साझेदारी और साझेदारी विलेख क्या है?
साझेदारी उन लोगों का संबंध है जो सबके द्वारा (या सबकी ओर से किसी एक द्वारा) चलाए गए व्यापार का लाभ बाँटने पर सहमत हैं। हर व्यक्ति साझेदार है, सब मिलकर फर्म।
- कम से कम 2 व्यक्ति, अधिकतम 50।
- समझौता और लाभ के लिए व्यापार ज़रूरी।
- साझेदारों का दायित्व असीमित।
लिखित समझौता साझेदारी विलेख कहलाता है। इसमें पूँजी, लाभ-विभाजन अनुपात, पूँजी और आहरण पर ब्याज, वेतन या कमीशन, और प्रवेश, सेवानिवृत्ति, विघटन के नियम लिखे होते हैं।
विलेख न होने पर साझेदारी अधिनियम 1932 के नियम
- लाभ-हानि: बराबर।
- पूँजी पर ब्याज: नहीं।
- आहरण पर ब्याज: नहीं।
- वेतन या कमीशन: नहीं।
- साझेदार के ऋण पर ब्याज: 6% वार्षिक।
याद रखें: ऋण पर 6% हानि होने पर भी मिलता है, क्योंकि यह प्रभार है।
स्थायी और परिवर्तनशील पूँजी खाते
स्थायी पूँजी पद्धति: हर साझेदार के दो खाते। पूँजी खाता केवल लाई गई पूँजी (और अतिरिक्त पूँजी या स्थायी निकासी) दिखाता है। अलग चालू खाते में पूँजी पर ब्याज, वेतन, कमीशन, लाभ का हिस्सा, आहरण और आहरण पर ब्याज जाते हैं। पूँजी खाता सदा जमा शेष; चालू खाता नामे शेष भी दिखा सकता है।
परिवर्तनशील पूँजी पद्धति: केवल एक पूँजी खाता, सब मदें उसी में, इसलिए शेष हर साल बदलता है।
प्रश्न में कुछ न कहा हो तो परिवर्तनशील पद्धति अपनाएँ।
लाभ-हानि विनियोजन खाता
पहले लाभ-हानि खाते में शुद्ध लाभ निकालें। प्रभार यहीं आते हैं: साझेदार के ऋण पर ब्याज, साझेदार को किराया, प्रबंधक का कमीशन।
फिर लाभ-हानि विनियोजन खाता बताता है लाभ कैसे बँटा:
- जमा पक्ष: शुद्ध लाभ, आहरण पर ब्याज।
- नामे पक्ष: पूँजी पर ब्याज, वेतन, कमीशन, संचय में हस्तांतरण, और शेष लाभ अनुपात में।
पूँजी और आहरण पर ब्याज
पूँजी पर ब्याज = पूँजी × दर × समय। हर महीने बराबर आहरण पर: महीने की शुरुआत में 6.5 महीने, बीच में 6, अंत में 5.5 महीने (कुल राशि पर)।
लाभ कम हो तो
यदि पूँजी पर ब्याज विनियोजन है और लाभ कुल ब्याज से कम है, तो लाभ ब्याज के अनुपात में बँटेगा। हानि में ब्याज नहीं।
साझेदार को लाभ की गारंटी
कभी किसी साझेदार (अक्सर नए) को न्यूनतम लाभ का वादा होता है। उसका हिस्सा कम हो तो कमी उठाते हैं:
- कोई एक साझेदार, या
- सभी पुराने साझेदार अपने अनुपात में, या
- तय किए गए अनुपात में।
प्रविष्टि: गारंटी देने वाले का पूँजी/चालू खाता नामे, गारंटी पाने वाले का पूँजी/चालू खाता जमा।
पिछली समायोजन
खाते बंद होने के बाद ग़लती मिले (जैसे ब्याज छूट गया या अनुपात ग़लत) तो खाते दोबारा न खोलें; साझेदारों के खातों के बीच एक समायोजन प्रविष्टि करें।
- तालिका बनाएँ: हर साझेदार को क्या मिलना चाहिए था।
- उसमें से जो मिला घटाएँ।
- धन = उस साझेदार को जमा, ऋण = नामे। कुल शून्य होगा।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- पूँजी पर ब्याज = पूँजी × दर × महीने/12
- आहरण पर ब्याज (हर महीने बराबर, कुल D): शुरुआत 6.5/12, बीच 6/12, अंत 5.5/12
- बाँटने योग्य लाभ = शुद्ध लाभ + आहरण पर ब्याज − पूँजी पर ब्याज − वेतन − कमीशन − संचय
- कमीशन के बाद लाभ पर % = लाभ × दर ÷ (100 + दर)
- गारंटी की कमी = गारंटी राशि − वास्तविक हिस्सा
- विलेख नहीं: बराबर बँटवारा, पूँजी पर ब्याज नहीं, वेतन नहीं, ऋण पर 6%
हल किए गए उदाहरण
1. आशा और बिलाल की पूँजी ₹2,00,000 व ₹1,00,000। पूँजी पर 10% ब्याज, बिलाल का वेतन ₹24,000, अनुपात 3:2। शुद्ध लाभ ₹1,20,000। बाँटिए।
ब्याज: आशा ₹20,000, बिलाल ₹10,000। वेतन ₹24,000। बचा: 1,20,000 − 30,000 − 24,000 = ₹66,000। आशा 3/5 = ₹39,600; बिलाल 2/5 = ₹26,400।
2. C और D का विलेख नहीं। C ने ₹50,000 ऋण दिया। ऋण ब्याज से पहले लाभ ₹43,000। C पूँजी पर 10% और ऋण पर 12% माँगता है। निपटाइए।
अधिनियम लागू: पूँजी पर ब्याज नहीं; ऋण पर 6% = ₹3,000 (प्रभार)। बचा ₹40,000 बराबर: ₹20,000 प्रत्येक।
3. E हर महीने की शुरुआत में ₹2,000 निकालता है। आहरण पर 6% वार्षिक ब्याज निकालिए।
कुल ₹24,000; शुरुआत → 6.5 महीने। 24,000 × 6/100 × 6.5/12 = ₹780।
4. F की पूँजी 1 अप्रैल को ₹1,00,000; 1 अक्टूबर को ₹40,000 और लाया। 8% वार्षिक ब्याज निकालिए।
1,00,000 × 8% = ₹8,000; 40,000 × 8% × 6/12 = ₹1,600। कुल ₹9,600।
5. प्रबंधक को अपने कमीशन के बाद वाले लाभ पर 10% कमीशन। कमीशन से पहले लाभ ₹66,000।
66,000 × 10/110 = ₹6,000।
6. G, H 3:2 में बाँटते हैं। K को 1/6 हिस्सा, गारंटी ₹20,000; कमी G, H 3:2 में। लाभ ₹90,000।
K = 15,000; कमी ₹5,000। शेष 75,000 → G 45,000, H 30,000। कमी: G 3,000, H 2,000। अंतिम: G 42,000; H 28,000; K 20,000।
7. P, Q (पूँजी ₹60,000, ₹40,000; बराबर अनुपात) खाते बंद करने के बाद 10% पूँजी पर ब्याज भूल गए। समायोजन कीजिए।
मिलना चाहिए: P 6,000, Q 4,000। ये 10,000 बराबर बँट गए थे: दोनों −5,000। शुद्ध: P +1,000, Q −1,000। प्रविष्टि: Q का पूँजी खाता नामे ₹1,000, P का पूँजी खाता जमा।
8. X, Y 2:1। पूँजी पर ब्याज (विनियोजन) X ₹12,000, Y ₹6,000। लाभ केवल ₹9,000।
लाभ ब्याज से कम → ब्याज के अनुपात 2:1 में: X ₹6,000, Y ₹3,000।
आम गलतियाँ
- साझेदार के ऋण पर ब्याज को विनियोजन खाते में दिखाना। यह प्रभार है, लाभ-हानि खाते में जाता है।
- विलेख न होने पर पूँजी पर ब्याज दे देना। अधिनियम इसकी अनुमति नहीं देता।
- स्थायी पद्धति में आहरण पूँजी खाते में लिखना। यह चालू खाते में जाता है।
- पिछली समायोजन में हर मद की अलग प्रविष्टि। हर साझेदार का शुद्ध अंतर निकालकर एक ही प्रविष्टि।