आंतरिक दहन इंजन कैसे काम करता है
आंतरिक दहन इंजन बंद सिलेंडर के अंदर ईंधन जलाता है। गर्म गैस पिस्टन को धकेलती है। कनेक्टिंग रॉड पिस्टन की ऊपर-नीचे गति को क्रैंकशाफ़्ट के घूमने में बदलती है।
चार स्ट्रोक
- चूषण (इनटेक): इनटेक वाल्व खुलता है, पिस्टन नीचे जाता है, हवा (और ईंधन) अंदर आती है।
- संपीडन (कम्प्रेशन): वाल्व बंद, पिस्टन ऊपर जाकर मिश्रण दबाता है।
- शक्ति (पावर): चिंगारी (पेट्रोल) या दबाव की गर्मी (डीज़ल) से मिश्रण जलता है; फैलती गैस पिस्टन को नीचे धकेलती है।
- निकास (एग्ज़ॉस्ट): निकास वाल्व खुलता है, पिस्टन ऊपर जाकर जली गैस बाहर निकालता है।
क्रैंकशाफ़्ट के दो चक्कर में हर सिलेंडर का एक शक्ति स्ट्रोक। दो-स्ट्रोक इंजन यह एक चक्कर में करता है, पर ज़्यादा प्रदूषण करता है।
मुख्य भाग
ब्लॉक, सिलेंडर हेड, पिस्टन और रिंग, कनेक्टिंग रॉड, क्रैंकशाफ़्ट, कैमशाफ़्ट, वाल्व, टाइमिंग बेल्ट या चेन, फ़्लाईव्हील, गैस्केट, ऑयल पैन।
सिलेंडर की बनावट
- इनलाइन: सब सिलेंडर एक पंक्ति में। सरल, छोटी कारों में आम।
- V: कोण पर दो पंक्तियाँ। ज़्यादा सिलेंडर के लिए छोटा इंजन (V6, V8)।
- सपाट / बॉक्सर: सिलेंडर आमने-सामने लेटे। नीचा और स्मूद।
- अन्य: रोटरी (वैंकेल), रेडियल (पुराने विमान)।
ईंधन, स्नेहन, शीतलन, प्रज्वलन और टाइमिंग
- ईंधन तंत्र: टंकी → पंप → फ़िल्टर → इंजेक्टर बारीक फुहार छोड़ते हैं; इंजन कंप्यूटर मात्रा तय करता है।
- स्नेहन: ऑयल पंप चलती धातु के बीच तेल भेजता है, ताकि घर्षण और घिसाव कम हो, गर्मी निकले और सफ़ाई हो। तेल कम हो तो बेयरिंग जल्दी खराब होते हैं।
- शीतलन: कूलेंट इंजन से रेडिएटर जाता है, जहाँ हवा गर्मी ले जाती है। थर्मोस्टैट तापमान स्थिर रखता है।
- प्रज्वलन: कॉइल बहुत ऊँचा वोल्टेज बनाती है; स्पार्क प्लग छोटे गैप में चिंगारी देता है।
टाइमिंग
वाल्व का खुलना-बंद होना और चिंगारी, ठीक सही क्रैंक कोण पर होने चाहिए। टाइमिंग बेल्ट/चेन क्रैंकशाफ़्ट और कैमशाफ़्ट को जोड़ती है (कैम आधी रफ़्तार से घूमता है)। चिंगारी टॉप डेड सेंटर से थोड़ा पहले होती है, क्योंकि लौ फैलने में समय लगता है; ज़्यादा rpm पर और पहले (एडवांस)। गलत टाइमिंग से कम ताकत, खटखट (नॉकिंग), ज़्यादा ईंधन या टूटे वाल्व।
शक्ति का स्थानांतरण: टॉर्क, शक्ति और गियर अनुपात
टॉर्क घुमाने वाला बल है (N·m)। शक्ति काम की दर है: P (W) = 2π × N × T ÷ 60, N rpm में।
- पेट्रोल इंजन बीच के rpm में सबसे ज़्यादा टॉर्क और ऊँचे rpm पर सबसे ज़्यादा शक्ति देते हैं।
- डीज़ल इंजन कम rpm पर ज़्यादा टॉर्क देते हैं, ट्रक और ट्रैक्टर के लिए अच्छे।
- इलेक्ट्रिक मोटर 0 rpm से पूरा टॉर्क देती है, इसलिए EV तेज़ी से चलती है और अक्सर एक ही गियर काफ़ी है।
पावरट्रेन
इंजन → क्लच (ऑटोमैटिक में टॉर्क कन्वर्टर) जोड़ता/अलग करता है → गियरबॉक्स अनुपात चुनता है → ड्राइव शाफ़्ट → डिफ़रेंशियल (फ़ाइनल ड्राइव; मोड़ पर पहियों को अलग रफ़्तार देता है) → एक्सल → पहिये। आगे के पहियों वाली कारों में गियरबॉक्स और डिफ़रेंशियल एक साथ (ट्रांसएक्सल)।
गियर अनुपात
गियर अनुपात = चालित दाँते ÷ चालक दाँते। आउटपुट रफ़्तार = इनपुट ÷ अनुपात। आउटपुट टॉर्क ≈ इनपुट × अनुपात (थोड़ी हानि घटाकर)। कुल अनुपात = गियरबॉक्स अनुपात × फ़ाइनल ड्राइव।
वाहन की बॉडी, फ़्रेम और बदलाव
- बॉडी-ऑन-फ़्रेम: मज़बूत सीढ़ी जैसा फ़्रेम इंजन और बॉडी उठाता है। मज़बूत, मरम्मत आसान; ट्रक और कई SUV में।
- यूनिबॉडी (मोनोकॉक): बॉडी ही फ़्रेम है। हल्की, सख़्त, क्रंपल ज़ोन के साथ; ज़्यादातर कारों में।
- विमान में फ़्रेम पर हल्की परत (स्किन) होती है; नाव का हल स्थिरता और कम खिंचाव के लिए आकार दिया जाता है।
बॉडी के भाग: बोनट, दरवाज़े, फ़ेंडर, बम्पर, छत, फ़्लोर पैन, पिलर, विंडस्क्रीन।
बदलावों का असर
बड़े पहिये स्पीडोमीटर और गियरिंग बदलते हैं; गाड़ी नीची करने से हैंडलिंग और ग्राउंड क्लीयरेंस बदलता है; स्पॉइलर नीचे की ओर बल देता है पर खिंचाव भी बढ़ाता है; ज़्यादा इंजन शक्ति के लिए बेहतर ब्रेक और ठंडक चाहिए। कुछ बदलाव सुरक्षा, प्रदूषण, बीमा और क़ानून पर असर डालते हैं, इसलिए स्थानीय नियम देखें।
सर्विस, खराबी की पहचान और वर्कशॉप सुरक्षा
क्रम से खराबी ढूँढना
- शिकायत पक्की करें (चलाकर देखें)।
- स्पेसिफ़िकेशन, सर्विस मैनुअल और ट्रबल चार्ट देखें; स्कैन टूल से फ़ॉल्ट कोड पढ़ें।
- सबसे सरल संभावित कारण पहले जाँचें।
- मरम्मत करें, फिर पक्का करें कि ठीक हुआ।
घिसाव नापना
क्रैंकशाफ़्ट के लिए माइक्रोमीटर, सिलेंडर घिसाव के लिए बोर गेज, रिंग गैप और वाल्व क्लीयरेंस के लिए फ़ीलर गेज, सिलेंडरों की तुलना के लिए कम्प्रेशन टेस्टर, और बोल्ट कसने के लिए टॉर्क रिंच।
आम लक्षण
| लक्षण | संभावित कारण |
|---|---|
| नीला धुआँ | तेल जल रहा: घिसी रिंग या वाल्व सील |
| सफ़ेद मीठी गंध वाला धुआँ | कूलेंट रिसाव, हेड गैस्केट |
| गियर बदलते समय घिसने की आवाज़ | घिसा क्लच या सिंक्रोनाइज़र |
| मोड़ पर खट-खट, CV जॉइंट की टिक-टिक | घिसा CV जॉइंट या डिफ़रेंशियल |
| तेज़ रफ़्तार पर कंपन | असंतुलित पहिया, मुड़ा शाफ़्ट, घिसा U-जॉइंट |
सुरक्षा
आँखों का बचाव पहनें; सिर्फ़ जैक पर टिकी गाड़ी के नीचे कभी न जाएँ (स्टैंड लगाएँ); बिजली के काम से पहले बैटरी हटाएँ; इंजन ठंडा होने दें; तेल और कूलेंट सही तरीके से फेंकें।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- विस्थापन = π/4 × बोर² × स्ट्रोक × सिलेंडरों की संख्या
- संपीडन अनुपात = (स्वेप्ट आयतन + क्लीयरेंस आयतन) ÷ क्लीयरेंस आयतन
- गियर अनुपात = चालित दाँते ÷ चालक दाँते
- आउटपुट रफ़्तार = इनपुट ÷ अनुपात; आउटपुट टॉर्क ≈ इनपुट × अनुपात
- शक्ति (W) = 2π × N (rpm) × T (N·m) ÷ 60
- सड़क रफ़्तार (km/h) = पहिया rpm × 2π × r (m) × 60 ÷ 1000
हल किए गए उदाहरण
1. एक सिलेंडर का बोर 5 cm, स्ट्रोक 6 cm। स्वेप्ट आयतन निकालें।
V = 0.785 × 5² × 6 = 0.785 × 25 × 6 ≈ 118 cm³।
2. 4-सिलेंडर इंजन, बोर 8.6 cm, स्ट्रोक 8.6 cm। विस्थापन लीटर में?
एक सिलेंडर = 0.785 × 8.6² × 8.6 ≈ 499.6 cm³। × 4 ≈ 1998 cm³ ≈ 2.0 L।
3. स्वेप्ट आयतन 500 cm³, क्लीयरेंस आयतन 50 cm³। संपीडन अनुपात?
CR = (500 + 50) ÷ 50 = 11, यानी 11:1।
4. 12 दाँते का गियर 36 दाँते वाले को घुमाता है। इनपुट 900 rpm, 20 N·m। आउटपुट रफ़्तार और टॉर्क?
अनुपात = 36 ÷ 12 = 3। रफ़्तार = 900 ÷ 3 = 300 rpm। टॉर्क ≈ 20 × 3 = 60 N·m।
5. इंजन 3000 rpm पर 200 N·m देता है। शक्ति kW में?
P = 2π × 3000 × 200 ÷ 60 ≈ 62 832 W ≈ 62.8 kW।
6. पहला गियर 3.6, फ़ाइनल ड्राइव 4.1, इंजन 3000 rpm, पहिये की त्रिज्या 0.3 m। सड़क रफ़्तार?
कुल अनुपात = 14.76। पहिया rpm = 3000 ÷ 14.76 ≈ 203। रफ़्तार = 203 × 2π × 0.3 × 60 ÷ 1000 ≈ 23 km/h।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि बड़ा गियर नंबर = ज़्यादा टॉर्क। ऊँचे गियर का अनुपात कम होता है: ज़्यादा रफ़्तार, कम टॉर्क।
- विस्थापन में 'सिलेंडरों की संख्या' से गुणा करना भूलना।
- π/4 × बोर² में त्रिज्या और व्यास मिलाना: बोर व्यास है।
- हेड या पहिये के बोल्ट अंदाज़े से कसना। टॉर्क रिंच और तय क्रम अपनाएँ।