समुद्री जीव विज्ञान क्या है?
समुद्री जीव विज्ञान समुद्र के जीवों का और उनके आपसी व समुद्री जल से संबंधों का अध्ययन है।
समुद्र पृथ्वी की सतह का लगभग 71% भाग ढकता है। समुद्री जल खारा है (हर लीटर में लगभग 35 g नमक)। यहाँ के जीवों को नमक, दाब, ठंड और अँधेरे से निपटना पड़ता है।
गहराई के अनुसार क्षेत्र
- प्रकाशित क्षेत्र (0–200 m): प्रकाश संश्लेषण के लिए पर्याप्त प्रकाश। ज़्यादातर समुद्री जीवन यहीं।
- धुँधला क्षेत्र (200–1000 m): हल्की नीली रोशनी, पौधों के लिए बहुत कम। बहुत से जीव ख़ुद चमकते हैं (जैव-संदीप्ति)।
- अँधेरा क्षेत्र (1000 m से नीचे): सूर्य का प्रकाश नहीं, लगभग 2–4 °C, बहुत ज़्यादा दाब। भोजन ऊपर से "समुद्री हिम" के रूप में नीचे गिरता है।
हर 10 m गहराई पर दाब लगभग 1 वायुमंडल बढ़ता है।
प्लवक, तरणक और नितलक
समुद्री जीवों को उनके जीने और चलने के ढंग से बाँटते हैं, उनके कुल से नहीं।
- प्लवक (plankton) धाराओं के साथ बहते हैं; उनके विरुद्ध तैर नहीं सकते। पादप प्लवक (डायटम जैसे छोटे शैवाल) प्रकाश संश्लेषण से भोजन बनाते हैं और हमारी साँस की ऑक्सीजन का बड़ा हिस्सा देते हैं। जंतु प्लवक (छोटे जंतु, मछली के अंडे और लार्वा, क्रिल) उन्हें खाते हैं।
- तरणक (nekton) सक्रिय रूप से तैरते हैं और अपनी दिशा चुनते हैं: मछली, स्क्विड, कछुए, सील, डॉल्फ़िन, व्हेल।
- नितलक (benthos) समुद्र तल पर या उसके अंदर रहते हैं: चट्टानों से चिपकी समुद्री घास, प्रवाल, स्पंज, तारामछली, केकड़े, सीपियाँ, कृमि।
जेलीफ़िश बड़ी है पर फिर भी प्लवक है, क्योंकि ज़्यादातर बहती है। छोटा केकड़ा प्लवक होता है, बड़ा होकर नितलक बनता है।
समुद्री पारितंत्र और खाद्य शृंखला
समुद्र में पादप प्लवक मुख्य उत्पादक हैं। एक शृंखला: पादप प्लवक → जंतु प्लवक → छोटी मछली (सार्डिन) → बड़ी मछली (टूना) → शार्क। हर अगले स्तर तक लगभग 10% ऊर्जा पहुँचती है, इसलिए शीर्ष शिकारी कम होते हैं।
मुख्य समुद्री पारितंत्र
- प्रवाल भित्ति: छोटे प्रवाल जंतुओं से बनी, जिनके अंदर शैवाल रहते हैं। गर्म, साफ़, उथले पानी में बहुत तरह की प्रजातियाँ।
- मैंग्रोव: उष्णकटिबंधीय तटों के खारा पानी सहने वाले पेड़। इनकी जड़ें छोटी मछलियों की नर्सरी हैं और तट को लहरों से बचाती हैं।
- समुद्री घास के मैदान और केल्प वन: पानी के नीचे के "घास के मैदान" और "जंगल" जो बहुत से जंतुओं को भोजन और आश्रय देते हैं।
- खुला समुद्र: विशाल, प्लवक, मछलियों के झुंड, व्हेल।
- गहरा समुद्र और गर्म जल-छिद्र: जीवाणु छिद्रों के रसायनों से भोजन बनाते हैं (रसायन संश्लेषण), जिससे बिना सूर्य के ट्यूब कृमि और केकड़े जीते हैं।
अनुकूलन
मछलियाँ गलफड़ों से पानी की ऑक्सीजन लेती हैं; धारारेखीय शरीर पानी का विरोध घटाता है; समुद्री मछलियाँ फ़ालतू नमक बाहर निकालती हैं; गहरे समुद्र के जीव अपनी रोशनी बनाते हैं; व्हेल ठंड से बचने के लिए चर्बी (ब्लबर) रखती हैं।
समुद्री संसाधन और विलवणीकरण
जैव संसाधन
- भोजन: मछली, झींगे, केकड़े, सीपियाँ; खाने वाली समुद्री घास।
- समुद्री कृषि (मैरीकल्चर): समुद्र में मछली, झींगे, सीप और समुद्री घास पालना।
- पदार्थ: समुद्री घास से अगार और एल्जिनेट, जो भोजन, दवाओं और प्रयोगशालाओं में काम आते हैं।
- दवाएँ: कुछ कैंसर और दर्द की दवाएँ स्पंज, कोन घोंघे जैसे समुद्री जीवों से मिली हैं।
विलवणीकरण
विलवणीकरण यानी समुद्री जल से नमक हटाकर मीठा पानी बनाना।
- आसवन: समुद्री जल गर्म करो, भाप इकट्ठा करके ठंडी करो। बहुत ऊर्जा लगती है।
- उत्क्रम परासरण (reverse osmosis): समुद्री जल को बहुत दाब से ऐसी झिल्ली से धकेलो जो पानी को जाने दे पर नमक को रोके। ज़्यादातर नए संयंत्र यही करते हैं।
समस्याएँ: बहुत ऊर्जा, और बचा हुआ बहुत खारा पानी (ब्राइन) लापरवाही से फेंकने पर समुद्री जीवन को नुकसान।
ख़तरे और बचाव
- अति-मत्स्यन: मछलियाँ जितनी तेज़ी से पैदा होती हैं उससे ज़्यादा तेज़ी से पकड़ी जाती हैं।
- प्रदूषण: प्लास्टिक, तेल रिसाव, सीवेज और खेतों की खाद (जिससे कम ऑक्सीजन वाले "मृत क्षेत्र" बनते हैं)।
- गर्मी: गर्म पानी में प्रवाल अपने शैवाल बाहर निकाल देते हैं और सफ़ेद हो जाते हैं (प्रवाल विरंजन)।
- अम्लीकरण: ज़्यादा कार्बन डाइऑक्साइड से समुद्री जल ज़्यादा अम्लीय होता है, जिससे कवच और प्रवाल कठिनाई से बनते हैं।
उपाय: समुद्री संरक्षित क्षेत्र, मछली पकड़ने की सीमा और बंद मौसम, ऐसे जाल जिनसे छोटी मछलियाँ निकल जाएँ, कम एक-बार-उपयोग प्लास्टिक, और मैंग्रोव व भित्तियों की रक्षा।
करके देखो: खाद्य जाल बनाओ
कागज़ पर इनके डिब्बे बनाओ: पादप प्लवक, जंतु प्लवक, सार्डिन, बांगड़ा, टूना, शार्क, कछुआ, जेलीफ़िश, समुद्री घास। भोजन से खाने वाले की ओर तीर बनाओ। फिर सार्डिन हटा दो। किन जंतुओं का भोजन घटेगा? फिर 3D का आख़िरी चरण खोलो और 0 m से 4000 m तक गोता लगाओ: किस गहराई पर प्रकाश शून्य होता है?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- प्लवक = बहते हैं; तरणक = तैरते हैं; नितलक = समुद्र तल पर
- प्रकाशित 0–200 m; धुँधला 200–1000 m; अँधेरा 1000 m से नीचे
- दाब ≈ 1 atm + हर 10 m गहराई पर 1 atm
- खाद्य शृंखला में अगले स्तर तक लगभग 10% ऊर्जा
- विलवणीकरण: आसवन या उत्क्रम परासरण
हल किए गए उदाहरण
1. वर्गीकरण करो: शार्क, डायटम, तारामछली, जेलीफ़िश, भित्ति के तल पर ऑक्टोपस।
शार्क: तरणक। डायटम: पादप प्लवक। तारामछली: नितलक। जेलीफ़िश: प्लवक (ज़्यादातर बहती है)। तल पर ऑक्टोपस: नितलक (तैर भी सकता है, पर तल पर रहता है)।
2. 500 m गहराई पर दाब कितना है?
सतह पर 1 atm + 500 ÷ 10 = 50 atm पानी का = लगभग 51 atm।
3. एक क्षेत्र के पादप प्लवक में 10 000 kJ ऊर्जा है। जंतु प्लवक खाने वाली छोटी मछलियों तक लगभग कितनी पहुँचेगी?
जंतु प्लवक को लगभग 10%: 1000 kJ। छोटी मछलियों को उसका 10%: 100 kJ।
4. 1500 m पर लगभग कोई हरा शैवाल क्यों नहीं रहता?
उस गहराई पर सूर्य का प्रकाश नहीं है, इसलिए प्रकाश संश्लेषण असंभव है।
5. गहरे समुद्र के जल-छिद्र के जंतु बिना सूर्य के कैसे जीते हैं?
वहाँ के जीवाणु हाइड्रोजन सल्फ़ाइड जैसे रसायनों से भोजन बनाते हैं (रसायन संश्लेषण)। ट्यूब कृमि और केकड़े इन्हीं पर या इनके साथ जीते हैं।
आम गलतियाँ
- सोचना कि प्लवक सिर्फ़ छोटे जीव हैं। जेलीफ़िश बड़ी है पर बहती है, इसलिए प्लवक है।
- कहना कि समुद्र में उत्पादक नहीं हैं। पादप प्लवक मुख्य उत्पादक हैं।
- सोचना कि सारे समुद्री जीव सूर्य पर निर्भर हैं। जल-छिद्र का जीवन रसायन संश्लेषण से चलता है।
- विलवणीकरण के तरीके मिलाना: आसवन उबालता है, उत्क्रम परासरण झिल्ली से पानी धकेलता है।