लेखांकन समीकरण क्या है?
व्यापार का हिसाब उसके मालिक से अलग रखा जाता है। व्यापार के पास जो कुछ है और काम आता है, जैसे रोकड़, माल, फ़र्नीचर या ग्राहकों से मिलने वाला पैसा, उसे परिसंपत्तियाँ (Assets) कहते हैं। हर परिसंपत्ति का पैसा किसी ने दिया है: या तो बाहरी लोगों ने, जैसे सप्लायर और बैंक (दायित्व, Liabilities), या मालिक ने (पूँजी, Capital)।
इसलिए दोनों तरफ़ हमेशा बराबर रहते हैं: परिसंपत्तियाँ = दायित्व + पूँजी। इसे लेखांकन समीकरण या तुलन-पत्र समीकरण कहते हैं।
लेन-देन के बाद भी संतुलन कैसे रहता है
हर लेन-देन कम से कम दो मदों को बदलता है। बदलाव सिर्फ़ चार तरह के होते हैं:
- एक परिसंपत्ति बढ़ी, दूसरी घटी (नकद फ़र्नीचर ख़रीदा): जोड़ नहीं बदलता।
- परिसंपत्ति बढ़ी, दायित्व बढ़ा (उधार माल, बैंक ऋण)।
- परिसंपत्ति घटी, दायित्व घटा (लेनदार को भुगतान, ऋण वापसी)।
- परिसंपत्ति और पूँजी साथ बदलीं (मालिक ने पैसा लगाया, आहरण किया, लाभ या हानि)।
हर बार दोनों तरफ़ बराबर रकम से बदलते हैं, इसलिए समीकरण सही रहता है। यही दोहरा लेखा प्रणाली (double entry system) का आधार है।
समीकरण के दूसरे रूप
इसे किसी भी समीकरण की तरह पलट सकते हैं: पूँजी = परिसंपत्तियाँ − दायित्व (मालिक का हिस्सा) और दायित्व = परिसंपत्तियाँ − पूँजी। व्यापार का लाभ पूँजी बढ़ाता है; आहरण और हानि उसे घटाते हैं।
3D तराज़ू पर ख़ुद करके देखें
तराज़ू के बाएँ पलड़े में परिसंपत्तियाँ हैं और दाएँ में दायित्व और पूँजी। हर ब्लॉक ₹5,000 का है। फ़्री प्ले में कोई लेन-देन चुनें: पहले एक तरफ़ बदलती है और डंडी झुकती है, फिर दूसरी तरफ़ बदलती है और डंडी फिर सीधी हो जाती है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- परिसंपत्तियाँ = दायित्व + पूँजी (A = L + C)
- पूँजी = परिसंपत्तियाँ − दायित्व
- दायित्व = परिसंपत्तियाँ − पूँजी
- अंतिम पूँजी = प्रारंभिक पूँजी + अतिरिक्त पूँजी + लाभ − आहरण
हल किए गए उदाहरण
1. अमन ₹80,000 नकद से व्यापार शुरू करता है। समीकरण दिखाइए।
परिसंपत्तियाँ (रोकड़) ₹80,000 = दायित्व ₹0 + पूँजी ₹80,000।
2. एक दुकान की परिसंपत्तियाँ ₹1,50,000 और दायित्व ₹40,000 हैं। पूँजी ज्ञात कीजिए।
पूँजी = परिसंपत्तियाँ − दायित्व = 1,50,000 − 40,000 = ₹1,10,000।
3. रोकड़ ₹60,000 = पूँजी ₹60,000। ₹15,000 का माल उधार ख़रीदा। नया समीकरण लिखिए।
रोकड़ ₹60,000 + माल ₹15,000 = लेनदार ₹15,000 + पूँजी ₹60,000, यानी ₹75,000 = ₹75,000।
आम गलतियाँ
- मालिक के निजी पैसे और व्यापार के पैसे को मिला देना। पूँजी वह रकम है जो व्यापार को मालिक को देनी है।
- सिर्फ़ एक तरफ़ बदलना। हर लेन-देन कम से कम दो मदें बदलता है; हर बार दोनों तरफ़ जाँचें।
- आहरण को परिसंपत्ति या ख़र्च लिखना। आहरण से रोकड़ घटती है और पूँजी घटती है।
- यह भूल जाना कि एक परिसंपत्ति से दूसरी ख़रीदने (नकद से फ़र्नीचर) पर कुल जोड़ नहीं बदलता।