पदार्थ से नहीं, ज़रूरत से शुरू कीजिए
किसी पसंदीदा पदार्थ से शुरुआत मत कीजिए। काम से शुरू कीजिए। पूछिए: इस उत्पाद को क्या करना है?
- इस्तेमाल की ज़रूरतें: मज़बूती, कड़ापन, वज़न, गर्मी, पानी, खाने या त्वचा के लिए सुरक्षा।
- बनाने की ज़रूरतें: क्या हम इसे अपने औज़ारों से काट, मोड़, ढाल या जोड़ सकते हैं?
- पैसे की ज़रूरतें: पदार्थ का दाम और उसे आकार देने का ख़र्च।
- रूप और स्पर्श: रंग, चमक, छूने पर कैसा लगे।
- पर्यावरण की ज़रूरतें: वह कहाँ से आता है और अंत में उसका क्या होता है।
हर ज़रूरत एक कसौटी (criterion) बन जाती है, यानी ऐसी जाँच जिसे पदार्थ को पास करना है। हर कसौटी छोटे और साफ़ वाक्य में लिखिए, जैसे: 'एक लीटर गर्म पानी बिना मुड़े सँभाले'।
व्यवस्थित चयन: अंक दो, भार दो, तुलना करो
व्यवस्थित चयन ऐसा तरीक़ा है जिसे कोई भी दोहराकर जाँच सकता है। इसके लिए तालिका बनाइए।
- पंक्तियों में उम्मीदवार पदार्थ लिखिए।
- स्तंभों में कसौटियाँ लिखिए।
- हर खाने में 0 से 10 अंक दीजिए (10 = उस ज़रूरत के लिए सबसे अच्छा)। दाम के लिए सस्ते पदार्थ को ज़्यादा अंक मिलते हैं।
- हर कसौटी को भार (महत्व) दीजिए। बड़ा भार यानी वह ज़रूरत ज़्यादा ज़रूरी है।
- हर अंक को उसके भार से गुणा कीजिए, जोड़िए और भारों के योग से भाग दीजिए। सबसे बड़ा कुल अंक जीतता है।
कुल अंक = (w₁×s₁ + w₂×s₂ + …) ÷ (w₁ + w₂ + …)
फिर विजेता को 'ज़रूर चाहिए' वाली शर्तों पर जाँचिए। जो पदार्थ ऐसी शर्त में फ़ेल हो (जैसे 'खाने के लिए सुरक्षित'), वह कितना भी ऊँचा अंक ले, बाहर है।
प्राकृतिक और कृत्रिम पदार्थ
प्राकृतिक पदार्थ पेड़-पौधों, जानवरों या ज़मीन से थोड़े बदलाव के साथ मिलते हैं: लकड़ी, बाँस, कपास, ऊन, चमड़ा, पत्थर, मिट्टी। कृत्रिम (मानव-निर्मित) पदार्थ इंसान रासायनिक या भारी प्रक्रिया से बनाता है: प्लास्टिक, काँच, स्टील, कंक्रीट, पॉलिएस्टर जैसे नकली रेशे।
- प्राकृतिक: अक्सर नवीकरणीय और बनाने में कम ऊर्जा, पर हर टुकड़े के गुण अलग हो सकते हैं और कुछ को बहुत ज़मीन चाहिए।
- कृत्रिम: गुण एक-से और दोहराए जा सकने वाले होते हैं, और हम उन्हें अपनी ज़रूरत से डिज़ाइन कर सकते हैं, पर आम तौर पर ज़्यादा ऊर्जा लगती है और कुछ सड़ते नहीं।
- प्राकृतिक का मतलब हमेशा 'बेहतर' नहीं। कुछ प्राकृतिक पदार्थ ज़रूरत से ज़्यादा काटे जाते हैं; कुछ कृत्रिम पदार्थ बार-बार रीसाइकिल हो सकते हैं।
इको-डिज़ाइन और उत्पाद का पूरा जीवन
इको-डिज़ाइन का मतलब है उत्पाद को ऐसे बनाना कि उसके पूरे जीवन में पर्यावरण को कम से कम नुक़सान हो।
- कच्चा माल: खदान, खेती या तेल। क्या वह नवीकरणीय है? रीसाइकिल किया हुआ है?
- निर्माण: कारख़ाने में ऊर्जा, पानी और कचरा।
- ढुलाई: दूरी और ढोया गया वज़न।
- इस्तेमाल: क्या बिजली लगती है? कितने साल चलता है?
- अंत: क्या मरम्मत, दोबारा इस्तेमाल या रीसाइकिल हो सकता है, या कचरे में जाएगा?
मदद करने वाले औज़ार: जीवन-चक्र विश्लेषण (LCA) हर चरण का असर गिनता है (जैसे कितने किलोग्राम CO₂ बनी); चेकलिस्ट या इको-स्कोर जल्दी अंक देता है; इको-निर्माण औज़ार इमारती सामान को ऊर्जा, दूरी और रीसाइकिल हिस्से के आधार पर तौलते हैं। सरल नियम: कम सामग्री लगाइए, रीसाइकिल हो सकने वाली सामग्री लीजिए, उत्पाद को टिकाऊ बनाइए, और ऐसा बनाइए कि मरम्मत और खोलना आसान हो।
सॉफ़्टवेयर, प्रोसेसर और इंटरफ़ेस भी इसी तरह चुनें
मशीन के नियंत्रण वाले हिस्से पर भी यही तरीक़ा चलता है। ज़रूरतें लिखिए, फिर विकल्पों को अंक दीजिए।
- सॉफ़्टवेयर: क्या वह काम करता है? मुफ़्त है या पैसे का? सीखना आसान है? हमारे कंप्यूटर पर चलता है?
- प्रोसेसर (मशीन का 'दिमाग़' चिप): गति, मेमोरी, इनपुट-आउटपुट पिनों की संख्या, बिजली की खपत, दाम।
- इंटरफ़ेस (मशीन इंसान या दूसरी मशीन से कैसे मिलती है): बटन, स्क्रीन, टच, वायरलेस जोड़। सोचिए इस्तेमाल कौन करेगा: बच्चा, दस्ताने पहना मज़दूर या ड्राइवर।
इको-डिज़ाइन यहाँ भी लागू है। कम बिजली खाने वाली चिप से बैटरी ज़्यादा चलती है, और पुराने हार्डवेयर पर चलने वाला सॉफ़्टवेयर लोगों को अपने उपकरण ज़्यादा समय रखने देता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- कुल अंक = (w₁s₁ + w₂s₂ + …) ÷ (w₁ + w₂ + …)
- उत्पाद का जीवन: कच्चा माल → निर्माण → ढुलाई → इस्तेमाल → अंत
- प्राकृतिक = पेड़-पौधे, जानवर, ज़मीन से। कृत्रिम = इंसान का बनाया।
- पहले ज़रूरी शर्तें, फिर अंक।
हल किए गए उदाहरण
1. बोतल के लिए मज़बूती का भार 3 और हल्केपन का भार 1 है। स्टील के अंक 9 और 3 हैं। प्लास्टिक के 4 और 9। कौन जीतेगा?
स्टील: (3×9 + 1×3) ÷ (3+1) = 30 ÷ 4 = 7.5। प्लास्टिक: (3×4 + 1×9) ÷ 4 = 21 ÷ 4 = 5.25। स्टील जीतता है, क्योंकि मज़बूती को ज़्यादा भार मिला।
2. वही बोतल, पर अब हल्केपन का भार 3 और मज़बूती का 1 है। अब कौन जीतेगा?
स्टील: (1×9 + 3×3) ÷ 4 = 18 ÷ 4 = 4.5। प्लास्टिक: (1×4 + 3×9) ÷ 4 = 31 ÷ 4 = 7.75। प्लास्टिक जीतता है। पदार्थ नहीं, भार बदले और उत्तर बदल गया। इसलिए साफ़ कहना ज़रूरी है कि क्या मायने रखता है।
3. काँच का कप 10 साल चलता है और प्लास्टिक का कप 1 साल। काँच का कप बनाने में 3 गुना ऊर्जा लगती है। पूरे जीवन में पर्यावरण के लिए कौन बेहतर है?
प्रति साल इस्तेमाल से तुलना कीजिए। मान लीजिए प्लास्टिक कप में 1 इकाई ऊर्जा लगी। प्लास्टिक: 1 इकाई प्रति वर्ष। काँच: 3 ÷ 10 = 0.3 इकाई प्रति वर्ष। काँच बेहतर है, क्योंकि वह लंबा चलता है। सिर्फ़ बनाने का चरण देखते तो ग़लत नतीजा निकलता।
आम गलतियाँ
- पहले पदार्थ चुन लेना और फिर उसके पक्ष में कारण ढूँढना। ज़रूरतों से शुरू कीजिए।
- सिर्फ़ एक गुण देखना। मज़बूत पदार्थ बहुत भारी या महँगा हो सकता है।
- यह मान लेना कि प्राकृतिक का मतलब हमेशा हरा-भरा। लेबल नहीं, पूरा जीवन देखिए।
- अंत को भूल जाना। जो उत्पाद रीसाइकिल या मरम्मत नहीं हो सकता, वह कचरा बन जाता है।