कार का परिचय और यांत्रिकी: मुख्य हिस्से
कार के चार बड़े समूह हैं: इंजन (ताक़त बनाता है), पावर ट्रेन (ताक़त पहियों तक ले जाती है), बॉडी और चेसिस (सब कुछ थामते हैं, मोड़ते और झटके सोखते हैं) और ब्रेक (रोकते हैं)।
दो बल तय करते हैं कि कार कैसे चलेगी। टायर सड़क को पीछे धकेलते हैं, उसकी प्रतिक्रिया से चालक बल कार को आगे बढ़ाता है। प्रतिरोध (हवा की रुकावट, टायर का लुढ़कने वाला घर्षण और चढ़ाई में ढलान) कार को धीमा करना चाहता है। चालक बल > प्रतिरोध हो तो गति बढ़ती है। बराबर हो तो गति स्थिर। कम हो तो गति घटती है।
हवा की रुकावट गति के साथ तेज़ी से बढ़ती है: गति दोगुनी तो रुकावट करीब चार गुनी। इसलिए तेज़ गति पर ईंधन बहुत ज़्यादा खर्च होता है।
चार स्ट्रोक इंजन
इंजन जलते ईंधन की गर्मी को गति में बदलता है। सिलिंडर के अंदर पिस्टन ऊपर-नीचे चलता है। एक पूरे चक्र में चार स्ट्रोक होते हैं:
- भरना (इनटेक): पिस्टन नीचे जाता है, इनटेक वाल्व खुलता है, हवा और ईंधन अंदर आते हैं।
- दबाना (कंप्रेशन): दोनों वाल्व बंद, पिस्टन ऊपर जाकर मिश्रण को दबाता है।
- पावर: चिंगारी मिश्रण को जलाती है। गरम गैस पिस्टन को ज़ोर से नीचे धकेलती है। सिर्फ़ यही स्ट्रोक ताक़त देता है।
- निकास (एग्ज़ॉस्ट): एग्ज़ॉस्ट वाल्व खुलता है, पिस्टन ऊपर जाकर जली गैस बाहर निकालता है।
पिस्टन क्रैंकशाफ़्ट को घुमाता है। असली इंजन में 3, 4 या ज़्यादा सिलिंडर बारी-बारी से जलते हैं, इसलिए शाफ़्ट सहजता से घूमता है। डीज़ल इंजन भी ऐसे ही चलता है, पर वह सिर्फ़ हवा को इतना दबाता है कि वह गरम होकर बिना चिंगारी के ईंधन जला देती है।
पावर ट्रेन के उपकरण: क्लच, गियरबॉक्स, शाफ़्ट, डिफ़रेंशियल
- क्लच: इंजन को गियरबॉक्स से जोड़ता या काटता है, ताकि इंजन चलता रहे और कार रुकी रहे, और गियर आसानी से बदले।
- गियरबॉक्स (ट्रांसमिशन): अलग-अलग आकार के गियर। निचला गियर: बड़ा धक्का, कम गति (शुरू करना, चढ़ाई)। ऊँचा गियर: छोटा धक्का, ज़्यादा गति (सीधी सड़क)। न्यूट्रल: कोई जोड़ नहीं।
- ड्राइव शाफ़्ट: घूमती छड़ जो ताक़त एक्सल तक पहुँचाती है।
- डिफ़रेंशियल: ताक़त को बाएँ-दाएँ पहियों में बाँटता है और उन्हें अलग-अलग गति से घूमने देता है, क्योंकि मोड़ पर बाहर वाला पहिया ज़्यादा दूरी तय करता है।
- फ़ाइनल ड्राइव और एक्सल: आख़िरी गियर कमी, फिर एक्सल पहियों को घुमाता है।
गियर अनुपात = इंजन के चक्कर ÷ पहिये के चक्कर। अनुपात 3.6 यानी पहिये के एक चक्कर पर इंजन 3.6 बार घूमता है: गति ÷ 3.6, धक्का × 3.6। फ्रंट-व्हील, रियर-व्हील और फ़ोर-व्हील ड्राइव में फ़र्क यह है कि ताक़त किन पहियों को मिलती है। बिजली की कार में इंजन की जगह मोटर होती है और अक्सर एक ही गियर काफ़ी होता है।
कार चलाना
चालक तीन मुख्य नियंत्रण इस्तेमाल करता है। एक्सीलरेटर (थ्रॉटल) तय करता है कि कितनी हवा-ईंधन जाए, यानी कितनी ताक़त बने। क्लच और गियर लीवर गियर चुनते हैं (ऑटोमैटिक में यह अपने आप होता है)। स्टीयरिंग व्हील आगे के पहियों को मोड़कर दिशा बदलता है। डैशबोर्ड गति, इंजन की गति (rpm), ईंधन और चेतावनी बत्तियाँ दिखाता है।
शुरू करना: क्लच दबाइए, पहला गियर डालिए, क्लच धीरे छोड़ते हुए एक्सीलरेटर दबाइए। गति बढ़ने पर ऊपर के गियर लीजिए, और चढ़ाई या ओवरटेक में नीचे का गियर लीजिए।
ब्रेक लगाना: कार कैसे रुकती है
पैडल दबाने से ब्रेक तेल पाइपों में धकेला जाता है। तेल पैड को घूमती डिस्क पर (या शू को ड्रम पर) दबाता है। घर्षण पहिये को धीमा करता है और गति की ऊर्जा गर्मी बन जाती है। द्रव बल को हर जगह बराबर पहुँचाता है, इसलिए एक पैर से चारों पहिए रुकते हैं। ब्रेक जोड़ी में होते हैं ताकि कार एक तरफ़ न खिंचे।
रुकने की दूरी = सोचने की दूरी (पैर हिलने से पहले चली दूरी) + ब्रेक की दूरी। ब्रेक की दूरी गति के वर्ग के साथ बढ़ती है: गति दोगुनी तो दूरी चार गुनी। गीली सड़क और घिसे टायर इसे बढ़ाते हैं। गरम ब्रेक कमज़ोर पड़ जाते हैं, इसलिए लंबी ढलान पर नीचे का गियर लीजिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- कुल बल = चालक बल − प्रतिरोध (> 0 हो तो गति बढ़ती है)
- गियर अनुपात = इंजन के चक्कर ÷ पहिये के चक्कर
- पहिये का धक्का ≈ इंजन का धक्का × गियर अनुपात; पहिये की गति ≈ इंजन की गति ÷ गियर अनुपात
- ब्रेक की दूरी ∝ गति² (गति दोगुनी, दूरी चार गुनी)
- मुख्य शब्द: पिस्टन, क्रैंकशाफ़्ट, क्लच, डिफ़रेंशियल, थ्रॉटल, घर्षण
हल किए गए उदाहरण
1. एक इंजन अनुपात 3 वाले गियर में 3000 चक्कर प्रति मिनट घूमता है। पहिया प्रति मिनट कितने चक्कर लगाएगा?
पहिये के चक्कर = इंजन के चक्कर ÷ अनुपात = 3000 ÷ 3 = 1000 प्रति मिनट।
2. चालक बल 900 N और प्रतिरोध 600 N है। कार का द्रव्यमान 1200 kg है। त्वरण निकालिए।
कुल बल = 900 − 600 = 300 N। a = F ÷ m = 300 ÷ 1200 = 0.25 m/s²।
3. कार स्थिर गति से चल रही है। रुकावट 700 N है। चालक बल कितना है?
स्थिर गति यानी कुल बल 0, इसलिए चालक बल = 700 N।
4. 30 km/h से रुकने में कार को 20 मीटर लगते हैं। उसी सड़क पर 60 km/h से (सिर्फ़ ब्रेक की दूरी) करीब कितनी दूरी लगेगी?
दूरी ∝ गति²। गति दोगुनी तो चार गुनी: 20 × 4 = 80 मीटर।
5. 0.3 m त्रिज्या का पहिया 5 चक्कर प्रति सेकंड घूमता है। कार की गति निकालिए।
एक चक्कर की दूरी = 2π × 0.3 = 1.885 m। गति = 1.885 × 5 = 9.4 m/s ≈ 34 km/h।
6. चार स्ट्रोक इंजन के दो सिलिंडर इस तरह बेमेल चलते हैं कि एक पावर स्ट्रोक दे तो दूसरा किसी और स्ट्रोक में हो। यह फ़ायदेमंद क्यों है?
चार में से सिर्फ़ एक स्ट्रोक ताक़त देता है। सिलिंडर बारी-बारी से जलें तो लगभग हर समय पावर का धक्का मिलता है, इसलिए इंजन सहजता से चलता है।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि चारों स्ट्रोक ताक़त देते हैं। सिर्फ़ पावर स्ट्रोक देता है; बाकी तीन ऊर्जा खर्च करते हैं।
- यह सोचना कि ऊँचे गियर में हमेशा ज़्यादा ताक़त होती है। ऊँचा गियर गति देता है, पर धक्का कम।
- यह सोचना कि ब्रेक से ऊर्जा गायब हो जाती है। वह गति की ऊर्जा को गर्मी में बदलता है।
- यह भूलना कि रुकने की दूरी के दो भाग हैं: सोचने की दूरी और ब्रेक की दूरी।