नवीकरणीय संसाधन कब होता है?
नवीकरणीय संसाधन वह है जिसे प्रकृति इंसान की उम्र के भीतर फिर बना देती है। धूप, हवा और पानी नवीकरणीय हैं। कोयले और तेल को बनने में करोड़ों साल लगते हैं, इसलिए वे नहीं हैं।
लकड़ी तभी नवीकरणीय है जब हम सावधान रहें। एक पेड़ को उगने में 10 से 100 साल लगते हैं। अगर पूरा जंगल काट दें और दोबारा न लगाएँ तो लकड़ी ख़त्म हो जाएगी। नियम सीधा है: जंगल के फिर उगने की रफ़्तार से तेज़ मत काटो। इसे टिकाऊ उपयोग कहते हैं।
लकड़ी के गुण
लकड़ी के कई उपयोगी गुण हैं।
- अपनी मज़बूती के हिसाब से हल्की: सूखी लकड़ी का घनत्व ज़्यादातर 0.4 से 0.8 g/cm³ होता है, पानी (1 g/cm³) से कम, इसलिए वह तैरती है।
- रेशे की दिशा में मज़बूत: खंभा भारी बोझ उठाता है, पर रेशे के साथ आसानी से फट जाता है।
- ऊष्मा और बिजली की कुचालक: इसीलिए कड़ाही के हत्थे और घर की छतों में लकड़ी लगती है।
- आसानी से ढलती है: आरी, ड्रिल, कील, गोंद और नक्काशी सब चलते हैं।
- पानी सोखती है: गीली होकर फूलती है, सूखकर सिकुड़ती है, इसलिए सुखाकर और रोगन लगाकर रखते हैं।
- जलती है: आग लग सकती है, इसलिए सावधानी चाहिए।
नरम लकड़ी (सॉफ़्टवुड) शंकुधारी पेड़ों (चीड़, देवदार) से मिलती है और जल्दी उगती है। कठोर लकड़ी (हार्डवुड) चौड़ी पत्ती वाले पेड़ों (सागौन, साल, ओक) से मिलती है, धीरे उगती है और ज़्यादा घनी होती है।
लकड़ी के उपयोग
लकड़ी चार बड़े कामों में आती है:
- निर्माण: कड़ियाँ, दरवाज़े, फ़र्श, छतें, पुल।
- फ़र्नीचर और औज़ार: कुर्सी, मेज़, हत्थे, वाद्य-यंत्र, खिलौने।
- काग़ज़ और बोर्ड: काग़ज़ की लुगदी, प्लाईवुड और पार्टिकल बोर्ड।
- ईंधन: जलावन लकड़ी और चारकोल। दुनिया में कटी लकड़ी का लगभग आधा हिस्सा ईंधन के रूप में जलता है, ज़्यादातर खाना पकाने और गर्म करने में।
कार्बन भंडारण, रीसायकल संसाधन और पर्यावरण
बढ़ते समय पेड़ हवा से कार्बन डाइऑक्साइड लेकर उसे लकड़ी में बदलता है। सूखी लकड़ी के भार का लगभग आधा हिस्सा कार्बन होता है। लकड़ी की छत या मेज़ जब तक चलती है, यह कार्बन हवा से बाहर रहता है। इससे जलवायु परिवर्तन धीमा होता है।
लकड़ी को इस क्रम में इस्तेमाल करो, जिसे लकड़ी की सीढ़ी कहते हैं:
- चीज़ को जैसी है वैसी दोबारा इस्तेमाल करो (पुराने दरवाज़े, पेटियाँ)।
- उसे नई सामग्री में रीसायकल करो (चिप्स से पार्टिकल बोर्ड या काग़ज़)।
- सबसे आख़िर में ऊर्जा के लिए जलाओ। जलाने से कार्बन हवा में लौटता है, इसलिए यह अंत में करो।
रीसायकल लकड़ी इस्तेमाल करने से कम पेड़ कटते हैं। जंगल लगाने और बचाने से मिट्टी, पानी और जीव-जंतु भी बचते हैं।
करके देखो: छल्ले गिनो
कटा लट्ठा, ठूँठ या उसकी फ़ोटो ढूँढो। बीच से छल्ले गिनो। हर छल्ला एक साल है। चौड़ा छल्ला यानी अच्छी बारिश वाला साल। 3D में स्लाइडर चलाओ और लिखो: जंगल घटे बिना हर साल कितने पेड़ काट सकते हैं? (उत्तर: जितने वापस उगते हैं उतने ही।)
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- नवीकरणीय उपयोग: हर साल कटे पेड़ ≤ हर साल उगे पेड़
- घनत्व = द्रव्यमान ÷ आयतन (लकड़ी: लगभग 0.4 से 0.8 g/cm³; पानी: 1 g/cm³)
- सूखी लकड़ी में कार्बन ≈ उसके सूखे द्रव्यमान का 50%
- जमा CO₂ ≈ कार्बन का द्रव्यमान × 44 ÷ 12 (कार्बन का लगभग 3.7 गुना)
- लकड़ी की सीढ़ी: दोबारा उपयोग → रीसायकल → ऊर्जा के लिए जलाना
हल किए गए उदाहरण
1. एक लट्ठे में 42 छल्ले हैं। पेड़ की उम्र लगभग कितनी थी?
हर साल एक छल्ला बनता है, इसलिए पेड़ लगभग 42 साल का था।
2. लकड़ी के ब्लॉक का माप 10 cm × 10 cm × 5 cm है और द्रव्यमान 250 g है। घनत्व निकालो। क्या वह पानी में तैरेगा?
आयतन = 10 × 10 × 5 = 500 cm³। घनत्व = 250 ÷ 500 = 0.5 g/cm³। यह पानी के 1 g/cm³ से कम है, इसलिए वह तैरेगा।
3. एक जंगल में साल में 300 पेड़ उगते हैं। मिल 240 पेड़ काटती है। क्या यह टिकाऊ है? और अगर 400 काटे तो?
240 कटे और 300 उगे: जंगल में हर साल 60 पेड़ बढ़ते हैं, टिकाऊ है। 400 कटे और 300 उगे: हर साल 100 पेड़ घटते हैं, टिकाऊ नहीं।
4. एक मेज़ में 20 kg सूखी लकड़ी है। उसमें कितना कार्बन बंद है? इसके लिए पेड़ ने हवा से कितनी CO₂ ली?
कार्बन ≈ 20 का 50% = 10 kg। CO₂ = 10 × 44 ÷ 12 ≈ 36.7 kg।
5. पुराने लकड़ी के दरवाज़े के लिए सही क्रम चुनो: जला देना, बोर्ड के लिए चिप्स बनाना, नए घर में लगा देना।
पहले दोबारा उपयोग (नए घर में लगाओ), फिर रीसायकल (बोर्ड के चिप्स), और जलाओ सबसे अंत में।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि लकड़ी हमेशा नवीकरणीय है। वह तभी है जब जंगल को फिर उगने दिया जाए।
- मान लेना कि सारी लकड़ी तैरती है। आबनूस जैसी बहुत घनी लकड़ी डूब सकती है; आम लकड़ी ज़्यादातर तैरती है।
- भूल जाना कि लकड़ी जलाने से कार्बन हवा में लौटता है। उसे पहले नहीं, आख़िर में जलाओ।
- नरम और कठोर लकड़ी में गड़बड़ करना। नरम लकड़ी का मतलब शंकुधारी पेड़ की लकड़ी है, छूने में नरम होना नहीं।