मूल्यह्रास: अर्थ, कारण और कारक
मूल्यह्रास उपयोग, समय बीतने या अप्रचलन के कारण स्थायी (मूर्त) संपत्ति के मूल्य में धीरे-धीरे स्थायी कमी है। यह गैर-नकद व्यय है जो संपत्ति की लागत उसके उपयोगी जीवन में बाँटता है (मिलान सिद्धांत)।
कारण
- टूट-फूट/घिसाव।
- समय बीतना (उपयोग न हो तब भी, जैसे पट्टे का भवन)।
- अप्रचलन: नई तकनीक या माँग बदलने से पुराना होना।
- क़ानूनी अधिकार की समाप्ति (पट्टा, पेटेंट)।
- दुर्घटना।
आवश्यकता
सही लाभ जानना, तुलन पत्र में संपत्ति का उचित मूल्य दिखाना, बदलने के लिए धन रखना, और कर व कंपनी क़ानून की माँग।
रकम को प्रभावित करने वाले कारक
- संपत्ति की लागत (कीमत + भाड़ा + स्थापना)।
- अनुमानित उपयोगी जीवन।
- अनुमानित अवशिष्ट (कबाड़) मूल्य।
- ह्रास योग्य लागत = लागत − अवशिष्ट मूल्य।
रिक्तीकरण और परिशोधन
रिक्तीकरण: प्राकृतिक साधनों (खान, तेल कुआँ, खदान) के मूल्य में कमी जब साधन निकाला जाता है। रिक्तीकरण = (लागत − अवशिष्ट) × निकाली मात्रा ÷ कुल अनुमानित मात्रा।
परिशोधन: अमूर्त संपत्ति (पेटेंट, कॉपीराइट, सॉफ़्टवेयर लाइसेंस, ट्रेडमार्क) की लागत उसके उपयोगी या क़ानूनी जीवन में बट्टे खाते डालना।
तीनों — मूल्यह्रास, रिक्तीकरण, परिशोधन — लागत को लाभ की अवधि में बाँटते हैं।
विधियाँ: सीधी रेखा (SLM) और क्रमागत ह्रास (WDV)
सीधी रेखा विधि (स्थायी किस्त)
वार्षिक मूल्यह्रास = (लागत − अवशिष्ट मूल्य) ÷ उपयोगी जीवन। दर = वार्षिक मूल्यह्रास ÷ लागत × 100। हर साल बराबर; सरल; संपत्ति अवशिष्ट मूल्य तक घट सकती है। फ़र्नीचर, पट्टा, पेटेंट के लिए उपयुक्त। पर बाद के सालों में मरम्मत बढ़ती है, इसलिए कुल भार बढ़ता है।
क्रमागत ह्रास विधि (घटता शेष)
वार्षिक मूल्यह्रास = दर × आरंभिक बही मूल्य। शुरू में बड़ा, बाद में छोटा; मूल्यह्रास + मरम्मत लगभग बराबर रहता है। आयकर क़ानून मानता है। बही मूल्य कभी शून्य नहीं होता। मशीन, वाहन के लिए उपयुक्त।
साल के बीच ख़रीदी संपत्ति पर केवल उपयोग के महीनों का मूल्यह्रास (जब तक कुछ और न कहा हो)।
मूल्यह्रास का लेखा: संपत्ति खाता या प्रावधान खाता
1. संपत्ति खाते में
मूल्यह्रास खाता नामे; संपत्ति खाते से। फिर लाभ-हानि खाता नामे; मूल्यह्रास खाते से। संपत्ति बही मूल्य (लागत घटा मूल्यह्रास) पर दिखती है।
2. ह्रास प्रावधान (संचित मूल्यह्रास) खाता बनाकर
मूल्यह्रास खाता नामे; ह्रास प्रावधान खाते से। संपत्ति खाता मूल लागत पर रहता है; प्रावधान बढ़ता जाता है। तुलन पत्र में संपत्ति लागत घटा प्रावधान दिखती है। लाभ: लागत और कुल मूल्यह्रास दोनों दिखते हैं।
संपत्ति का निपटान
बिक्री पर बिक्री की तारीख़ का बही मूल्य निकालें (लागत − अब तक का मूल्यह्रास, बिक्री तक के महीनों सहित)।
- बिक्री मूल्य > बही मूल्य → बिक्री पर लाभ (लाभ-हानि खाते में जमा)।
- बिक्री मूल्य < बही मूल्य → बिक्री पर हानि (लाभ-हानि खाते में नामे)।
संपत्ति खाता विधि: बैंक नामे; संपत्ति खाते से, फिर शेष लाभ या हानि के रूप में हस्तांतरित।
प्रावधान विधि: संपत्ति निपटान खाता खोलें। लागत: संपत्ति निपटान नामे; संपत्ति खाते से। संचित मूल्यह्रास: ह्रास प्रावधान नामे; संपत्ति निपटान से। बिक्री: बैंक नामे; संपत्ति निपटान से। निपटान खाते का शेष लाभ या हानि, लाभ-हानि खाते में।
प्रावधान और संचय: अर्थ और अंतर
प्रावधान: ज्ञात देयता या संपत्ति मूल्य में कमी, जिसकी सही रकम पक्की नहीं, के लिए लाभ पर डाली गई रकम — ह्रास प्रावधान, संदिग्ध ऋण प्रावधान, कर प्रावधान, मरम्मत प्रावधान।
संचय: वित्तीय स्थिति मज़बूत करने या भविष्य की ज़रूरतों के लिए लाभ में से अलग रखी रकम।
अंतर
- प्रावधान लाभ पर प्रभार है (लाभ-हानि खाते में नामे); संचय लाभ का विनियोग है।
- ज्ञात देयता/हानि के लिए प्रावधान अनिवार्य; संचय प्रायः इच्छा से (कभी क़ानून से)।
- प्रावधान शुद्ध लाभ घटाता है; संचय शुद्ध लाभ नहीं, बाँटने योग्य लाभ घटाता है।
- प्रावधान संपत्ति से घटाकर या देयता के रूप में; संचय "संचय एवं आधिक्य" में।
- प्रावधान से लाभांश नहीं दिया जा सकता; आयगत संचय से दिया जा सकता है।
संचय के प्रकार
- आयगत संचय: आयगत (व्यापारिक) लाभ से, लाभांश के लिए उपयोग हो सकता है।
- सामान्य संचय: कोई विशेष उद्देश्य नहीं; व्यवसाय को मज़बूत करता है।
- विशिष्ट संचय: तय उद्देश्य के लिए — लाभांश समानीकरण संचय, ऋणपत्र शोधन संचय, विनियोग उच्चावचन संचय।
- पूँजीगत संचय: पूँजीगत लाभ से — अंशों के निर्गमन पर प्रीमियम, स्थायी संपत्ति बिक्री पर लाभ, ज़ब्त अंशों के पुनर्निर्गमन पर लाभ। प्रायः लाभांश के लिए नहीं।
- गुप्त संचय: तुलन पत्र में नहीं दिखता; संपत्ति कम या देयता ज़्यादा दिखाकर बनता है (जैसे ज़्यादा मूल्यह्रास)। फ़र्म को कमज़ोर दिखाता है; कंपनियों के लिए क़ानून की सीमा से बाहर इसकी अनुमति नहीं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- SLM वार्षिक मूल्यह्रास = (लागत − अवशिष्ट मूल्य) ÷ उपयोगी जीवन
- SLM दर = वार्षिक मूल्यह्रास ÷ लागत × 100
- WDV मूल्यह्रास = दर × आरंभिक बही मूल्य
- बही मूल्य = लागत − संचित मूल्यह्रास
- बिक्री पर लाभ/हानि = बिक्री मूल्य − बिक्री तिथि का बही मूल्य
- रिक्तीकरण = (लागत − अवशिष्ट) × निकाली मात्रा ÷ कुल मात्रा
हल किए गए उदाहरण
1. मशीन ₹1,00,000, भाड़ा ₹4,000, स्थापना ₹6,000; अवशिष्ट ₹10,000; जीवन 5 साल। SLM मूल्यह्रास?
लागत 1,10,000; (1,10,000 − 10,000) ÷ 5 = ₹20,000 प्रति वर्ष।
2. मशीन ₹1,00,000, WDV 20%। 3 साल का मूल्यह्रास और बही मूल्य?
व1: 20,000 → 80,000। व2: 16,000 → 64,000। व3: 12,800 → 51,200।
3. 1 अक्टूबर 2025 को ₹60,000 की संपत्ति; SLM 10% वार्षिक; खाते 31 मार्च को बंद। 2025-26 का मूल्यह्रास?
6 महीने: 60,000 × 10% × 6/12 = ₹3,000।
4. मशीन ₹1,00,000 (1 अप्रैल 2023), SLM ₹18,000 वार्षिक, प्रावधान विधि। 31 मार्च 2026 को ₹55,000 में बेची। लाभ या हानि?
3 साल का संचित ह्रास 54,000; बही मूल्य 46,000; लाभ ₹9,000।
5. ₹20 लाख की खान में 4 लाख टन; इस साल 80,000 टन निकाला। रिक्तीकरण?
20,00,000 × 80,000 ÷ 4,00,000 = ₹4,00,000।
6. प्रावधान या संचय: (क) संदिग्ध ऋण, (ख) सामान्य संचय, (ग) अंश प्रीमियम, (घ) कर।
(क) प्रावधान। (ख) आयगत (सामान्य) संचय। (ग) पूँजीगत संचय। (घ) प्रावधान।
आम गलतियाँ
- भाड़ा और स्थापना जोड़े बिना लागत लेना। ये संपत्ति की लागत का भाग हैं।
- WDV में हर साल मूल लागत पर दर लगाना। दर आरंभिक बही मूल्य पर लगती है।
- साल के बीच ख़रीदी संपत्ति पर पूरे साल का मूल्यह्रास लगाना (जब तक प्रश्न न कहे)।
- संचय को लाभ पर प्रभार कहना। संचय विनियोग है; प्रावधान प्रभार है।