पत्थर की सामग्री
पत्थर चट्टान से काटा गया प्राकृतिक सख्त पदार्थ है। यह मज़बूत, भारी और सदियों टिकने वाला होता है। आम प्रकार: ग्रेनाइट (बहुत सख्त), बलुआ पत्थर (नरम, काटना आसान), चूना पत्थर और स्लेट (समतल परतें, फर्श के लिए अच्छे)।
उपयोग: सहारा देने वाली दीवारें, सीढ़ियाँ, फर्श, किनारे, चलने के पत्थर, रॉकरी और पानी के किनारे। सीमाएँ: ढोना भारी, काटना महँगा, और कुछ पत्थर गीले होने पर फिसलन भरे हो जाते हैं।
लकड़ी और बाँस
लकड़ी हल्की, गर्म और काटने-जोड़ने में आसान है। बाँस तेज़ी से बढ़ने वाली घास है जिसके खोखले मज़बूत तने गाँठों से बँटे होते हैं। यह सस्ता है और बाड़, मंडप और पौधों के सहारे के लिए अच्छा है।
कमज़ोरी: नम ज़मीन में लकड़ी और बाँस सड़ जाते हैं, और दीमक व कीड़े इन्हें खाते हैं। देखभाल: सामग्री सुखाओ, प्रिज़र्वेटिव से उपचार करो, गीली मिट्टी से दूर रखो और हवा लगने दो। बाहर के लिए स्वाभाविक रूप से टिकाऊ लकड़ी (जैसे सागौन, साल) चुनो।
धातु की सामग्री
धातुएँ पतली छड़ों में भी बहुत मज़बूत होती हैं। भू-दृश्य में इनका उपयोग बाड़, गेट, रेलिंग, लैंप पोस्ट, बेंच, किनारे की पट्टियों और सरिया (कंक्रीट के अंदर स्टील की छड़ें) में होता है।
ज़ंग: लोहा और स्टील हवा-पानी से क्रिया करके ज़ंग खाते हैं। रंग, जस्ते की परत (गैल्वनाइज़िंग) या पाउडर कोटिंग से बचाओ। ऐल्युमिनियम और स्टेनलेस स्टील ज़ंग से अच्छे बचे रहते हैं पर महँगे हैं। धूप में धातु गरम भी हो जाती है, इसलिए खुली धूप में बैठने की जगह के लिए न चुनो।
कंक्रीट सामग्री
कंक्रीट सीमेंट, रेत, गिट्टी (मोटा मसाला) और पानी का मिश्रण है। गीला होने पर इसे किसी भी आकार में डाला जा सकता है। सीमेंट और पानी की क्रिया से कुछ दिनों में यह सख्त हो जाता है। यह दबाने (संपीड़न) पर मज़बूत है पर खींचने पर कमज़ोर, इसलिए अंदर स्टील का सरिया रखते हैं (प्रबलित कंक्रीट)।
आम मिश्रण आयतन के हिसाब से 1 : 2 : 4 है (सीमेंट : रेत : गिट्टी)। ज़्यादा पानी इसे कमज़ोर बनाता है। डालने के बाद कुछ दिन इसे नम रखते हैं, इसे तराई (क्योरिंग) कहते हैं।
कंक्रीट के बने-बनाए (प्रीकास्ट) उत्पाद
प्रीकास्ट यानी पहले से कारखाने में ढला हुआ, साइट पर नहीं डाला हुआ। उदाहरण: किनारे के पत्थर (कर्ब), पेवर ब्लॉक, कंक्रीट की स्लैब, दीवार के ब्लॉक, पाइप, सीढ़ियाँ और गमले।
फायदे: एक जैसा आकार और गुणवत्ता, जल्दी लगते हैं, बर्बादी कम और साइट पर सूखने का इंतज़ार नहीं। सीमाएँ: ढोने में भारी, और टुकड़ों के जोड़ ठीक से भरने और समतल करने पड़ते हैं।
भट्ठी के उत्पाद
मिट्टी को आकार देकर भट्ठी (बहुत गरम तंदूर) में पकाया जाता है। पकने से नरम मिट्टी सख्त और टिकाऊ पदार्थ बन जाती है। उदाहरण: ईंट, छत और फर्श की टाइलें, टेराकोटा गमले, चीनी-मिट्टी के पाइप और चमकदार सजावटी टाइलें।
ये सड़ते नहीं, आग और मौसम सह लेते हैं और इनके रंग गर्म होते हैं। ईंटों को गारे से एक पैटर्न (बॉन्ड) में लगाते हैं। सीमा: ज़ोर की चोट लगने पर या अंदर का पानी जम जाने पर ये चटक सकती हैं।
अन्य भू-दृश्य सामग्री
कई और सामग्रियाँ ज़मीन को भरती, ढकती और बचाती हैं:
- रेत और बजरी: फर्श के नीचे आधार, पानी निकासी की परतें।
- मिट्टी और खाद: जहाँ पौधे उगते हैं।
- मल्च (छाल, पत्ते): मिट्टी में नमी रखता है और खरपतवार रोकता है।
- जियोटेक्सटाइल: कपड़े जैसी चादर जो मिट्टी को बजरी से अलग रखती है और पानी निकलने देती है।
- प्लास्टिक और रबड़: पाइप, किनारे, खेल की जगह की सतह।
करके देखो (Try it)
3D में: हर सामग्री चुनो और चारों खंभे (मज़बूत, टिकाऊ, हल्का, प्राकृतिक) मिलाओ। सबसे मज़बूत और सबसे हल्की सामग्री कौन-सी है? सबसे प्राकृतिक कौन-सी?
घर पर: अपनी गली या स्कूल में घूमकर 5 सामग्रियाँ लिखो (दीवार, गेट, बेंच, रास्ता, गमला)। हर एक के चुने जाने का एक कारण लिखो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- कंक्रीट = सीमेंट + रेत + गिट्टी + पानी; आम मिश्रण 1 : 2 : 4 (आयतन से)
- प्रबलित कंक्रीट = कंक्रीट + स्टील का सरिया (खिंचाव सरिया सहता है)
- ईंटों की संख्या = दीवार का क्षेत्रफल ÷ एक ईंट के मुख का क्षेत्रफल (गारे सहित)
- मुख्य शब्द: प्रीकास्ट, भट्ठी, क्योरिंग, सरिया, गैल्वनाइज़िंग, मल्च, जियोटेक्सटाइल
हल किए गए उदाहरण
1. कंक्रीट मिश्रण आयतन से 1 : 2 : 4 है। 3 बोरी सीमेंट लगे तो रेत और गिट्टी की कितनी बोरियाँ चाहिए?
रेत = 3 × 2 = 6 बोरी। गिट्टी = 3 × 4 = 12 बोरी।
2. 3 वर्ग मीटर की दीवार उन ईंटों से बनानी है जिनका मुख गारे सहित 0.2 मी × 0.1 मी है। कितनी ईंटें चाहिए (बर्बादी छोड़कर)?
एक ईंट का मुख = 0.2 × 0.1 = 0.02 वर्ग मीटर। ईंटें = 3 ÷ 0.02 = 150।
3. एक स्लैब 2 मी लंबी, 1 मी चौड़ी और 0.1 मी मोटी है। कितना कंक्रीट चाहिए, और 1 : 2 : 4 मिश्रण में सीमेंट कितना (सीमेंट = सूखे आयतन का 1/7; सूखे आयतन का अतिरिक्त भाग छोड़ दो)?
आयतन = 2 × 1 × 0.1 = 0.2 घन मीटर। सीमेंट = 0.2 × 1/7 ≈ 0.029 घन मीटर। (असल में सूखा आयतन गीले का लगभग 1.5 गुना होता है, इसलिए मिस्त्री ज़्यादा जोड़ते हैं।)
आम गलतियाँ
- गीली मिट्टी में बिना उपचार की लकड़ी या बाँस लगाना। कुछ सालों में सड़ जाता है।
- बाहर लोहे को बिना रंग के छोड़ देना। उसमें ज़ंग लग जाता है।
- कंक्रीट डालने में आसानी के लिए ज़्यादा पानी मिलाना। वह कमज़ोर हो जाता है।
- यह सोचना कि पत्थर हमेशा सबसे अच्छा है। छत के बगीचे या दूर ढुलाई में भारी पत्थर गलत हो सकता है।