स्रोत प्रलेख
स्रोत प्रलेख लेन-देन का पहला लिखित सबूत है। मुख्य प्रलेख:
- कैश मेमो: नकद बिक्री पर।
- बीजक/बिल: उधार बिक्री या ख़रीद पर, मात्रा, दर, GST और शर्तों के साथ।
- रसीद: नकद मिलने का सबूत।
- नामे नोट: ख़रीदार माल लौटाने पर पूर्तिकर्ता को भेजता है (पूर्तिकर्ता का खाता नामे)।
- जमा नोट: विक्रेता माल वापसी पर ग्राहक को भेजता है (ग्राहक का खाता जमा)।
- पे-इन स्लिप: बैंक में नकद या चेक जमा करने के लिए।
- चेक: बैंक को तय रकम देने का आदेश।
लेखांकन प्रमाणक बनाना
लेखांकन प्रमाणक स्रोत प्रलेख से बनता है और अधिकृत व्यक्ति स्वीकृत करता है। इसमें होना चाहिए: फ़र्म का नाम, तिथि, क्रमांक, नामे और जमा होने वाले खाते, रकम अंकों और शब्दों में, विवरण, बनाने वाले और स्वीकृत करने वाले के हस्ताक्षर।
प्रमाणक के प्रकार
- नकद प्रमाणक: नामे प्रमाणक (नकद भुगतान) और जमा प्रमाणक (नकद प्राप्ति)।
- गैर-नकद या स्थानांतरण प्रमाणक: नकद नहीं, जैसे उधार ख़रीद या मूल्यह्रास।
- मिश्रित प्रमाणक: एक नामे कई जमा, या कई नामे एक जमा (जैसे तीन कर्मचारियों का वेतन)।
- जटिल (रोज़नामचा) प्रमाणक: कई नामे और कई जमा।
लेखांकन समीकरण
द्विपक्ष सिद्धांत के कारण हर लेन-देन के दो बराबर प्रभाव होते हैं, इसलिए संपत्तियाँ = देयताएँ + पूँजी। अन्य रूप: पूँजी = संपत्तियाँ − देयताएँ; देयताएँ = संपत्तियाँ − पूँजी।
- दोनों पक्ष बढ़ें: उधार माल, ऋण लिया, स्वामी ने पूँजी लगाई।
- दोनों पक्ष घटें: लेनदार को भुगतान, ऋण चुकाया, आहरण।
- एक संपत्ति बढ़े, दूसरी घटे: नकद में फ़र्नीचर।
- व्यय दिया: संपत्ति और पूँजी घटे। आय मिली: संपत्ति और पूँजी बढ़े।
और अभ्यास के लिए लेखांकन समीकरण पाठ देखें।
नामे और जमा के नियम
नामे (Dr) खाते का बायाँ पक्ष है; जमा (Cr) दायाँ पक्ष। आधुनिक (समीकरण आधारित) नियम:
- संपत्ति: बढ़े → नामे; घटे → जमा।
- व्यय और हानि: बढ़े → नामे; घटे → जमा।
- देयता: बढ़े → जमा; घटे → नामे।
- पूँजी: बढ़े → जमा; घटे → नामे (आहरण नामे होता है)।
- आगम और लाभ: बढ़े → जमा; घटे → नामे।
हर लेन-देन में नामे और जमा का जोड़ बराबर होता है। यही दोहरा लेखा प्रणाली है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- संपत्तियाँ = देयताएँ + पूँजी
- पूँजी = संपत्तियाँ − देयताएँ
- अंतिम पूँजी = आरंभिक पूँजी + लाभ − आहरण (+ अतिरिक्त पूँजी)
- नामे: संपत्ति ↑, व्यय ↑, आहरण ↑
- जमा: देयता ↑, पूँजी ↑, आगम ↑
- कुल नामे = कुल जमा
हल किए गए उदाहरण
1. समीकरण बनाइए: (1) ₹1,00,000 नकद से व्यापार शुरू; (2) ₹30,000 का माल उधार; (3) ₹10,000 का फ़र्नीचर नकद।
(1) नकद 1,00,000 = पूँजी 1,00,000। (2) नकद 1,00,000 + स्टॉक 30,000 = लेनदार 30,000 + पूँजी 1,00,000। (3) नकद 90,000 + स्टॉक 30,000 + फ़र्नीचर 10,000 = 30,000 + 1,00,000। कुल 1,30,000 = 1,30,000।
2. आगे: (4) ₹5,000 किराया दिया; (5) ₹20,000 लागत का माल ₹26,000 नकद में बेचा।
(4) नकद 85,000; पूँजी 95,000। (5) नकद 1,11,000, स्टॉक 10,000; ₹6,000 लाभ पूँजी में → 1,01,000। संपत्ति 1,31,000 = 30,000 + 1,01,000।
3. संपत्तियाँ ₹4,50,000, देयताएँ ₹1,20,000। पूँजी?
₹3,30,000।
4. नामे-जमा बताइए: ₹12,000 वेतन नकद दिया।
वेतन खाता (व्यय ↑) नामे; नकद खाता (संपत्ति ↓) जमा।
5. बैंक से ₹50,000 ऋण लिया, बैंक खाते में आया।
बैंक खाता (संपत्ति ↑) नामे; बैंक ऋण खाता (देयता ↑) जमा।
6. कौन-सा प्रमाणक: (क) नकद बिक्री, (ख) उधार ख़रीद, (ग) मज़दूरी दी?
(क) जमा (प्राप्ति) प्रमाणक। (ख) स्थानांतरण प्रमाणक। (ग) नामे (भुगतान) प्रमाणक।
आम गलतियाँ
- व्यय बढ़ने पर जमा करना। व्यय नामे पक्ष में बढ़ते हैं।
- भूल जाना कि व्यय समीकरण में पूँजी भी घटाता है।
- नामे को हमेशा "बुरा" या "हानि" समझना। नामे बस बायाँ पक्ष है।
- नामे नोट (ख़रीदार भेजता है) और जमा नोट (विक्रेता भेजता है) में उलझना।