समुद्री सूचना प्रणाली क्या है?
डेटा यानी तथ्य और संख्याएँ, जैसे समुद्र का तापमान या लहर की ऊँचाई। सूचना प्रणाली डेटा इकट्ठा करती है, रखती है, जोड़ती है और ऐसे दिखाती है कि लोग उसे काम में ला सकें।
समुद्र में डेटा कई जगह से आता है: बॉय (तैरते यंत्र), जहाज़, उपग्रह और तटीय केंद्र। समुद्री सूचना प्रणाली इन सबको जोड़कर नक्शे और चेतावनियाँ बनाती है। जैसे समुद्र की सतह के तापमान का नक्शा, लहरों का पूर्वानुमान, ज्वार की सारणी और तूफ़ान की चेतावनी।
इसकी ज़रूरत क्यों? समुद्र बड़ा है, हमेशा हिलता रहता है और ख़तरनाक है। डेटा से हम काम की योजना बनाते हैं और सुरक्षित रहते हैं।
जहाज़ चलाने की सूचना प्रणालियाँ
जहाज़ को तीन सवालों के जवाब चाहिए: मैं कहाँ हूँ? मेरे आसपास क्या है? मुझे कहाँ जाना है?
- GPS (ग्लोबल पोज़िशनिंग सिस्टम): उपग्रह समय के संकेत भेजते हैं। रिसीवर उनसे अक्षांश और देशांतर निकालता है।
- रडार: रेडियो तरंगें भेजकर दूसरे जहाज़ और ज़मीन को स्क्रीन पर बिंदु की तरह दिखाता है, रात और कोहरे में भी।
- AIS (ऑटोमैटिक आइडेंटिफ़िकेशन सिस्टम): हर जहाज़ रेडियो से अपना नाम, जगह, चाल और दिशा भेजता है। दूसरे जहाज़ और बंदरगाह उसे देखते हैं। इससे टक्कर बचती है।
- इलेक्ट्रॉनिक चार्ट (ECDIS): डिजिटल समुद्री नक्शा, जिस पर जहाज़ की जगह, गहराई और तय रास्ता दिखता है।
- इको साउंडर: जहाज़ के नीचे की गहराई नापता है ताकि वह तल से न टकराए।
- मौसम और समुद्र की स्थिति का डेटा: रास्ते में तूफ़ान और ऊँची लहरों की चेतावनी देता है।
इन सबको मिलाकर जहाज़ की नौवहन और संचार प्रणाली कहते हैं।
सोनार मछली और गहराई कैसे ढूँढता है
सोनार का मतलब है ध्वनि से दिशा और दूरी जानना। जहाज़ के नीचे लगा ट्रांसड्यूसर नीचे की ओर छोटी ध्वनि-तरंग भेजता है। समुद्री पानी में ध्वनि लगभग 1500 मी/से की चाल से चलती है। जब वह मछलियों के झुंड या समुद्र तल से टकराती है तो लौट आती है। जहाज़ भेजने और गूँज सुनने के बीच का समय नापता है।
गहराई = चाल x समय / 2। 2 से भाग इसलिए कि आवाज़ नीचे गई और ऊपर वापस भी आई।
मछली के शरीर में गैस से भरा वायु-कोष होता है। वह ध्वनि को ज़ोर से लौटाता है, इसलिए फिश-फाइंडर की स्क्रीन पर झुंड चमकीले निशान की तरह दिखते हैं।
मत्स्य सूचना प्रणालियाँ
समुद्र से थाली तक हर क़दम पर IT मदद करती है।
- मछली ढूँढना: समुद्र के तापमान और प्लवक के रंग के उपग्रह नक्शे दिखाते हैं कि मछलियाँ कहाँ इकट्ठी होती हैं। फिश फाइंडर नाव के नीचे का झुंड दिखाता है।
- पकड़ का रिकॉर्ड (लॉगबुक): कौन-सी मछली कितनी, कहाँ और कब पकड़ी। वैज्ञानिक इससे जाँचते हैं कि कहीं ज़्यादा मछली तो नहीं पकड़ी जा रही।
- नाव की निगरानी: नाव पर ट्रैकर लगा होता है। वह दिखाता है कि नाव तय इलाक़े और मौसम में ही है।
- मछली-पालन के सेंसर: तालाब या पिंजरे में सेंसर ऑक्सीजन, तापमान और pH नापते हैं। गड़बड़ी हो तो अलार्म बजता है।
- कोल्ड चेन और ट्रेसेबिलिटी: भंडारण और ढुलाई में तापमान लॉगर मछली पर नज़र रखते हैं। पैक पर बारकोड या QR कोड बताता है कि मछली कहाँ और कब पकड़ी गई।
- बाज़ार की जानकारी: ऐप आज के भाव दिखाते हैं, ताकि मछुआरा तय कर सके कि कहाँ बेचे।
नेटवर्क पर डेटा भेजना और सुरक्षा
डेटा रेडियो, उपग्रह लिंक, मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट से चलता है। तट के पास मोबाइल नेटवर्क चलता है। दूर समुद्र में जहाज़ उपग्रह संचार का उपयोग करते हैं। तट पर डेटा केंद्र डेटा रखता है और ऐसे प्रोग्राम चलाता है जो पूर्वानुमान बनाते हैं।
डेटा सही, ताज़ा और सुरक्षित होना चाहिए। ग़लत जगह या हैक किया गया AIS संकेत दुर्घटना करा सकता है। इसलिए बैकअप, पासवर्ड और जाँच की व्यवस्था रखी जाती है।
करके देखो
3D में: आख़िरी चरण पर जाओ। गहराई स्लाइडर 150 मीटर पर करो। पहले गूँज का समय अंदाज़े से बताओ (संकेत: 2 x 150 / 1500 सेकंड)। फिर दृश्य के नीचे की संख्या पढ़ो।
घर पर: शांत जगह पर दूर की दीवार के पास ताली बजाओ, या ख़ाली गलियारे में आवाज़ लगाओ। गूँज लौटने में कितना समय लगा, गिनो। मोबाइल का स्टॉपवॉच काम आएगा। दूरी = 340 x समय / 2 (हवा में ध्वनि की चाल 340 मी/से है)।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- गहराई = (ध्वनि की चाल x गूँज का समय) / 2
- समुद्री पानी में ध्वनि की चाल लगभग 1500 मी/से
- गूँज का समय = 2 x गहराई / चाल
- GPS अक्षांश और देशांतर देता है
हल किए गए उदाहरण
1. जहाज़ के इको साउंडर को 0.2 सेकंड में गूँज मिली। समुद्री पानी में चाल 1500 मी/से है। समुद्र कितना गहरा है?
गहराई = 1500 x 0.2 / 2 = 150 मीटर।
2. मछलियों का झुंड नाव से 75 मीटर नीचे है। गूँज कितनी देर में लौटेगी?
समय = 2 x 75 / 1500 = 0.1 सेकंड।
3. कोहरे में दूसरे जहाज़ से टक्कर बचाने के लिए कप्तान कौन-से दो सिस्टम काम में लेगा?
रडार (दूसरे जहाज़ बिंदु की तरह दिखते हैं) और AIS (दूसरे जहाज़ अपनी जगह और दिशा रेडियो से भेजते हैं)।
4. समुद्र तल की गूँज 0.4 सेकंड में आई और मछली की गूँज 0.1 सेकंड में। मछली तल से कितना ऊपर है?
तल: 1500 x 0.4 / 2 = 300 मी। मछली: 1500 x 0.1 / 2 = 75 मी। मछली तल से 300 - 75 = 225 मी ऊपर है।
आम गलतियाँ
- 2 से भाग देना भूल जाना। गूँज का समय नीचे जाने और वापस आने, दोनों का है।
- GPS और सोनार को मिला देना। GPS उपग्रह से जगह देता है; सोनार ध्वनि से गहराई और मछली बताता है।
- रडार को ध्वनि वाला समझना। रडार रेडियो तरंगें इस्तेमाल करता है; सोनार ध्वनि तरंगें।
- समुद्री पानी में 340 मी/से चाल लेना। पानी में ध्वनि तेज़ चलती है, लगभग 1500 मी/से।