औद्योगिक मात्राओं का मापन
उद्योग में कई मात्राएँ नापी जाती हैं: लंबाई और व्यास, कोण, द्रव्यमान, बल, तापमान, दाब, द्रव या गैस का प्रवाह, गति (rpm) और बिजली की मात्राएँ। हर एक का SI मात्रक है: मीटर (m), किलोग्राम (kg), केल्विन या डिग्री सेल्सियस, पास्कल या बार, लीटर प्रति मिनट, वोल्ट, एम्पियर।
नापते क्यों हैं? पुर्ज़े को सही नाप में बनाने के लिए, गुणवत्ता जाँचने के लिए, प्रक्रिया को सुरक्षित रखने के लिए (बॉयलर बहुत गरम न हो), और सामग्री व ऊर्जा बचाने के लिए।
तीन शब्द: शुद्धता (accuracy) यानी सही मान के कितने पास, परिशुद्धता (precision) यानी बार-बार की रीडिंग आपस में कितनी पास, और अल्पतमांक (least count) यानी यंत्र जो सबसे छोटा मान दिखा सकता है। दुकान में आमतौर पर 20 °C पर मानक से तुलना होती है, क्योंकि गरम होने पर धातु फैलती है।
मापक यंत्रों का उपयोग: रूल, वर्नियर कैलिपर, माइक्रोमीटर
स्टील रूल: हर 1 मिमी पर निशान। तेज़, पर मोटा: लगभग 0.5 मिमी।
वर्नियर कैलिपर: मुख्य पैमाना और सरकने वाला वर्नियर पैमाना। अल्पतमांक = मुख्य पैमाने का 1 भाग − वर्नियर का 1 भाग। यदि वर्नियर के 50 भाग 49 मिमी के बराबर हों, तो अल्पतमांक = 1 − 49/50 = 0.02 मिमी। यह बाहरी माप, भीतरी माप और गहराई नापता है। रीडिंग = वर्नियर के शून्य से ठीक पहले का मुख्य पैमाने का मान + (मिलने वाली वर्नियर रेखा × अल्पतमांक)।
माइक्रोमीटर: 0.5 मिमी पिच का पेंच और 50 भागों वाला थिंबल। अल्पतमांक = 0.5 ÷ 50 = 0.01 मिमी। रीडिंग = स्लीव की रीडिंग + (थिंबल रेखा × 0.01 मिमी)। सिर्फ़ रैचेट घुमाओ ताकि बल हमेशा बराबर रहे।
मापक यंत्रों का उपयोग: गेज, डायल इंडिकेटर और सेंसर
लिमिट गेज (गो/नो-गो): पुर्ज़ा तब ठीक है जब उसकी नाप दो सीमाओं के बीच हो। GO गेज एक सीमा पर बना होता है, इसलिए ठीक पुर्ज़े को उसमें से निकलना चाहिए; NO-GO गेज दूसरी सीमा पर होता है, इसलिए ठीक पुर्ज़ा उसमें से नहीं निकलना चाहिए। संख्या पढ़े बिना तुरंत हाँ या ना मिल जाता है।
गेज ब्लॉक और डायल इंडिकेटर: गेज ब्लॉक बहुत समतल स्टील के ब्लॉक हैं जिनकी मोटाई एकदम ठीक होती है और जो मानक का काम करते हैं। डायल इंडिकेटर प्रोब की छोटी सी हरकत दिखाता है, इसलिए समतलता या रनआउट जाँच सकते हैं।
सेंसर: थर्मोकपल तापमान के लिए वोल्टेज देता है, प्रेशर ट्रांसड्यूसर दाब के लिए, फ़्लो मीटर प्रवाह के लिए। आम औद्योगिक संकेत 4 से 20 mA की धारा है: 4 mA यानी सीमा का सबसे निचला सिरा और 20 mA सबसे ऊपरी। कंप्यूटर इसे वापस संख्या में बदल देता है।
अच्छी आदतें: पुर्ज़े और जबड़ों को साफ़ करो, पहले शून्य रीडिंग (शून्यांक त्रुटि) जाँचो, एक ही जगह कई बार नापो, यंत्र पर ज़ोर मत लगाओ, और समय-समय पर मानक से कैलिब्रेट करो।
करके देखो: रूल बनाम कैलिपर
पेंसिल की मोटाई स्कूल के स्केल से नापो। फिर कंपास और स्केल से, या अगर हो तो सस्ते प्लास्टिक कैलिपर से नापो। संख्याएँ लिखो। किस रीडिंग पर ज़्यादा भरोसा है? 3D में स्लाइडर को 15.37 मिमी जैसे अजीब व्यास पर रखो और तीनों यंत्रों की तुलना करो। पहले अंदाज़ा लगाओ, फिर देखो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- वर्नियर कैलिपर का अल्पतमांक = मुख्य पैमाने का 1 भाग − वर्नियर पैमाने का 1 भाग (आम तौर पर 0.02 मिमी)।
- माइक्रोमीटर का अल्पतमांक = पिच ÷ थिंबल के भाग = 0.5 मिमी ÷ 50 = 0.01 मिमी।
- वर्नियर रीडिंग = मुख्य पैमाने की रीडिंग + (मिलने वाली वर्नियर रेखा × अल्पतमांक)।
- माइक्रोमीटर रीडिंग = स्लीव रीडिंग + (थिंबल रेखा × 0.01 मिमी)।
- सुधारी रीडिंग = देखी रीडिंग − शून्यांक त्रुटि।
- संकेत 4–20 mA: सीमा का अनुपात = (I − 4) ÷ 16।
हल किए गए उदाहरण
1. वर्नियर कैलिपर का अल्पतमांक 0.02 मिमी है। मुख्य पैमाने पर 24 मिमी और 17वीं वर्नियर रेखा मिलती है। रीडिंग?
24 + 17 × 0.02 = 24 + 0.34 = 24.34 मिमी।
2. माइक्रोमीटर की स्लीव पर 7.5 मिमी और थिंबल की रेखा 23 संदर्भ रेखा पर है। रीडिंग?
7.5 + 23 × 0.01 = 7.5 + 0.23 = 7.73 मिमी।
3. जबड़े बंद करने पर कैलिपर 0.04 मिमी दिखाता है (धनात्मक शून्यांक त्रुटि)। छड़ पर रीडिंग 12.36 मिमी है। असली व्यास?
सुधारी रीडिंग = 12.36 − 0.04 = 12.32 मिमी।
4. शाफ़्ट 20 मिमी का है, सीमाएँ 19.98 से 20.02 मिमी। एक शाफ़्ट 20.03 मिमी है। क्या वह GO गेज से निकलेगा?
GO गेज ऊपरी सीमा 20.02 मिमी पर है। 20.03 उससे बड़ा है, इसलिए नहीं निकलेगा। पुर्ज़ा रद्द।
5. तापमान ट्रांसमीटर 0 से 200 °C को 4 से 20 mA में देता है। वह 12 mA दिखाता है। तापमान?
अनुपात = (12 − 4) ÷ 16 = 0.5। तापमान = 0.5 × 200 = 100 °C।
6. एक ही छड़ की तीन रीडिंग 15.38, 15.38, 15.37 मिमी हैं, पर असली नाप 15.20 मिमी है। यंत्र परिशुद्ध है, शुद्ध है, या दोनों?
रीडिंग आपस में बहुत पास हैं, इसलिए परिशुद्ध है। असली मान से दूर हैं, इसलिए शुद्ध नहीं है (शायद शून्यांक त्रुटि जैसी कोई गलती है)।
आम गलतियाँ
- नापने से पहले शून्य रीडिंग न जाँचना। शून्यांक त्रुटि हर रीडिंग को खिसका देती है।
- रैचेट की जगह माइक्रोमीटर को बहुत ज़ोर से कसना। इससे धातु मुड़ती है और रीडिंग गलत आती है।
- शुद्धता और परिशुद्धता को मिलाना। परिशुद्ध यानी दोहराने योग्य; शुद्ध यानी सही।
- वर्नियर को तिरछा देखना (पैरेलैक्स) या गलत मिलती रेखा लेना।