ख्याति का अर्थ और प्रकृति
ख्याति फर्म की साख का मूल्य है, जिससे वह समान फर्मों के सामान्य लाभ से अधिक कमाती है। यह:
- अमूर्त संपत्ति है (दिखती नहीं), पर कृत्रिम संपत्ति नहीं;
- व्यापार से अलग नहीं बिकती;
- इसका मूल्य जल्दी बदल सकता है;
- व्यापार या उसका हिस्सा हाथ बदलने पर ही आँकी जाती है।
AS 26 के अनुसार केवल क्रय की गई ख्याति पुस्तकों में लिखी जाती है; स्वयं बनाई गई नहीं।
ख्याति को प्रभावित करने वाले कारक
- व्यापार की प्रकृति: स्थिर माँग वाला उत्पाद।
- स्थान: भीड़ वाली, पहुँचने में आसान जगह।
- कुशल प्रबंधन: अच्छी योजना से लागत कम।
- बाज़ार की स्थिति: एकाधिकार या कम प्रतियोगिता।
- विशेष लाभ: लाइसेंस, पेटेंट, सस्ती बिजली।
- गुणवत्ता और लंबा अच्छा इतिहास।
औसत लाभ विधि
ख्याति = औसत लाभ × क्रय वर्षों की संख्या।
पहले पिछले लाभ सामान्य करें: असामान्य लाभ-हानि (जैसे आग से हानि, ज़मीन बिक्री का लाभ) हटाएँ, छूटा वेतन घटाएँ।
भारित औसत लाभ
लाभ में बढ़ने या घटने की प्रवृत्ति हो तो हाल के वर्षों को ज़्यादा भार दें: भारित औसत = Σ(लाभ × भार) ÷ Σ भार।
अधिलाभ विधि
- लगी पूँजी = कुल संपत्तियाँ (ख्याति और कृत्रिम संपत्ति छोड़कर) − बाहरी दायित्व।
- सामान्य लाभ = लगी पूँजी × सामान्य दर ÷ 100।
- अधिलाभ = औसत लाभ − सामान्य लाभ।
- ख्याति = अधिलाभ × क्रय वर्ष।
पूँजीकरण विधि
(क) औसत लाभ का पूँजीकरण: पूँजीकृत मूल्य = औसत लाभ × 100 ÷ सामान्य दर। ख्याति = पूँजीकृत मूल्य − लगी पूँजी।
(ख) अधिलाभ का पूँजीकरण: ख्याति = अधिलाभ × 100 ÷ सामान्य दर।
एक ही आँकड़ों पर दोनों का उत्तर समान आता है।
पूँजी या चालू खातों से ख्याति का समायोजन
अनुपात बदलने, प्रवेश, सेवानिवृत्ति या मृत्यु पर लाभ पाने वाला साझेदार त्याग करने वाले को ख्याति का मूल्य देता है।
प्रविष्टि (AS 26, ख्याति खाता नहीं खुलता): लाभ पाने वाले का पूँजी/चालू खाता नामे, त्याग करने वाले का पूँजी/चालू खाता जमा — त्याग/लाभ अनुपात में।
पुस्तकों में पुरानी ख्याति हो तो पहले पुराने अनुपात में पुराने साझेदारों में अपलिखित करें।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- औसत लाभ = सामान्य किए गए लाभों का योग ÷ वर्ष
- ख्याति (औसत लाभ) = औसत लाभ × क्रय वर्ष
- भारित औसत लाभ = Σ(लाभ × भार) ÷ Σ भार
- लगी पूँजी = संपत्तियाँ (ख्याति, कृत्रिम छोड़कर) − बाहरी दायित्व
- सामान्य लाभ = लगी पूँजी × सामान्य दर ÷ 100
- अधिलाभ = औसत लाभ − सामान्य लाभ; ख्याति = अधिलाभ × क्रय वर्ष
- पूँजीकृत मूल्य = औसत लाभ × 100 ÷ दर; ख्याति = पूँजीकृत मूल्य − लगी पूँजी
- ख्याति = अधिलाभ × 100 ÷ सामान्य दर
हल किए गए उदाहरण
1. 4 वर्षों के लाभ: ₹50,000, ₹60,000, ₹55,000, ₹75,000। औसत लाभ के 3 वर्ष के क्रय पर ख्याति?
योग 2,40,000 ÷ 4 = ₹60,000। ख्याति = ₹1,80,000।
2. लाभ: 2023 ₹40,000 (आग से ₹10,000 हानि के बाद), 2024 ₹52,000 (ज़मीन बिक्री लाभ ₹4,000 सहित), 2025 ₹60,000। 2 वर्ष का क्रय।
सामान्य लाभ: 50,000; 48,000; 60,000। योग 1,58,000 ÷ 3 = 52,667 (लगभग)। ख्याति ≈ ₹1,05,333।
3. भार 1, 2, 3 वाले लाभ: ₹30,000, ₹45,000, ₹60,000। भारित औसत के 2 वर्ष का क्रय।
Σ = 3,00,000 ÷ 6 = ₹50,000। ख्याति ₹1,00,000।
4. लगी पूँजी ₹4,00,000; सामान्य दर 10%; औसत लाभ ₹55,000; अधिलाभ के 3 वर्ष का क्रय।
सामान्य लाभ ₹40,000; अधिलाभ ₹15,000; ख्याति ₹45,000।
5. उसी आँकड़े से औसत लाभ के पूँजीकरण द्वारा ख्याति।
55,000 × 100/10 = ₹5,50,000 − 4,00,000 = ₹1,50,000।
6. उसी आँकड़े से अधिलाभ के पूँजीकरण द्वारा।
15,000 × 100/10 = ₹1,50,000 (समान)।
7. संपत्तियाँ ₹6,00,000 (ख्याति ₹20,000 सहित); लेनदार ₹1,00,000; औसत लाभ ₹60,000; दर 12%। औसत लाभ पूँजीकरण से ख्याति?
लगी पूँजी = 5,80,000 − 1,00,000 = 4,80,000। पूँजीकृत = 5,00,000। ख्याति ₹20,000।
आम गलतियाँ
- असामान्य लाभ-हानि वाले लाभों का औसत लेना। पहले सामान्य करें।
- लगी पूँजी में पुरानी ख्याति गिन लेना।
- क्रय वर्ष और सामान्य दर को उलझाना। क्रय वर्ष से गुणा, दर से 100 में भाग।
- ख्याति सभी साझेदारों को जमा करना। केवल त्याग करने वालों को, त्याग अनुपात में।