जनन स्वास्थ्य क्या है?
जनन स्वास्थ्य का मतलब है कि जनन से जुड़ी हर बात में व्यक्ति शरीर, मन, व्यवहार और सामाजिक जीवन से ठीक हो। यह केवल 'रोग न होना' नहीं है।
समाज इसे कैसे सुधारता है
- स्कूलों में सही यौन शिक्षा, ताकि युवाओं को तथ्य मिलें, भ्रम नहीं।
- STI, गर्भनिरोध, गर्भावस्था और जन्म के बाद की देखभाल, और स्तनपान के महत्त्व की जानकारी।
- लड़कों और लड़कियों की बराबर देखभाल; लिंग चुनकर गर्भपात और बाल विवाह रोकना।
- बांझपन और सुरक्षित प्रसव जैसी समस्याओं के लिए अच्छी चिकित्सा सुविधा।
भारत ने 1951 में राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम शुरू किया, जो बाद में 'जनन एवं बाल स्वास्थ्य सेवा (RCH)' कार्यक्रम बना। सफलता के संकेत: माँ और शिशु की मृत्यु दर में कमी, अस्पताल में ज़्यादा प्रसव, अपनी इच्छा से छोटे परिवार।
जनसंख्या और जन्म नियंत्रण
अच्छी स्वास्थ्य सेवा से मृत्यु दर घटी, इसलिए जनसंख्या तेज़ी से बढ़ी। बच्चों के बीच अंतर और छोटा परिवार स्वास्थ्य और संसाधन दोनों के लिए अच्छा है। विवाह की कानूनी आयु (लड़की 18, लड़का 21) भी मदद करती है।
यौन संचारित रोग (STI) और बचाव
यौन संपर्क से फैलने वाले संक्रमण यौन संचारित रोग (STI/STD/रतिज रोग) हैं। उदाहरण: सुज़ाक (गोनोरिया), सिफ़लिस, जननिक हर्पीज़, क्लैमाइडिया, जननिक मस्से, ट्राइकोमोनिएसिस, हेपेटाइटिस-B और HIV (जिससे एड्स होता है)।
- हेपेटाइटिस-B और HIV सुई साझा करने, संक्रमित खून चढ़ाने या संक्रमित माँ से बच्चे में भी फैल सकते हैं।
- कई STI शुरू में कम लक्षण दिखाते हैं (खुजली, स्राव, दर्द, सूजन), इसलिए लोग इलाज में देर करते हैं।
- इलाज न हो तो श्रोणि संक्रमण, अस्थानिक गर्भ (गर्भाशय के बाहर भ्रूण), मृत जन्म, बांझपन और जनन मार्ग का कैंसर तक हो सकता है।
- हेपेटाइटिस-B, जननिक हर्पीज़ और HIV को छोड़कर ज़्यादातर STI जल्दी पता चलने पर पूरी तरह ठीक हो सकते हैं।
सुरक्षित रहने के आसान नियम
- अनजान या कई साथियों से यौन संबंध से बचो।
- हमेशा कंडोम का उपयोग करो।
- शक हो तो जल्दी योग्य डॉक्टर को दिखाओ और पूरा इलाज लो।
गर्भनिरोधक उपाय
अच्छा गर्भनिरोधक आसान, सुरक्षित, असरदार, उलटा जा सकने वाला और कम दुष्प्रभाव वाला होता है।
- प्राकृतिक उपाय: अंडोत्सर्ग के आसपास के उपजाऊ दिनों में संपर्क से बचना (आवधिक संयम), बाह्य स्खलन, और दुग्धस्रवण अनार्तव (पूरा स्तनपान कराने पर लगभग 6 महीने तक अंडोत्सर्ग नहीं)। दुष्प्रभाव नहीं, पर असफलता ज़्यादा।
- अवरोधक: पुरुष और महिला कंडोम, डायाफ्राम, गर्भाशय ग्रीवा टोपी और वॉल्ट, अक्सर शुक्राणुनाशक क्रीम के साथ। कंडोम STI से भी बचाता है।
- अंतःगर्भाशयी युक्तियाँ (IUD), जिन्हें डॉक्टर गर्भाशय में लगाते हैं: बिना दवा वाली, कॉपर छोड़ने वाली (कॉपर-T, मल्टीलोड 375; कॉपर शुक्राणु को कमज़ोर करता है) और हॉर्मोन छोड़ने वाली (गर्भाशय को अंतर्रोपण के लायक नहीं रहने देतीं और ग्रीवा को शुक्राणु के लिए प्रतिकूल बनाती हैं)। बच्चों में अंतर रखने के लिए बढ़िया।
- खाने की गोलियाँ: प्रोजेस्टोजन या प्रोजेस्टोजन-एस्ट्रोजन की छोटी मात्रा, 21 दिन रोज़। ये अंडोत्सर्ग और अंतर्रोपण रोकती हैं। सहेली, हफ़्ते में एक बार ली जाने वाली गैर-स्टेरॉयडी गोली, भारत में बनी। हॉर्मोन इंजेक्शन या त्वचा के नीचे इम्प्लांट से भी दिए जाते हैं। असुरक्षित संपर्क के 72 घंटे के अंदर आपातकालीन गोली या IUD गर्भ रोक सकते हैं।
- शल्य क्रिया (नसबंदी): पुरुषों में शुक्रवाहक-उच्छेदन (vasectomy: शुक्रवाहक का छोटा भाग काटकर बाँधना) और महिलाओं में डिंबवाहिनी-उच्छेदन (tubectomy: अंडवाहिनी का छोटा भाग काटकर बाँधना)। बहुत असरदार पर उलटना मुश्किल।
चिकित्सीय सगर्भता समापन (MTP)
MTP का मतलब है पूरा समय होने से पहले योग्य डॉक्टर द्वारा जानबूझकर गर्भ समाप्त करना। भारत ने 1971 में इसे दुरुपयोग रोकने वाले नियमों के साथ कानूनी बनाया; 2021 में कानून बदला गया।
- 20 हफ़्ते तक: अनुमति वाली स्थितियों में एक पंजीकृत डॉक्टर की राय पर।
- 20–24 हफ़्ते: दो डॉक्टरों की राय, केवल विशेष वर्गों के लिए (जैसे यौन हिंसा की पीड़ित या नाबालिग)।
- 24 हफ़्ते के बाद: केवल भ्रूण में गंभीर दोष होने पर, मेडिकल बोर्ड के निर्णय से।
पहली तिमाही (पहले 12 हफ़्ते) में MTP सबसे सुरक्षित है। यह तब किया जाता है जब गर्भ जारी रखने से माँ को ख़तरा हो, भ्रूण में गंभीर दोष हो, या गर्भनिरोधक असफल हुआ हो। अप्रशिक्षित लोगों से MTP ख़तरनाक है; लिंग चुनकर गर्भपात अपराध है।
उल्बवेधन (एम्नियोसेंटेसिस)
भ्रूण उल्ब द्रव में तैरता है, जिसमें उसकी कुछ कोशिकाएँ होती हैं। उल्बवेधन में डॉक्टर सुई से थोड़ा द्रव निकालकर कोशिकाओं के गुणसूत्र जाँचते हैं। इससे डाउन सिंड्रोम जैसे आनुवंशिक विकार पता चल सकते हैं।
क्योंकि इससे भ्रूण का लिंग भी पता चल सकता है, भारत में इसका (या किसी भी जाँच का) लिंग जाँच के लिए उपयोग कानून से प्रतिबंधित है। इससे बेटियों की रक्षा होती है और लिंग अनुपात संतुलित रहता है।
बांझपन और सहायक जनन तकनीकें
बांझपन का मतलब है कि दंपति बिना गर्भनिरोध के एक साल या ज़्यादा कोशिश करके भी संतान नहीं पा रहे। कारण पुरुष या महिला, किसी में भी हो सकता है। यह केवल महिला की समस्या नहीं है।
ART तकनीकें
- IVF-ET (पात्रे निषेचन और भ्रूण स्थानांतरण, 'टेस्ट-ट्यूब बेबी'): अंडाणु और शुक्राणु प्रयोगशाला की प्लेट में मिलाए जाते हैं; भ्रूण माँ में रखा जाता है।
- ZIFT (युग्मनज अंतः डिंबवाहिनी स्थानांतरण): युग्मनज या 8 कोशिका तक का भ्रूण अंडवाहिनी में रखा जाता है।
- IUT (अंतः गर्भाशयी स्थानांतरण): 8 से ज़्यादा कोशिकाओं वाला भ्रूण गर्भाशय में रखा जाता है।
- GIFT (युग्मक अंतः डिंबवाहिनी स्थानांतरण): दाता का अंडाणु उस महिला की अंडवाहिनी में रखा जाता है जो अंडाणु नहीं बना सकती पर गर्भ सँभाल सकती है; निषेचन उसके शरीर के अंदर होता है।
- ICSI (अंतः कोशिकाद्रव्यी शुक्राणु निक्षेपण): प्रयोगशाला में एक शुक्राणु सीधे अंडाणु में इंजेक्ट किया जाता है।
- AI / IUI (कृत्रिम वीर्यसेचन / अंतः गर्भाशयी वीर्यसेचन): पति या दाता का वीर्य योनि या गर्भाशय में डाला जाता है। शुक्राणु संख्या कम होने पर उपयोगी।
ये तकनीकें विशेष केंद्रों में होती हैं और महँगी हैं। गोद लेना भी संतानहीन दंपतियों के लिए एक प्यारा विकल्प है।
करके देखो: उपायों का नक्शा बनाओ
- एक लाइन में चार डिब्बे बनाओ: अंडाशय → अंडवाहिनी → गर्भाशय → योनि (3D की लाइन जैसे)।
- हर गर्भनिरोधक उपाय के लिए, जहाँ वह काम करता है वहाँ लाल क्रॉस बनाओ। 3D के चरण 3 से मिलाओ।
- दूसरी लाइन पर हर ART तकनीक के लिए तारा बनाओ कि कोशिकाएँ कहाँ रखी जाती हैं: ZIFT, IUT, GIFT, IUI। चरण 5 से जाँचो।
पहले अनुमान लगाओ: कौन-सी दो तकनीकें अंडवाहिनी में कुछ रखती हैं?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- प्राकृतिक: आवधिक संयम, बाह्य स्खलन, दुग्धस्रवण अनार्तव (~6 महीने तक)
- अवरोधक: कंडोम, डायाफ्राम, ग्रीवा टोपी, वॉल्ट (+ शुक्राणुनाशक)
- IUD: बिना दवा, कॉपर वाली (कॉपर-T, मल्टीलोड 375), हॉर्मोन वाली
- गोली / इंजेक्शन / इम्प्लांट: अंडोत्सर्ग और अंतर्रोपण रोकें; सहेली = साप्ताहिक गोली
- शल्य: शुक्रवाहक-उच्छेदन (पुरुष), डिंबवाहिनी-उच्छेदन (महिला)
- ART: IVF-ET · ZIFT (≤ 8 कोशिका → नली) · IUT (> 8 कोशिका → गर्भाशय) · GIFT (अंडाणु → नली) · ICSI · AI/IUI
हल किए गए उदाहरण
1. एक दंपति पहला बच्चा 2 साल बाद चाहते हैं और महिला रोज़ गोली नहीं लेना चाहती। कौन-सा उपाय सुझाओगे?
कॉपर-T जैसी IUD। डॉक्टर एक बार लगाते हैं, यह सालों काम करती है, और बच्चा चाहने पर निकाली जा सकती है।
2. कौन-सा गर्भनिरोधक STI से भी बचाता है? क्यों?
कंडोम, क्योंकि यह भौतिक अवरोध है जो शरीर के द्रवों को, और उनके साथ रोगाणुओं को, एक से दूसरे तक जाने से रोकता है।
3. एक महिला अंडाणु नहीं बना सकती पर उसका गर्भाशय और नलिकाएँ स्वस्थ हैं। कौन-सी ART ठीक है?
GIFT: दाता का अंडाणु उसकी अंडवाहिनी में रखा जाता है और निषेचन उसके शरीर में होता है। (दाता अंडाणु के साथ IVF भी विकल्प है।)
4. एक भ्रूण में 16 कोशिकाएँ हैं। इसे ZIFT से रखेंगे या IUT से? कहाँ?
8 से ज़्यादा कोशिकाएँ → IUT; गर्भाशय में। ZIFT युग्मनज या 8 कोशिका तक के भ्रूण के लिए है, जो अंडवाहिनी में रखा जाता है।
5. दुग्धस्रवण अनार्तव अधिकतम 6 महीने सुरक्षा देता है। माँ 8 महीने पूरा स्तनपान कराती है। कितने महीने इस उपाय से सुरक्षा नहीं है?
8 − 6 = 2 महीने। लगभग 6 महीने बाद (या माहवारी लौटते ही या दूध पिलाना कम होते ही) दूसरा उपाय चाहिए।
6. उल्बवेधन उपयोगी क्यों है, और लिंग जाँच के लिए प्रतिबंधित क्यों?
यह डाउन सिंड्रोम जैसे गुणसूत्र विकार जल्दी पकड़ता है ताकि माता-पिता और डॉक्टर योजना बना सकें। लिंग जाँच पर रोक है क्योंकि इसका दुरुपयोग कन्या भ्रूण गिराने में हुआ, जिससे बेटियों और लिंग अनुपात को नुकसान हुआ।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि हर गर्भनिरोधक STI से बचाता है। केवल कंडोम जैसे अवरोधक बचाते हैं; गोली, IUD और शल्य क्रिया नहीं।
- शुक्रवाहक-उच्छेदन और डिंबवाहिनी-उच्छेदन में उलझना। पहला पुरुष में (शुक्रवाहक), दूसरा महिला में (अंडवाहिनी)।
- ZIFT और IUT में उलझना। ZIFT: 8 कोशिका तक, अंडवाहिनी में। IUT: 8 से ज़्यादा, गर्भाशय में।
- यह मानना कि बांझपन हमेशा महिला की समस्या है। कारण किसी भी साथी में हो सकता है।