लकड़ी किससे बनी है?
लकड़ी के तीन मुख्य हिस्से हैं। सेल्यूलोज़ लम्बे, मज़बूत रेशे बनाता है, सूखी लकड़ी का लगभग 40 से 50%। हेमिसेल्यूलोज़ छोटा, शर्करा जैसा हिस्सा है। लिग्निन (लगभग 20 से 30%) प्राकृतिक गोंद है जो रेशों को जोड़ता और लकड़ी को कड़ा बनाता है। लकड़ी को चिप्स, रेशों या पतली परतों में तोड़कर फिर गोंद से जोड़ें, तो एक पेड़ से कटे तख़्ते से बड़ी, सपाट और एक-सी सामग्री बना सकते हैं।
लकड़ी की सामग्री बनाना
लकड़ी के बोर्ड छोटे टुकड़ों और बचे माल का अच्छा उपयोग करते हैं।
- प्लाईवुड: पतली परतें (वीनियर) गोंद से जुड़ी, हर परत का रेशा नीचे वाली परत से आड़ा। परतें विषम संख्या (3, 5, 7) में होती हैं, इसलिए दोनों दिशाओं में मज़बूत और सीधा रहता है।
- पार्टिकल बोर्ड: चिप्स और बुरादा गोंद (रेज़िन) में मिलाकर गर्म और दबाया हुआ। सस्ता, फ़र्नीचर और शेल्फ़ में उपयोगी, पर पानी से डरता है।
- फ़ाइबरबोर्ड (MDF): लकड़ी बारीक रेशों में तोड़कर गोंद के साथ दबाई जाती है। सतह चिकनी होती है और रंग अच्छा चढ़ता है।
- स्ट्रैंड बोर्ड (OSB): लम्बे चिप्स की परतें, दीवार और फ़र्श में।
- ग्लूलैम और CLT: तख़्ते जोड़कर इमारतों के लिए बड़ी कड़ियाँ और पैनल।
कदम: टुकड़े तैयार करो, सुखाओ, गोंद मिलाओ, परत बिछाओ, गर्म दबाओ, ठंडा करो, काटो और रेती करो।
लकड़ी की लुगदी और वाशी काग़ज़
लुगदी यानी लकड़ी जो ढीले रेशों में टूट चुकी हो। यांत्रिक लुगदी में मशीनें लकड़ी पीसती हैं। रासायनिक लुगदी में चिप्स को रसायनों में पकाते हैं जो लिग्निन घोल देते हैं, जिससे रेशे मज़बूत और सफ़ेद मिलते हैं। लुगदी को पानी में मिलाकर चलती जाली पर फैलाते हैं, दबाते और सुखाते हैं, और काग़ज़ बनता है। पुराने काग़ज़ को फिर लुगदी बनाकर कई बार रीसायकल कर सकते हैं।
वाशी पारंपरिक जापानी काग़ज़ है। यह कटे पेड़ों के चिप्स से नहीं, पौधों की छाल के लम्बे रेशों (कोज़ो, मित्सुमाता और गाम्पी) से बनता है। रेशों को पकाते, कूटते, पानी और एक चिपचिपे पौधे के गोंद के साथ मिलाते हैं और हाथ से जाली पर उठाते हैं। लम्बे रेशे जाल की तरह एक-दूसरे को काटते हैं, इसलिए वाशी पतला पर मज़बूत है और सैकड़ों साल चलता है। इससे लिखाई, कला, किताबें, लैम्पशेड बनते हैं और पुराने दस्तावेज़ों की मरम्मत होती है।
काष्ठ बायोमास का उपयोग
बायोमास जीवों से मिला पदार्थ है जिसे ऊर्जा के स्रोत के रूप में इस्तेमाल करते हैं। काष्ठ बायोमास में छँटाई के चिप्स, बुरादा, छाल, टहनियाँ और वह पुरानी लकड़ी आती है जिसे दोबारा इस्तेमाल नहीं कर सकते। इसे:
- गर्मी के लिए बॉयलर में जलाया जा सकता है (स्कूल, ग्रीनहाउस, कारख़ाने),
- बिजली के लिए भाप बनाने में लगा सकते हैं,
- पेलेट में दबा सकते हैं, जो सूखे, एक-से और ढोने-जलाने में आसान हैं,
- चारकोल या तरल ईंधन में बदल सकते हैं।
यह तभी नवीकरणीय है जब नए पेड़ उगकर कार्बन डाइऑक्साइड वापस लें। बचा माल और कचरा इस्तेमाल करना बेहतर है, और लकड़ी को दोबारा उपयोग व रीसाइक्लिंग के बाद ही जलाओ।
करके देखो: एक ढेर, चार उत्पाद
पुराना काग़ज़ छोटे टुकड़ों में फाड़ो, एक दिन पानी में भिगोओ, मिक्सर में पीसो और लुगदी को जाली पर फैलाकर सुखाओ। तुमने रीसायकल काग़ज़ बना लिया। 3D में हर बटन दबाओ और लिखो कि कौन-सा कदम जुड़ा: गोंद और दबाव (बोर्ड), पकाना (काग़ज़), लम्बे रेशों का जाल (वाशी) या जलाना (ऊर्जा)।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- सूखी लकड़ी: सेल्यूलोज़ ≈ 40 से 50%, लिग्निन ≈ 20 से 30%
- प्लाईवुड: वीनियर की परतें विषम संख्या में, रेशे 90° पर आड़े
- लुगदी: रेशे अलग करो (यांत्रिक या रासायनिक), फिर शीट बनाकर सुखाओ
- द्रव्यमान = घनत्व × आयतन; काग़ज़ का भार प्रति क्षेत्रफल = द्रव्यमान ÷ क्षेत्रफल
- ईंधन से ऊर्जा = द्रव्यमान × प्रति kg ऊर्जा (लकड़ी की पेलेट ≈ 17 MJ/kg)
हल किए गए उदाहरण
1. एक प्लाईवुड में 5 वीनियर हैं, हर एक 3 mm मोटा। प्लाईवुड की मोटाई कितनी है?
5 × 3 mm = 15 mm। (5 विषम संख्या है, जैसी प्लाईवुड में चाहिए।)
2. A4 शीट 0.21 m × 0.297 m की है और काग़ज़ 80 g/m² का है। एक शीट और 500 शीट की रीम का द्रव्यमान निकालो।
क्षेत्रफल = 0.21 × 0.297 ≈ 0.0624 m²। द्रव्यमान = 0.0624 × 80 ≈ 5 g। रीम: 500 × 5 g = 2,500 g = 2.5 kg।
3. अगर हर kg से लगभग 17 MJ मिलते हैं, तो 10 kg लकड़ी की पेलेट कितनी ऊर्जा देगी?
10 × 17 = 170 MJ (लगभग 47 kWh, क्योंकि 1 kWh = 3.6 MJ)।
4. पार्टिकल बोर्ड की शीट 2.44 m × 1.22 m × 0.018 m है और घनत्व 700 kg/m³। उसका द्रव्यमान निकालो।
आयतन = 2.44 × 1.22 × 0.018 ≈ 0.0536 m³। द्रव्यमान = 0.0536 × 700 ≈ 37.5 kg।
5. कौन-सा उत्पाद लम्बे रेशे बचाता है: चिप्स वाली नरम लकड़ी का काग़ज़ या वाशी? पतला होने पर कौन ज़्यादा मज़बूत है?
वाशी में पौधे की छाल के लम्बे रेशे जाल की तरह एक-दूसरे को काटते हैं, इसलिए बहुत पतला होकर भी मज़बूत है।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि प्लाईवुड में परतें सम संख्या में होती हैं। आम तौर पर विषम होती हैं ताकि रेशे संतुलित रहें।
- लिग्निन को रेशा कहना। रेशा सेल्यूलोज़ है; लिग्निन गोंद है।
- वाशी को आम लुगदी वाले काग़ज़ जैसा समझना। उसमें छाल के लम्बे रेशे होते हैं और वह ज़्यादातर हाथ से बनता है।
- यह मानना कि बायोमास जलाना हमेशा कार्बन-मुक्त है। वह तभी नवीकरणीय है जब पेड़ फिर उगें और पहले बचा माल इस्तेमाल हो।