इलेक्ट्रॉनिक मापक यंत्र
मापक यंत्र अदृश्य चीज़ (संकेत) को संख्या या चित्र में बदलता है। आम यंत्र:
- मल्टीमीटर: वोल्टता, धारा और प्रतिरोध।
- ऑसिलोस्कोप: वोल्टता को समय के साथ खींचता है। आयाम, आवर्तकाल T पढ़कर आवृत्ति f = 1/T निकालते हैं।
- आवृत्ति काउंटर: एक सेकंड में लहरें गिनता है।
- सिग्नल जनरेटर: चुनी हुई आवृत्ति और स्तर का साफ़ परीक्षण संकेत बनाता है।
- पावर मीटर: रेडियो या प्रकाश संकेत की शक्ति पढ़ता है।
नियम: पहले संकेत का अंदाज़ा लगाओ, रेंज थोड़ी ऊँची रखो, फिर पढ़ो। प्रोब का ग्राउंड पहले जोड़ो।
उदाहरण। स्क्रीन पर एक लहर 2 ms की है तो f = 1 / 0.002 = 500 Hz।
ट्रांसमीटर का मापन
ट्रांसमीटर अपनी ही आवृत्ति पर रहे, सही शक्ति भेजे और ज़रूरत से ज़्यादा मॉड्यूलेशन न करे। हम मापते हैं:
- आवृत्ति काउंटर से। थोड़ा खिसकना भी दूसरे स्टेशन को बिगाड़ सकता है।
- निर्गत शक्ति पावर मीटर से, डमी लोड पर (एक प्रतिरोधक जो एंटीना की जगह शक्ति सुरक्षित सोख लेता है)।
- मॉड्यूलेशन गहराई m = (Emax − Emin) / (Emax + Emin) × 100 %, स्कोप पर AM तरंग से। m 100 % से ज़्यादा हो तो ध्वनि बिगड़ती है।
रिसीवर का मापन
रिसीवर को सिग्नल जनरेटर से जाँचते हैं। बहुत कमज़ोर जाना-पहचाना संकेत देते हैं और आउटपुट देखते हैं।
- संवेदनशीलता: सबसे कमज़ोर इनपुट जिस पर भी आउटपुट साफ़ मिले। संख्या जितनी छोटी, रिसीवर उतना अच्छा।
- संकेत-शोर अनुपात (S/N): संकेत स्तर ÷ शोर स्तर। जितना बड़ा, उतना अच्छा।
- वरणक्षमता (selectivity): एक स्टेशन चुनना और पड़ोसी को छोड़ना कितना अच्छा करता है।
माइक्रोवेव और प्रकाशीय मापन
माइक्रोवेव और प्रकाश आवृत्तियों पर हम हानि और लब्धि को डेसिबल (dB) में बोलते हैं। dB = 10 × log10(P_out / P_in)। 3 dB हानि यानी आधी शक्ति बची; 10 dB यानी दसवाँ हिस्सा; 20 dB यानी सौवाँ हिस्सा।
dB जुड़ते हैं, इसलिए लंबे लिंक का हिसाब आसान है: कुल हानि = (प्रति km हानि × km) + कनेक्टर की हानि।
उपकरण: ऑप्टिकल पावर मीटर और प्रकाश स्रोत, OTDR (स्पंद भेजकर गूँज के समय से टूटन ढूँढता है), स्पेक्ट्रम विश्लेषक (हर आवृत्ति की शक्ति), माइक्रोवेव के लिए पावर सेंसर। उदाहरण। 20 km फाइबर, 0.2 dB/km: हानि 4 dB। 10 mW घुसे तो लगभग 4 mW निकलता है।
एंटीना और रेडियो तरंग का मापन
एंटीना की जाँच होती है कि वह शक्ति कितनी अच्छी तरह बाहर भेजता है और दूर तरंग कितनी प्रबल है।
- क्षेत्र-प्रबलता (वोल्ट प्रति मीटर) फील्ड-स्ट्रेंथ मीटर और परीक्षण एंटीना से नापते हैं। दूरी बढ़ने पर यह घटती है (खुले में लगभग 1/d)।
- SWR (स्थायी तरंग अनुपात): बताता है कि बेमेल एंटीना से कितनी शक्ति वापस लौटती है। 1 : 1 सबसे अच्छा; 3 : 1 से ऊपर खराब।
- दिशिकता: एंटीना घुमाकर देखो किस दिशा में सबसे तेज़ है।
खुद करके देखो
1. 3D में स्कोप स्लाइडर से 3 लहरें करो और f लिखो। 2. रिसीवर स्लाइडर ऐसे हिलाओ कि ध्वनि ठीक साफ़ हो जाए। सबसे छोटा संकेत कितना है? 3. फाइबर स्लाइडर पर वह लंबाई ढूँढो जहाँ आधी शक्ति बचे (लगभग 15 km)। पहले अंदाज़ा लगाओ, फिर जाँचो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- f = 1 / T
- m = (Emax − Emin) / (Emax + Emin) × 100 %
- dB = 10 log10(P_out / P_in)
- फाइबर हानि (dB) = प्रति km हानि × लंबाई
- S/N = संकेत स्तर / शोर स्तर
हल किए गए उदाहरण
1. स्कोप पर एक लहर 0.5 ms की है। आवृत्ति निकालो।
f = 1 / T = 1 / 0.0005 = 2000 Hz = 2 kHz।
2. एक AM तरंग में Emax = 9 V और Emin = 3 V है। मॉड्यूलेशन गहराई निकालो।
m = (9 − 3) / (9 + 3) = 6 / 12 = 0.5, यानी 50 %।
3. 30 km फाइबर प्रति km 0.2 dB घटाता है। कुल हानि और बची शक्ति का भाग बताओ।
हानि = 0.2 × 30 = 6 dB। बचा भाग = 10^(−0.6) = 0.25, यानी लगभग चौथाई।
4. केबल में 10 mW घुसा और 1 mW निकला। dB में हानि निकालो।
dB = 10 log10(1 / 10) = −10 dB, यानी 10 dB हानि।
5. एक रिसीवर 2 µV पर साफ़ ध्वनि देता है, दूसरा 8 µV पर। कौन ज़्यादा संवेदनशील है?
जिसे सिर्फ़ 2 µV चाहिए। कम संकेत में काम करने वाला ज़्यादा संवेदनशील है।
आम गलतियाँ
- स्कोप की स्क्रीन को सीधे आवृत्ति पढ़ लेना। स्क्रीन समय दिखाती है; f = 1/T निकालना पड़ता है।
- ट्रांसमीटर की शक्ति डमी लोड की जगह सीधे एंटीना पर नापना।
- संवेदनशीलता की बड़ी संख्या को अच्छा मानना। माइक्रोवोल्ट की छोटी संख्या अच्छी है।
- शक्तियों को जोड़ देना। dB जुड़ते हैं; मिलीवाट गुणा होते हैं।