स्टॉक के खाते और दो स्टॉक प्रणालियाँ
व्यापारिक स्टॉक चालू परिसंपत्ति है: दोबारा बेचने को ख़रीदा माल। जुड़े खाते: क्रय, क्रय वापसी, क्रय छूट, आवक भाड़ा, बिक्री, बिक्री वापसी और बेचे गए माल की लागत (COGS)।
| सतत (परपेचुअल) | आवधिक (पीरियॉडिक) | |
|---|---|---|
| स्टॉक कब अपडेट? | हर ख़रीद और बिक्री पर | सिर्फ़ अवधि के अंत की गिनती पर |
| माल ख़रीदना | Dr स्टॉक, Cr लेनदार | Dr क्रय, Cr लेनदार |
| माल बेचना | Dr देनदार, Cr बिक्री और Dr COGS, Cr स्टॉक | सिर्फ़ Dr देनदार, Cr बिक्री |
| COGS कैसे | कभी भी, रिकॉर्ड से | प्रारंभिक + शुद्ध क्रय − अंतिम गिनती |
| किसके लिए ठीक | स्कैनर और सॉफ़्टवेयर वाली दुकानें | बहुत सारी सस्ती चीज़ों वाली छोटी दुकानें |
स्टॉक मूल्यांकन विधियाँ: FIFO और भारित औसत
एक ही चीज़ अलग-अलग दाम पर ख़रीदी हो, तो नियम चाहिए कि कौन-सी लागत COGS में जाए।
- विशिष्ट पहचान: हर इकाई की असली लागत। अनोखी, महँगी चीज़ों (कार, गहने) के लिए।
- FIFO (पहले आया, पहले गया): सबसे पुरानी लागत पहले COGS में। अंतिम स्टॉक में नई लागत।
- भारित औसत: प्रति इकाई औसत लागत = उपलब्ध माल की कुल लागत ÷ कुल इकाइयाँ। सतत प्रणाली में हर ख़रीद के बाद नया औसत (चल औसत)।
- LIFO (बाद में आया, पहले गया) IFRS और Ind AS में मना है।
असर: दाम बढ़ें तो FIFO में COGS कम, लाभ ज़्यादा, कर ज़्यादा और अंतिम स्टॉक ज़्यादा। औसत बीच का नतीजा देता है। दाम गिरें तो असर उल्टा। जो विधि चुनो, लगातार वही अपनाओ।
स्टॉक की गिनती और स्टॉक की ग़लती का असर
सतत प्रणाली हो तब भी साल में कम से कम एक बार माल हाथ से गिना जाता है (भौतिक सत्यापन), आमतौर पर साल के अंत में या जब दुकान बंद/कम व्यस्त हो। चरण: माल का आना-जाना रोको, क्रमांकित गिनती पर्चियाँ लो, जोड़ी में गिनो (एक गिने, दूसरा जाँचे), रिकॉर्ड से मिलाओ, और अंतर (चोरी, टूट-फूट, ग़लती) की जाँच करो।
अंतिम स्टॉक की ग़लती सीधे लाभ में जाती है:
- अंतिम स्टॉक ज़्यादा → COGS कम → इस साल लाभ ज़्यादा।
- इस साल का अंतिम स्टॉक अगले साल का प्रारंभिक स्टॉक है, इसलिए अगले साल लाभ उतना ही कम। दो साल में ग़लती कट जाती है, पर दोनों साल ग़लत।
स्टॉक की सुरक्षा, आंतरिक नियंत्रण, तकनीक और टर्नओवर
आंतरिक नियंत्रण माल बचाते हैं और रिकॉर्ड सच्चे रखते हैं: गोदाम पर ताला, सीमित प्रवेश, काम का बँटवारा (जो माल रखे वह रिकॉर्ड न रखे), क्रमांकित प्राप्ति व निकासी पर्चियाँ, अचानक जाँच-गिनती, और बीमा।
तकनीक: बारकोड स्कैनर और POS बिलिंग हर बिक्री पर स्टॉक अपडेट करते हैं; RFID टैग बड़े माल को ट्रैक करते हैं; लेखा सॉफ़्टवेयर (Tally, QuickBooks, Zoho, SAP) स्टॉक, COGS और पुनःआदेश स्तर अपने-आप रखता है और कम स्टॉक पर चेतावनी देता है।
स्टॉक टर्नओवर = COGS ÷ औसत स्टॉक, जहाँ औसत स्टॉक = (प्रारंभिक + अंतिम) ÷ 2। स्टॉक में दिन = 365 ÷ टर्नओवर। ऊँचा टर्नओवर = माल तेज़ी से बिकता है (कम पैसा फँसा, कम ख़राबी)। बहुत ऊँचा हो तो शेल्फ़ ख़ाली रह सकती हैं। पिछले साल और मिलते-जुलते व्यवसायों से तुलना करो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- बिक्री योग्य माल = प्रारंभिक स्टॉक + शुद्ध क्रय
- COGS = बिक्री योग्य माल − अंतिम स्टॉक
- भारित औसत लागत प्रति इकाई = उपलब्ध माल की कुल लागत ÷ कुल इकाइयाँ
- स्टॉक टर्नओवर = COGS ÷ औसत स्टॉक; औसत स्टॉक = (प्रारंभिक + अंतिम) ÷ 2
- स्टॉक में दिन = 365 ÷ स्टॉक टर्नओवर
हल किए गए उदाहरण
1. प्रारंभिक 10 इकाई @ 10; ख़रीद 20 @ 12 और 10 @ 15। कुल इकाइयाँ और लागत?
इकाइयाँ: 10 + 20 + 10 = 40। लागत: 100 + 240 + 150 = 490।
2. इन परतों से 25 इकाई बिकीं। FIFO से COGS और अंतिम स्टॉक?
पुरानी पहले: 10 × 10 = 100, फिर 15 × 12 = 180। COGS = 280। बचा: 5 × 12 + 10 × 15 = 210। जाँच: 280 + 210 = 490।
3. वही आँकड़े, भारित औसत विधि।
औसत = 490 ÷ 40 = 12.25। COGS = 25 × 12.25 = 306.25। अंतिम = 15 × 12.25 = 183.75। जाँच: 490।
4. 25 इकाई 20-20 में बिकीं। दोनों विधियों से सकल लाभ?
बिक्री = 500। FIFO: 500 − 280 = 220। औसत: 500 − 306.25 = 193.75। दाम बढ़ रहे थे, इसलिए FIFO लाभ ज़्यादा।
5. अंतिम स्टॉक 210 होना था पर 260 गिना गया। इस साल और अगले साल COGS व लाभ पर असर?
COGS 50 कम, इस साल लाभ 50 ज़्यादा। अगले साल प्रारंभिक स्टॉक 50 ज़्यादा, COGS 50 ज़्यादा, लाभ 50 कम।
6. प्रारंभिक स्टॉक 100, अंतिम 210, COGS 280। टर्नओवर और स्टॉक में दिन?
औसत स्टॉक = (100 + 210) ÷ 2 = 155। टर्नओवर = 280 ÷ 155 ≈ 1.81 बार। दिन = 365 ÷ 1.81 ≈ 202 दिन।
आम गलतियाँ
- सोचना कि FIFO में सबसे पुराना डिब्बा ही पहले निकालना ज़रूरी है। यह लागत का नियम है; डिब्बे किसी भी क्रम में जा सकते हैं।
- इकाई दामों का साधारण औसत (10, 12, 15 → 12.33) लेना, जबकि कुल लागत ÷ कुल इकाइयाँ (12.25) चाहिए।
- कहना कि अंतिम स्टॉक ज़्यादा दिखाने से लाभ घटता है। लाभ बढ़ता है, क्योंकि COGS कम होता है।
- टर्नओवर में औसत स्टॉक के बजाय सिर्फ़ अंतिम स्टॉक लेना।