France Terminale STMG (management and business) — Terminale specialties
अध्याय: 9
1. Law and economics — law
What is a contract for? · What does being liable mean? · How law frames paid employment · How and in what form to start a business
- अपकृत्य विधि: लापरवाही, उपद्रव और दायित्व – अपकृत्य (tort) एक दीवानी गलती है, जिसमें किसी का काम या लापरवाही दूसरे को नुकसान पहुँचाती है और दोनों के बीच कोई अनुबंध नहीं होता। पीड़ित (वादी) गलती करने वाले (प्रतिवादी) पर उपचार के लिए दावा कर सकता है, आम तौर पर पैसा जिसे हर्जाना कहते हैं। मुख्य अपकृत्य हैं: लापरवाही (कर्तव्य, उल्लंघन, कारण-संबंध और नुकसान चाहिए), अधिभोगी दायित्व, उपद्रव और ख़तरनाक रिसाव। नियोक्ता अपने कर्मचारियों के अपकृत्य के लिए भी ज़िम्मेदार हो सकता है (प्रतिनिधिक दायित्व)। अंशदायी लापरवाही और सहमति जैसे बचाव दायित्व घटा या खत्म कर सकते हैं।
- रोज़गार क़ानून: किसी के लिए काम करने के नियम – रोज़गार क़ानून (श्रम क़ानून) नियोक्ता और कर्मचारी के रिश्ते के नियम हैं। रोज़गार अनुबंध तब बनता है जब कोई व्यक्ति वेतन के बदले, नियोक्ता के निर्देश में (अधीनता) काम करता है। अनुबंध स्थायी, निश्चित अवधि, एजेंसी के ज़रिए अस्थायी, अंशकालिक या दूरस्थ हो सकता है; सिविल या फ़्रीलांस अनुबंध नौकरी नहीं है। कर्मचारी के अधिकार हैं (कम से कम न्यूनतम वेतन, सीमित घंटे, आराम और सवेतन छुट्टी, सुरक्षित कार्यस्थल, बराबर व्यवहार, उत्पीड़न से मुक्ति) और कर्तव्य हैं (सावधान काम, वैध निर्देश मानना, वफ़ादारी, सुरक्षा नियम)। नियोक्ता क़ानून के भीतर काम व्यवस्थित कर सकता है और अनुशासन दे सकता है। सकल वेतन कर और सामाजिक बीमा से पहले का है, शुद्ध बाद का; नियोक्ता की कुल लागत ज़्यादा होती है। ट्रेड यूनियन सामूहिक समझौते करती हैं। अनुबंध इस्तीफ़े, वैध कारण और निष्पक्ष प्रक्रिया वाली बर्ख़ास्तगी, आपसी सहमति या अवधि ख़त्म होने से समाप्त होता है।
- व्यापार कानून: हर व्यापार को मानने वाले नियम – व्यापार कानून वे नियम हैं जो सरकार बनाती है और अदालतें लागू करती हैं, और जिन्हें हर व्यापार को मानना पड़ता है। ये तय करते हैं कि व्यापार का कानूनी रूप क्या है और उसका कर्ज़ कौन भरेगा (दायित्व), कोई वादा कब अनुबंध बनता है, कर्मचारियों के साथ कैसा व्यवहार हो (मज़दूरी, बराबरी, सुरक्षा), ग्राहक क्या माँग सकता है (ठीक चलने वाला और बताए जैसा सामान), और झगड़े कैसे सुलझें।
2. Law and economics — economics
How can the state act in the economy? · The state’s influence on jobs and unemployment · Organising trade in a global economy · Growth and sustainable development
- बाज़ार में सरकारी हस्तक्षेप – बाज़ार अक्सर अच्छा काम करते हैं, पर विफल भी हो सकते हैं: हानिकारक चीज़ें ज़्यादा इस्तेमाल होती हैं, उपयोगी चीज़ें कम, सार्वजनिक वस्तुएँ बनती ही नहीं, फ़र्मों को एकाधिकार मिल जाता है और आय में बहुत असमानता आती है। सरकार दख़ल देती है: अप्रत्यक्ष कर (कीमत बढ़ाते, मात्रा घटाते हैं), सब्सिडी (कीमत घटाती, मात्रा बढ़ाती है), अधिकतम और न्यूनतम कीमत, नियमन, सार्वजनिक वस्तुओं और सेवाओं की व्यवस्था, सरकारी स्वामित्व या निजीकरण, प्रतिस्पर्धा नीति, और कर व लाभों से पुनर्वितरण। वह आर्थिक चक्र को संभालने के लिए राजकोषीय और मौद्रिक नीति भी अपनाती है। हस्तक्षेप ख़ुद भी ग़लत हो सकता है – इसे सरकारी विफलता कहते हैं।
- बेरोज़गारी: अर्थ, दर, प्रकार, नुकसान और उपाय – कोई व्यक्ति बेरोज़गार तब है जब उसके पास नौकरी नहीं, वह काम कर सकता है, और सक्रिय रूप से काम ढूँढ रहा है। श्रम बल यानी सभी रोज़गार वाले और सभी बेरोज़गार। बेरोज़गारी दर = बेरोज़गार ÷ श्रम बल × 100। अर्थशास्त्री कारण के हिसाब से इसे बाँटते हैं: घर्षणात्मक (नौकरियों के बीच), संरचनात्मक (कौशल या जगह नौकरियों से मेल नहीं खाती), चक्रीय (कुल माँग में मंदी) और मौसमी (कुछ ही महीने काम)। बेरोज़गारी से व्यक्ति की आय जाती है, देश का उत्पादन और कर घटता है, और सेहत व समाज को नुकसान होता है। चक्रीय के लिए सरकार ख़र्च और ब्याज दर का सहारा लेती है; बाक़ी के लिए प्रशिक्षण, जानकारी और आवागमन। कुछ बेरोज़गारी हमेशा रहती है; सबसे कम टिकाऊ स्तर को प्राकृतिक दर कहते हैं।
- अंतर्राष्ट्रीय व्यापार – देशों की सीमाओं के पार वस्तुओं और सेवाओं का ख़रीदना-बेचना अंतर्राष्ट्रीय व्यापार है। बाहर बेचना निर्यात और बाहर से ख़रीदना आयात है। इससे देश को विदेशी मुद्रा, विकास और रोज़गार मिलते हैं, और कंपनियों को लाभ और नए बाज़ार। निर्यात और आयात तय चरणों से होते हैं और इनमें साख पत्र, बिल ऑफ़ लेडिंग जैसे कई प्रलेख लगते हैं। WTO (1995) व्यापार के नियम बनाता है और बाधाएँ घटाता है।
- अंतर्राष्ट्रीय व्यापार: आधार, संतुलन, WTO और पत्तन – अंतर्राष्ट्रीय व्यापार देशों के बीच सामान और सेवाओं का आदान-प्रदान है। यह वस्तु-विनिमय से शुरू हुआ, रेशम मार्ग जैसे रास्तों पर बढ़ा, क्रूर दास व्यापार और औपनिवेशिक व्यापार से गुज़रा, और उद्योगों के साथ फैला। देश इसलिए व्यापार करते हैं क्योंकि वे संसाधन, जनसंख्या, विकास, विदेशी निवेश और परिवहन में अलग हैं। व्यापार संतुलन निर्यात और आयात की तुलना है। व्यापार द्विपक्षीय या बहुपक्षीय हो सकता है; मुक्त व्यापार रुकावटें घटाता है, जबकि राशिपातन विदेश में लागत से कम पर माल बेचता है। WTO विश्व नियम बनाता है, प्रादेशिक समूह पड़ोसियों को जोड़ते हैं, और कई तरह के पत्तन व्यापार के द्वार हैं।
- पर्यावरण और धारणीय विकास – पर्यावरण हमें संसाधन देता है, हमारा कचरा सोखता है, जीवन चलाता है और सुंदरता देता है। जब हम संसाधन प्रकृति के नवीकरण से तेज़ लेते हैं, या कचरा उसकी सोखने की क्षमता से ज़्यादा फेंकते हैं, तो धारण क्षमता पार होती है और पर्यावरण संकट आता है। भारत में भूमि अपक्षय, वायु-जल प्रदूषण, वन और जैव-विविधता की हानि है। जीवाश्म ईंधन जलाने से गर्मी फँसती है और वैश्विक उष्णता होती है; CFC ओज़ोन परत पतली करते हैं। धारणीय विकास आज की ज़रूरतें पूरी करता है बिना भावी पीढ़ियों की क्षमता घटाए।
3. Management and digital — organisations and production
Which products for which needs? · Which resources to produce? · Organising production: flexibility, quality, cost · Digital change as a chance for production · Keeping an organisation coherent
- विपणन प्रबंध – विपणन का मतलब है ख़रीदारों की ज़रूरत पहचानना और मूल्य के बदले, लाभ के साथ, उसे पूरा करना। इसके कई कार्य हैं (अनुसंधान, योजना, ब्रांड, लेबल, पैकेजिंग, कीमत, संवर्धन, वितरण, सेवा) और पाँच विचारधाराएँ (उत्पादन, उत्पाद, विक्रय, विपणन, सामाजिक विपणन)। विपणन मिश्र 4P है: उत्पाद (ब्रांड, लेबल, पैकेजिंग के साथ), कीमत (लागत, माँग, प्रतियोगिता, सरकारी नियम, उद्देश्य और विपणन तरीकों से तय), स्थान (माध्यम और भौतिक वितरण) और संवर्धन (विज्ञापन, व्यक्तिगत विक्रय, विक्रय संवर्धन, जनसंपर्क)।
- प्रबंध की प्रकृति एवं महत्व – प्रबंध का मतलब है लोगों के साथ और उनके ज़रिए काम करवाना, ताकि लक्ष्य समय पर (प्रभावपूर्णता) और कम लागत में (कुशलता) पूरे हों। इसके संगठनात्मक, सामाजिक और व्यक्तिगत उद्देश्य होते हैं। यह कुछ हद तक विज्ञान, पूरी तरह कला और अभी पूरा पेशा नहीं है। यह तीन स्तरों पर पाँच कार्यों से चलता है, और समन्वय सबको जोड़ता है।
- संचालन प्रबंधन: व्यवसाय वस्तुएँ और सेवाएँ कैसे बनाते हैं – संचालन प्रबंधन (operations management) यह है कि व्यवसाय इनपुट (कच्चा माल, मज़दूर, मशीनें, पैसा) को आउटपुट (वस्तुएँ और सेवाएँ) में सबसे अच्छे ढंग से कैसे बदलता है। उत्पादन जॉब (ऑर्डर पर एक चीज़), बैच (एक जैसी चीज़ों के समूह) या फ़्लो (लगातार बड़े पैमाने पर) हो सकता है। संचालन के उद्देश्य हैं: कम लागत, ऊँची गुणवत्ता, गति, लचीलापन और पर्यावरण की देखभाल। प्रदर्शन मापते हैं: क्षमता (अधिकतम उत्पादन), क्षमता उपयोग (उत्पादन ÷ क्षमता × 100), श्रम उत्पादकता (उत्पादन ÷ मज़दूर) और प्रति इकाई लागत (कुल लागत ÷ उत्पादन)। आपूर्ति शृंखला आपूर्तिकर्ता, कारख़ाना, दुकान और ग्राहक को जोड़ती है; पुश प्रवाह में पहले माल बनता है, पुल प्रवाह (just-in-time) में ऑर्डर आने पर। गुणवत्ता नियंत्रण तैयार माल जाँचता है; गुणवत्ता आश्वासन और निरंतर सुधार (kaizen) हर चरण पर ख़राबी रोकते हैं।
- सूचना प्रणाली (Information System) – सूचना प्रणाली (IS) लोगों, हार्डवेयर, सॉफ़्टवेयर, डेटा, नेटवर्क और प्रक्रियाओं का ऐसा समूह है जो मिलकर सूचना जुटाता, सहेजता, संसाधित करता और बाँटता है। यह कच्चे डेटा को एक शृंखला से काम की सूचना में बदलती है: जुटाना, कोड करना, भेजना, सहेजना, संसाधित करना और दिखाना। प्रणाली एक चक्र में बनती है (योजना, विश्लेषण, डिज़ाइन, निर्माण, परीक्षण, चलाना-सुधारना)। यह काम तेज़ करती है और ज्ञान बाँटने देती है, पर इसमें ख़र्च, ख़राबी, हैकिंग और जड़ता (rigidity) का ख़तरा भी है।
- संगठन: प्रक्रिया, ढाँचे, भारार्पण और विकेंद्रीकरण – संगठन का मतलब है काम, लोगों और साधनों को ऐसे जमाना कि योजना पूरी हो सके। इसके 4 चरण हैं: काम बाँटना, विभाग बनाना, कर्तव्य सौंपना और रिपोर्टिंग संबंध तय करना। इससे संगठन ढाँचा बनता है: कार्यात्मक (काम के प्रकार से) या प्रभागीय (उत्पाद से)। औपचारिक ढाँचे के साथ दोस्ती से अनौपचारिक ढाँचा भी बनता है। भारार्पण में अधिकार अधीनस्थ को दिया जाता है; विकेंद्रीकरण में निर्णय की शक्ति सभी स्तरों तक फैलती है।
4. Management and digital — organisations and actors
Bringing an organisation’s actors together · Does digital improve customer relations? · Communicating with different stakeholders
- संगठनात्मक व्यवहार: काम पर लोग वैसा क्यों करते हैं – संगठनात्मक व्यवहार (OB) यह पढ़ता है कि किसी संगठन में व्यक्ति, समूह और ढाँचा व्यवहार को कैसे प्रभावित करते हैं, ताकि प्रबंधक बेहतर नतीजे पा सकें और लोग काम पर अच्छा महसूस करें। व्यक्ति अपने साथ व्यक्तित्व, धारणा और अभिवृत्ति (रवैया) लाता है, और आज डिजिटल पहचान भी। लोग आपसी संवाद से संदेश भेजते हैं, जिसे शोर और बाधाएँ बिगाड़ सकती हैं। लोग समूह बनाते हैं, जिसमें हैसियत (स्टेटस), भूमिका और अपनेपन का भाव होता है, और वे एक संस्कृति तथा नियम-परंपराएँ (नॉर्म्स) साझा करते हैं। प्रबंधक अधिकार, नेतृत्व और प्रेरणा से समूह को राह दिखाते हैं। जब लक्ष्य, संसाधन या मूल्य टकराते हैं, तो टकराव होता है; उसे बातचीत, समझौते या साझा हल से सुलझाया जाता है।
- उपभोक्ता व्यवहार: लोग क्यों और कैसे ख़रीदते हैं – उपभोक्ता व्यवहार यह अध्ययन है कि लोग वस्तुएँ और सेवाएँ कैसे चुनते, ख़रीदते, इस्तेमाल करते और छोड़ते हैं। ज़्यादातर ख़रीद के पाँच चरण होते हैं: ज़रूरत पहचानना, जानकारी खोजना, विकल्पों का मूल्यांकन, ख़रीद और ख़रीद के बाद की भावना। प्रेरणाएँ (ज़रूरत, आनंद, प्रतिष्ठा, दूसरों की मदद) ख़रीदने का धक्का देती हैं; ब्रेक (दाम, जोखिम, आदत) रोकते हैं। व्यक्तिगत, मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कारक हर चुनाव पर असर डालते हैं। कंपनियाँ डेटा से उपभोक्ता प्रोफ़ाइल बनाती हैं और खंडों को लक्ष्य करती हैं। डिजिटल ने रिश्ता बदला है: डिजिटल निशान, व्यक्तिगत ऑफ़र, चैट सहायता, समीक्षाएँ और सोशल नेटवर्क, और ऑनलाइन सरकारी सेवाएँ (ई-गवर्नेंस)। संतुष्टि अनुभव की उम्मीद से तुलना है, और अनुमानित मूल्य ख़रीदार को मिलने वाला लाभ घटा उसका त्याग है। अनुभवात्मक विपणन सिर्फ़ उत्पाद नहीं, यादगार अनुभव बेचता है।
- व्यावसायिक संचार – एक व्यवसाय कई समूहों से बात करता है, जिन्हें हितधारक कहते हैं: अंदर कर्मचारी, और बाहर ग्राहक, निवेशक, बैंक, आपूर्तिकर्ता, समुदाय और सरकार। हर समूह को अलग संदेश, अलग माध्यम से चाहिए। संचार रणनीति तय करती है: लक्ष्य, संदेश, माध्यम, समय और नतीजा कैसे नापें। माध्यम मौखिक, अशाब्दिक, लिखित या डिजिटल हो सकते हैं। निवेशकों और बैंकों को वित्तीय संचार और व्यवसाय योजना दी जाती है। फ़र्म के अंदर अच्छा संचार निर्णय, समय-प्रबंधन और टीमवर्क में मदद करता है, और चालबाज़ी की जगह ईमानदार प्रभाव अपनाता है।
5. Management and digital — organisations and society
Can organisations ignore social issues? · Do lifestyle changes shape organisations? · New responsibilities from digital change · Organisations and their ecosystem
- व्यावसायिक नैतिकता: अवधारणा और तत्व – व्यावसायिक नैतिकता सही-ग़लत के वे नैतिक नियम हैं जो व्यवसाय के व्यवहार को दिशा देते हैं। ये कानून से ज़्यादा माँगते हैं: ईमानदारी, निष्पक्षता और लोगों की परवाह। फ़र्म पाँच तत्वों से नैतिकता बनाती है: शीर्ष प्रबंधन की प्रतिबद्धता, आचार संहिता का प्रकाशन, अनुपालन व्यवस्था, हर स्तर के कर्मचारियों की भागीदारी और परिणामों का मापन।
- गाँव और नगर में सामाजिक परिवर्तन और सामाजिक व्यवस्था – सामाजिक परिवर्तन यानी समाज के ढाँचे में बड़ा और टिकाऊ बदलाव। यह धीमा (उद्विकासीय) या अचानक (क्रांतिकारी) हो सकता है, और ढाँचे, विचार या मूल्य बदल सकता है। इसके कारण हैं पर्यावरण, तकनीक और अर्थव्यवस्था, राजनीति और संस्कृति। सामाजिक व्यवस्था दूसरा पहलू है: समाज साझा मूल्यों, प्रभुत्व, सत्ता और कानून से स्थिर रहता है। व्यवस्था को प्रतिरोध, अपराध और हिंसा चुनौती देते हैं। गाँव, कस्बा और नगर आकार, घनत्व और काम में अलग हैं, और सब अपने ढंग से बदलते हैं।
- डेटा गोपनीयता: आपका डेटा किसके पास जाता है और उसे कैसे बचाएँ – निजी डेटा (personal data) वह हर जानकारी है जो आपकी पहचान बता सके। ऐप और वेबसाइट इसे हर समय इकट्ठा करते हैं। गोपनीयता (privacy) का मतलब है कि आप तय करें कौन इसे देखे और कैसे इस्तेमाल करे। उचित नियम कहते हैं: साफ़ उद्देश्य, कम से कम डेटा, सुरक्षित रखना और काम ख़त्म होने पर मिटाना। आपके डेटा पर आपके अधिकार हैं, और कुछ आसान आदतें आपको सुरक्षित रखती हैं।
- व्यावसायिक रणनीति (Business Strategy) – व्यावसायिक रणनीति एक लंबी अवधि की योजना है जो कंपनी को जहाँ वह है वहाँ से वहाँ ले जाती है जहाँ वह पहुँचना चाहती है। यह मिशन (कंपनी क्यों है) से शुरू होती है, उसे SMART उद्देश्यों में बदलती है, SWOT से अपनी स्थिति जाँचती है, एन्सॉफ़ मैट्रिक्स से तय करती है कि किस बाज़ार और उत्पाद में बढ़ना है, पोर्टर की रणनीति (लागत नेतृत्व, विशिष्टता या फ़ोकस) से तय करती है कि कैसे जीतना है, और फिर लोगों, पैसे और नियंत्रण से योजना लागू करती है।
6. Specific option — management and finance
Accounting information system and digital tools · Recording purchases and sales · Recording investment · A true and fair accounting picture · Measuring performance · Financial structure and survival · Choosing how to finance · Optimising cash · Allocating profit · Cost analysis for decisions
- मूल्य वर्धन, लाभ का आवंटन और लेखा सूचना प्रणाली – मूल्य वर्धन = बिक्री - दूसरी फर्मों से खरीदा गया माल और सेवाएँ। यह कर्मचारियों (वेतन), सरकार (कर), ऋणदाताओं (ब्याज) और मालिकों (लाभ) में बँटता है। लाभ आगे संचय, लाभांश और रोके गए लाभ में बाँटा जाता है। लेखा सूचना प्रणाली (अक्सर ERP) हर लेन-देन एक बार दर्ज करती है: मूल दस्तावेज़ से खाताबही तक और फिर वित्तीय विवरण तक, और डेटा सुरक्षित रखती है।
- रोज़नामचा और विशेष प्रयोजन बहियाँ – रोज़नामचा प्रारंभिक प्रविष्टि की पुस्तक है: हर लेन-देन तिथि क्रम में नामे खाता, जमा खाता और विवरण के साथ लिखा जाता है। बड़े व्यवसाय इसे विशेष बहियों में बाँटते हैं — रोकड़ बही, लघु रोकड़ बही, क्रय, विक्रय और वापसी बहियाँ — और बाकी सबके लिए रोज़नामचा (मुख्य) रखते हैं।
- मूल्यह्रास, प्रावधान और संचय – मूल्यह्रास उपयोग, समय और नई तकनीक के कारण स्थायी संपत्ति के मूल्य में कमी है; इसकी लागत उपयोगी जीवन में सीधी रेखा विधि (हर साल बराबर रकम) या क्रमागत ह्रास विधि (घटते शेष पर बराबर दर) से बाँटी जाती है। प्रावधान ज्ञात हानि या देयता के लिए लाभ पर प्रभार है; संचय व्यवसाय को मज़बूत करने के लिए लाभ में से रोका गया भाग है।
- एकल स्वामित्व के वित्तीय विवरण – साल के अंत में तलपट से दो विवरण बनते हैं। व्यापार और लाभ-हानि खाता आयगत मदों से सकल लाभ, परिचालन लाभ और शुद्ध लाभ निकालता है। तुलन पत्र पूँजीगत मदों से अंतिम दिन की संपत्ति, देयता और पूँजी को समूहों में और क्रम से दिखाता है। इसके अंतिम शेष प्रारंभिक प्रविष्टि से अगले साल की पुस्तकें खोलते हैं।
- लेखांकन अनुपात: तरलता, शोधन क्षमता, क्रियाशीलता और लाभदायकता – अनुपात वित्तीय विवरणों की दो संबंधित संख्याओं की तुलना है। तरलता अनुपात बताते हैं अल्पकालीन क़र्ज़ चुक सकते हैं या नहीं; शोधन क्षमता अनुपात दीर्घकालीन सुरक्षा; क्रियाशीलता (आवर्त) अनुपात संपत्ति कितनी तेज़ी से उपयोग होती है; लाभदायकता अनुपात हर रुपये पर कितना लाभ।
- व्यावसायिक वित्त के स्रोत – हर व्यवसाय को लंबे समय की संपत्तियों (स्थायी पूँजी) और रोज़ के काम (कार्यशील पूँजी) के लिए पैसा चाहिए। यह पैसा दो बड़े स्रोतों से आता है: स्वामित्व निधि (समता अंश, पूर्वाधिकार अंश, प्रतिधारित आय), जिसे लौटाना नहीं पड़ता, और उधार निधि (ऋणपत्र, बॉन्ड, बैंक व वित्तीय संस्थाओं के ऋण, जन जमा, व्यापार साख, अंतर-निगमीय जमा), जिसे ब्याज के साथ लौटाना पड़ता है।
- नकद प्रवाह (Cash Flow) – नकद प्रवाह व्यवसाय में आने और जाने वाला पैसा है। शुद्ध नकद प्रवाह = नकद अंतर्वाह − नकद बहिर्वाह, और अंतिम शेष = शुरुआती शेष + शुद्ध नकद प्रवाह। नकद प्रवाह पूर्वानुमान इसे महीने-दर-महीने पहले से बताता है ताकि कमी जल्दी दिखे। कंपनी लाभ कमाते हुए भी नकद से खाली हो सकती है, इसलिए मैनेजर ओवरड्राफ़्ट, ग्राहकों से जल्दी वसूली, सप्लायरों को देर से भुगतान, कम माल, फ़ैक्टरिंग और बेचकर-किराये पर-लेने से नकद प्रवाह सुधारते हैं।
- सम-विच्छेद विश्लेषण (Break-Even Analysis) – जब कुल आय कुल लागत के बराबर हो, यानी लाभ शून्य, तो व्यवसाय सम-विच्छेद पर है। हर बिकी इकाई अंशदान देती है = कीमत − प्रति इकाई परिवर्ती लागत, जो पहले स्थिर लागत चुकाता है। सम-विच्छेद मात्रा = स्थिर लागत ÷ प्रति इकाई अंशदान। इससे ज़्यादा बिक्री पर लाभ, कम पर हानि। सुरक्षा सीमा = असली बिक्री − सम-विच्छेद बिक्री। लक्ष्य लाभ के लिए (स्थिर लागत + लक्ष्य लाभ) ÷ अंशदान इकाइयाँ बेचनी होंगी।
7. Specific option — marketing
Must the offer be personalised? · Consumption as experience · Price: reason or illusion? · Can we skip intermediaries? · Does the consumer shape distribution? · Digital as a new way to distribute · Communicating: visibility and media · Richer customer relations through digital
- विपणन प्रबंध – विपणन का मतलब है ख़रीदारों की ज़रूरत पहचानना और मूल्य के बदले, लाभ के साथ, उसे पूरा करना। इसके कई कार्य हैं (अनुसंधान, योजना, ब्रांड, लेबल, पैकेजिंग, कीमत, संवर्धन, वितरण, सेवा) और पाँच विचारधाराएँ (उत्पादन, उत्पाद, विक्रय, विपणन, सामाजिक विपणन)। विपणन मिश्र 4P है: उत्पाद (ब्रांड, लेबल, पैकेजिंग के साथ), कीमत (लागत, माँग, प्रतियोगिता, सरकारी नियम, उद्देश्य और विपणन तरीकों से तय), स्थान (माध्यम और भौतिक वितरण) और संवर्धन (विज्ञापन, व्यक्तिगत विक्रय, विक्रय संवर्धन, जनसंपर्क)।
- उपभोक्ता व्यवहार: लोग क्यों और कैसे ख़रीदते हैं – उपभोक्ता व्यवहार यह अध्ययन है कि लोग वस्तुएँ और सेवाएँ कैसे चुनते, ख़रीदते, इस्तेमाल करते और छोड़ते हैं। ज़्यादातर ख़रीद के पाँच चरण होते हैं: ज़रूरत पहचानना, जानकारी खोजना, विकल्पों का मूल्यांकन, ख़रीद और ख़रीद के बाद की भावना। प्रेरणाएँ (ज़रूरत, आनंद, प्रतिष्ठा, दूसरों की मदद) ख़रीदने का धक्का देती हैं; ब्रेक (दाम, जोखिम, आदत) रोकते हैं। व्यक्तिगत, मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कारक हर चुनाव पर असर डालते हैं। कंपनियाँ डेटा से उपभोक्ता प्रोफ़ाइल बनाती हैं और खंडों को लक्ष्य करती हैं। डिजिटल ने रिश्ता बदला है: डिजिटल निशान, व्यक्तिगत ऑफ़र, चैट सहायता, समीक्षाएँ और सोशल नेटवर्क, और ऑनलाइन सरकारी सेवाएँ (ई-गवर्नेंस)। संतुष्टि अनुभव की उम्मीद से तुलना है, और अनुमानित मूल्य ख़रीदार को मिलने वाला लाभ घटा उसका त्याग है। अनुभवात्मक विपणन सिर्फ़ उत्पाद नहीं, यादगार अनुभव बेचता है।
- मूल्य निर्धारण रणनीतियाँ: फर्म दाम कैसे तय करती है – दाम लागत से शुरू होता है (लागत-जमा: लागत + मार्क-अप), पर यह इससे सीमित होता है कि ग्राहक कितना स्वीकार करेंगे (मूल्य-संवेदनशीलता या लोच)। फर्म सबके लिए एक दाम, अलग-अलग ग्राहकों के लिए अलग दाम, पैकेज दाम, यील्ड मैनेजमेंट, डायनामिक प्राइसिंग या मुफ़्त मॉडल चुन सकती है।
- वितरण माध्यम: सामान आप तक कैसे पहुँचता है – वितरण माध्यम वह रास्ता है जिससे सामान उत्पादक से उपभोक्ता तक जाता है। प्रत्यक्ष माध्यम में कोई मध्यस्थ नहीं; अप्रत्यक्ष में थोक और खुदरा विक्रेता सेवाएँ और अपना लाभ जोड़ते हैं। इंटरनेट से कंपनियाँ मध्यस्थ हटा सकती हैं, पर नए मध्यस्थ भी आते हैं। कंपनियाँ सघन, चयनात्मक या अनन्य पहुँच चुनती हैं, और क्योंकि ग्राहक ऑनलाइन और दुकान के बीच घूमते हैं, सब माध्यम ओमनीचैनल में जोड़े जाते हैं।
- ई-कॉमर्स – ई-कॉमर्स यानी इंटरनेट पर वस्तुओं और सेवाओं को ख़रीदना-बेचना। यह गैर-स्टोर खुदरा का एक रूप है, जैसे टेलीमार्केटिंग और कैटलॉग बिक्री। कौन किसे बेचता है, इसके अनुसार यह B2C, B2B, C2C या D2C हो सकता है। मार्केटप्लेस एक प्लेटफ़ॉर्म पर कई विक्रेताओं और ख़रीदारों को जोड़ता है और कमीशन कमाता है। एम-कॉमर्स मोबाइल फ़ोन पर ई-कॉमर्स है, अक्सर डिजिटल भुगतान के साथ। असली दुकानें भी QR कोड, स्क्रीन और क्लिक एंड कलेक्ट से डिजिटल बन रही हैं; सब चैनल जोड़ने वाली कंपनियाँ ओमनीचैनल हैं। हर ऑर्डर के पीछे ई-रिटेल लॉजिस्टिक्स है: गोदाम, चुनना-पैक करना, हब, अंतिम मील डिलीवरी और वापसी। ई-मार्केटिंग (सर्च, सोशल मीडिया, ईमेल) ग्राहकों को ऑनलाइन दुकान तक लाती है।
- विज्ञापन – विज्ञापन एक पहचाने हुए प्रायोजक का भुगतान किया हुआ, अवैयक्तिक संदेश है, जो जनसंचार माध्यमों से लक्षित दर्शकों को समझाने के लिए भेजा जाता है। यह संचार प्रक्रिया पर चलता है: विज्ञापनदाता → संदेश → माध्यम → दर्शक → प्रतिक्रिया। इसके उद्देश्य हैं सूचना देना, समझाना और याद दिलाना, और अच्छा विज्ञापन लोगों को AIDA से गुज़ारता है: ध्यान, रुचि, इच्छा, कार्य। विज्ञापन कई प्रकार (उत्पाद, संस्थागत, जनसेवा, तुलनात्मक) और रूपों (प्रिंट, प्रसारण, बाहरी, ऑनलाइन) के होते हैं। कंपनियाँ पहुँच, लक्ष्य, प्रति हज़ार लागत (CPM) और संदेश के अनुसार माध्यम और सपोर्ट चुनती हैं। संचार के दूसरे साधन हैं प्रत्यक्ष विपणन, बिक्री संवर्धन, प्रायोजन और इवेंट।
- ग्राहक संबंध प्रबंधन (CRM) – ग्राहक संबंध प्रबंधन का मतलब है एक बार की बिक्री की जगह ग्राहकों से लंबा रिश्ता बनाना। फ़र्में हर टचपॉइंट पर ग्राहक अनुभव सुधारती हैं, लॉयल्टी कारणों और कार्यक्रमों से ग्राहक रोकती हैं, ग्राहक आजीवन मूल्य (सालाना ख़र्च × साल × मार्जिन) आँकती हैं, CRM टूल में रिकॉर्ड रखती हैं और इन्फ़्लुएंसर व कम्युनिटी मैनेजर से ऑनलाइन बात करती हैं।
8. Specific option — human resources and communication
Is recruitment enough to meet skill needs? · Can all work be evaluated? · Skills management and employability · Well-being at work and performance · Health and safety at work · Individual pay and recognition · Tensions and cohesion · Social dialogue and communication
- नियुक्तिकरण: भर्ती, चयन और प्रशिक्षण – नियुक्तिकरण का मतलब है पदों को सही लोगों से भरना और उन्हें कुशल बनाए रखना। यह मानव संसाधन प्रबंधन का भाग है। इसकी प्रक्रिया मानव शक्ति के अनुमान से शुरू होकर भर्ती, चयन, स्थापन, प्रशिक्षण, मूल्यांकन, पदोन्नति और पारिश्रमिक तक जाती है। भर्ती आंतरिक या बाहरी स्रोतों से आवेदक लाती है। चयन परीक्षा, साक्षात्कार और जाँच से सबसे अच्छे को चुनता है। प्रशिक्षण कार्य पर (प्रवेश, शिक्षुता, इंटर्नशिप, कोचिंग) या कार्य से पृथक (प्रकोष्ठ, कक्षा, केस स्टडी) होता है।
- कार्य-निष्पादन मूल्यांकन (परफ़ॉर्मेंस अप्रेज़ल) – कार्य-निष्पादन मूल्यांकन यह आँकना है कि कर्मचारी अपना काम कितना अच्छा करता है। तरीक़े: प्रबंधक की रेटिंग, स्व-मूल्यांकन, उद्देश्य आधारित प्रबंधन और 360 डिग्री फ़ीडबैक। फ़र्में वार्षिक समीक्षा और अलग से करियर (पेशेवर) समीक्षा करती हैं, और कौशल मूल्यांकन से कमियाँ ढूँढकर प्रशिक्षण योजना बनाती हैं। हर काम आँकड़ों में नहीं नापा जा सकता, इसलिए निष्पक्ष मूल्यांकन के लिए साफ़ मापदंड, प्रमाण और पक्षपात से सावधानी चाहिए।
- प्रशिक्षण और कौशल विकास – हर काम के लिए कुछ कौशल (हुनर) चाहिए। प्रशिक्षण उस कमी को भरता है जो इंसान के पास मौजूद कौशल और काम की ज़रूरत के बीच होती है। सतत प्रशिक्षण पूरी ज़िंदगी कौशल ताज़ा रखता है, ई-लर्निंग इंटरनेट से अपनी रफ़्तार पर सीखने देती है, कौशल विकास योजना साल-दर-साल लक्ष्य तय करती है, व्यक्तिगत प्रशिक्षण खाता हर कर्मचारी को सीखने का क्रेडिट देता है, और प्रशिक्षण से लोग नौकरी या करियर बदल सकते हैं। इन सबसे रोज़गार योग्यता यानी काम पाने और टिकाए रखने की ताक़त बढ़ती है।
- काम पर प्रेरणा, भलाई और प्रदर्शन – लोग तब सबसे अच्छा काम करते हैं जब उनकी ज़रूरतें पूरी हों और काम में अर्थ हो। मास्लो कहते हैं कि ज़रूरतें शरीर की, सुरक्षा, अपनापन, सम्मान से बढ़कर आत्म-विकास तक जाती हैं। हर्ज़बर्ग कारकों को दो भागों में बाँटते हैं: स्वच्छता कारक (वेतन, सुरक्षित जगह, नियम) सिर्फ़ नाखुशी रोकते हैं, जबकि प्रेरक (प्रशंसा, विकास, दिलचस्प काम) असली जोश पैदा करते हैं। कार्य-जीवन की गुणवत्ता और अर्गोनॉमिक्स (शरीर के अनुकूल कार्यस्थल) सेहत बचाते हैं। कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) बताता है कि कंपनी कर्मचारियों, समाज और प्रकृति से कैसा व्यवहार करती है। बेहतर भलाई से आमतौर पर प्रदर्शन बढ़ता है।
- स्वास्थ्य और सुरक्षा: ख़तरे, जोखिम और नियंत्रण – ख़तरा (hazard) वह चीज़ है जो नुकसान कर सकती है। जोखिम (risk) बताता है नुकसान कितना संभव है और कितना गंभीर होगा: जोखिम = संभावना × गंभीरता। जोखिम आकलन में ख़तरे ढूँढते हैं, किसे नुकसान हो सकता है तय करते हैं, अंक देते हैं, नियंत्रण जोड़ते हैं और बाद में दोबारा जाँचते हैं। नियंत्रण का क्रम: हटाना, बदलना, इंजीनियरिंग नियंत्रण, नियम और प्रशिक्षण, और आख़िर में PPE। सुरक्षा चिह्न रंग और आकार से बोलते हैं। वर्कशॉप, कला कक्ष और कार्यस्थल पर गार्ड, ताज़ी हवा, लेबल, खुले रास्ते और प्राथमिक उपचार चाहिए। ज़्यादातर देशों में क़ानून मालिक और कर्मचारी दोनों पर सुरक्षा की ज़िम्मेदारी डालते हैं।
- पारिश्रमिक: कर्मचारियों को भुगतान और उसकी लागत – पारिश्रमिक वह सब है जो कर्मचारी को काम के बदले मिलता है: वेतन, बोनस, अतिरिक्त लाभ और बाँटा हुआ मुनाफ़ा। सामाजिक अंशदान के कारण नियोक्ता जितना देता है वह कर्मचारी के हाथ में आने वाले वेतन से ज़्यादा होता है। फर्म श्रम-लागत, औसत घंटा दर और स्टाफ़ लागत अनुपात देखती हैं, और बोनस, लाभ तथा लाभ-साझेदारी से स्टाफ़ को प्रेरित रखती हैं।
- औद्योगिक संबंध: नियोक्ता और कर्मचारी कैसे साथ चलते हैं – औद्योगिक संबंध (कर्मचारी संबंध भी कहते हैं) किसी व्यवसाय और उसके कर्मचारियों के बीच का रिश्ता है। अच्छे संबंध दोतरफ़ा संचार और कर्मचारियों को आवाज़ देने पर टिके होते हैं, चाहे वे ख़ुद बोलें या यूनियन और वर्क्स काउंसिल के ज़रिए। वेतन और शर्तें अक्सर सामूहिक सौदेबाज़ी से तय होती हैं। बातचीत टूटे तो हड़ताल जैसी औद्योगिक कार्रवाई हो सकती है; सुलह, मध्यस्थता या पंचनिर्णय जैसी निष्पक्ष मदद विवाद ख़त्म कर सकती है।
9. Specific option — management information systems
How an organisation handles information · Are digital changes risk-free? · The IS function and organisational choices · Information-system projects · Turning data into information · Can management problems be automated? · Standards and the flow of information · Network technologies and collaboration
- सूचना प्रणाली (Information System) – सूचना प्रणाली (IS) लोगों, हार्डवेयर, सॉफ़्टवेयर, डेटा, नेटवर्क और प्रक्रियाओं का ऐसा समूह है जो मिलकर सूचना जुटाता, सहेजता, संसाधित करता और बाँटता है। यह कच्चे डेटा को एक शृंखला से काम की सूचना में बदलती है: जुटाना, कोड करना, भेजना, सहेजना, संसाधित करना और दिखाना। प्रणाली एक चक्र में बनती है (योजना, विश्लेषण, डिज़ाइन, निर्माण, परीक्षण, चलाना-सुधारना)। यह काम तेज़ करती है और ज्ञान बाँटने देती है, पर इसमें ख़र्च, ख़राबी, हैकिंग और जड़ता (rigidity) का ख़तरा भी है।
- साइबर सुरक्षा: ख़तरे और उनसे बचाव – साइबर सुरक्षा कंप्यूटर, नेटवर्क और डेटा की रक्षा करती है। इसके लक्ष्य हैं गोपनीयता, अखंडता और उपलब्धता (CIA त्रिक)। आम ख़तरे: मालवेयर, फ़िशिंग व सोशल इंजीनियरिंग, ब्रूट फ़ोर्स और डिनायल ऑफ़ सर्विस। बचाव: मज़बूत प्रमाणीकरण, कूटलेखन, फ़ायरवॉल, एंटी-मालवेयर, अपडेट, पहुँच नियंत्रण और बैकअप।
- परियोजना प्रबंधन – परियोजना (project) एक बार का काम है जिसका साफ़ लक्ष्य, शुरुआत और अंत होता है। परियोजना प्रबंधन यानी उसकी योजना बनाकर और नियंत्रण करके उसे तय दायरे में, समय पर और बजट में पूरा करना। जीवन चक्र: आरंभ, योजना, कार्यान्वयन, निगरानी और समापन। योजनाकार काम को छोटे कामों (WBS) में बाँटते हैं, गैंट चार्ट पर रखते हैं, क्रांतिक पथ ढूँढते हैं, जोखिम सँभालते हैं और अंत में सीख की समीक्षा करते हैं।
- डेटाबेस संकल्पनाएँ: DBMS, रिलेशन और की – अलग-अलग फ़ाइलों में डेटा रखने से दोहराव, असंगति और कमज़ोर सुरक्षा होती है। डेटाबेस संबंधित डेटा को एक व्यवस्थित जगह रखता है, और DBMS (जैसे MySQL) उसे सँभालने वाला सॉफ़्टवेयर है। रिलेशनल मॉडल में डेटा तालिकाओं (रिलेशन) में रहता है, जिनमें स्तंभ (एट्रिब्यूट) और पंक्तियाँ (टपल) होती हैं; डोमेन किसी स्तंभ के अनुमत मानों का समूह है। कैंडिडेट की हर पंक्ति को अलग पहचानती है; उनमें से एक प्राइमरी की चुनी जाती है और बाकी ऑल्टरनेट की होती हैं।
- समस्या समाधान का परिचय – कंप्यूटर से समस्या हल करने के चरण: समस्या का विश्लेषण (इनपुट, आउटपुट, नियम), एल्गोरिद्म बनाना (सीमित, स्पष्ट, क्रमबद्ध चरण), प्रोग्रामिंग भाषा में कोड करना, अलग-अलग इनपुट से जाँचना (टेस्ट), और डीबग (गलतियाँ ढूँढकर हटाना)। एल्गोरिद्म को फ़्लोचार्ट (अंडाकार = शुरू/रुको, समांतर चतुर्भुज = इनपुट/आउटपुट, आयत = प्रक्रिया, हीरा = निर्णय, तीर = दिशा) या स्यूडोकोड (सरल संरचित भाषा) में दिखाते हैं। विघटन बड़ी समस्या को छोटी उप-समस्याओं में तोड़ता है।
- नेटवर्क के प्रकार, टोपोलॉजी और प्रोटोकॉल: आकार, ढाँचा और नियम – नेटवर्क आकार से बँटते हैं: PAN (एक व्यक्ति के आस-पास कुछ मीटर), LAN (कमरा, इमारत या परिसर), MAN (शहर) और WAN (देश या दुनिया)। टोपोलॉजी नोड्स के जुड़ने का ढाँचा है: बस (सब एक बैकबोन केबल पर), स्टार (सब एक केंद्रीय हब या स्विच से) और ट्री (स्तरों में जुड़े स्टार)। प्रोटोकॉल नियमों का समूह है: TCP/IP इंटरनेट पर डेटा तोड़ता और रास्ता देता है, HTTP और HTTPS वेब पेज लाते हैं, FTP फ़ाइलें भेजता है, SMTP ईमेल भेजता है, POP3 ईमेल डाउनलोड करता है, PPP दो उपकरण सीधे जोड़ता है, TELNET दूर के कंप्यूटर में लॉग-इन कराता है, और VoIP इंटरनेट पर आवाज़ ले जाता है।