स्प्रेडशीट से प्रणाली बनाना
स्प्रेडशीट सेलों की जाली है। हर सेल में संख्या, शब्द या फ़ॉर्मूला रहता है।
स्प्रेडशीट प्रणाली का डिज़ाइन ऐसे कीजिए:
- इनपुट सेल: जो तथ्य आप भरते हैं (वस्तु, मात्रा, दाम)।
- फ़ॉर्मूला सेल: अपने आप निकले नतीजे, जैसे
जोड़ = मात्रा × दाम। इनपुट बदलिए तो जोड़ बदल जाता है। - जाँच: क्या भरा जा सकता है इसकी सीमा (जैसे मात्रा ऋणात्मक न हो) और हर स्तंभ का साफ़ शीर्षक।
- रिपोर्ट: जोड़, चार्ट या छाँटी हुई सूची।
कहाँ अच्छी: छोटे काम, तुरंत हिसाब, एक-दो उपयोगकर्ता।
कहाँ कमज़ोर: एक ही तथ्य बार-बार भरना, कई लोगों का एक साथ बदलना और बहुत सारा डेटा।
डेटाबेस सॉफ़्टवेयर से प्रणाली बनाना
डेटाबेस डेटा तालिकाओं में रखता है। तालिका में पंक्तियाँ (रिकॉर्ड) और स्तंभ (फ़ील्ड) होते हैं।
- प्राथमिक कुंजी: ऐसा फ़ील्ड जिसका मान हर पंक्ति में अलग हो, जैसे ग्राहक ID। यह पंक्ति का नाम है।
- विदेशी कुंजी: दूसरी तालिका का वह फ़ील्ड जिसमें यही ID रहती है, ताकि दोनों पंक्तियाँ जुड़ें।
- क्वेरी: आपका सवाल, जैसे "ग्राहक 1 के सारे ऑर्डर"।
- फ़ॉर्म और रिपोर्ट: डेटा भरने की साफ़ स्क्रीन और सार की रिपोर्ट।
ग्राहक की जानकारी ग्राहक तालिका में एक बार रहती है। ऑर्डर तालिका में सिर्फ़ ग्राहक ID रहती है। फ़ोन नंबर बदले तो एक पंक्ति बदलनी होती है और हर रिपोर्ट सही रहती है। इससे डेटा रिडंडेंसी (दोहराया डेटा) और बेमेल नक़लें नहीं बनतीं।
दोनों प्रणालियाँ बनाने के चरण
- ज़रूरत: उपयोगकर्ताओं से पूछिए क्या दर्ज करना है और कौन-सी रिपोर्ट चाहिए।
- डिज़ाइन: डेटा की सूची बनाइए, स्तंभ या तालिकाएँ तय कीजिए, तालिकाएँ कैसे जुड़ेंगी बनाइए, फ़ॉर्मूले सोचिए।
- निर्माण: शीट या तालिकाएँ, फ़ॉर्मूले और फ़ॉर्म बनाइए।
- जाँच: सामान्य, चरम और ग़लत मान भरिए, नतीजे हाथ के हिसाब से मिलाइए, बग ठीक कीजिए।
- उपयोग और सुधार: उपयोगकर्ताओं को सिखाइए, बैकअप लीजिए और ज़रूरत बदलने पर प्रणाली बदलिए।
चुनाव: छोटे, अकेले के काम के लिए स्प्रेडशीट से शुरू कीजिए। डेटा बढ़े, तथ्य दोहराए जाएँ या कई लोगों को सुरक्षित साझा करना हो तो डेटाबेस अपनाइए।
करके देखिए: ट्यूशन फ़ीस का हिसाब
काग़ज़ पर पाँच बच्चों का फ़ीस-ट्रैकर बनाइए। पहले एक शीट में स्तंभ: नाम, फ़ोन, महीना, रक़म। गिनिए फ़ोन नंबर कितनी बार लिखे गए। फिर इसे दो तालिकाओं में बनाइए (बच्चे: ID के साथ; भुगतान: बच्चे की ID के साथ)। फिर गिनिए। 3D के फ़्री-प्ले चरण से मिलाइए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- स्प्रेडशीट फ़ॉर्मूला उदाहरण: जोड़ = मात्रा × दाम
- प्राथमिक कुंजी = ऐसा फ़ील्ड जो हर पंक्ति में अलग हो
- विदेशी कुंजी = ऐसा फ़ील्ड जिसमें दूसरी तालिका की प्राथमिक कुंजी रहती है
- डेटा रिडंडेंसी = वही तथ्य कई बार रखना
- विकास के चरण: ज़रूरत → डिज़ाइन → निर्माण → जाँच → उपयोग और सुधार
हल किए गए उदाहरण
1. सेल B2 में 4 है और C2 में 25। D2 में सूत्र =B2*C2 है। D2 क्या दिखाएगा? B2 के 6 होने पर क्या होगा?
D2 में 4 × 25 = 100 दिखेगा। B2 के 6 होने पर D2 अपने आप 150 हो जाएगा।
2. एक शीट में एक ही ग्राहक के 30 ऑर्डर हैं और हर पंक्ति में नाम व फ़ोन है। फ़ोन नंबर की कितनी नक़लें रखी हैं? डेटाबेस कितनी रखेगा?
शीट में 30 नक़लें। डेटाबेस ग्राहक तालिका में 1 नक़ल रखेगा; 30 ऑर्डरों में सिर्फ़ ग्राहक ID रहेगी।
3. ऑर्डर तालिका में विदेशी कुंजी कौन-सा फ़ील्ड है: OrderID, CustomerID, Item?
CustomerID। इसमें ग्राहक तालिका की प्राथमिक कुंजी रहती है और यह हर ऑर्डर को उसके ग्राहक से जोड़ती है।
4. कौन-सा औज़ार बेहतर है: (a) इस हफ़्ते के बिलों का तुरंत जोड़, (b) 5000 ग्राहकों वाली दुकान जहाँ 3 कर्मचारी ऑर्डर भरते हैं?
(a) स्प्रेडशीट जल्दी और काफ़ी है। (b) डेटाबेस, क्योंकि डेटा दोहराता है, बड़ा है और कई लोग साझा करते हैं।
आम गलतियाँ
- फ़ॉर्मूले की जगह नतीजा हाथ से टाइप करना। इनपुट बदलने पर टाइप किया नतीजा ग़लत रह जाता है।
- हर पंक्ति में वही जानकारी दोहराना और सिर्फ़ एक नक़ल सुधारना।
- नाम को कुंजी बनाना। दो ग्राहकों का नाम एक हो सकता है; अनोखी ID इस्तेमाल कीजिए।
- जाँच का चरण छोड़ देना। प्रणाली को हाथ के हिसाब और ग़लत मानों से हमेशा परखिए।