CBSE कक्षा 11 लेखाशास्त्र
अध्याय: 4
1. सैद्धांतिक ढाँचा
लेखांकन का परिचय · लेखांकन की मूल शब्दावली · लेखांकन का सैद्धांतिक आधार · लेखांकन के आधार और मानक
- लेखांकन का परिचय – लेखांकन व्यवसाय की भाषा है। यह पैसों से जुड़ी घटनाओं को पहचानता है, लिखता है, वर्गों में बाँटता है, सारांश बनाता है और फिर नतीजा उन लोगों तक पहुँचाता है जिन्हें चाहिए — स्वामी, प्रबंधक, बैंक, निवेशक और सरकार।
- लेखांकन की मूल शब्दावली – लेखांकन की अपनी भाषा है। स्वामी जो लगाता है वह पूँजी, जो निजी काम के लिए निकालता है वह आहरण। जो व्यवसाय के पास है वह संपत्ति, जो देना है वह देयता। इसी साल ख़त्म होने वाला ख़र्च आयगत व्यय, सालों काम देने वाला पूँजीगत व्यय। व्यापारिक छूट लिखी नहीं जाती, नकद छूट लिखी जाती है।
- लेखांकन का सैद्धांतिक आधार – लेखांकन GAAP नाम के साझा नियमों पर चलता है ताकि हर फ़र्म के खातों का अर्थ एक हो। सबसे पहले तीन मूल मान्यताएँ — चालू व्यवसाय, एकरूपता और उपार्जन। फिर इकाई, मुद्रा माप, ऐतिहासिक लागत, द्विपक्ष, मिलान, रूढ़िवादिता जैसे सिद्धांत तय करते हैं कि क्या, कब और किस मूल्य पर लिखना है।
- लेखांकन के आधार, लेखांकन मानक और GST – व्यवसाय मदों को तब लिख सकता है जब नकद आए-जाए (नकद आधार) या जब वे कमाई/ख़र्च हों (उपार्जन आधार)। लेखांकन मानक (AS) और Ind AS लिखित नियम हैं जो खातों को एकसमान बनाते हैं; Ind AS विश्व मानकों से मिलते हैं और सूचीबद्ध व बड़ी कंपनियों पर लागू हैं। GST माल और सेवाओं की आपूर्ति पर एक कर है, जिसमें पहले दिए कर का क्रेडिट मिलता है।
2. लेखांकन प्रक्रिया
प्रमाणक और लेखांकन समीकरण · रोज़नामचा और विशेष प्रयोजन पुस्तकें · खाता बही · बैंक समाधान विवरण · मूल्यह्रास, प्रावधान और संचय · तलपट और अशुद्धियों का सुधार
- प्रमाणक, लेखांकन समीकरण और नामे-जमा के नियम – हर लेन-देन स्रोत प्रलेख (बिल, रसीद, कैश मेमो) से शुरू होता है। उससे प्रमाणक बनता है जो बताता है कौन-सा खाता नामे और कौन-सा जमा होगा। हर लेन-देन कम से कम दो खातों को छूता है, इसलिए संपत्तियाँ = देयताएँ + पूँजी हमेशा बना रहता है। संपत्ति और व्यय नामे पक्ष में बढ़ते हैं; देयता, पूँजी और आगम जमा पक्ष में।
- रोज़नामचा और विशेष प्रयोजन बहियाँ – रोज़नामचा प्रारंभिक प्रविष्टि की पुस्तक है: हर लेन-देन तिथि क्रम में नामे खाता, जमा खाता और विवरण के साथ लिखा जाता है। बड़े व्यवसाय इसे विशेष बहियों में बाँटते हैं — रोकड़ बही, लघु रोकड़ बही, क्रय, विक्रय और वापसी बहियाँ — और बाकी सबके लिए रोज़नामचा (मुख्य) रखते हैं।
- खाता बही: प्रारूप, खतौनी और शेष – खाता बही लेखों की मुख्य पुस्तक है जहाँ किसी एक मद (नकद, एक ग्राहक, किराया) की सारी प्रविष्टियाँ एक खाते में इकट्ठी होती हैं। खतौनी का अर्थ है रोज़नामचे या सहायक बही की हर प्रविष्टि को सही खातों में उतारना। अवधि के अंत में शेष निकालकर दोनों पक्षों का अंतर जाना जाता है।
- बैंक समाधान विवरण – रोकड़ बही का बैंक खाना (फ़र्म रखती है) और पास बुक (बैंक रखता है) का शेष एक होना चाहिए, पर अक्सर अलग होता है — समय के अंतर, पहले बैंक को पता चलने वाली मदों और गलतियों के कारण। बैंक समाधान विवरण एक शेष से शुरू करके हर कारण जोड़ता-घटाता है और दूसरे शेष तक पहुँचता है।
- मूल्यह्रास, प्रावधान और संचय – मूल्यह्रास उपयोग, समय और नई तकनीक के कारण स्थायी संपत्ति के मूल्य में कमी है; इसकी लागत उपयोगी जीवन में सीधी रेखा विधि (हर साल बराबर रकम) या क्रमागत ह्रास विधि (घटते शेष पर बराबर दर) से बाँटी जाती है। प्रावधान ज्ञात हानि या देयता के लिए लाभ पर प्रभार है; संचय व्यवसाय को मज़बूत करने के लिए लाभ में से रोका गया भाग है।
- तलपट और अशुद्धियों का सुधार – तलपट सभी खातों के शेषों को नामे और जमा खानों में लिखकर जाँचता है कि कुल नामे कुल जमा के बराबर है या नहीं। मिलान केवल गणितीय शुद्धता दिखाता है: भूल, लेखे, सैद्धांतिक और क्षतिपूरक अशुद्धियाँ फिर भी छिपी रह सकती हैं। एकपक्षीय अशुद्धियों से तलपट नहीं मिलता; अंतर उचंत खाते में रखा जाता है जब तक हर अशुद्धि सुधर न जाए।
3. एकल स्वामित्व के वित्तीय विवरण
वित्तीय विवरण · वित्तीय विवरणों में समायोजन · अपूर्ण अभिलेख
- एकल स्वामित्व के वित्तीय विवरण – साल के अंत में तलपट से दो विवरण बनते हैं। व्यापार और लाभ-हानि खाता आयगत मदों से सकल लाभ, परिचालन लाभ और शुद्ध लाभ निकालता है। तुलन पत्र पूँजीगत मदों से अंतिम दिन की संपत्ति, देयता और पूँजी को समूहों में और क्रम से दिखाता है। इसके अंतिम शेष प्रारंभिक प्रविष्टि से अगले साल की पुस्तकें खोलते हैं।
- वित्तीय विवरणों में समायोजन – समायोजन वे मदें हैं जो तलपट के बाद पता चलती हैं और सही लाभ (उपार्जन और मिलान) के लिए अंतिम खातों में लानी होती हैं। सुनहरा नियम: हर समायोजन दो जगह दिखता है — एक बार व्यापार या लाभ-हानि खाते में और एक बार तुलन पत्र में (या इन्हीं में दो बार)।
- अपूर्ण अभिलेखों से खाते – कई छोटे व्यवसाय पूरी दोहरी प्रविष्टि नहीं अपनाते: वे केवल रोकड़ बही और व्यक्तिगत खाते रखते हैं। ऐसे अपूर्ण अभिलेखों से तलपट या सही लाभ-हानि खाता नहीं बन सकता, इसलिए साल के आरंभ और अंत की पूँजी स्थिति विवरण से निकालकर, आहरण और नई पूँजी का समायोजन कर, लाभ का अनुमान लगाया जाता है।
4. परियोजना कार्य
परियोजना (कोई एक)
जल्द आ रहा है