Japan 高校(専門学科)1〜3年 Commerce / Business
अध्याय: 20
1. Business Basics
Studying commerce and business · Attitude towards business · Economy and distribution · Transactions and business calculation · Corporate activities · Business in the local area
- व्यवसाय, पेशा और रोज़गार – मनुष्य की क्रियाएँ आर्थिक (पैसा कमाने के लिए) या अनार्थिक (प्रेम, कर्तव्य या आस्था से) होती हैं। आर्थिक क्रियाएँ तीन रूप में होती हैं: व्यवसाय (वस्तुएँ-सेवाएँ बनाकर या बेचकर लाभ), पेशा (विशेषज्ञ सेवा के बदले शुल्क) और रोज़गार (किसी के लिए काम करके वेतन)। व्यवसाय के कई उद्देश्य होते हैं, और टिके रहने व बढ़ने के लिए लाभ ज़रूरी है।
- व्यापार के प्रति रवैया: भरोसा, बात और जानकारी – अच्छे व्यापारिक रवैये की तीन आदतें हैं। वादे निभाकर और ईमानदार रहकर भरोसा बनाओ। साफ़ बात करो: सरल कहो, सुनो और जाँचो कि सामने वाले ने समझा। भरोसेमंद स्रोत से जानकारी लो और उससे अच्छा फ़ैसला करो। भरोसा धीरे बनता है और जल्दी टूटता है।
- अर्थशास्त्र की मूल बातें: लोग, फ़र्में और सरकार कैसे चुनते हैं – अर्थशास्त्र वह विज्ञान है जो देखता है कि लोग, फ़र्में और सरकारें सीमित संसाधनों से असीमित इच्छाएँ कैसे पूरी करते हैं। आवश्यकताएँ वस्तुओं और सेवाओं से पूरी होती हैं (मुफ़्त बनाम आर्थिक वस्तुएँ, उपभोक्ता बनाम पूँजीगत वस्तुएँ, निजी बनाम सार्वजनिक वस्तुएँ)। दुर्लभता के कारण हर समाज तय करता है: क्या, कैसे और किसके लिए उत्पादन हो। तीन आर्थिक इकाइयाँ हैं: परिवार (काम, उपभोग, बचत), फ़र्में (उत्पादन और बिक्री; लाभ = आय − लागत) और सरकार (नियम, कर, सार्वजनिक सेवाएँ)। अर्थशास्त्र अवलोकन, मॉडल और सांख्यिकी का उपयोग करता है; यह व्यष्टि (एक परिवार, फ़र्म, बाज़ार) और समष्टि (पूरी अर्थव्यवस्था: GDP, बेरोज़गारी, महँगाई, चक्र) में बँटा है। सामाजिक लक्ष्य: विकास, पूर्ण रोज़गार, स्थिर कीमतें, न्यायपूर्ण बँटवारा और टिकाऊपन।
- बिक्री लेन-देन और व्यापारिक गणना – हर बिक्री कुछ चरणों से गुज़रती है: पूछताछ, भाव-पत्र, ऑर्डर, माल के साथ बिल (चालान), भुगतान और रसीद। भुगतान नकद, बैंक ट्रांसफर, कार्ड या उधार पर हो सकता है। विक्रेता क्रय मूल्य से शुरू करता है, मार्क-अप जोड़कर अंकित मूल्य बनाता है, छूट देकर विक्रय मूल्य पाता है। विक्रय और क्रय मूल्य का अंतर लाभ या हानि है। लाभ % हमेशा क्रय मूल्य पर निकालते हैं।
- व्यावसायिक संगठन: रूप, ढाँचा और नेतृत्व शैली – संगठन लोगों का वह समूह है जो एक लक्ष्य के लिए मिलकर काम करता है। व्यवसाय एकल स्वामी, साझेदारी, कंपनी या सहकारी समिति हो सकता है और क़ानूनी रूप तय करता है कि कर्ज़ का बोझ किस पर पड़ेगा। अंदर का ढाँचा (ऊँचा, सपाट या विभाग-आधारित) बताता है कि कौन किसे रिपोर्ट करता है। प्रबंधक योजना, संगठन, नेतृत्व और नियंत्रण करते हैं और नेता अकेले, टीम के साथ या खुली छूट देकर फ़ैसला ले सकता है।
- अपने इलाके का व्यवसाय – स्थानीय व्यवसाय यानी आपके आस-पास की दुकानें, खेत, कार्यशालाएँ और सेवाएँ। ये रोज़गार देते हैं और पैसे को कस्बे में घुमाते हैं। इन्हें समझने के लिए पहले स्थानीय समस्याएँ पहचानो, फिर चलन (लोग अब कैसे खरीदते-बेचते हैं) देखो, फिर असली ज़रूरत से व्यवसाय का विचार बनाकर उसे सरल हिसाब से जाँचो।
2. Research Project
Investigation, research and experiments · Creating works · Practice at industrial sites · Obtaining vocational qualifications
- चीज़ें बनाना: विचार से प्रोटोटाइप तक – कोई चीज़ बनाने के लिए हम योजना बनाते हैं, सामान चुनते हैं, नापकर निशान लगाते हैं, काटते हैं, जोड़ते हैं, सजाते-चमकाते हैं, जाँचते हैं और फिर सुधारते हैं। पहला चलने वाला नमूना प्रोटोटाइप कहलाता है। हर क़दम में सही औज़ार सुरक्षित तरीक़े से चलता है। जाँच बताती है क्या बदलना है, और अच्छा बनाने वाला यह चक्र तब तक दोहराता है जब तक चीज़ बढ़िया न चले।
3. Comprehensive Business Practice
Practice in marketing · Practice in management · Practice in accounting · Practice in business information · Cross-field comprehensive practice
- मार्केटिंग अभ्यास: एक सच्चा छोटा प्रोजेक्ट करें – मार्केटिंग अभ्यास का मतलब है पूरा मार्केटिंग काम एक बार छोटे स्तर पर करके देखना, केवल शब्द रटना नहीं। इसमें पाँच कदम क्रम से आते हैं। पहला, छोटे सर्वे से जानें कि ग्राहक क्या चाहते हैं। दूसरा, लक्षित समूह चुनें, यानी वे लोग जिनकी आप सबसे ज़्यादा सेवा करना चाहते हैं। तीसरा, 4 P तय करें: उत्पाद, कीमत, स्थान और प्रचार। चौथा, योजना को थोड़े समय के लिए परखें और गिनें कि क्या हुआ। पाँचवाँ, नतीजे को लक्ष्य से मिलाएँ और जो ठीक नहीं चला उसे बदलें। हमारे जूस-स्टॉल प्रोजेक्ट में लक्ष्य 400 का लाभ है। कीमत बढ़ने पर माँग घटती है, और पोस्टर से ज़्यादा खरीदार आ सकते हैं पर उसमें पैसा लगता है। इसलिए अंदाज़ा नहीं, संख्याएँ आज़माकर लाभ देखें। यही पाँच कदम स्कूल मेले, ऑनलाइन दुकान या गाँव के बाज़ार में भी काम आते हैं।
- प्रबंधन अभ्यास: एक छोटी टीम का प्रोजेक्ट चलाएँ – प्रबंधन अभ्यास का मतलब है एक छोटे प्रोजेक्ट को शुरू से अंत तक चलाना। प्रबंधक लोगों, समय और पैसे का उपयोग करके लक्ष्य तक पहुँचता है। काम में चार भूमिकाएँ दोहराई जाती हैं: योजना (क्या और कब तय करना), संगठन (हर व्यक्ति को काम देना), नेतृत्व (टीम को राह दिखाना और हौसला देना) और नियंत्रण (प्रगति जाँचना और समस्या सुधारना)। हमारे स्कूल मेले के प्रोजेक्ट में लक्ष्य है शुक्रवार तक 100 कप जूस परोसना। हम चार काम क्रम से लिखते हैं: योजना, तैयारी, आयोजन और समीक्षा। तैयारी के काम में 6 व्यक्ति-दिन लगते हैं, इसलिए 2 सहायकों के साथ 3 दिन लगते हैं और पूरा प्रोजेक्ट 8 दिन में होता है। गैंट चार्ट हर काम को कैलेंडर पर एक पट्टी की तरह दिखाता है, ताकि सब देख सकें कि कौन क्या और कब करेगा। शुरुआती दिनों के बाद प्रबंधक असली प्रगति जाँचता है। कोई काम पिछड़े तो प्रबंधक कदम उठाता है: सहायक बढ़ाना, क्रम बदलना या छोटा काम हटाना। ज़्यादा सहायक एक सीमा तक ही काम घटाते हैं।
- लेखाकर्म अभ्यास: एक छोटी दुकान की बही रखें – लेखाकर्म अभ्यास का मतलब है एक छोटे व्यवसाय की बही पहले लेन-देन से अंतिम रिपोर्ट तक रखना। सब कुछ लेखांकन समीकरण पर टिका है: संपत्ति = देनदारियाँ + स्वामी की पूँजी। हर लेन-देन दो जगह लिखा जाता है (दोहरी प्रविष्टि), इसलिए समीकरण संतुलित रहता है। कदम ये हैं: हर लेन-देन को जर्नल में दर्ज करो, उन्हें खाताबही के खातों में छाँटो, तलपट से योग जाँचो, फिर दो रिपोर्ट बनाओ। लाभ-हानि विवरण बिक्री में से लागत और खर्च घटाकर लाभ बताता है। चिट्ठा (बैलेंस शीट) बताता है कि व्यवसाय के पास क्या है और उस पर क्या बकाया है। हमारे प्रोजेक्ट में रवि 1000 नकद से दुकान शुरू करता है, 400 का माल खरीदता है, 100 लागत का माल 160 में बेचता है और 50 किराया देता है। उसका लाभ 160 − 100 − 50 = 10 है, पूँजी 1010 और संपत्ति 1010। हर कदम पर तराज़ू बराबर रहता है।
- व्यावसायिक सूचना अभ्यास: आँकड़ों को निर्णय में बदलें – व्यावसायिक सूचना अभ्यास का मतलब है व्यवसाय चलाने में आँकड़ों का उपयोग करना। आँकड़े (डेटा) कच्चे तथ्य और संख्याएँ हैं, जैसे हर दिन बिके कप। सूचना वे आँकड़े हैं जिन्हें क्रम में रखकर और संसाधित करके निर्णय में उपयोगी बनाया गया हो। अभ्यास के पाँच कदम हैं: आँकड़े जुटाओ, तालिका या स्प्रेडशीट में सजाओ, गणना करो (योग, औसत, सबसे बड़ा और सबसे छोटा), चार्ट में दिखाओ, और निर्णय लो। जूस-स्टॉल प्रोजेक्ट में आम सोमवार से शुक्रवार 12, 18, 15, 20 और 25 कप बिकता है। योग 90, औसत 18 और सबसे अच्छा दिन 25। नींबू 10, 9, 11, 8 और 12 बिकता है, औसत 10। चार्ट में आम बढ़ता दिखता है, इसलिए मालिक आम ज़्यादा बनाने का निर्णय लेता है। अच्छी सूचना के लिए सही आँकड़े चाहिए, और ग्राहकों के विवरण जैसे व्यावसायिक डेटा को मज़बूत पासवर्ड और बैकअप से सुरक्षित रखना चाहिए।
- बहु-क्षेत्र अभ्यास: एक पूरा व्यावसायिक प्रोजेक्ट चलाएँ – असली व्यवसाय मार्केटिंग, प्रबंधन, लेखा और सूचना को एक-एक करके नहीं, चारों को एक समस्या पर साथ इस्तेमाल करते हैं। इस प्रोजेक्ट में एक टीम स्कूल मेले में जूस स्टॉल चलाती है। मार्केटिंग कीमत तय करती है और माँग का अनुमान लगाती है: कीमत 25 पर लगभग 90 − 2 × 25 = 40 कप। प्रबंधन तय करता है कितने सहायक लगें: हर सहायक 25 कप बना सकता है, इसलिए 2 सहायक 50 बना सकते हैं, जो काफ़ी है। लेखा पैसे का हिसाब जोड़ता है: आय 40 × 25 = 1000, सामग्री 400, स्टॉल शुल्क 200 और सहायकों का वेतन 100 घटाकर लाभ 300। सूचना फिर अनुमान को असली नतीजे से मिलाती है। अगर सिर्फ़ 36 कप बिके तो लाभ 240 है, और टीम सीखती है कि अगली बार ज़्यादा लोगों से पूछे। बिके कप माँग और क्षमता में से छोटे के बराबर होते हैं। एक क्षेत्र बदलने से बाकी बदलते हैं, इसलिए अच्छे निर्णय चारों को साथ देखते हैं।
4. Business Communication
Business and communication · Business manners · Business thinking and communication · Business and foreign languages
- व्यावसायिक संचार – एक व्यवसाय कई समूहों से बात करता है, जिन्हें हितधारक कहते हैं: अंदर कर्मचारी, और बाहर ग्राहक, निवेशक, बैंक, आपूर्तिकर्ता, समुदाय और सरकार। हर समूह को अलग संदेश, अलग माध्यम से चाहिए। संचार रणनीति तय करती है: लक्ष्य, संदेश, माध्यम, समय और नतीजा कैसे नापें। माध्यम मौखिक, अशाब्दिक, लिखित या डिजिटल हो सकते हैं। निवेशकों और बैंकों को वित्तीय संचार और व्यवसाय योजना दी जाती है। फ़र्म के अंदर अच्छा संचार निर्णय, समय-प्रबंधन और टीमवर्क में मदद करता है, और चालबाज़ी की जगह ईमानदार प्रभाव अपनाता है।
- व्यावसायिक शिष्टाचार: सम्मान से स्वागत, मुलाक़ात और सेवा – व्यावसायिक शिष्टाचार (business manners) काम की जगह के वे अच्छे तौर-तरीक़े हैं जिनसे भरोसा बनता है। मेहमान का मुस्कुराकर स्वागत करो, सही जगह बैठाओ, कार्ड दोनों हाथों से दो, ग्राहक की बात सुनो और समय पर पहुँचो। अच्छा व्यवहार ग्राहक को वापस लाता है।
5. Marketing
Modern markets and marketing · Market research · Product policy · Price policy · Channel policy · Promotion policy
- विपणन प्रबंध – विपणन का मतलब है ख़रीदारों की ज़रूरत पहचानना और मूल्य के बदले, लाभ के साथ, उसे पूरा करना। इसके कई कार्य हैं (अनुसंधान, योजना, ब्रांड, लेबल, पैकेजिंग, कीमत, संवर्धन, वितरण, सेवा) और पाँच विचारधाराएँ (उत्पादन, उत्पाद, विक्रय, विपणन, सामाजिक विपणन)। विपणन मिश्र 4P है: उत्पाद (ब्रांड, लेबल, पैकेजिंग के साथ), कीमत (लागत, माँग, प्रतियोगिता, सरकारी नियम, उद्देश्य और विपणन तरीकों से तय), स्थान (माध्यम और भौतिक वितरण) और संवर्धन (विज्ञापन, व्यक्तिगत विक्रय, विक्रय संवर्धन, जनसंपर्क)।
- बाज़ार अनुसंधान: ग्राहक क्या चाहते हैं, यह पता करना – बाज़ार अनुसंधान का अर्थ है ग्राहकों, प्रतियोगियों और बाज़ार की जानकारी इकट्ठा करके उसका विश्लेषण करना, ताकि व्यवसाय बेहतर निर्णय ले और जोखिम घटे। प्राथमिक (क्षेत्र) अनुसंधान सर्वेक्षण, साक्षात्कार, अवलोकन, फ़ोकस समूह और परीक्षण विपणन से नया डेटा जुटाता है। द्वितीयक (डेस्क) अनुसंधान पहले से मौजूद डेटा, जैसे सरकारी आँकड़े, रिपोर्ट और वेबसाइटें, इस्तेमाल करता है। सबसे नहीं पूछ सकते, इसलिए नमूना चुनते हैं: यादृच्छिक, स्तरित, कोटा या सुविधा। डेटा मात्रात्मक (संख्याएँ) या गुणात्मक (राय और कारण) होता है। नतीजों से बाज़ार विभक्तिकरण, बाज़ार मानचित्र, ख़ाली जगह खोजने और मूल्य प्रस्ताव बनाने में मदद मिलती है। इसकी सीमाएँ भी हैं: पक्षपात, छोटे नमूने और पुराना डेटा।
6. Product Development and Distribution
Modern markets, product development and distribution · Product planning · Business plans · Distribution and promotion
- आधुनिक बाज़ार: उत्पाद कैसे बनते और बँटते हैं – आज के बाज़ार तेज़ी से बदलते हैं: ऑनलाइन ख़रीदारी बढ़ी है और ग्राहक को ज़्यादा विकल्प चाहिए। कंपनी ग्राहक की ज़रूरत को उत्पाद की अवधारणा (concept) में बदलती है, फिर विचार, डिज़ाइन, जाँच, निर्माण और बिक्री के क्रम से गुज़ारती है। वितरण (distribution) माल को ख़रीदार तक पहुँचाता है, और सही रास्ता उत्पाद पर निर्भर करता है।
- उत्पाद योजना: बाज़ार की ज़रूरत से उत्पाद प्रस्ताव तक – उत्पाद योजना (product planning) तय करती है कि कुछ बनाने से पहले क्या बनाना है। कंपनी देखती है कि बाज़ार कैसे बदल रहा है, बाहर और अंदर की हालत जाँचती है, नीति और विषय तय करती है, बाज़ार सर्वेक्षण से विचार परखती है और फिर प्रस्ताव लिखती है, जिससे प्रबंधक तय करते हैं कि आगे बढ़ना है या नहीं।
- बिज़नेस प्लान: उत्पाद के विचार से कीमत और योजना तक – नया उत्पाद बेचने से पहले चार काम करने होते हैं। पहला, विनिर्देश (स्पेसिफ़िकेशन) लिखो: आकार, सामग्री, सुरक्षा और जाँच का तरीका। दूसरा, डिज़ाइन बनाओ: चित्र, नमूना (प्रोटोटाइप), उपयोगकर्ताओं से राय, सुधार। तीसरा, विचार को बौद्धिक संपदा से बचाओ: नए तरीके के लिए पेटेंट, रूप के लिए डिज़ाइन पंजीकरण, नाम-निशान के लिए ट्रेडमार्क, चित्र और लेख के लिए कॉपीराइट। चौथा, कीमत तय करो। सीधी कीमत है लागत + मुनाफ़ा, पर प्रतियोगियों की कीमत और ग्राहक की देने की इच्छा भी देखनी होती है। ये सब एक लिखित बिज़नेस प्लान में आता है। आज उत्पाद बनाने वाले पर्यावरण (कम कचरा), 3D प्रिंटिंग और ऑनलाइन राय से तेज़ जाँच, और बदलती पसंद का भी ध्यान रखते हैं।
- वितरण माध्यम: सामान आप तक कैसे पहुँचता है – वितरण माध्यम वह रास्ता है जिससे सामान उत्पादक से उपभोक्ता तक जाता है। प्रत्यक्ष माध्यम में कोई मध्यस्थ नहीं; अप्रत्यक्ष में थोक और खुदरा विक्रेता सेवाएँ और अपना लाभ जोड़ते हैं। इंटरनेट से कंपनियाँ मध्यस्थ हटा सकती हैं, पर नए मध्यस्थ भी आते हैं। कंपनियाँ सघन, चयनात्मक या अनन्य पहुँच चुनती हैं, और क्योंकि ग्राहक ऑनलाइन और दुकान के बीच घूमते हैं, सब माध्यम ओमनीचैनल में जोड़े जाते हैं।
7. Tourism Business
Tourism and business · Tourism resources and policy · Tourism business and marketing · Development and effects of tourism business
- आतिथ्य और पर्यटन: मेहमानों का स्वागत, भोजन और देखभाल – पर्यटन यानी लोगों का घर से दूर घूमने, काम, पढ़ाई या परिवार के लिए यात्रा करना। आतिथ्य वह स्वागत और देखभाल है जो उन्हें मिलती है: ठहरने की जगह, खाना-पीना और सेवाएँ। उद्योग के पाँच मुख्य क्षेत्र हैं: आवास, खान-पान, परिवहन, आकर्षण, और आयोजन व यात्रा सेवाएँ। कर्मचारियों को पाक ज्ञान (पोषण, खाद्य सुरक्षा, रसोई उपकरण और बनावट) और आयोजन की योजना, संचालन, प्रबंधन और समीक्षा का कौशल चाहिए।
- पर्यटन भूगोल: संसाधन, प्रकार, प्रभाव और नियोजन – पर्यटन का अर्थ है घर से दूर कम से कम एक रात के लिए घूमने, व्यापार, इलाज या रिश्तेदारों से मिलने जाना। पर्यटन भूगोल पूछता है कि लोग कहाँ जाते हैं, क्यों, और पर्यटन जगहों पर क्या असर डालता है। जगहें प्राकृतिक संसाधनों (पर्वत, तट, वन्यजीव) और सांस्कृतिक संसाधनों (धरोहर, उत्सव, भोजन) से लोगों को खींचती हैं। लोग घर से धकेले और गंतव्य की ओर खींचे जाते हैं। पर्यटन घरेलू या अंतरराष्ट्रीय होता है, और इसके कई प्रकार हैं: इको, साहसिक, सांस्कृतिक, चिकित्सा और समुद्री। रिसॉर्ट अक्सर खोज से ठहराव और फिर पतन या पुनर्जीवन तक एक जीवन-चक्र से गुज़रते हैं। पर्यटन रोज़गार और पैसा लाता है, पर वहन क्षमता से ज़्यादा पर्यटक प्रकृति और संस्कृति को नुक़सान पहुँचाते हैं, इसलिए अच्छा नियोजन टिकाऊ पर्यटन चाहता है।
- पर्यटन व्यवसाय और मार्केटिंग – पर्यटन व्यवसाय टीम का काम है। होटल, यातायात कंपनियाँ, गाइड, दर्शनीय स्थल, यात्रा एजेंसियाँ और स्थानीय समुदाय, सब एक ही यात्री की सेवा करते हैं। पर्यटन की मार्केटिंग इसलिए खास है कि उत्पाद एक सेवा है: खरीदने से पहले छू नहीं सकते, जमा करके रख नहीं सकते (खाली सीट या कमरा हमेशा के लिए खोई कमाई है), मौसम के साथ बदलती है, और कई साझेदारों पर निर्भर है। अच्छी मार्केटिंग ग्राहक को समझने से शुरू होती है: परिवार, अकेले यात्री, बुज़ुर्ग और काम से आने वालों की ज़रूरतें अलग हैं, और हर कोई सपना, योजना, बुकिंग, सफ़र और साझा करने की यात्रा से गुज़रता है। ग्राहक सेवा उस अंतर को भरती है जो मेहमान की उम्मीद और असली अनुभव के बीच होता है। अनुभव उम्मीद से ऊपर हो तो मेहमान खुश होकर दोबारा आता है।
- टिकाऊ पर्यटन – टिकाऊ (सतत) पर्यटन वह यात्रा है जो पर्यटकों, स्थानीय लोगों और प्रकृति, तीनों के लिए आज भी अच्छी हो और कल भी। पर्यटन रोज़गार और पैसा लाता है, पर बहुत ज़्यादा पर्यटक भीड़, प्रदूषण और संस्कृति का नुक़सान लाते हैं (अति-पर्यटन)। संरक्षित क्षेत्र, पर्यटक सीमा, शुल्क और नियम जगहों को बचाते हैं; पैसा स्थानीय रहे और पर्यटक ज़िम्मेदारी से यात्रा करें।
8. Business Management
Business and management · Organisational management · Managing business resources · Corporate order and responsibility · Creating and developing a business
- प्रबंध की प्रकृति एवं महत्व – प्रबंध का मतलब है लोगों के साथ और उनके ज़रिए काम करवाना, ताकि लक्ष्य समय पर (प्रभावपूर्णता) और कम लागत में (कुशलता) पूरे हों। इसके संगठनात्मक, सामाजिक और व्यक्तिगत उद्देश्य होते हैं। यह कुछ हद तक विज्ञान, पूरी तरह कला और अभी पूरा पेशा नहीं है। यह तीन स्तरों पर पाँच कार्यों से चलता है, और समन्वय सबको जोड़ता है।
- संगठन: प्रक्रिया, ढाँचे, भारार्पण और विकेंद्रीकरण – संगठन का मतलब है काम, लोगों और साधनों को ऐसे जमाना कि योजना पूरी हो सके। इसके 4 चरण हैं: काम बाँटना, विभाग बनाना, कर्तव्य सौंपना और रिपोर्टिंग संबंध तय करना। इससे संगठन ढाँचा बनता है: कार्यात्मक (काम के प्रकार से) या प्रभागीय (उत्पाद से)। औपचारिक ढाँचे के साथ दोस्ती से अनौपचारिक ढाँचा भी बनता है। भारार्पण में अधिकार अधीनस्थ को दिया जाता है; विकेंद्रीकरण में निर्णय की शक्ति सभी स्तरों तक फैलती है।
- व्यावसायिक संसाधनों का प्रबंधन – व्यवसाय चार तरह के संसाधन इस्तेमाल करता है: लोग (मानव), वस्तुएँ (भौतिक), पैसा (वित्तीय) और जानकारी (सूचना)। अच्छा प्रबंधन हर संसाधन को सही मात्रा में, सही समय पर लगाता है और चारों में संतुलन रखता है, क्योंकि काम उतना ही होता है जितना सबसे कमज़ोर संसाधन होने देता है।
- व्यवसाय का सामाजिक उत्तरदायित्व – सामाजिक उत्तरदायित्व का अर्थ है कि व्यवसाय ऐसे फ़ैसले ले जो सिर्फ़ उसके लाभ के लिए नहीं, समाज के लिए भी अच्छे हों, और कानून से आगे जाएँ। इसके पक्ष में मज़बूत तर्क हैं, जैसे दीर्घकालीन स्वहित और अच्छी छवि। व्यवसाय के दायित्व स्वामियों, निवेशकों, उपभोक्ताओं, कर्मचारियों, सरकार और समुदाय के प्रति हैं, और उसे प्रदूषण से पर्यावरण की रक्षा करनी चाहिए।
- उद्यमिता विकास – उद्यमिता का अर्थ है ज़रूरत पहचानकर, संसाधन जोड़कर और जोखिम उठाकर नया व्यवसाय शुरू करना। भारत को रोज़गार, नए विचारों और संतुलित विकास के लिए उद्यमी चाहिए। प्रक्रिया खुद को जानने से शुरू होकर व्यवसाय शुरू करने और बढ़ाने तक जाती है। स्टार्टअप इंडिया (2016) नई फ़र्मों की मदद करता है; पैसा बचत, एंजेल, वेंचर कैपिटल, बैंक और क्राउडफ़ंडिंग से आता है; और बौद्धिक संपदा अधिकार नए विचारों, ब्रांड और रचनाओं की रक्षा करते हैं।
9. Global Economy
Economic globalisation and Japan · Markets and the economy · Globalisation trends and issues · Globalisation of corporate activities
- आर्थिक वैश्वीकरण और जापान – अंतरराष्ट्रीयकरण अलग-अलग देशों की अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार है। वैश्वीकरण इससे आगे है: उत्पादन, पैसा, लोग और विचार कई देशों में एक जुड़े जाल की तरह बहते हैं। जापान अमीर और व्यापार पर निर्भर अर्थव्यवस्था है: वह ज़्यादातर ऊर्जा और काफ़ी खाना आयात करता है, कारें, मशीनें और पुर्ज़े निर्यात करता है, और बूढ़ी होती आबादी व विनिमय दर के झूलों से जूझता है।
- बाज़ार और अर्थव्यवस्था – बाज़ार में ख़रीदार और विक्रेता उस दाम पर मिलते हैं जहाँ माँग और आपूर्ति बराबर हो। जब कुछ लागतें दाम में नहीं जुड़तीं तो बाज़ार विफल हो सकता है। लंबे समय में अर्थव्यवस्था बढ़ती है, पर छोटे समय में उत्पादन व्यापार चक्र में ऊपर-नीचे होता है। सरकार और केंद्रीय बैंक आर्थिक नीति से इस झूले को कम करते हैं।
- वैश्वीकरण और वैश्विक शासन – वैश्वीकरण यानी सामान, पूँजी, सूचना और श्रम के प्रवाह का बढ़ना, जो जगहों को आपस में जोड़ता है। तकनीक, परिवहन और व्यापार समझौते इसे चलाते हैं। प्रवाह असमान हैं: अमीर देशों के पास ज़्यादा ताक़त है, ग़रीब देशों की बाज़ार तक पहुँच कमज़ोर है। TNC एक ही चीज़ को कई जगह बनवाती हैं। UN, WTO, IMF और विश्व बैंक जैसी संस्थाएँ इन प्रवाहों को संभालने की कोशिश करती हैं, और संधियाँ अंटार्कटिका जैसे साझा क्षेत्रों को बचाती हैं। वैश्वीकरण विकास और सस्ता सामान लाता है, पर असमानता, टकराव और पर्यावरण का नुक़सान भी।
- अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय – अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय वह हर व्यावसायिक काम है जो देश की सीमा पार करता है: वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार, लाइसेंसिंग, फ़्रैंचाइज़िंग, संयुक्त उद्यम और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI)। कंपनियाँ नए ग्राहक, सस्ता कच्चा माल और विकास पाने विदेश जाती हैं, पर जोखिम भी झेलती हैं: विनिमय दर में बदलाव, व्यापार बाधाएँ (टैरिफ़, कोटा, प्रतिबंध), सीमा-शुल्क के नियम, राजनीतिक-आर्थिक जोखिम और संस्कृति का फ़र्क़, जिसकी वजह से उत्पाद और बातचीत बदलनी पड़ सकती है। व्यापार समझौते और संगठन बाधाएँ घटाते हैं और देशों को एक-दूसरे पर निर्भर बनाते हैं; तकनीक और ई-कॉमर्स से छोटी कंपनियाँ भी दुनिया भर में बेच पाती हैं।
10. Business Law
Overview of law · Corporate activities and law · Intellectual property and law · Tax and law · Corporate responsibility and law
- कानून क्या है? बुनियादी बातें – कानून सामान्य, बाध्यकारी नियमों का समूह है जिसे राज्य बनाता या मान्यता देता है और अदालतें लागू करती हैं। यह नैतिकता से मिलता है पर वही नहीं है। इसके स्रोत हैं संविधान, संधियाँ, अधिनियम, नियम, न्यायिक निर्णय और रीति-रिवाज, जो एक क्रम में सजे हैं। प्राकृतिक व्यक्ति और विधिक व्यक्ति (जैसे कंपनी) अधिकार और कर्तव्य रखते हैं। रोज़मर्रा के कानून में अनुबंध, उपभोक्ता संरक्षण और अदालत तक पहुँच आते हैं।
- कंपनी और कानून: शेयर, अनुबंध और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा – संयुक्त स्टॉक कंपनी एक क़ानूनी व्यक्ति है जिसके मालिक शेयरधारक होते हैं। शेयरधारक बोर्ड चुनते हैं और बोर्ड प्रबंधक नियुक्त करता है। कंपनी अनुबंध करती है, मालिकों (शेयर) या ऋणदाताओं (ऋण) से पैसा जुटाती है, विलय, बचाव या बंदी से गुज़र सकती है, और प्रतिस्पर्धा कानून मानती है ताकि बाज़ार निष्पक्ष रहे।
- डेटा सुरक्षा और बौद्धिक संपदा अधिकार – बौद्धिक संपदा (IP) मन की रचना है, जैसे कहानी, गीत, प्रोग्राम, आविष्कार या लोगो। बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) निर्माता को उसके उपयोग पर नियंत्रण देते हैं। कॉपीराइट रचनात्मक कार्य (लेख, संगीत, कला, सॉफ़्टवेयर कोड) को बनते ही अपने-आप बचाता है; पेटेंट नए, उपयोगी आविष्कार को लगभग 20 साल बचाता है और इसके लिए आवेदन करना पड़ता है; ट्रेडमार्क ब्रांड नाम, लोगो और नारे बचाता है। साहित्यिक चोरी दूसरे का काम बिना श्रेय अपना बताना है। उल्लंघन सुरक्षित IP को बिना अनुमति इस्तेमाल करना है। सार्वजनिक लाइसेंस से निर्माता अपनी शर्तों पर साझा करते हैं: रचनात्मक कार्यों के लिए क्रिएटिव कॉमन्स (BY, SA, NC, ND), और सॉफ़्टवेयर के लिए GPL (कॉपीलेफ़्ट: बदला संस्करण खुला रहे) और Apache (उदार: नोटिस रखकर बंद उत्पाद में भी)।
- कर और कानून: कंपनी क्या चुकाती है और कैसे – कंपनी अपने मुनाफ़े (बिक्री घटा ख़र्च) पर कॉर्पोरेट कर देती है और हर बिक्री पर ख़रीदारों से उपभोग कर (VAT या GST) वसूलती है। वह सरकार को वसूला हुआ उपभोग कर घटा ख़रीद पर पहले दिया हुआ कर चुकाती है। दोनों कर विवरण में दिखाकर तय तारीख़ तक चुकाए जाते हैं; देरी या झूठे विवरण पर जुर्माना लगता है।
- कॉर्पोरेट ज़िम्मेदारी और कानून – कंपनी को कानून मानना और अपने कामों को समझाने के लिए तैयार रहना होता है (अनुपालन और जवाबदेही)। कानून कामगारों (अनुबंध, न्यूनतम मज़दूरी, काम के घंटे, सुरक्षा), उपभोक्ताओं (सुरक्षित सामान, सच्चे लेबल, निष्पक्ष अनुबंध, लौटाने या शिकायत का अधिकार) और सूचना (निजी डेटा, व्यापारिक राज़, कॉपीराइट) की रक्षा करता है। विवाद साफ़ अनुबंध और नियमों से रोके जाते हैं; हो जाएँ तो पहले बातचीत, फिर मध्यस्थता या पंचाट, और अंत में अदालत।
11. Bookkeeping
Principles of bookkeeping · Recording transactions · Year-end closing · Head office and branch accounting · Efficient bookkeeping
- प्रमाणक, लेखांकन समीकरण और नामे-जमा के नियम – हर लेन-देन स्रोत प्रलेख (बिल, रसीद, कैश मेमो) से शुरू होता है। उससे प्रमाणक बनता है जो बताता है कौन-सा खाता नामे और कौन-सा जमा होगा। हर लेन-देन कम से कम दो खातों को छूता है, इसलिए संपत्तियाँ = देयताएँ + पूँजी हमेशा बना रहता है। संपत्ति और व्यय नामे पक्ष में बढ़ते हैं; देयता, पूँजी और आगम जमा पक्ष में।
- रोज़नामचा और विशेष प्रयोजन बहियाँ – रोज़नामचा प्रारंभिक प्रविष्टि की पुस्तक है: हर लेन-देन तिथि क्रम में नामे खाता, जमा खाता और विवरण के साथ लिखा जाता है। बड़े व्यवसाय इसे विशेष बहियों में बाँटते हैं — रोकड़ बही, लघु रोकड़ बही, क्रय, विक्रय और वापसी बहियाँ — और बाकी सबके लिए रोज़नामचा (मुख्य) रखते हैं।
- एकल स्वामित्व के वित्तीय विवरण – साल के अंत में तलपट से दो विवरण बनते हैं। व्यापार और लाभ-हानि खाता आयगत मदों से सकल लाभ, परिचालन लाभ और शुद्ध लाभ निकालता है। तुलन पत्र पूँजीगत मदों से अंतिम दिन की संपत्ति, देयता और पूँजी को समूहों में और क्रम से दिखाता है। इसके अंतिम शेष प्रारंभिक प्रविष्टि से अगले साल की पुस्तकें खोलते हैं।
- मुख्यालय और शाखा लेखांकन – शाखाओं वाला व्यवसाय मुख्यालय और हर शाखा में अलग बहियाँ रखता है। मुख्यालय शाखा को जो भी देता है, वह मुख्यालय की बही में शाखा खाते में नाम और शाखा की बही में मुख्यालय खाते में जमा होता है। एक शाखा से दूसरी शाखा का लेन-देन मुख्यालय के ज़रिए होता है। रास्ते में माल जैसे अंतर मिलाए जाते हैं। वर्ष के अंत में सब विवरण जोड़े जाते हैं और दोनों आईना-खाते कट जाते हैं।
- कुशल बहीखाता: वाउचर और अकाउंटिंग सॉफ़्टवेयर – हर लेन-देन को एक बड़ी बही में लिखना धीमा है। वाउचर प्रणाली में हर लेन-देन की एक पर्ची बनती है: पैसा आने की प्राप्ति पर्ची, पैसा जाने की भुगतान पर्ची और नकद न हिलने पर हस्तांतरण पर्ची। पर्चियाँ कई लोग लिख सकते हैं, जाँच और छाँट सकते हैं और दैनिक कुल के रूप में चढ़ा सकते हैं। अकाउंटिंग सॉफ़्टवेयर आगे जाता है: एक प्रविष्टि से खाताबही, तलपट और विवरण अपने आप बन जाते हैं।
12. Financial Accounting I
Overview of financial accounting · Accounting procedures · Preparing financial statements · Basics of financial analysis
- लेखांकन का परिचय – लेखांकन व्यवसाय की भाषा है। यह पैसों से जुड़ी घटनाओं को पहचानता है, लिखता है, वर्गों में बाँटता है, सारांश बनाता है और फिर नतीजा उन लोगों तक पहुँचाता है जिन्हें चाहिए — स्वामी, प्रबंधक, बैंक, निवेशक और सरकार।
- लेखांकन प्रक्रियाएँ – तुला-पत्र (बैलेंस शीट) हमेशा बराबर रहता है: संपत्ति = देनदारी + शुद्ध संपत्ति। आय शुद्ध संपत्ति बढ़ाती है, खर्च घटाता है, और अंतर लाभ है। स्थायी संपत्ति मूल्यह्रास से घिसती है, प्रतिभूतियाँ बाज़ार मूल्य पर आँकी जाती हैं, ऋण चालू और दीर्घकालीन में बँटते हैं, और कर-प्रभाव लेखा कर-खर्च को लेखा लाभ से मिलाता है।
- एकल स्वामित्व के वित्तीय विवरण – साल के अंत में तलपट से दो विवरण बनते हैं। व्यापार और लाभ-हानि खाता आयगत मदों से सकल लाभ, परिचालन लाभ और शुद्ध लाभ निकालता है। तुलन पत्र पूँजीगत मदों से अंतिम दिन की संपत्ति, देयता और पूँजी को समूहों में और क्रम से दिखाता है। इसके अंतिम शेष प्रारंभिक प्रविष्टि से अगले साल की पुस्तकें खोलते हैं।
- वित्तीय विवरण विश्लेषण के उपकरण – विश्लेषण यानी वित्तीय विवरणों को पढ़कर कंपनी के लाभ, सुरक्षा और वृद्धि का आकलन। मुख्य उपकरण: तुलनात्मक विवरण (दो वर्ष साथ-साथ: रुपये और % में बदलाव) और सामान्य आकार विवरण (हर मद एक आधार का %)। सीमाएँ: पुराने आँकड़े, ग़ैर-मौद्रिक तथ्य छूटना, लेखा नीतियों पर निर्भरता।
13. Financial Accounting II
Basic concepts and standards of financial accounting · Accounting procedures · Cash-flow statements · Group (consolidated) accounting · Financial statement analysis · Auditing and professional accountants
- लेखांकन के आधार, लेखांकन मानक और GST – व्यवसाय मदों को तब लिख सकता है जब नकद आए-जाए (नकद आधार) या जब वे कमाई/ख़र्च हों (उपार्जन आधार)। लेखांकन मानक (AS) और Ind AS लिखित नियम हैं जो खातों को एकसमान बनाते हैं; Ind AS विश्व मानकों से मिलते हैं और सूचीबद्ध व बड़ी कंपनियों पर लागू हैं। GST माल और सेवाओं की आपूर्ति पर एक कर है, जिसमें पहले दिए कर का क्रेडिट मिलता है।
- लेखांकन प्रक्रियाएँ – तुला-पत्र (बैलेंस शीट) हमेशा बराबर रहता है: संपत्ति = देनदारी + शुद्ध संपत्ति। आय शुद्ध संपत्ति बढ़ाती है, खर्च घटाता है, और अंतर लाभ है। स्थायी संपत्ति मूल्यह्रास से घिसती है, प्रतिभूतियाँ बाज़ार मूल्य पर आँकी जाती हैं, ऋण चालू और दीर्घकालीन में बँटते हैं, और कर-प्रभाव लेखा कर-खर्च को लेखा लाभ से मिलाता है।
- रोकड़ प्रवाह विवरण (AS 3): रोकड़ कहाँ से आई, कहाँ गई? – रोकड़ प्रवाह विवरण बताता है कि साल भर में कंपनी में रोकड़ कहाँ से आई और कहाँ गई। हर रोकड़ लेन-देन तीन समूहों में से एक में जाता है: परिचालन, निवेश या वित्तीय। अप्रत्यक्ष विधि में हम कर से पहले के लाभ से शुरू करते हैं, बिना रोकड़ वाले ख़र्च वापस जोड़ते हैं, चालू संपत्ति-देयता के बदलाव समायोजित करते हैं और चुकाया गया कर घटाते हैं।
- समूह (समेकित) लेखांकन – कंपनियाँ अलग-अलग तरह से जुड़ती हैं: विलय में दो एक बन जाती हैं; अधिग्रहण में मूल कंपनी सहायक कंपनी पर नियंत्रण पाती है और दोनों अलग कंपनियाँ रहती हैं। विलय के बाद एक विवरण बनता है और शुद्ध संपत्ति से ऊपर दिया दाम ख्याति है। समूह के लिए समेकित विवरण मूल और सहायक को जोड़ता है, निवेश को सहायक की पूँजी से हटाता है, आपसी बिक्री और अवास्तविक लाभ हटाता है और बाहरी मालिकों को गैर-नियंत्रक हित के रूप में दिखाता है। अवास्तविक लाभ हटाने से आस्थगित कर संपत्ति बनती है।
- वित्तीय विवरण विश्लेषण के उपकरण – विश्लेषण यानी वित्तीय विवरणों को पढ़कर कंपनी के लाभ, सुरक्षा और वृद्धि का आकलन। मुख्य उपकरण: तुलनात्मक विवरण (दो वर्ष साथ-साथ: रुपये और % में बदलाव) और सामान्य आकार विवरण (हर मद एक आधार का %)। सीमाएँ: पुराने आँकड़े, ग़ैर-मौद्रिक तथ्य छूटना, लेखा नीतियों पर निर्भरता।
- अंकेक्षण और पेशेवर लेखाकार – मालिक प्रबंधकों को पैसा देते हैं, इसलिए प्रबंधक जवाबदेह हैं: उन्हें वित्तीय विवरणों से बताना होता है कि पैसा कैसे लगा। चूँकि विवरण प्रबंधक अपने बारे में लिखते हैं, स्वतंत्र अंकेक्षक सबूतों से उन्हें जाँचकर राय देता है: बेदाग़, शर्तयुक्त, प्रतिकूल या राय से इनकार। प्रमाणित सार्वजनिक लेखाकार और कर लेखाकार जैसे पेशेवर लेखाकार अंकेक्षण, कर विवरणी और सलाह देते हैं, और उन्हें ईमानदार, स्वतंत्र, सावधान और गोपनीय रहना होता है।
14. Cost Accounting
Costs and cost accounting · Costing by cost element · Departmental and product costing · Internal accounting · Standard costing · Direct costing
- लागत और लागत लेखांकन: अवधारणा, विशेषताएँ और ढाँचा – लागत उन चीज़ों का मूल्य है जो कोई सामान बनाने और बेचने में खर्च होती हैं: माल, मज़दूरी और दूसरे खर्च। लागत लेखांकन इन्हें दर्ज करके छाँटता है, ताकि हर सामान की असली लागत पता चले। इसमें तीन चरण हैं: तत्व के अनुसार, फिर विभाग के अनुसार, फिर उत्पाद के अनुसार। लागत परत-दर-परत बनती है: मूल लागत, निर्माण लागत, कुल लागत, और फिर लाभ जोड़कर बिक्री मूल्य।
- लागत तत्व के अनुसार गणना: माल, श्रम और खर्च – लागत गणना का पहला चरण यह निकालना है कि फ़ैक्टरी ने कितना माल, श्रम और खर्च लगाया। लगे हुए माल का दाम FIFO या औसत लागत जैसे नियम से तय होता है। श्रम का भुगतान समय दर या इकाई दर से होता है, और वह प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हो सकता है। खर्च तीन तरह के हैं: अवधि के लिए चुकाए (किराया), उपयोग से नापे (बिजली मीटर) और सालों में बाँटे (मूल्यह्रास)। नतीजा दो हिस्सों में बँटता है: काम से सीधे जुड़ी प्रत्यक्ष लागत और उपरिव्यय में जाने वाली अप्रत्यक्ष लागत।
- विभागीय और उत्पाद लागत: जॉब-ऑर्डर और प्रोसेस कॉस्टिंग – लागत गणना का दूसरा और तीसरा चरण: कारखाना उपरिव्यय को विभागों में बाँटना, फिर हर उत्पाद की लागत निकालना। जॉब-ऑर्डर कॉस्टिंग में हर ग्राहक के ऑर्डर की अपनी लागत होती है: प्रत्यक्ष माल + प्रत्यक्ष श्रम + दर से उपरिव्यय। विभागीय कॉस्टिंग में हर विभाग की अलग दर होती है, जो ज़्यादा न्यायपूर्ण है। प्रोसेस कॉस्टिंग उन चीज़ों के लिए है जो दिनभर एक ही तरह बनती हैं: विभाग की कुल लागत ÷ समतुल्य इकाइयाँ = प्रति इकाई लागत।
- आंतरिक लेखांकन: माल तैयार होना, फ़ैक्टरी लेजर और खाते बंद करना – फ़ैक्टरी में लागत पहले 'अधूरा काम' (Work in process) में जमा होती है। माल तैयार होने पर उसकी लागत 'तैयार माल' में जाती है। बिकने पर लागत 'बेचे गए माल की लागत' में जाती है और बिक्री दर्ज होती है। कुछ कंपनियाँ अलग फ़ैक्टरी लेजर रखती हैं, जो प्रधान कार्यालय के लेजर से दर्पण-खातों (mirror accounts) से जुड़ा रहता है। साल के अंत में निर्माता निर्माण खाता (निर्मित माल की लागत) और फिर आय विवरण बनाकर लाभ निकालता है।
- मानक लागत: उद्देश्य, प्रक्रिया और लागत अंतर विश्लेषण – मानक लागत में पहले तय करते हैं कि सामान की लागत कितनी होनी चाहिए (मानक), फिर असली लागत दर्ज करते हैं और दोनों के फ़र्क (अंतर या variance) की पड़ताल करते हैं। असली लागत मानक से कम हो तो अंतर अनुकूल (favourable) है और ज़्यादा हो तो प्रतिकूल (unfavourable)। कारण के अनुसार बाँटने से पता चलता है कि पैसा कहाँ गया: माल का मूल्य और उपयोग, श्रम की दर और कुशलता। प्रबंधक इससे समस्या जल्दी पकड़ते हैं, लागत पर नियंत्रण रखते हैं और बेहतर योजना बनाते हैं।
- प्रत्यक्ष लागत विधि (Direct Costing) – प्रत्यक्ष लागत विधि में उत्पाद की लागत में केवल परिवर्ती लागत गिनी जाती है। स्थिर लागत उसी अवधि के खर्च में पूरी चढ़ती है। लाभ = बिक्री - परिवर्ती लागत - स्थिर लागत। अवशोषण लागत में स्थिर लागत हर बनी इकाई पर बँटती है, इसलिए बिना बिके माल के साथ कुछ स्थिर लागत आगे चली जाती है। स्टॉक बढ़े तो अवशोषण लाभ ज़्यादा दिखता है।
15. Management Accounting
Management accounting and business administration · Short-term profit planning · Performance measurement · Budgeting and budgetary control · Cost management · Business decision making
- प्रबंधकीय लेखा और व्यवसाय प्रशासन – प्रबंधकीय लेखा फर्म के अंदर के प्रबंधकों को योजना, नियंत्रण और निर्णय के लिए आँकड़े देता है। लागत लेखा उत्पादों और सेवाओं की लागत निकालता है और मुख्य आँकड़ा-स्रोत है। वित्तीय लेखा तय नियमों से बीते नतीजे बाहर वालों को देता है। प्रबंधकीय लेखा आगे देखता है, उसका कोई तय रूप नहीं है, और वह लागत आँकड़ों व अनुमानों का उपयोग करता है।
- सम-विच्छेद विश्लेषण (Break-Even Analysis) – जब कुल आय कुल लागत के बराबर हो, यानी लाभ शून्य, तो व्यवसाय सम-विच्छेद पर है। हर बिकी इकाई अंशदान देती है = कीमत − प्रति इकाई परिवर्ती लागत, जो पहले स्थिर लागत चुकाता है। सम-विच्छेद मात्रा = स्थिर लागत ÷ प्रति इकाई अंशदान। इससे ज़्यादा बिक्री पर लाभ, कम पर हानि। सुरक्षा सीमा = असली बिक्री − सम-विच्छेद बिक्री। लक्ष्य लाभ के लिए (स्थिर लागत + लक्ष्य लाभ) ÷ अंशदान इकाइयाँ बेचनी होंगी।
- कार्य-निष्पादन मापन (Performance Measurement) – बड़ी फर्म इकाइयों में बँटी होती है और हर प्रमुख को उसी पर परखा जाता है जो उसके नियंत्रण में है। लागत केंद्र को बजट के सामने लागत से, लाभ केंद्र को लाभ से, और निवेश केंद्र को लगे धन के मुक़ाबले लाभ से परखते हैं: ROI = लाभ ÷ निवेश × 100। अवशिष्ट आय = लाभ - प्रयुक्त पूँजी का शुल्क। संतुलित स्कोरकार्ड ग्राहक, प्रक्रिया और सीखने जैसे गैर-मौद्रिक पहलू जोड़ता है।
- बजट और बजटीय नियंत्रण – बजट एक तय अवधि की अंकों में योजना है। फर्म पहले बिक्री बजट बनाती है, फिर उत्पादन, लागत और रोकड़ बजट, और सबको जोड़कर मास्टर बजट बनता है। बजटीय नियंत्रण में वास्तविक नतीजों की बजट से तुलना होती है, अंतर (अनुकूल या प्रतिकूल) निकलते हैं, कारण पूछा जाता है और कदम उठाया जाता है। लोचशील बजट गतिविधि के साथ बदलता है; शून्य-आधारित बजट हर बार शून्य से शुरू होता है।
- लागत प्रबंधन – लागत प्रबंधन का मतलब है लागत की योजना बनाना और उसे काबू में रखना। मानक लागत से हम तय करते हैं कि एक चीज़ की लागत कितनी होनी चाहिए और असली लागत से तुलना करके विचरण निकालते हैं। लक्ष्य लागत = कीमत - चाहा गया मुनाफ़ा। गतिविधि आधारित लागत में ओवरहेड उसी गतिविधि के हिसाब से बँटता है जिसने उसे पैदा किया। गुणवत्ता लागत में रोकथाम, जाँच और विफलता की लागत जुड़ती है।
- व्यावसायिक निर्णय (Business Decision Making) – प्रबंधक छोटे अल्पकालीन (कार्यगत) फ़ैसले लेते हैं, जैसे बनाओ या खरीदो और विशेष ऑर्डर, और बड़े दीर्घकालीन (संरचनात्मक) फ़ैसले, जैसे मशीन खरीदना। हर फ़ैसले में सिर्फ़ प्रासंगिक लागत गिनो: भविष्य की वह लागत जो विकल्पों में अलग-अलग हो। डूबी लागत और सबमें बराबर लागत छोड़ दो। संरचनात्मक फ़ैसलों को पेबैक और वर्तमान मूल्य से जाँचते हैं।
16. Information Processing
Corporate activities and information processing · Computer systems and networks · Tallying and analysing information · Writing business documents · Presentation
- कंपनी की गतिविधियाँ और सूचना प्रसंस्करण – आँकड़े (डेटा) कच्चे तथ्य हैं। सूचना प्रसंस्करण में आँकड़े जमा करते हैं, छाँटते और गिनते हैं और साफ़ दिखाते हैं ताकि लोग फ़ैसला ले सकें। कंपनियाँ इसे बिक्री, खरीद, वेतन और योजना में इस्तेमाल करती हैं। अच्छा संचार साफ़ सूचना डिज़ाइन माँगता है: एक संदेश, सादा चार्ट, ईमानदार लेबल। सूचना नैतिकता का मतलब है जानकारी संभालते समय गोपनीयता, सच, स्वामित्व और अनुमति का सम्मान।
- कंप्यूटर सिस्टम और नेटवर्क – कंप्यूटर सिस्टम में हार्डवेयर (इनपुट, CPU, मेमोरी, स्टोरेज, आउटपुट) और सॉफ़्टवेयर (सिस्टम और एप्लिकेशन प्रोग्राम) होते हैं। नेटवर्क केबल या वाई-फ़ाई से उपकरणों को जोड़ता है ताकि वे डेटा बाँट सकें। डेटा छोटे पैकेटों में स्विच और राउटर से होकर क्लाइंट और सर्वर के बीच जाता है। नेटवर्क से हम फ़ाइलें, मेल और ऑनलाइन सेवाएँ बाँटते हैं। सुरक्षा (पासवर्ड, फ़ायरवॉल, अपडेट, बैकअप) और क़ानून लोगों और व्यवसायों को दुरुपयोग से बचाते हैं।
- जानकारी की गिनती और विश्लेषण – व्यवसाय सांख्यिकी से बहुत सारे उत्तरों को कुछ साफ़ तथ्यों में बदलते हैं। टैली मार्क उत्तर गिनते हैं; बारंबारता तालिका गिनती लिखती है; बार ग्राफ़ उन्हें पट्टियों में दिखाता है। माध्य (औसत), माध्यिका (बीच का मान) और बहुलक (सबसे आम मान) आँकड़ों का सार देते हैं और प्रतिशत हिस्सा और बदलाव दिखाते हैं। औसत से तुलना करके समस्या पहचानो, कारण पूछो, उपाय आज़माओ और फिर जाँचो।
- प्रेज़ेंटेशन स्किल्स: श्रोताओं के सामने बोलना – अच्छा प्रेज़ेंटेशन श्रोता और उद्देश्य को सोचकर बनता है। उसमें साफ़ शुरुआत, मुख्य भाग और अंत होता है। स्लाइड सरल होती हैं और बोलने वाले की मदद करती हैं। साफ़ आवाज़, आँखों से संपर्क और सही समय ज़रूरी हैं। अभ्यास से घबराहट आत्मविश्वास बन जाती है।
17. Using Software
Corporate activities and software · Using spreadsheet software · Using database software · Using business software · Developing information systems
- व्यवसाय में सॉफ़्टवेयर, नेटवर्क और सूचना की सुरक्षा – व्यवसाय सॉफ़्टवेयर से बेचने, ख़रीदने, वेतन देने और रिकॉर्ड रखने का काम तेज़ी से और कम ग़लतियों के साथ करते हैं। दफ़्तर के कंप्यूटर नेटवर्क से जुड़ते हैं: स्विच उन्हें LAN में जोड़ता है और राउटर LAN को इंटरनेट से जोड़ता है। कंपनी का डेटा एक संपत्ति है, इसलिए उसे परतों में बचाना पड़ता है: पासवर्ड, फ़ायरवॉल, एंटीवायरस, बैकअप और पहुँच के अधिकार जो तय करते हैं कि कौन क्या देखे या बदले।
- डेटाबेस संकल्पनाएँ: DBMS, रिलेशन और की – अलग-अलग फ़ाइलों में डेटा रखने से दोहराव, असंगति और कमज़ोर सुरक्षा होती है। डेटाबेस संबंधित डेटा को एक व्यवस्थित जगह रखता है, और DBMS (जैसे MySQL) उसे सँभालने वाला सॉफ़्टवेयर है। रिलेशनल मॉडल में डेटा तालिकाओं (रिलेशन) में रहता है, जिनमें स्तंभ (एट्रिब्यूट) और पंक्तियाँ (टपल) होती हैं; डोमेन किसी स्तंभ के अनुमत मानों का समूह है। कैंडिडेट की हर पंक्ति को अलग पहचानती है; उनमें से एक प्राइमरी की चुनी जाती है और बाकी ऑल्टरनेट की होती हैं।
- बिज़नेस सॉफ़्टवेयर का उपयोग: ख़रीद, बिक्री, पे-रोल और ग्रुपवेयर – ख़रीद सॉफ़्टवेयर सप्लायर को ऑर्डर भेजता है और आए माल को स्टॉक में जोड़ता है। बिक्री सॉफ़्टवेयर हर बिक्री दर्ज करता है, स्टॉक घटाता है और बिक्री-जोड़ बढ़ाता है। पे-रोल सॉफ़्टवेयर घंटे गुणा दर से कुल वेतन निकालता है, कर आदि घटाता है और शुद्ध वेतन दिखाता है। ग्रुपवेयर (साझा कैलेंडर, चैट, फ़ाइलें) टीम को एक ही जानकारी पर साथ काम करने देता है।
- स्प्रेडशीट और डेटाबेस से सूचना प्रणाली बनाना – छोटी सूचना प्रणाली स्प्रेडशीट से भी बन सकती है और डेटाबेस सॉफ़्टवेयर से भी। स्प्रेडशीट जल्दी बनती है: इनपुट सेल में तथ्य रहते हैं और फ़ॉर्मूला सेल नतीजे अपने आप निकालते हैं। पर जब ग्राहक का नाम जैसे तथ्य हर पंक्ति में दोहराए जाते हैं तो ग़लतियाँ और जगह की बर्बादी बढ़ती है। डेटाबेस हर तथ्य एक बार तालिका में रखता है और तालिकाओं को कुंजी से जोड़ता है। औज़ार कोई भी हो, विकास के चरण वही हैं: ज़रूरत, डिज़ाइन, निर्माण, जाँच और उपयोग।
18. Programming
Information systems and programming · Hardware and software · Algorithms · Developing programs and information systems
- सूचना प्रणाली (Information System) – सूचना प्रणाली (IS) लोगों, हार्डवेयर, सॉफ़्टवेयर, डेटा, नेटवर्क और प्रक्रियाओं का ऐसा समूह है जो मिलकर सूचना जुटाता, सहेजता, संसाधित करता और बाँटता है। यह कच्चे डेटा को एक शृंखला से काम की सूचना में बदलती है: जुटाना, कोड करना, भेजना, सहेजना, संसाधित करना और दिखाना। प्रणाली एक चक्र में बनती है (योजना, विश्लेषण, डिज़ाइन, निर्माण, परीक्षण, चलाना-सुधारना)। यह काम तेज़ करती है और ज्ञान बाँटने देती है, पर इसमें ख़र्च, ख़राबी, हैकिंग और जड़ता (rigidity) का ख़तरा भी है।
- कंप्यूटर का मूल संगठन – कंप्यूटर प्रणाली में हार्डवेयर (जिसे छू सकें) और सॉफ़्टवेयर (निर्देश) दोनों होते हैं। इनपुट उपकरण डेटा अंदर लाते हैं, CPU (ALU + कंट्रोल यूनिट + रजिस्टर) उस पर काम करता है, और आउटपुट उपकरण परिणाम देते हैं। मेमोरी एक सीढ़ी जैसी है: रजिस्टर और कैश छोटे पर सबसे तेज़, प्राथमिक मेमोरी (RAM, ROM) चलते प्रोग्राम रखती है, और द्वितीयक भंडारण (HDD, SSD, पेन ड्राइव) डेटा हमेशा के लिए रखता है। 8 बिट = 1 बाइट, और KB से आगे हर इकाई पिछली की 1024 गुना है।
- समस्या समाधान का परिचय – कंप्यूटर से समस्या हल करने के चरण: समस्या का विश्लेषण (इनपुट, आउटपुट, नियम), एल्गोरिद्म बनाना (सीमित, स्पष्ट, क्रमबद्ध चरण), प्रोग्रामिंग भाषा में कोड करना, अलग-अलग इनपुट से जाँचना (टेस्ट), और डीबग (गलतियाँ ढूँढकर हटाना)। एल्गोरिद्म को फ़्लोचार्ट (अंडाकार = शुरू/रुको, समांतर चतुर्भुज = इनपुट/आउटपुट, आयत = प्रक्रिया, हीरा = निर्णय, तीर = दिशा) या स्यूडोकोड (सरल संरचित भाषा) में दिखाते हैं। विघटन बड़ी समस्या को छोटी उप-समस्याओं में तोड़ता है।
- सॉफ़्टवेयर विकास: विचार से चलते ऐप तक – अच्छा सॉफ़्टवेयर चरणों में बनता है: समस्या का विश्लेषण करके आवश्यकताएँ लिखो, हल डिज़ाइन करो, छोटे हिस्सों में कोड करो, सामान्य, सीमा और गलत डेटा से परीक्षण करो, उपयोगकर्ताओं तक पहुँचाओ और रखरखाव करो। वॉटरफ़ॉल हर चरण एक बार क्रम से करता है; एजाइल छोटे चक्र दोहराता है। मज़बूत प्रोग्राम इनपुट जाँचते हैं, और टीमें वर्ज़न कंट्रोल, साफ़ भूमिकाएँ और उपयोगकर्ता की राय इस्तेमाल करती हैं।
19. Using Networks
Advances in IT and business · The internet and information security · Producing information content · Using the internet
- डिजिटल अर्थव्यवस्था: प्लेटफ़ॉर्म, रिव्यू और निजी डेटा – डिजिटल अर्थव्यवस्था (digital economy) अर्थव्यवस्था का वह हिस्सा है जो इंटरनेट, मोबाइल और डेटा से चलता है। इसका केंद्र है प्लेटफ़ॉर्म: एक ऐप या वेबसाइट जो खरीदार और विक्रेता (या सवारी और ड्राइवर, होटल और मेहमान) को जोड़ती है और फ़ीस लेती है। प्लेटफ़ॉर्म नेटवर्क प्रभाव से बढ़ते हैं: एक तरफ़ ज़्यादा लोग, तो दूसरी तरफ़ भी ज़्यादा लोग आते हैं। ग्राहक रेटिंग और रिव्यू देखकर चुनते हैं, इसलिए हर व्यवसाय को अच्छी डिजिटल पहचान चाहिए। प्लेटफ़ॉर्म बहुत सारा निजी डेटा जमा करते हैं, इसलिए सहमति और डेटा-सुरक्षा कानून ज़रूरी हैं।
- सूचना नैतिकता और सुरक्षा – सूचना नैतिकता का मतलब है जानकारी के साथ सही व्यवहार: दूसरों की निजता का सम्मान, सच बोलना, श्रेय देना और किसी को नुकसान न पहुँचाना। सूचना सुरक्षा का मतलब है जानकारी को उन लोगों से बचाना जिन्हें उसे देखना या बदलना नहीं चाहिए: पासवर्ड, ताला (एन्क्रिप्शन), अपडेट, बैकअप और साफ़ नियमों से। दोनों की शुरुआत एक आदत से होती है: शेयर करने से पहले सोचो।
- डिजिटल मीडिया: चित्र, आवाज़ और वीडियो संख्याएँ कैसे बनते हैं – डिजिटल मीडिया यानी कंप्यूटर पर संख्याओं के रूप में सहेजा गया हर चित्र, आवाज़, वीडियो या एनिमेशन। रास्टर चित्र पिक्सेल का जाल है; हर पिक्सेल लाल, हरे और नीले के 0 से 255 तक के मानों में सहेजा जाता है। वेक्टर ग्राफ़िक्स आकृतियों को गणित से सहेजते हैं, इसलिए हर आकार में साफ़ रहते हैं। वीडियो और एनिमेशन बहुत सारे फ़्रेम तेज़ी से दिखाना है। रेज़ोल्यूशन बढ़ने से फ़ाइल बड़ी होती है, इसलिए संपीडन करते हैं। मीडिया बनाते-बाँटते समय कॉपीराइट, लाइसेंस और लोगों के चित्र-अधिकार का सम्मान करना ज़रूरी है।
- व्यवसाय के लिए वेबसाइट डिज़ाइन: योजना, निर्माण और जाँच – अच्छी व्यवसायिक वेबसाइट साफ़ उद्देश्य और लक्षित दर्शक से शुरू होती है। यह तय हिस्सों (हेडर, मेन्यू, मुख्य संदेश, ऐक्शन बटन, सामग्री, फ़ुटर) से बनती है, आसान नेविगेशन और डिज़ाइन नियमों (क्रम, कंट्रास्ट, ख़ाली जगह, एकरूपता) से सजती है, फ़ोन पर चलती है, और सूची व असली लोगों से जाँचकर सुधारी जाती है।
20. Network Management
Corporate activities and networks · Information security administration · Network design, construction and management
- कंप्यूटर नेटवर्क: प्रकार, उपकरण और टोपोलॉजी – कंप्यूटर नेटवर्क डेटा और साधन बाँटने के लिए जुड़े उपकरणों का समूह है। क्षेत्र के हिसाब से नेटवर्क PAN, LAN, MAN और WAN हैं। उपकरणों के काम अलग हैं: मॉडेम डिजिटल और एनालॉग सिग्नल बदलता है, रिपीटर कमज़ोर सिग्नल मज़बूत करता है, हब डेटा सभी पोर्ट पर भेजता है, स्विच सिर्फ़ सही उपकरण को भेजता है, राउटर नेटवर्क जोड़कर रास्ता चुनता है, और गेटवे अलग प्रोटोकॉल वाले नेटवर्क जोड़ता है। टोपोलॉजी जुड़ाव का ढाँचा है: स्टार, बस, ट्री और मेश, हर एक के अपने गुण-दोष।
- सूचना नैतिकता और सुरक्षा – सूचना नैतिकता का मतलब है जानकारी के साथ सही व्यवहार: दूसरों की निजता का सम्मान, सच बोलना, श्रेय देना और किसी को नुकसान न पहुँचाना। सूचना सुरक्षा का मतलब है जानकारी को उन लोगों से बचाना जिन्हें उसे देखना या बदलना नहीं चाहिए: पासवर्ड, ताला (एन्क्रिप्शन), अपडेट, बैकअप और साफ़ नियमों से। दोनों की शुरुआत एक आदत से होती है: शेयर करने से पहले सोचो।
- नेटवर्क डिज़ाइन, निर्माण और प्रबंधन – अच्छा नेटवर्क पहले योजना बनाकर तैयार होता है, फिर चलाया और जाँचा जाता है। डिज़ाइन में पहले ज़रूरतें देखते हैं (कितने लोग, कितनी गति, सुरक्षा, बजट), फिर ढाँचा, डिवाइस और पते चुनते हैं। निर्माण में केबल और डिवाइस लगाकर जाँच करते हैं। संचालन में नेटवर्क पर नज़र रखते हैं और खराबी जल्दी ठीक करते हैं। सिस्टम ऑडिट देखता है कि सब कुछ योजना और नियमों के अनुसार है या नहीं।