आज का मछली दाना: क्या ख़ास है
पाली गई मछलियाँ और शंख-जीव अपना खाना खुद नहीं ढूँढ सकते, इसलिए पालक देता है। भोजन चार तरह का होता है: जीवित भोजन (छोटे जीवित पौधे-जानवर), कच्चा या ताज़ा भोजन (कटी छोटी मछली), नम गोलियाँ और सूखा मिश्रित दाना। फ़ार्म अब कच्ची मछली छोड़कर सूखी गोलियों की ओर जा रहे हैं, क्योंकि गोलियाँ साफ़ होती हैं, देर तक चलती हैं और उनका फ़ॉर्मूला पता होता है।
मछली ठंडे ख़ून की होती है। उसे शरीर गरम रखने में ऊर्जा नहीं लगती, इसलिए वह दाने को ज़मीन के जानवरों से बेहतर वज़न में बदलती है। समस्या यह है कि पुराने फ़ॉर्मूले में बहुत मछली चूरा (सूखी पिसी मछली) होता था, और उसके लिए जंगली मछलियाँ सीमित हैं। इसलिए अब कुछ हिस्सा सोयाबीन जैसे पौधों के प्रोटीन और कीड़ों के आटे से बदला जा रहा है।
मछली कैसे खाती, पचाती और उपयोग करती है
खाना: मछली देखकर, सूँघकर और चखकर भोजन ढूँढती है। पाचन: आँत एंज़ाइम की मदद से बड़े टुकड़ों को छोटे भागों में तोड़ती है। अवशोषण: छोटे भाग आँत की दीवार से ख़ून में जाते हैं। फिर शरीर उनका उपयोग करता है।
माँसाहारी मछली (जैसे सी ब्रीम) की आँत छोटी होती है। शाकाहारी मछली (जैसे ग्रास कार्प) की आँत लंबी होती है। झींगा और शंख-जीव धीरे खाते हैं, इसलिए गोली पानी में देर तक सख़्त रहनी चाहिए।
मछली को कौन से पोषक तत्व चाहिए:
- प्रोटीन शरीर बनाता है। मछली को भोजन से दस ज़रूरी अमीनो अम्ल चाहिए।
- वसा ऊर्जा देती है। समुद्री मछली को ख़ास ओमेगा-3 वसा भी चाहिए।
- कार्बोहाइड्रेट सस्ती ऊर्जा देता है, पर मछली उसे कम अच्छी तरह उपयोग करती है।
- विटामिन और खनिज थोड़ी मात्रा में हड्डी, ख़ून और सेहत में मदद करते हैं।
आरंभिक आहार: नन्ही मछली का भोजन
अंडे से निकली लार्वा का मुँह बहुत छोटा और आँत सरल होती है। शुरू में वह अपनी जर्दी की थैली पर जीती है। जर्दी ख़त्म होने पर उसे आरंभिक आहार चाहिए जो छोटा, नरम, जीवित और हिलता हुआ हो, क्योंकि लार्वा हिलती चीज़ पर झपटती है।
- सूक्ष्म शैवाल (हरा पानी) पहले भोजन-जीवों को खिलाते हैं।
- रोटिफ़र (लगभग 0.1 से 0.3 मिमी) ज़्यादातर समुद्री मछलियों का पहला जीवित भोजन हैं।
- आर्टेमिया (ब्राइन श्रिम्प) के बच्चे बड़े होते हैं और अगले चरण में दिए जाते हैं।
- कोपेपॉड बहुत अच्छा प्राकृतिक भोजन हैं।
रोटिफ़र और आर्टेमिया को पहले शैवाल और तेल खिलाते हैं ताकि उनमें ओमेगा-3 वसा आ जाए। इसे संवर्धन (enrichment) कहते हैं। बाद में लार्वा को बहुत बारीक सूखे दाने पर लाते हैं।
दाने के घटक और मिश्रित दाना
मिश्रित दाना एक बनाया हुआ फ़ॉर्मूला है जिसमें कई चीज़ें मिलाकर दबाई जाती हैं ताकि हर कौर में सभी ज़रूरी पोषक तत्व हों। घटकों के मुख्य समूह:
- प्रोटीन के स्रोत: मछली चूरा, सोयाबीन खली, कीड़ों का आटा, झींगा या स्क्विड का चूरा।
- ऊर्जा के स्रोत: मछली का तेल, पौधों के तेल, गेहूँ या चावल का आटा।
- अन्य: विटामिन, खनिज, गोली को जोड़ने वाला बाइंडर, कभी-कभी रंग।
गोलियाँ तैरने वाली (पालक देख सकता है कि मछली खा रही है) या डूबने वाली (तल पर खाने वाले झींगा के लिए) होती हैं। गोली का आकार मुँह के अनुसार हो। अच्छे भोजन की माप फ़ीड कन्वर्ज़न रेशियो से होती है: FCR = दिया दाना ÷ बढ़ा वज़न। कम FCR बेहतर है।
करके देखिए: दाना, पानी और पैसा
3D टंकी में भोजन का स्लाइडर 0 से 10 तक चलाइए। तीन चीज़ें देखिए: मछली कितनी पतली या स्वस्थ दिखती है, तल पर कितना भूरा कचरा है, और पानी का रंग कैसे बदलता है। सबसे अच्छा बीच का स्तर है: मछली बढ़ती है और पानी साफ़ रहता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- FCR = दिया गया दाना / बढ़ा हुआ वज़न
- रोज़ की मात्रा = शरीर का वज़न × खिलाने की दर (%)
- दाने की लागत = इस्तेमाल दाना × प्रति किलो दाम
- मुख्य शब्द: लार्वा, जीवित भोजन, रोटिफ़र, आर्टेमिया, मिश्रित दाना, मछली चूरा, FCR
हल किए गए उदाहरण
1. किसान ने 150 किलो दाना दिया और मछली का वज़न 100 किलो बढ़ा। FCR निकालिए।
FCR = दाना / बढ़त = 150 / 100 = 1.5। यानी 1 किलो मछली बनाने में 1.5 किलो दाना लगा।
2. तालाब में मछलियों का कुल वज़न 200 किलो है। रोज़ शरीर के वज़न का 3 प्रतिशत दाना देना है। रोज़ कितना दाना चाहिए?
200 का 3 प्रतिशत = 0.03 × 200 = 6 किलो दाना रोज़।
3. फ़ार्म को 400 किलो वज़न बढ़ाना है और उसका FCR 1.2 है। कितना दाना चाहिए?
दाना = FCR × बढ़त = 1.2 × 400 = 480 किलो।
4. फ़ार्म A का FCR 1.2 और फ़ार्म B का 1.8 है। दोनों 500 किलो मछली उगाते हैं। दाना 60 रुपये किलो है। किसका ख़र्च कम है और कितना?
A का दाना = 1.2 × 500 = 600 किलो, ख़र्च 36 000 रुपये। B का दाना = 1.8 × 500 = 900 किलो, ख़र्च 54 000 रुपये। A का ख़र्च 18 000 रुपये कम है।
5. सी ब्रीम की लार्वा का पहला भोजन सूखी गोली नहीं, रोटिफ़र क्यों है?
लार्वा का मुँह सिर्फ़ लगभग 0.2 मिमी चौड़ा होता है और वह हिलते शिकार पर झपटती है। रोटिफ़र छोटा, नरम और हिलने वाला है; गोली बहुत बड़ी है और हिलती नहीं।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि ज़्यादा दाना हमेशा तेज़ बढ़त देता है। बचा दाना सड़ता है और पानी की ऑक्सीजन घटाता है।
- छोटी मछलियों को बड़ी गोलियाँ देना। गोली का आकार मुँह के अनुसार हो।
- FCR को बढ़त की दर समझ लेना। कम FCR बेहतर है, क्योंकि कम दाने से उतनी ही मछली बनती है।
- पहले दिन से लार्वा को सिर्फ़ सूखा दाना देना। ज़्यादातर समुद्री लार्वा को पहले रोटिफ़र जैसा जीवित भोजन चाहिए।