लेखांकन चक्र क्या है?
सेवा व्यवसाय माल नहीं, काम बेचता है: ट्यूटर, सैलून, सफ़ाई सेवा। इसकी पैसे की कहानी हर लेखा अवधि (महीना, तिमाही या साल) में दोहराई जाती है। इन दोहराए जाने वाले चरणों को लेखांकन चक्र कहते हैं।
- स्रोत दस्तावेज़ (बिल, रसीद, बैंक पर्ची) से लेन-देन का विश्लेषण।
- जर्नल में डेबिट-क्रेडिट के रूप में लिखना।
- हर पंक्ति की खाताबही में खतौनी (पोस्टिंग)।
- असमायोजित तलपट बनाना।
- समायोजन प्रविष्टियाँ, फिर समायोजित तलपट।
- वित्तीय विवरण: आय विवरण, स्वामी की पूँजी का विवरण, तुलन-पत्र (बैलेंस शीट)।
- समापन प्रविष्टियाँ लिखना और खतौनी।
- समापन-बाद तलपट।
चरण 1–3 पूरी अवधि चलते हैं। चरण 4–8 अवधि के अंत में।
सामान्य रूप से स्वीकृत लेखा सिद्धांत (GAAP)
GAAP वे साझा नियम हैं जिनसे खाते निष्पक्ष और तुलना योग्य बनते हैं। कई देश IFRS अपनाते हैं; भारत में Ind AS है, जो IFRS पर आधारित है। चक्र में काम आने वाले विचार वही हैं:
- व्यावसायिक इकाई: मालिक का निजी पैसा अलग। मालिक नकद ले तो वह आहरण है, ख़र्च नहीं।
- लेखा अवधि: समय को अवधियों में बाँटते हैं ताकि हर एक की रिपोर्ट बने।
- आगम मान्यता: आय तब दर्ज करो जब कमाई हो (काम पूरा), नकद आने पर नहीं।
- मिलान (मैचिंग): ख़र्च उसी अवधि में दर्ज करो जिसकी आय कमाने में वह लगा।
- लागत: परिसंपत्ति उसकी लागत पर दर्ज।
- वस्तुनिष्ठता: हर प्रविष्टि के पीछे सबूत के रूप में दस्तावेज़।
समायोजन प्रविष्टियाँ आगम मान्यता और मिलान के कारण ही होती हैं।
समायोजन प्रविष्टियाँ
अवधि के अंत में कुछ खाते पुराने रह जाते हैं। समायोजन उन्हें ठीक करता है। हर समायोजन एक आय-विवरण खाता और एक तुलन-पत्र खाता बदलता है। इसमें नकद कभी नहीं आता।
- पूर्वदत्त ख़र्च का उपयोग (स्टेशनरी, बीमा): Dr स्टेशनरी ख़र्च, Cr स्टेशनरी।
- उपकरण का मूल्यह्रास: Dr मूल्यह्रास ख़र्च, Cr संचित मूल्यह्रास।
- उपार्जित आय (कमाई, बिल नहीं): Dr देनदार, Cr फ़ीस आय।
- अदत्त ख़र्च (मज़दूरी बकाया): Dr मज़दूरी ख़र्च, Cr देय मज़दूरी।
- अनर्जित आय जो अब कमा ली: Dr अनर्जित आय, Cr फ़ीस आय।
समापन प्रविष्टियाँ: हाथ से और कंप्यूटर पर
अस्थायी खाते (आय, ख़र्च, आहरण) सिर्फ़ एक अवधि नापते हैं, इसलिए अंत में ख़ाली किए जाते हैं। स्थायी खाते (परिसंपत्ति, देयता, पूँजी) आगे चलते हैं।
- आय बंद: Dr हर आय खाता, Cr आय सारांश।
- ख़र्च बंद: Dr आय सारांश, Cr हर ख़र्च खाता।
- आय सारांश (शुद्ध आय) पूँजी में: Dr आय सारांश, Cr पूँजी। हानि हो तो उल्टा।
- आहरण बंद: Dr पूँजी, Cr आहरण।
हाथ वाली प्रणाली में ये चारों प्रविष्टियाँ ख़ुद लिखकर खतौनी करते हैं और खाते बंद करते हैं। कंप्यूटर प्रणाली (Tally, QuickBooks, Sage, Zoho Books…) में पहले डेटा का बैकअप, रिपोर्ट की जाँच, फिर “ईयर-एंड” या “क्लोज़ बुक्स” कमांड। सॉफ़्टवेयर शुद्ध आय को पूँजी (या प्रतिधारित आय) में ले जाता है, अस्थायी खाते शून्य करता है और पुरानी अवधि लॉक कर देता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- परिसंपत्तियाँ = देयताएँ + स्वामी की पूँजी
- कुल डेबिट = कुल क्रेडिट (तलपट)
- शुद्ध आय = आय − ख़र्च
- अंतिम पूँजी = प्रारंभिक पूँजी + अतिरिक्त पूँजी + शुद्ध आय − आहरण
- उपयोग हुई स्टेशनरी = खाते में स्टेशनरी − गिनती में बची स्टेशनरी
हल किए गए उदाहरण
1. मालिक ने नए ट्यूशन व्यवसाय में 20,000 नकद लगाए। जर्नल प्रविष्टि लिखो।
परिसंपत्ति बढ़ी, पूँजी बढ़ी। Dr नकद 20,000; Cr पूँजी 20,000।
2. नकद: +20,000 पूँजी, +8,000 फ़ीस मिली, −2,000 किराया, −500 आहरण। नकद शेष निकालो।
20,000 + 8,000 − 2,000 − 500 = 25,500 (डेबिट शेष)।
3. शेष: नकद 25,500, स्टेशनरी 1,000, किराया ख़र्च 2,000, आहरण 500, लेनदार 1,000, पूँजी 20,000, फ़ीस आय 8,000। क्या तलपट मिलता है?
डेबिट: 25,500 + 1,000 + 2,000 + 500 = 29,000। क्रेडिट: 1,000 + 20,000 + 8,000 = 29,000। हाँ, दोनों 29,000।
4. स्टेशनरी खाते में 1,000, पर शेल्फ़ पर सिर्फ़ 600 बची। समायोजन प्रविष्टि लिखो।
उपयोग = 1,000 − 600 = 400। Dr स्टेशनरी ख़र्च 400; Cr स्टेशनरी 400।
5. आख़िरी हफ़्ते 600 की फ़ीस कमाई पर बिल नहीं भेजा। समायोजन करो और आय व शुद्ध आय निकालो (ख़र्च: किराया 2,000, स्टेशनरी 400)।
Dr देनदार 600; Cr फ़ीस आय 600। आय = 8,000 + 600 = 8,600। ख़र्च = 2,400। शुद्ध आय = 6,200।
6. ऊपर के आँकड़ों से (प्रारंभिक पूँजी 20,000, आहरण 500) चारों समापन प्रविष्टियाँ लिखो और अंतिम पूँजी निकालो।
1) Dr फ़ीस आय 8,600; Cr आय सारांश 8,600। 2) Dr आय सारांश 2,400; Cr किराया ख़र्च 2,000, Cr स्टेशनरी ख़र्च 400। 3) Dr आय सारांश 6,200; Cr पूँजी 6,200। 4) Dr पूँजी 500; Cr आहरण 500। अंतिम पूँजी = 20,000 + 6,200 − 500 = 25,700।
आम गलतियाँ
- आहरण को ख़र्च मानना। आहरण सीधे पूँजी घटाता है; आय विवरण में कभी नहीं आता।
- यह सोचना कि तलपट मिल गया तो कोई ग़लती नहीं। छूटी प्रविष्टि या सही रक़म ग़लत खाते में हो, तब भी तलपट मिल जाता है।
- समायोजन प्रविष्टि में नकद डालना। समायोजन सिर्फ़ आय-विवरण और तुलन-पत्र खातों के बीच होता है।
- परिसंपत्ति या देयता खाते बंद करना। सिर्फ़ आय, ख़र्च, आहरण (और आय सारांश) बंद होते हैं।