4 मी लंबा है। कितना बल लगाएँ?
बल = 60 ÷ 0.4 = 150 N।
3. कार का वज़न 1,000 किग्रा है। 750 किग्रा रीसायकल हुआ। दर कितनी?
750 ÷ 1,000 × 100 = 75%।
4. स्टील का दरवाज़ा 12 किग्रा है। एल्युमिनियम में वही दरवाज़ा एक-तिहाई द्रव्यमान का है। कितना बचा?
एल्युमिनियम दरवाज़ा = 12 ÷ 3 = 4 किग्रा। बचत = 12 − 4 = 8 किग्रा।
5. प्रक्रिया पहचानिए: (क) पिघली धातु से इंजन ब्लॉक, (ख) गर्म करके पीटा गया क्रैंकशाफ़्ट।
(क) ढलाई (कास्टिंग)। (ख) फ़ोर्जिंग।
आम गलतियाँ
- स्पैनर पर लंबी नली लगाकर बहुत कसना। बोल्ट टूट जाते हैं; टॉर्क रिंच इस्तेमाल करें।
- सिर्फ़ जैक पर टिकी कार के नीचे काम करना। हमेशा जैक स्टैंड लगाएँ।
- रीसायकल योग्य सामग्री को एक ही डिब्बे में मिलाना, जिससे अलग करना मुश्किल हो जाता है।
- निकाला हुआ तेल और कूलेंट ज़मीन पर बहाना। उन्हें रीसायकल के लिए रखना होता है।