China 高三 Biology
अध्याय: 6
1. Sel.3 Ch.1 Fermentation engineering
Traditional fermentation · Microbial culture: sterilisation, plating, counting · Fermentation engineering and uses
- मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव – सूक्ष्मजीव बहुत छोटे जीव हैं: जीवाणु, कवक, कुछ प्रोटोज़ोआ, शैवाल और वायरस। इनमें से बहुत से हमारी मदद करते हैं। ये दूध को दही बनाते हैं, आटा फुलाते हैं, और बड़े कारखानों में पेय, अम्ल, एंज़ाइम और दवाएँ बनाते हैं। ये गंदा पानी साफ़ करते हैं, बायोगैस ईंधन बनाते हैं, फ़सल के कीट सुरक्षित ढंग से मारते हैं और मिट्टी को पोषक देते हैं। पेनिसिलिन जैसे प्रतिजैविक सूक्ष्मजीवों से मिलते हैं, पर इन्हें सावधानी से लेना चाहिए ताकि कीटाणु प्रतिरोधी न बनें।
- सूक्ष्मजीव संवर्धन: लैब में सूक्ष्मजीव कैसे उगाते हैं – किसी सूक्ष्मजीव को पढ़ने के लिए हम कुछ कोशिकाओं से बहुत सारी कोशिकाएँ उगाते हैं। इसे संवर्ध (कल्चर) कहते हैं। पहले औज़ारों और भोजन के सारे कीटाणु मारते हैं (निर्जर्मीकरण)। फिर प्लेट में सूक्ष्मजीवों को भोजन देते हैं (संवर्धन माध्यम)। गर्म करके ठंडा किए तार के लूप से थोड़ी कोशिकाएँ फैलाते हैं (स्ट्रीकिंग) और प्लेट को गर्म जगह रखते हैं। हर कोशिका एक दिखने वाला बिंदु बन जाती है, जिसे कॉलोनी कहते हैं। फ़्लास्क में कोशिकाओं की संख्या चार चरणों में बढ़ती है: लैग, लॉग, स्थिर और मृत्यु।
2. Sel.3 Ch.2 Cell engineering
Plant tissue culture; somatic hybridisation · Animal cell culture; fusion; monoclonal antibodies; nuclear transfer · Embryo engineering
- पादप ऊतक संवर्धन: छोटे टुकड़े से बहुत सारे पौधे – पादप ऊतक संवर्धन यानी पौधे की कोशिकाएँ, ऊतक या अंग को बंद काँच के जार में साफ़ जेली भोजन पर उगाना। पौधे का एक छोटा टुकड़ा (कर्तोतक) साफ़ करके शर्करा, लवण, विटामिन और पादप हॉर्मोन वाले माध्यम पर रखते हैं। इसकी कोशिकाएँ बँटकर मुलायम ढेला बनाती हैं, जिसे कैलस कहते हैं। हॉर्मोन का मिश्रण तय करता है कि प्ररोह उगेंगे या जड़ें। हर नया प्ररोह काटकर फिर उगाया जा सकता है, इसलिए एक टुकड़े से हज़ारों एक जैसे पौधे बनते हैं। यही सूक्ष्मप्रवर्धन है।
- क्लोनिंग: वैज्ञानिक किसी जीव की प्रतिलिपि कैसे बनाते हैं – क्लोन ऐसा जीव है जिसके जीन किसी दूसरे जीव जैसे हों। प्रकृति हर समय क्लोन बनाती है: एक जैसे जुड़वाँ, बँटते जीवाणु, पौधे की कलम। प्रयोगशाला में वैज्ञानिक जंतु कोशिकाओं को थाली में उगाते हैं, दो कोशिकाओं को जोड़कर एक करते हैं, और शरीर कोशिका का केंद्रक ऐसे अंड में डालते हैं जिसका अपना केंद्रक निकाल दिया गया हो। यह केंद्रक स्थानांतरण है। अंड बँटकर भ्रूण बनता है जो सरोगेट माँ के भीतर बढ़ता है। बच्चे में केंद्रक दाता के जीन होते हैं। डॉली भेड़ (1996) वयस्क शरीर कोशिका से इस तरह बना पहला स्तनधारी था।
- भ्रूण अभियांत्रिकी: भ्रूण को शरीर के बाहर बढ़ने में मदद – भ्रूण अभियांत्रिकी का मतलब है आरंभिक भ्रूण के साथ काम करना। शुक्राणु अंड से जुड़कर (निषेचन) युग्मनज बनाता है। युग्मनज बार-बार बँटता है (विदलन) और गेंद बनता है, फिर खोखला ब्लास्टोसिस्ट जिसकी भीतरी कोशिकाएँ शिशु बनाती हैं। IVF में अंड और शुक्राणु प्रयोगशाला की थाली में मिलते हैं। छोटे भ्रूण को गर्भाशय में रखा जाता है (भ्रूण स्थानांतरण), बाद के लिए जमाया जाता है, या दो में बाँटकर एक जैसे जुड़वाँ बनाए जाते हैं। किसान यही विचार उपयोग करके एक उत्तम गाय से कई बछड़े पाते हैं।
3. Sel.3 Ch.3 Genetic engineering
Tools of recombinant DNA · Procedure; PCR and electrophoresis · Applications · Protein engineering
- जैव प्रौद्योगिकी: सिद्धांत व प्रक्रम (पुनर्योगज DNA तकनीक) – आनुवंशिक इंजीनियरिंग यानी किसी जीव के जीन जान-बूझकर बदलना। चाहा गया जीन प्रतिबंधन एंज़ाइम (आणविक कैंची) से काटते हैं, DNA लाइगेज़ (आणविक गोंद) से वाहक DNA में जोड़ते हैं, परपोषी कोशिका में डालते हैं, सही कोशिकाएँ चुनते हैं और बड़े टैंक (बायोरिएक्टर) में उगाकर उत्पाद निकालते हैं। PCR जीन की लाखों प्रतियाँ बनाता है और जेल वैद्युतकणसंचलन DNA टुकड़ों को आकार के हिसाब से अलग करता है।
- जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग – आनुवंशिक इंजीनियरिंग के औज़ार दवा, खेती और शोध में काम आते हैं। जीवाणु मानव इंसुलिन बनाते हैं; यीस्ट सुरक्षित टीका-प्रोटीन बनाता है। स्टेम कोशिकाएँ कई प्रकार की कोशिकाओं में बदल सकती हैं। जीन थेरेपी रोगी की कोशिकाओं में सही जीन डालती है। Bt कपास जैसी GM फसलों में कीट मारने वाले प्रोटीन का जीन होता है। पारजीनी जंतु रोग समझने या दवा बनाने में मदद करते हैं। ये शक्तिशाली हैं, इसलिए भारत में GEAC इन पर नज़र रखती है और कानून बायोपायरेसी व अनुचित पेटेंट से बचाते हैं।
- प्रोटीन इंजीनियरिंग: बेहतर प्रोटीन बनाना – प्रोटीन अमीनो अम्लों की श्रृंखलाएँ हैं जो एक सटीक 3D आकार में मुड़ती हैं, और आकार तय करता है कि प्रोटीन क्या करेगा। प्राकृतिक प्रोटीन हमेशा इंसानों के काम के लिए ठीक नहीं होते: कोई एंज़ाइम गर्म होने पर काम बंद कर देता है, कोई हॉर्मोन धीरे असर करता है। प्रोटीन इंजीनियरिंग बदले हुए (या बिल्कुल नए) प्रोटीन डिज़ाइन करके बनाती है। प्रोटीन जीन के निर्देशों से बनते हैं, इसलिए यह उल्टी चलती है: पहले चाहा गया काम, फिर उस काम के लिए ज़रूरी संरचना, फिर अमीनो अम्ल क्रम, और आख़िर में उसे बनाने वाला DNA (जीन) बदलना या बनाना। बदला जीन जीवाणु या यीस्ट जैसी कोशिकाओं में डाला जाता है, जो परखने के लिए नया प्रोटीन बनाती हैं। दो मुख्य तरीक़े: तर्कसंगत डिज़ाइन (योजनाबद्ध बदलाव, जैसे स्थल-निर्देशित उत्परिवर्तन) और निर्देशित विकास (बहुत से बेतरतीब बदलाव, फिर चयन)। जेनेटिक इंजीनियरिंग मौजूदा जीन से प्राकृतिक प्रोटीन बनाती है; प्रोटीन इंजीनियरिंग ऐसे प्रोटीन बनाती है जो प्रकृति में नहीं हैं, इसलिए इसे दूसरी पीढ़ी की जेनेटिक इंजीनियरिंग भी कहते हैं।
4. Sel.3 Ch.4 Biosafety and ethics
GM product safety · Reproductive cloning prohibited · Banning biological weapons
- जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग – आनुवंशिक इंजीनियरिंग के औज़ार दवा, खेती और शोध में काम आते हैं। जीवाणु मानव इंसुलिन बनाते हैं; यीस्ट सुरक्षित टीका-प्रोटीन बनाता है। स्टेम कोशिकाएँ कई प्रकार की कोशिकाओं में बदल सकती हैं। जीन थेरेपी रोगी की कोशिकाओं में सही जीन डालती है। Bt कपास जैसी GM फसलों में कीट मारने वाले प्रोटीन का जीन होता है। पारजीनी जंतु रोग समझने या दवा बनाने में मदद करते हैं। ये शक्तिशाली हैं, इसलिए भारत में GEAC इन पर नज़र रखती है और कानून बायोपायरेसी व अनुचित पेटेंट से बचाते हैं।
- जैवनैतिकता: जीवविज्ञान और चिकित्सा में सही क्या है – जैवनैतिकता पूछती है कि जीवविज्ञान और चिकित्सा जो करने देते हैं, क्या हमें वह करना चाहिए। इसके चार सिद्धांत हैं: स्वायत्तता (पसंद का सम्मान), हितकारिता (भला करो), अहानिकारिता (नुक़सान न करो) और न्याय (बराबरी)। मानव गरिमा का अर्थ है कि इंसान कभी सिर्फ़ साधन नहीं, इसलिए सूचित सहमति ज़रूरी है। चिकित्सीय क्लोनिंग सख़्त नियमों से कहीं-कहीं मान्य है; इंसान की प्रजनन क्लोनिंग ज़्यादातर देशों में प्रतिबंधित है। जीवन की शुरुआत और अंत के सवाल फ़ायदों बनाम जोखिमों और मूल्यों पर तौले जाते हैं।
- जैविक हथियारों पर प्रतिबंध: दुनिया ने रोगाणु युद्ध को क्यों ना कहा – जैविक हथियार में रोगाणु या उनके विष जानबूझकर लोगों, पशुओं या फसलों को नुक़सान पहुँचाने के लिए इस्तेमाल होते हैं। रोगाणु अपने आप फैलते हैं, किसी एक समूह पर निशाना नहीं बनाए जा सकते और यात्रा से सारी सीमाएँ पार करते हैं, इसलिए कोई सुरक्षित नहीं, प्रयोग करने वाला भी नहीं। 1925 के जिनेवा प्रोटोकॉल ने युद्ध में इनके प्रयोग पर रोक लगाई। 1972 का जैविक हथियार अभिसमय, जो 1975 से लागू है, इन्हें विकसित करने, बनाने और जमा करने पर रोक लगाता है। चूँकि वही जीवविज्ञान टीके और दवाएँ भी बनाता है, प्रयोगशालाएँ जैव-सुरक्षा और जैव-संरक्षा नियम मानती हैं और वैज्ञानिक दुरुपयोग की सूचना देते हैं।
5. Elective modules (standard, 1 credit each)
Healthy living · First-aid measures · Infectious diseases and control · Occupational diseases · Animal welfare · Biopharmaceuticals · Marine biology · Stem cells and applications · Plant tissue culture · Ecological security
- स्वस्थ जीवनशैली: रोज़ की आदतें जो तुम्हें ठीक रखें – स्वस्थ जीवनशैली रोज़ की अच्छी आदतों का नाम है: पाँच भोजन-समूहों वाला संतुलित आहार, भरपूर पानी, स्कूली बच्चों के लिए 9–11 घंटे और किशोरों के लिए लगभग 8–10 घंटे नींद, रोज़ कम से कम 60 मिनट खेल-कूद, सही मुद्रा, साफ-सुरक्षित भोजन, और तंबाकू, शराब व नशे से दूरी। इनसे टाइप 2 मधुमेह, हृदय रोग और कुछ कैंसर जैसे जीवनशैली रोगों का खतरा घटता है।
- प्राथमिक चिकित्सा: आपात स्थिति में क्या करें – प्राथमिक चिकित्सा वह मदद है जो प्रशिक्षित मदद आने तक घायल या बीमार व्यक्ति को दी जाती है। लक्ष्य: जान बचाना, हालत बिगड़ने से रोकना, ठीक होने में मदद। DRABC अपनाएँ: ख़तरा, प्रतिक्रिया, श्वास मार्ग, साँस, CPR/कॉल। बेहोश पर साँस चल रही → करवट स्थिति। सामान्य साँस नहीं → CPR 30:2, प्रति मिनट 100-120 दबाव, 5-6 सेमी गहरा, और AED। ख़ून → सीधा दबाव। जलना → 20 मिनट बहता पानी। गला अटकना → पीठ थपकी और पेट धक्के। मोच → RICE।
- मानव स्वास्थ्य तथा रोग – स्वास्थ्य का मतलब है शरीर, मन और सामाजिक जीवन तीनों ठीक हों। रोग कई बार कीटाणुओं (रोगजनक) से होते हैं: जीवाणु, वायरस, प्रोटोज़ोआ, कृमि और कवक। शरीर दो तरह की प्रतिरक्षा से लड़ता है: सहज (जन्म से) और उपार्जित (सीखी हुई, याद रखने वाली)। टीके इसी याददाश्त का उपयोग करते हैं। HIV सहायक T कोशिकाओं को नष्ट करके एड्स करता है। कैंसर में कोशिकाएँ बिना रुके बँटती हैं। नशा और शराब किशोरों के शरीर और मन को नुकसान पहुँचाते हैं।
- व्यावसायिक स्वास्थ्य: काम सेहत पर कैसे असर डालता है और कामगारों को कैसे बचाएँ – व्यावसायिक स्वास्थ्य का मतलब है काम करने वालों को स्वस्थ और सुरक्षित रखना। काम की जगह पर भौतिक, रासायनिक, जैविक, एर्गोनॉमिक और मानसिक-सामाजिक ख़तरे हो सकते हैं। लंबे समय तक संपर्क से सिलिकोसिस, शोर से बहरापन और कमर की चोट जैसे व्यावसायिक रोग होते हैं। बचाव के दो रास्ते: काम का माहौल सुधारना (बचाव की सीढ़ी) और कामगारों की सेहत की देखभाल (जाँच, संपर्क की सीमा, प्रशिक्षण)।
- पशु कल्याण – पशु कल्याण यानी कोई जानवर अपने जीवन में कितना अच्छा महसूस कर रहा है: उसका शरीर, उसकी भावनाएँ और स्वाभाविक व्यवहार की आज़ादी। जानवर संवेदनशील हैं: वे दर्द, डर और ख़ुशी महसूस करते हैं। पाँच स्वतंत्रताएँ बताती हैं कि हमारी देखरेख में हर जानवर को क्या चाहिए: भोजन-पानी, आराम, स्वास्थ्य, स्वाभाविक व्यवहार और डर से मुक्ति। पालतू, खेत या प्रयोगशाला के जानवर रखने वालों का कर्तव्य है कि ये ज़रूरतें पूरी करें।
- जैव-औषधियाँ: जीवित कोशिकाओं से बनी दवाएँ – जैव-औषधि वह दवा है जिसे जीवित कोशिकाएँ बनाती हैं, आमतौर पर कोई प्रोटीन जैसे इंसुलिन, टीका या प्रतिरक्षी। वैज्ञानिक मानव जीन को जीवाणु, ख़मीर या जंतु कोशिकाओं में डालते हैं, उन्हें किण्वक में उगाते हैं और फिर दवा को शुद्ध करते हैं। हर चरण पर सुरक्षा जाँच होती है।
- समुद्री जीव विज्ञान: समुद्र में जीवन – समुद्री जीव विज्ञान समुद्र के जीवन का अध्ययन है। समुद्री जीवों को उनके जीने के ढंग से बाँटते हैं: प्लवक बहते हैं, तरणक तैरते हैं और नितलक तल पर रहते हैं। गहराई के साथ प्रकाश घटता है, इसलिए भोजन बनाने वाले पादप प्लवक सतह के पास रहते हैं और लगभग हर समुद्री खाद्य शृंखला को भोजन देते हैं। प्रवाल भित्ति, मैंग्रोव, खुला समुद्र और गहरा समुद्र मुख्य पारितंत्र हैं। समुद्र भोजन, दवाएँ और विलवणीकरण से मीठा पानी देता है, पर उसे अति-मत्स्यन, प्रदूषण और गर्मी से ख़तरा है।
- कोशिका विभेदन और स्टेम कोशिका – आपके शरीर में 200 से ज़्यादा तरह की कोशिकाएँ हैं, पर सब एक ही कोशिका, युग्मनज, से बनी हैं। हर कोशिका में वही DNA है। विभेदन में कोशिका कुछ जीन चालू और कुछ बंद रखती है, इसलिए उसका आकार और काम अलग हो जाता है। जो कोशिकाएँ बँट सकती हैं और कई प्रकार की बन सकती हैं, उन्हें स्टेम कोशिका कहते हैं।
- पादप ऊतक संवर्धन: छोटे टुकड़े से बहुत सारे पौधे – पादप ऊतक संवर्धन यानी पौधे की कोशिकाएँ, ऊतक या अंग को बंद काँच के जार में साफ़ जेली भोजन पर उगाना। पौधे का एक छोटा टुकड़ा (कर्तोतक) साफ़ करके शर्करा, लवण, विटामिन और पादप हॉर्मोन वाले माध्यम पर रखते हैं। इसकी कोशिकाएँ बँटकर मुलायम ढेला बनाती हैं, जिसे कैलस कहते हैं। हॉर्मोन का मिश्रण तय करता है कि प्ररोह उगेंगे या जड़ें। हर नया प्ररोह काटकर फिर उगाया जा सकता है, इसलिए एक टुकड़े से हज़ारों एक जैसे पौधे बनते हैं। यही सूक्ष्मप्रवर्धन है।
- पारिस्थितिक सुरक्षा: आक्रामक प्रजातियाँ और प्रकृति की रक्षा – पारिस्थितिक सुरक्षा का मतलब है पारितंत्रों को स्वस्थ रखना ताकि वे हमें साफ़ पानी, भोजन और हवा देते रहें। आक्रामक प्रजातियाँ, जो दूसरी जगह से आकर तेज़ी से फैलती हैं क्योंकि उनके प्राकृतिक शत्रु नहीं होते, बड़ा खतरा हैं। हम प्रकृति को उसके घर में (आरक्षित क्षेत्र, उद्यान: स्व-स्थाने), घर से दूर (बीज बैंक, चिड़ियाघर: बाह्य-स्थाने) और शिकार व व्यापार के खिलाफ़ कानूनों से बचाते हैं।
6. 高考 review
Comprehensive review
जल्द आ रहा है