Ontario Grade 12 BAN4E Accounting for a Small Business (Grade 12, Workplace Preparation)
अध्याय: 4
1. Financial Analysis and Decision Making
1 Methods of Financing · 2 Annual Reports · 3 Financial Analysis for Decision Making
- व्यावसायिक वित्त के स्रोत – हर व्यवसाय को लंबे समय की संपत्तियों (स्थायी पूँजी) और रोज़ के काम (कार्यशील पूँजी) के लिए पैसा चाहिए। यह पैसा दो बड़े स्रोतों से आता है: स्वामित्व निधि (समता अंश, पूर्वाधिकार अंश, प्रतिधारित आय), जिसे लौटाना नहीं पड़ता, और उधार निधि (ऋणपत्र, बॉन्ड, बैंक व वित्तीय संस्थाओं के ऋण, जन जमा, व्यापार साख, अंतर-निगमीय जमा), जिसे ब्याज के साथ लौटाना पड़ता है।
- कंपनी के वित्तीय विवरण (अनुसूची III) – कंपनी दो मुख्य विवरण बनाती है: तुलन पत्र (एक तारीख़ को क्या है और क्या देना है) और लाभ-हानि विवरण (साल की आय और व्यय)। कंपनी अधिनियम 2013 की अनुसूची III एक तय ऊर्ध्वाधर प्रारूप देती है, ताकि सभी कंपनियों के विवरण एक जैसे दिखें और तुलना हो सके।
- वित्तीय विवरण विश्लेषण के उपकरण – विश्लेषण यानी वित्तीय विवरणों को पढ़कर कंपनी के लाभ, सुरक्षा और वृद्धि का आकलन। मुख्य उपकरण: तुलनात्मक विवरण (दो वर्ष साथ-साथ: रुपये और % में बदलाव) और सामान्य आकार विवरण (हर मद एक आधार का %)। सीमाएँ: पुराने आँकड़े, ग़ैर-मौद्रिक तथ्य छूटना, लेखा नीतियों पर निर्भरता।
2. Service and Merchandising Businesses
1 The Accounting Cycle for a Service Business · 2 Inventory Systems · 3 The Accounting Cycle for a Merchandising Business
- सेवा व्यवसाय का लेखांकन चक्र – लेखांकन चक्र वे चरण हैं जो हर व्यवसाय हर अवधि में दोहराता है, ताकि रोज़ के लेन-देन से वित्तीय विवरण बन सकें। लेन-देन का विश्लेषण, जर्नल में लिखना, खाताबही में खतौनी, तलपट, समायोजन प्रविष्टियाँ, वित्तीय विवरण, अस्थायी खातों का समापन, और समापन-बाद तलपट से जाँच। फिर चक्र दोबारा शुरू।
- स्टॉक लेखांकन: प्रणालियाँ, मूल्यांकन विधियाँ और नियंत्रण – स्टॉक (इन्वेंटरी) वह माल है जो व्यवसाय बेचने के लिए रखता है। स्टॉक लेखांकन तय करता है कि बेचे गए माल की लागत (COGS) कितनी है और बचे माल (अंतिम स्टॉक) का मूल्य कितना है। जब दाम बदलते हैं तो जवाब विधि पर निर्भर है: FIFO या भारित औसत (अनोखी चीज़ों के लिए विशिष्ट पहचान)। व्यवसाय सतत या आवधिक प्रणाली से स्टॉक का हिसाब रखते हैं, हाथ से गिनते हैं, आंतरिक नियंत्रण से बचाते हैं, और टर्नओवर से देखते हैं कि माल कितनी तेज़ी से बिकता है।
- व्यापारिक (मर्चेंडाइज़िंग) व्यवसाय का लेखांकन – व्यापारिक व्यवसाय तैयार माल खरीदता है और उसे ज़्यादा दाम पर बेचता है। इसके खास खाते हैं: स्टॉक (Inventory), खरीद, बिक्री, वापसी, छूट, आवक भाड़ा और बेचे गए माल की लागत (COGS)। स्टॉक सतत प्रणाली (हर बिक्री पर अपडेट) या आवधिक प्रणाली (साल के अंत में गिनती) से रखा जाता है। COGS = शुरू का स्टॉक + शुद्ध खरीद − अंत का स्टॉक। शुद्ध बिक्री − COGS = सकल लाभ; सकल लाभ − संचालन खर्च = शुद्ध आय।
3. Accounting Practices
1 Special Journals · 2 Accounting for Receivables · 3 Accounting for Payables
- रोज़नामचा और विशेष प्रयोजन बहियाँ – रोज़नामचा प्रारंभिक प्रविष्टि की पुस्तक है: हर लेन-देन तिथि क्रम में नामे खाता, जमा खाता और विवरण के साथ लिखा जाता है। बड़े व्यवसाय इसे विशेष बहियों में बाँटते हैं — रोकड़ बही, लघु रोकड़ बही, क्रय, विक्रय और वापसी बहियाँ — और बाकी सबके लिए रोज़नामचा (मुख्य) रखते हैं।
- देनदार (प्राप्य खाते) और लेनदार (देय खाते) – जब व्यवसाय उधार बेचता है तो ग्राहक पर उसका पैसा बकाया होता है: देनदार (चालू परिसंपत्ति)। जब उधार ख़रीदता है तो सप्लायर का बकाया होता है: लेनदार (चालू देयता)। 2/10, n/30 जैसी शर्तें जल्दी भुगतान पर छूट देती हैं। हर ग्राहक और सप्लायर का उप-खाताबही में अलग पन्ना होता है जो नियंत्रण खाते से मिलना चाहिए। कुछ ग्राहक कभी नहीं चुकाते, इसलिए प्रावधान से डूबत ऋण का अनुमान लगाते हैं। ब्याज सहित भुगतान का लिखित वादा प्राप्य विपत्र (नोट) है।
4. Fixed Assets
1 Fixed Assets · 2 Payroll Practices · 3 Income Tax
- मूल्यह्रास, प्रावधान और संचय – मूल्यह्रास उपयोग, समय और नई तकनीक के कारण स्थायी संपत्ति के मूल्य में कमी है; इसकी लागत उपयोगी जीवन में सीधी रेखा विधि (हर साल बराबर रकम) या क्रमागत ह्रास विधि (घटते शेष पर बराबर दर) से बाँटी जाती है। प्रावधान ज्ञात हानि या देयता के लिए लाभ पर प्रभार है; संचय व्यवसाय को मज़बूत करने के लिए लाभ में से रोका गया भाग है।
- पेरोल लेखांकन: सकल वेतन से शुद्ध वेतन तक – पेरोल यानी कर्मचारियों को भुगतान करना और उसका हिसाब रखना। कर्मचारी तय वेतन, ओवरटाइम सहित घंटे की मज़दूरी, कमीशन, पीस रेट या बोनस कमा सकते हैं। कुल कमाई सकल वेतन है। उसमें से कुछ कटता है (कटौतियाँ): आयकर, पेंशन/सामाजिक सुरक्षा, बीमा और यूनियन शुल्क जैसी स्वैच्छिक चीज़ें। जो बचे वह शुद्ध वेतन। नियोक्ता सकल वेतन को ख़र्च लिखता है, कटौतियाँ सरकार व अन्य को देय होती हैं, अपना अंशदान पेरोल कर ख़र्च में जोड़ता है, और समय पर पैसा भेजता है।
- आयकर रिटर्न भरना (Income Tax Filing) – आयकर रिटर्न एक फ़ॉर्म है जो साल में एक बार कर विभाग को भेजा जाता है। इसमें तुम बताते हो कि कितना कमाया, कौन-सी कटौती (deduction) और क्रेडिट (credit) माँग सकते हो, कितना कर बनता है, और वेतन से पहले ही कितना कर कट चुका है। ज़्यादा कटा हो तो रिफंड मिलता है, कम कटा हो तो बाकी भरना पड़ता है। इसके लिए वेतन पर्ची, ब्याज पर्ची और रसीदें चाहिए। अपना काम करने वाले लोग व्यापार की आय और खर्च भी बताते हैं। आज ज़्यादातर रिटर्न ऑनलाइन भरे जाते हैं।