बिलिंग प्रक्रिया
बिल (या बीजक) बिक्री का लिखित रिकॉर्ड है। यही बहीखाते का पहला सबूत है।
बिल के भाग
- विक्रेता का नाम, पता और कर पंजीकरण संख्या (भारत में GSTIN, दूसरे देशों में VAT नंबर)।
- बिल संख्या (क्रम से) और तारीख।
- खरीदार का नाम (उधार बिक्री में पता भी)।
- सामान: विवरण, मात्रा, दर, राशि (मात्रा × दर)।
- छूट, कर और कुल; भुगतान का तरीका।
- हस्ताक्षर या मुहर; वापसी जैसे नियम।
बिल के प्रकार
- कैश मेमो: नकद बिक्री के लिए; भुगतान तुरंत।
- उधार बीजक: माल अभी, भुगतान बाद में।
- डेबिट नोट / क्रेडिट नोट: माल लौटाने या दाम सुधारने पर भेजा जाता है।
चरण
- सामान और दाम जाँचो।
- नई क्रम संख्या के साथ बिल लिखो या छापो।
- भुगतान लो (या बकाया राशि दर्ज करो)।
- मूल प्रति ग्राहक को दो; एक प्रति बहीखाते के लिए रखो।
लेखांकन की बुनियाद: दोहरा लेखा
बहीखाता लेन-देन लिखना है। लेखांकन उससे आगे जाता है: उन्हें छाँटना, जोड़ना और समझाना।
खाता किसी एक चीज़ का रिकॉर्ड है, जैसे रोकड़, बिक्री, किराया या कोई ग्राहक। इसके दो पक्ष होते हैं: बाईं ओर नाम (डेबिट, Dr) और दाईं ओर जमा (क्रेडिट, Cr)।
दोहरे लेखे का नियम
हर लेन-देन कम से कम दो खातों पर असर डालता है, और नाम व जमा का जोड़ बराबर होता है।
- परिसंपत्तियाँ और खर्च नाम पक्ष में बढ़ते हैं।
- देयताएँ, पूँजी और आय जमा पक्ष में बढ़ते हैं।
उदाहरण: ₹500 का माल नकद बेचा → रोकड़ खाता नाम ₹500, विक्रय खाता जमा ₹500।
दोनों पक्ष हमेशा बराबर रहते हैं, इसलिए लेखांकन समीकरण सही रहता है: परिसंपत्तियाँ = देयताएँ + पूँजी।
जर्नल, खाता-बही और सहायक बहियाँ
जर्नल
जर्नल प्रारंभिक प्रविष्टि की पुस्तक है। लेन-देन तारीख के क्रम में लिखे जाते हैं: तारीख, नाम और जमा होने वाले खाते, राशि और छोटा विवरण (नैरेशन)।
खाता-बही (लेजर)
खाता-बही मुख्य पुस्तक है। हर खाते का अपना पन्ना (T-खाता) होता है। जर्नल से खाता-बही में प्रविष्टि ले जाना खतौनी (पोस्टिंग) कहलाता है। अवधि के अंत में हर खाते का शेष निकाला जाता है: दोनों पक्ष जोड़ो; अंतर ही शेष है।
सहायक बहियाँ
| बही | क्या लिखा जाता है |
|---|---|
| रोकड़ बही | सारा नकद आना और जाना (अक्सर बैंक भी) |
| क्रय बही | माल की उधार खरीद |
| विक्रय बही | माल की उधार बिक्री |
| क्रय वापसी बही | सप्लायर को लौटाया माल |
| विक्रय वापसी बही | ग्राहकों से लौटा माल |
| लघु रोकड़ बही | रोज़ के छोटे खर्च (चाय, डाक) |
| मुख्य जर्नल | जो किसी और बही में न आए |
इनसे समय बचता है, कई लोग एक साथ काम कर सकते हैं और गलती ढूँढना आसान होता है। फिर तलपट (ट्रायल बैलेंस) में सभी खातों के शेष लिखकर जाँचा जाता है कि कुल नाम = कुल जमा।
व्यापार खाता और लाभ-हानि खाता
व्यापार खाता (सकल लाभ)
बेचे गए माल की लागत = प्रारंभिक स्टॉक + खरीद + प्रत्यक्ष खर्च − अंतिम स्टॉक।
सकल लाभ = शुद्ध बिक्री − बेचे गए माल की लागत। अगर लागत ज़्यादा हो तो सकल हानि।
लाभ-हानि खाता (शुद्ध लाभ)
शुद्ध लाभ = सकल लाभ + अन्य आय − अप्रत्यक्ष खर्च (किराया, वेतन, बिजली, विज्ञापन, मूल्यह्रास)।
हल किया उदाहरण
प्रारंभिक स्टॉक ₹10,000; खरीद ₹50,000; अंतिम स्टॉक ₹15,000 → लागत = 10,000 + 50,000 − 15,000 = ₹45,000। बिक्री ₹70,000 → सकल लाभ = ₹25,000। खर्च ₹9,000 → शुद्ध लाभ = ₹16,000।
शुद्ध लाभ मालिक का होता है और तुलन-पत्र (बैलेंस शीट) में पूँजी में जुड़ता है।
करके देखें: 3D में और घर पर
3D के आख़िरी चरण में खर्च तब तक बढ़ाइए जब तक शुद्ध लाभ हानि न बन जाए। फिर अंतिम स्टॉक बढ़ाकर सकल लाभ बढ़ता देखिए। घर पर: एक हफ़्ते तक हर मिला और खर्च किया रुपया एक छोटी 'रोकड़ बही' में दो खानों, आया और गया, में लिखिए। अंत में अपना शेष निकालिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- बिल पर राशि = मात्रा × दर
- परिसंपत्तियाँ = देयताएँ + पूँजी
- कुल नाम = कुल जमा
- बेचे गए माल की लागत = प्रारंभिक स्टॉक + खरीद + प्रत्यक्ष खर्च − अंतिम स्टॉक
- सकल लाभ = शुद्ध बिक्री − बेचे गए माल की लागत
- शुद्ध लाभ = सकल लाभ + अन्य आय − अप्रत्यक्ष खर्च
हल किए गए उदाहरण
1. एक बिल में ₹60 वाले 5 रजिस्टर और ₹120 वाले 2 ज्योमेट्री बॉक्स हैं, 5% कर के साथ। कुल निकालिए।
5 × 60 = 300; 2 × 120 = 240। उप-योग = ₹540। कर = 0.05 × 540 = ₹27। कुल = ₹567।
2. मेहता एंड कंपनी से ₹8,000 का माल उधार खरीदा। कौन-सा खाता नाम और कौन-सा जमा होगा, और यह किस सहायक बही में लिखा जाएगा?
क्रय खाता नाम ₹8,000; मेहता एंड कंपनी जमा ₹8,000। क्रय बही में लिखा जाएगा।
3. ₹3,000 किराया नकद दिया। प्रविष्टि बताइए।
किराया (खर्च) खाता नाम ₹3,000; रोकड़ खाता जमा ₹3,000। रोकड़ बही में लिखा जाएगा।
4. रोकड़ खाता: नाम पक्ष का जोड़ ₹12,000, जमा पक्ष का जोड़ ₹7,500। शेष निकालिए।
12,000 − 7,500 = ₹4,500 नाम शेष (हाथ में नकद)।
5. प्रारंभिक स्टॉक ₹20,000; खरीद ₹80,000; आवक भाड़ा ₹2,000; अंतिम स्टॉक ₹25,000; बिक्री ₹1,05,000। सकल लाभ निकालिए।
लागत = 20,000 + 80,000 + 2,000 − 25,000 = ₹77,000। सकल लाभ = 1,05,000 − 77,000 = ₹28,000।
6. सकल लाभ ₹28,000; वेतन ₹12,000; बिजली ₹3,000; मिला कमीशन ₹1,000। शुद्ध लाभ निकालिए।
शुद्ध लाभ = 28,000 + 1,000 − 12,000 − 3,000 = ₹14,000।
आम गलतियाँ
- लेन-देन का सिर्फ़ एक पक्ष लिखना। हर लेन-देन में बराबर नाम और जमा चाहिए।
- उधार बिक्री को रोकड़ बही में लिखना। उधार बिक्री विक्रय बही में जाती है; रोकड़ बही में सिर्फ़ नकद लेन-देन।
- व्यापार खाते में अंतिम स्टॉक भूल जाना। इसे घटाना ज़रूरी है, वरना लागत ज़्यादा और लाभ कम दिखेगा।
- सकल और शुद्ध लाभ को मिलाना। सकल लाभ किराया, वेतन जैसे अप्रत्यक्ष खर्चों से पहले है; शुद्ध लाभ उनके बाद।