निषेचन
निषेचन तब होता है जब शुक्राणु अंड में प्रवेश करता है और उनके केंद्रक जुड़ जाते हैं। यह अंडवाहिनी में होता है। अंड में माँ के आधे जीन और शुक्राणु में पिता के आधे जीन होते हैं, इसलिए युग्मनज में पूरा सेट बन जाता है।
केवल एक शुक्राणु अंदर जाता है। फिर अंड अपनी बाहरी परत बदल लेता है ताकि कोई और शुक्राणु प्रवेश न कर सके।
आरंभिक विकास: विदलन, मोरुला, ब्लास्टोसिस्ट
- विदलन: युग्मनज बिना बढ़े 2, 4, 8, 16... में बँटता है। कोशिकाएँ (ब्लास्टोमियर) छोटी होती जाती हैं।
- मोरुला: लगभग 16 कोशिकाओं की ठोस गेंद (शहतूत जैसी)।
- ब्लास्टोसिस्ट (लगभग दिन 5): खोखली गेंद। भीतरी कोशिका समूह शिशु बनता है। बाहरी परत (ट्रोफ़ोब्लास्ट) अपरा बनती है।
- अंतर्रोपण (लगभग दिन 6 से 7): ब्लास्टोसिस्ट गर्भाशय की नरम दीवार में चिपक जाता है।
अंडवाहिनी से गर्भाशय तक जाते हुए भी भ्रूण बँटता रहता है।
IVF: इन विट्रो निषेचन
इन विट्रो का अर्थ है “काँच में”। चरण: स्त्री हॉर्मोन लेती है ताकि कई अंड परिपक्व हों; अंड निकाले जाते हैं; थाली में शुक्राणु मिलाए जाते हैं (या एक शुक्राणु इंजेक्ट किया जाता है: ICSI); भ्रूण 3 से 5 दिन बढ़ते हैं; सबसे अच्छे एक-दो गर्भाशय में रखे जाते हैं।
यह तब मदद करता है जब अंडवाहिनी बंद हो, शुक्राणु कम हों, या कारण पता न हो। पहला IVF शिशु 1978 में जन्मा। संबंधित विधियाँ: ZIFT (युग्मनज या आरंभिक भ्रूण अंडवाहिनी में) और IUT (बड़ा भ्रूण गर्भाशय में)।
भ्रूण स्थानांतरण और हिमीकरण
भ्रूण स्थानांतरण का मतलब है पतली नली से भ्रूण को मादा के गर्भ में रखना। अतिरिक्त भ्रूणों को द्रव नाइट्रोजन में −196 °C पर जमाया जा सकता है (क्रायोसंरक्षण) और बाद में उपयोग किया जा सकता है।
पशु-प्रजनन में (MOET: बहु-अंडोत्सर्ग भ्रूण स्थानांतरण): उत्तम गाय को हॉर्मोन देकर कई अंड छुड़ाए जाते हैं; उसका गर्भाधान कराया जाता है; 6 से 8 दिन के भ्रूण धोकर निकाले जाते हैं; हर एक साधारण गाय में रखा जाता है जो बछड़ा पालती है। नतीजा: हर साल श्रेष्ठ जीन वाले कई बछड़े।
भ्रूण विभाजन और जाँच
भ्रूण विभाजन (भ्रूण क्लोनिंग) में आरंभिक भ्रूण को बारीक ब्लेड से दो या अधिक भागों में काटा जाता है। हर भाग के जीन एक जैसे होते हैं और अलग पशु बन सकता है, एक जैसे जुड़वाँ की तरह। यह केवल बहुत शुरुआती अवस्था में होता है।
जाँच: भ्रूण रखने से पहले कुछ कोशिकाओं में गंभीर आनुवंशिक रोग देखे जा सकते हैं। इससे नैतिक प्रश्न उठते हैं, इसलिए नियम और डॉक्टर की सलाह ज़रूरी हैं।
करके देखिए
3D में अवस्था को 1 से 16 कोशिकाओं तक खिसकाइए और देखिए कि गेंद लगभग उसी आकार की रहती है। फिर 8 कोशिकाओं पर “बाँटें” दबाइए। घर पर कागज़ को बार-बार आधा मोड़िए और खाने गिनिए: 1, 2, 4, 8, 16। कोशिकाएँ इसी तेज़ी से दुगुनी होती हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- n विभाजनों के बाद कोशिकाएँ = 2ⁿ (1, 2, 4, 8, 16, 32...)
- युग्मनज → मोरुला (लगभग 16 कोशिकाएँ) → ब्लास्टोसिस्ट (लगभग दिन 5) → अंतर्रोपण (दिन 6 से 7)
- IVF: अंड + शुक्राणु थाली में (37 °C) → भ्रूण → स्थानांतरण
- भ्रूण विभाजन: 1 भ्रूण → 2 भाग = एक जैसे जुड़वाँ
- भ्रूण हिमीकरण: द्रव नाइट्रोजन में −196 °C
हल किए गए उदाहरण
1. विदलन के 4 चरणों के बाद कितनी कोशिकाएँ होती हैं?
2⁴ = 16 कोशिकाएँ (मोरुला अवस्था)।
2. एक उत्तम गाय एक बार में 8 भ्रूण देती है। 6 स्वस्थ हैं और 4 सरोगेट गायों में सफलतापूर्वक रखे गए। कितने बछड़ों की आशा है?
लगभग 4 बछड़े, हर सफल गर्भ के लिए एक।
3. 8 कोशिका वाले भ्रूण को दो बराबर भागों में बाँटा गया। हर भाग में कितनी कोशिकाएँ हैं और क्या जुड़वाँ के जीन एक जैसे हैं?
हर भाग में 4 कोशिकाएँ। हाँ, दोनों भाग एक ही निषेचित अंड से आए हैं, इसलिए जीन एक जैसे हैं।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि विदलन में भ्रूण बड़ा होता है। कोशिकाएँ बँटती हैं पर गेंद का आकार वही रहता है।
- IVF (थाली में निषेचन) और क्लोनिंग (शुक्राणु नहीं, केंद्रक स्थानांतरण) को मिला देना।
- यह मानना कि ब्लास्टोसिस्ट की बाहरी परत शिशु बनाती है। शिशु भीतरी कोशिकाओं से बनता है; बाहरी परत अपरा बनाती है।
- यह मानना कि भ्रूण विभाजन भ्रूण की किसी भी उम्र में हो सकता है। यह केवल बहुत शुरुआती अवस्था में होता है।