लेखांकन समीकरण और दोहरी प्रविष्टि
संपत्ति वह है जो व्यवसाय के पास है (नकद, माल, फ़र्नीचर)। देनदारियाँ वे हैं जो उस पर बकाया हैं। पूँजी स्वामी का व्यवसाय में लगा पैसा है।
संपत्ति = देनदारियाँ + पूँजी। हमारी दुकान पर कोई कर्ज़ नहीं, इसलिए संपत्ति = पूँजी।
हर लेन-देन दो चीज़ें बदलता है, इसलिए समीकरण सही रहता है। यही दोहरी प्रविष्टि है: एक खाता नाम (डेबिट) होता है और दूसरा उतनी ही राशि से जमा (क्रेडिट)।
दर्ज करो और छाँटो: जर्नल और खाताबही
जर्नल पहली किताब है। हर लेन-देन तारीख के क्रम में दो खातों, डेबिट और क्रेडिट, के साथ लिखा जाता है।
उदाहरण: 400 नकद का माल खरीदा। माल खाता नाम 400, नकद खाता जमा 400।
खाताबही में हर मद का एक पन्ना (खाता) होता है: नकद, माल, किराया, बिक्री। खतौनी (posting) का मतलब है जर्नल की हर पंक्ति को सही खाते के पन्ने पर उतारना, ताकि हर मद का योग दिखे।
जाँचो और रिपोर्ट बनाओ: तलपट, लाभ, चिट्ठा
तलपट (trial balance) खाताबही के हर शेष को दो कॉलम में लिखता है। नाम का योग जमा के योग के बराबर होना चाहिए। रवि के लिए: नाम में नकद 710, माल 300, किराया 50, माल की लागत 100 = 1160। जमा में पूँजी 1000 और बिक्री 160 = 1160। मेल खाते हैं।
लाभ-हानि विवरण: बिक्री 160 − माल की लागत 100 − किराया 50 = लाभ 10।
चिट्ठा (balance sheet): संपत्ति 710 + 300 = 1010। पूँजी 1000 + लाभ 10 = 1010। बराबर।
तलपट का मेल खाना अच्छा संकेत है, पर इसका मतलब यह नहीं कि कोई गलती नहीं। दोनों तरफ़ गलत लिखी एक जैसी राशि भी मेल खाएगी।
खुद करके देखो और इस्तेमाल करो
लाभ पूँजी बढ़ाता है। हानि घटाती है। अगर स्वामी निजी काम के लिए नकद निकाले (आहरण, drawings) तो नकद और पूँजी दोनों घटते हैं।
खुद करके देखो
एक कॉपी लो। मान लो तुमने 500 से एक स्टॉल शुरू किया। पाँच सौदे लिखो: माल खरीदना, कुछ बेचना, एक बिल चुकाना आदि। हर सौदे के बाद नकद, माल और पूँजी लिखो। जाँचो कि संपत्ति अब भी पूँजी के बराबर है। फिर 3D में स्लाइडर से दूसरी कीमतें आज़माओ।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- संपत्ति = देनदारियाँ + पूँजी
- लाभ = बिक्री − बेचे माल की लागत − खर्च
- अंतिम पूँजी = प्रारंभिक पूँजी + लाभ − आहरण
- तलपट: कुल नाम = कुल जमा
हल किए गए उदाहरण
1. स्वामी 1000 नकद से शुरू करता है और 400 नकद का माल खरीदता है। नकद, माल और कुल संपत्ति?
नकद = 1000 − 400 = 600। माल = 400। कुल संपत्ति = 1000। यह नहीं बदली, सिर्फ़ रूप बदला।
2. 100 लागत का माल 160 नकद में बेचा। पूँजी 1000 थी, तो लाभ और नई पूँजी?
लाभ = 160 − 100 = 60। नई पूँजी = 1000 + 60 = 1060।
3. फिर 50 किराया चुकाया। अंतिम लाभ और पूँजी?
लाभ = 60 − 50 = 10। पूँजी = 1000 + 10 = 1010।
4. 400 नकद के माल की खरीद की जर्नल प्रविष्टि लिखो।
माल खाता नाम 400, नकद खाता जमा 400। दोनों तरफ़ 400।
आम गलतियाँ
- सौदा सिर्फ़ एक तरफ़ लिखना। हर सौदे में नाम और जमा दोनों होते हैं।
- किराये को संपत्ति गिनना। चुकाया किराया खर्च है और लाभ घटाता है।
- पूरी बिक्री 160 को लाभ मान लेना। पहले माल की लागत घटाओ।
- यह मानना कि तलपट मिलने का मतलब कोई गलती नहीं। राशियाँ भी जाँचो।