वित्तीय विवरण: अर्थ और उपयोग
वित्तीय विवरण लेखांकन प्रक्रिया की अंतिम रिपोर्ट हैं: व्यापार और लाभ-हानि खाता (एक अवधि का लाभ या हानि) और तुलन पत्र (एक तारीख़ की वित्तीय स्थिति)।
उपयोग
- अवधि का लाभ या हानि जानना।
- अंतिम तारीख़ पर संपत्ति, देयता और पूँजी दिखाना।
- स्वामी की योजना और प्रबंधक का लागत नियंत्रण।
- ऋण आवेदन और कर रिटर्न में सहायता।
- सालों और फ़र्मों की तुलना।
पूँजीगत और आयगत: व्यय और प्राप्तियाँ
- पूँजीगत व्यय: स्थायी संपत्ति पाने या सुधारने पर; लाभ एक साल से ज़्यादा (मशीन, भवन विस्तार, स्थापना)। तुलन पत्र में।
- आयगत व्यय: चलाने का ख़र्च, लाभ साल में ख़त्म (मज़दूरी, किराया, मरम्मत)। व्यापार या लाभ-हानि में।
- पूँजीगत प्राप्तियाँ: सामान्य व्यापार से नहीं; लंबा ढाँचा बदलें (पूँजी लाई, ऋण लिया, स्थायी संपत्ति बेची)। तुलन पत्र में (संपत्ति बिक्री पर लाभ लाभ-हानि में)।
- आयगत प्राप्तियाँ: सामान्य व्यापार से (बिक्री, कमीशन, किराया, ब्याज)। व्यापार या लाभ-हानि में जमा।
आस्थगित आयगत व्यय
ऐसा आयगत व्यय जो बहुत बड़ा हो और जिसका लाभ कई साल चले, जैसे नया उत्पाद लाने के लिए भारी विज्ञापन या बड़ा शोध। इस साल का हिस्सा ही लाभ-हानि खाते में; बाकी पूरी तरह बट्टे खाते डलने तक तुलन पत्र में। (आज के लेखांकन मानकों में ज़्यादातर ऐसे व्यय तुरंत बट्टे खाते; कक्षा 11 में हम बाँटने का विचार सीखते हैं।)
उदाहरण: विज्ञापन ₹90,000, लाभ 3 साल → हर साल ₹30,000 लाभ-हानि में; पहले साल के बाद ₹60,000 बाकी दिखता है।
प्रारंभिक प्रविष्टि
नए साल की शुरुआत में पिछले साल के तुलन पत्र की संपत्ति, देयता और पूँजी के शेष रोज़नामचा मुख्य में प्रारंभिक प्रविष्टि से नई पुस्तकों में लाए जाते हैं:
विविध संपत्ति खाते नामे (हर संपत्ति); विविध देयता खातों से (हर देयता); पूँजी खाते से (संतुलन रकम = संपत्ति − देयता)।
नाममात्र खाते (व्यय, आय) आगे नहीं आते, क्योंकि वे लाभ-हानि खाते में बंद हो चुके।
व्यापार और लाभ-हानि खाता
व्यापार खाता (नामे | जमा)
नामे: आरंभिक स्टॉक, क्रय (वापसी घटाकर), प्रत्यक्ष व्यय — मज़दूरी, आवक भाड़ा, ढुलाई, ईंधन व बिजली, आयात शुल्क, निर्माण व्यय। जमा: बिक्री (वापसी घटाकर), अंतिम स्टॉक। शेष = सकल लाभ (जमा बड़ा) या सकल हानि।
समापन प्रविष्टियाँ
व्यापार खाता नामे; आरंभिक स्टॉक, क्रय, प्रत्यक्ष व्यय खातों से। विक्रय खाता नामे; व्यापार खाते से। अंतिम स्टॉक खाता नामे; व्यापार खाते से।
लाभ-हानि खाता
नामे: सकल हानि (हो तो), अप्रत्यक्ष व्यय — कार्यालय व प्रशासन (वेतन, किराया, छपाई), विक्रय व वितरण (विज्ञापन, जावक भाड़ा, दी गई छूट, डूबत ऋण), वित्तीय (दिया ब्याज), मूल्यह्रास, असामान्य हानियाँ। जमा: सकल लाभ, अन्य आय (कमीशन, किराया, ब्याज, प्राप्त छूट)। शेष = शुद्ध लाभ, पूँजी खाते में (लाभ-हानि खाता नामे; पूँजी खाते से)।
सकल लाभ, परिचालन लाभ और शुद्ध लाभ
- सकल लाभ = शुद्ध बिक्री − बेचे माल की लागत; बेचे माल की लागत = आरंभिक स्टॉक + शुद्ध क्रय + प्रत्यक्ष व्यय − अंतिम स्टॉक।
- परिचालन लाभ = सकल लाभ − परिचालन व्यय (कार्यालय, प्रशासन, विक्रय, वितरण, मूल्यह्रास) + परिचालन आय। मुख्य कारोबार से लाभ।
- शुद्ध लाभ = परिचालन लाभ + गैर-परिचालन आय (ब्याज, लाभांश, संपत्ति बिक्री पर लाभ) − गैर-परिचालन व्यय व हानि (ऋण पर ब्याज, आग से हानि, संपत्ति बिक्री पर हानि)।
तुलन पत्र: समूहन और क्रमबंधन
तुलन पत्र अंतिम तारीख़ पर एक ओर पूँजी व देयताएँ और दूसरी ओर संपत्तियाँ दिखाता है। पूँजी: आरंभिक पूँजी + शुद्ध लाभ (या − शुद्ध हानि) + नई पूँजी − आहरण।
समूहन
एक जैसी मदों को शीर्षकों में रखना: गैर-चालू संपत्ति (मूर्त, अमूर्त, दीर्घकालीन निवेश), चालू संपत्ति (स्टॉक, देनदार, प्राप्य बिल, नकद, बैंक, पूर्वदत्त व्यय); पूँजी, दीर्घकालीन देयता (ऋण), चालू देयता (लेनदार, देय बिल, अदत्त व्यय)।
क्रमबंधन
समूहों को तय क्रम में रखना:
- तरलता का क्रम: सबसे तरल पहले — नकद, बैंक, देनदार, स्टॉक … भूमि अंत में; चालू देयता पहले, पूँजी अंत में।
- स्थायित्व का क्रम: सबसे स्थायी पहले — भूमि, भवन, मशीन … नकद अंत में; पूँजी पहले, चालू देयता अंत में (कंपनियाँ यही अपनाती हैं)।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- बेचे माल की लागत = आरंभिक स्टॉक + शुद्ध क्रय + प्रत्यक्ष व्यय − अंतिम स्टॉक
- सकल लाभ = शुद्ध बिक्री − बेचे माल की लागत
- परिचालन लाभ = सकल लाभ − परिचालन व्यय + परिचालन आय
- शुद्ध लाभ = परिचालन लाभ + गैर-परिचालन आय − गैर-परिचालन व्यय
- अंतिम पूँजी = आरंभिक पूँजी + शुद्ध लाभ + नई पूँजी − आहरण
- संपत्ति = देयता + पूँजी (तुलन पत्र)
हल किए गए उदाहरण
1. आरंभिक स्टॉक ₹40,000; क्रय ₹1,80,000; मज़दूरी ₹20,000; अंतिम स्टॉक ₹50,000; बिक्री ₹3,00,000। सकल लाभ?
लागत = 1,90,000; सकल लाभ = ₹1,10,000।
2. आगे: वेतन ₹40,000, किराया ₹12,000, विज्ञापन ₹8,000, प्राप्त ब्याज ₹2,000, आग से हानि ₹4,000। परिचालन और शुद्ध लाभ?
परिचालन लाभ ₹50,000; शुद्ध लाभ = 50,000 + 2,000 − 4,000 = ₹48,000।
3. बिक्री ₹5,00,000, विक्रय वापसी ₹20,000, क्रय ₹3,20,000, क्रय वापसी ₹10,000, आवक भाड़ा ₹6,000, आरंभिक स्टॉक ₹50,000, अंतिम स्टॉक ₹70,000। सकल लाभ?
शुद्ध बिक्री 4,80,000; लागत = 50,000 + 3,10,000 + 6,000 − 70,000 = 2,96,000; सकल लाभ ₹1,84,000।
4. आरंभिक पूँजी ₹2,00,000; शुद्ध लाभ ₹48,000; आहरण ₹18,000। अंतिम पूँजी?
₹2,30,000।
5. तरलता क्रम में लगाइए: मशीन, नकद, देनदार, स्टॉक, भूमि, बैंक।
नकद, बैंक, देनदार, स्टॉक, मशीन, भूमि।
6. प्रारंभिक प्रविष्टि: नकद 30,000; स्टॉक 50,000; मशीन 80,000; लेनदार 30,000; ऋण 40,000।
नकद नामे 30,000; स्टॉक नामे 50,000; मशीन नामे 80,000; लेनदारों से 30,000; ऋण से 40,000; पूँजी से 90,000 (संतुलन रकम)।
आम गलतियाँ
- जावक भाड़ा व्यापार खाते में लिखना। यह विक्रय व्यय है (लाभ-हानि)।
- बेचे माल की लागत में अंतिम स्टॉक घटाने की जगह जोड़ना।
- आहरण को लाभ-हानि में व्यय दिखाना। यह तुलन पत्र में पूँजी से घटता है।
- क्रमबंधन में तरलता और स्थायित्व का क्रम मिला देना।