कारें हवा को कैसे नुकसान पहुँचाती हैं
पेट्रोल और डीज़ल कार्बन और हाइड्रोजन से बने ईंधन हैं। इंजन में जलने के लिए इन्हें हवा चाहिए। अगर जलना पूरा होता तो सिर्फ़ कार्बन डाइऑक्साइड और पानी बनते। पर इंजन में जलना कभी पूरा नहीं होता।
- कार्बन मोनोऑक्साइड (CO): ज़हरीली, बिना गंध की गैस। हवा कम पड़ने पर बनती है।
- नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx): इंजन बहुत गर्म हो तो बनती हैं। धुंध (स्मॉग) और फेफड़ों की तकलीफ़ करती हैं।
- बिना जला ईंधन (HC): ईंधन की छोटी बूँदें जो बाहर निकल जाती हैं।
- कालिख (कण): काली धूल, ज़्यादातर डीज़ल से। फेफड़ों में गहरे जाती है।
- कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂): ज़हरीली नहीं, पर गर्मी रोकती है और ग्लोबल वार्मिंग बढ़ाती है।
धुएँ को साफ़ करना
कैटेलिटिक कन्वर्टर निकास पाइप में लगा होता है। अंदर शहद के छत्ते जैसी जाली होती है, जिस पर प्लैटिनम जैसी क़ीमती धातुओं की परत होती है। ये धातुएँ उत्प्रेरक (catalyst) का काम करती हैं और ख़त्म नहीं होतीं।
- CO बन जाती है CO₂।
- बिना जला ईंधन बन जाता है CO₂ और पानी।
- NOx बन जाती है हानिरहित नाइट्रोजन और ऑक्सीजन।
डीज़ल कारों में कालिख रोकने के लिए पार्टिकल फ़िल्टर भी होता है। कन्वर्टर गर्म होने पर ही काम करता है। समय पर इंजन ट्यूनिंग और प्रदूषण जाँच से पता चलता है कि सब ठीक है या नहीं।
कम ईंधन जलाना
कम ईंधन यानी कम गैस। ईंधन बचाने के तरीक़े:
- हल्की बॉडी और छोटा इंजन।
- टायर में सही हवा। नरम टायर ज़्यादा ज़ोर माँगते हैं।
- आराम से चलाना: झटके से ब्रेक नहीं, रेस नहीं।
- लाल बत्ती पर लंबा रुकना हो तो इंजन बंद करें।
- समय पर सर्विस। गंदा एयर फ़िल्टर ईंधन बर्बाद करता है।
माइलेज (ईंधन दक्षता) बताता है कि एक लीटर में कार कितने किमी चलती है (किमी/लीटर)।
हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कार
हाइब्रिड कार में छोटा इंजन और बैटरी वाली बिजली की मोटर, दोनों होते हैं। धीमी चाल पर मोटर चलती है, इसलिए ईंधन कम लगता है। इलेक्ट्रिक कार (EV) में सिर्फ़ बैटरी और मोटर होती है। उसमें धुएँ का पाइप नहीं होता और आवाज़ भी कम होती है। बिजली बिजलीघर से आती है, इसलिए जब बिजली सूरज, हवा या पानी से बने तब यह सबसे साफ़ है। पुरानी बैटरी फेंकें नहीं, पुनर्चक्रण (रीसायकल) कराएँ।
करके देखिए: गुबार गिनिए
3D खोलिए। पहले अंदाज़ा लगाइए: 2 कारें और कन्वर्टर चालू हो तो हरे गुबार ज़्यादा होंगे या काले? चालू करके जाँचिए। फिर घर पर बड़ों से पूछिए कि आपकी कार का प्रदूषण जाँच प्रमाणपत्र (PUC) चालू है या नहीं, और अगली तारीख़ लिख लीजिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- माइलेज = चली दूरी ÷ ईंधन (किमी/लीटर)
- यात्रा का ईंधन = दूरी ÷ माइलेज
- 1 लीटर पेट्रोल से लगभग 2.3 किग्रा CO₂ (मोटा नियम)
- मुख्य शब्द: निकास (exhaust), CO, NOx, HC, कण, उत्प्रेरक, हाइब्रिड, EV
हल किए गए उदाहरण
1. एक कार 12 लीटर में 180 किमी चलती है। माइलेज कितना है?
माइलेज = 180 ÷ 12 = 15 किमी/लीटर।
2. इसी कार को 300 किमी के लिए कितना ईंधन चाहिए?
ईंधन = 300 ÷ 15 = 20 लीटर।
3. 2.3 किग्रा CO₂ प्रति लीटर लें तो 20 लीटर पेट्रोल से कितनी CO₂ बनेगी?
20 × 2.3 = 46 किग्रा।
4. कार A का माइलेज 10 और कार B का 20 किमी/लीटर है। 400 किमी में दोनों कितना पेट्रोल लेंगी?
A: 400 ÷ 10 = 40 लीटर। B: 400 ÷ 20 = 20 लीटर। B आधा लेती है, इसलिए CO₂ भी आधी।
5. कन्वर्टर ज़हरीली CO को क्या बना देता है?
कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂), जो ज़हरीली नहीं है।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि कन्वर्टर सारा प्रदूषण हटा देता है। वह सिर्फ़ बुरी गैसें घटाता है, CO₂ फिर भी निकलती है।
- कार्बन डाइऑक्साइड को ज़हरीली कहना। वह ज़हरीली नहीं, पर धरती को गर्म करती है।
- इलेक्ट्रिक कार को बिल्कुल प्रदूषण-रहित मानना। बिजलीघर और बैटरी का असर रहता है।
- इंजन को देर तक चालू छोड़ना। ईंधन जलता है, दूरी नहीं मिलती।