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व्यावसायिक वित्त के स्रोत

हर व्यवसाय को लंबे समय की संपत्तियों (स्थायी पूँजी) और रोज़ के काम (कार्यशील पूँजी) के लिए पैसा चाहिए। यह पैसा दो बड़े स्रोतों से आता है: स्वामित्व निधि (समता अंश, पूर्वाधिकार अंश, प्रतिधारित आय), जिसे लौटाना नहीं पड़ता, और उधार निधि (ऋणपत्र, बॉन्ड, बैंक व वित्तीय संस्थाओं के ऋण, जन जमा, व्यापार साख, अंतर-निगमीय जमा), जिसे ब्याज के साथ लौटाना पड़ता है।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. व्यवसाय को पैसा चाहिए। सिक्के गिनिए: 8 स्थायी पूँजी (ज़मीन, मशीन) में और 5 कार्यशील पूँजी (कच्चा माल, मज़दूरी) में।
  2. पैसा दो टंकियों से आता है। हरी = स्वामित्व निधि, लौटाना नहीं। लाल = उधार निधि, ब्याज के साथ लौटाना।
  3. स्वामित्व निधि के तीन रूप: समता अंश, पूर्वाधिकार अंश और प्रतिधारित आय (बचाया हुआ लाभ)।
  4. लंबे समय का उधार: जनता से ऋणपत्र और बॉन्ड, बैंकों और वित्तीय संस्थाओं से ऋण। ब्याज तय रहता है।
  5. थोड़े समय का उधार: जन जमा, आपूर्तिकर्ता से व्यापार साख, और दूसरी कंपनियों से अंतर-निगमीय जमा।
  6. खुला खेल: स्लाइडर से मालिकों और उधार का पैसा मिलाइए। सालाना ब्याज और जोखिम बदलते देखिए।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

कार्यशील पूँजी सिर्फ़ दुकान को चाहिए या कारख़ाने को भी?

हर व्यवसाय को। कारख़ाने को माल बिकने तक कच्चे माल, मज़दूरी और बिजली के लिए कार्यशील पूँजी चाहिए।

मालिक नया पैसा नहीं लगाते, फिर प्रतिधारित आय स्वामित्व निधि क्यों?

लाभ मालिकों का है। लाभांश न लेकर वे अपना ही पैसा व्यवसाय में दोबारा लगा रहे हैं।

पूर्वाधिकार अंशधारी मालिक है या लेनदार?

मालिक (विशेष सुविधाओं वाला हिस्सेदार)। लेनदार ऋणपत्रधारी है। पूर्वाधिकार वालों को लाभ से लाभांश मिलता है, तय ब्याज नहीं।

ऋणपत्र और बॉन्ड एक जैसे लगते हैं। अंतर क्या?

दोनों तय ब्याज वाले उधार के साधन हैं। भारत में कंपनी के उधार के लिए "ऋणपत्र" और सरकारी संस्थाओं व बड़ी फ़र्मों के लिए अक्सर "बॉन्ड" शब्द आता है। परीक्षा में इन्हें मिलते-जुलते मानें।

हमेशा व्यापार साख ही क्यों न लें?

आपूर्तिकर्ता सीमित समय और रकम देते हैं। देरी से साख बिगड़ती है और छूट जाती है। यह कार्यशील पूँजी के लिए ठीक है, मशीन के लिए नहीं।

ज़्यादा उधार जोखिम भरा क्यों?

घाटे वाले साल में भी ब्याज देना पड़ता है। स्लाइडर को 70% या ज़्यादा पर ले जाइए और सालाना ब्याज का बड़ा तय बोझ देखिए।

व्यावसायिक वित्त की आवश्यकता

व्यावसायिक वित्त का मतलब है वह पैसा जो व्यवसाय शुरू करने, चलाने और बढ़ाने के लिए चाहिए। पैसे के बिना कोई काम शुरू नहीं होता।

पैसा क्यों चाहिए

कितना पैसा चाहिए, यह व्यवसाय के आकार, प्रकार (कारख़ाने को दुकान से ज़्यादा स्थायी पूँजी) और बढ़ने की रफ़्तार पर निर्भर है।

स्वामित्व निधि

स्वामित्व निधि मालिकों का लगाया पैसा और रोका हुआ लाभ है। व्यवसाय चलते रहने तक इसे लौटाना नहीं पड़ता और तय लाभ देना ज़रूरी नहीं। जोखिम और नियंत्रण मालिकों का।

समता अंश (इक्विटी शेयर)

कंपनी अपनी पूँजी को छोटे हिस्सों (अंशों) में बाँटती है। समता अंशधारी असली मालिक हैं: सभा में वोट देते हैं, लाभ हो तभी और पूर्वाधिकार वालों के बाद लाभांश पाते हैं, कंपनी बंद हो तो सबसे आख़िर में पैसा। गुण: स्थायी पूँजी, घाटे में कोई बोझ नहीं। सीमा: नियंत्रण बँटता है, जारी करने में समय और ख़र्च।

पूर्वाधिकार अंश

पूर्वाधिकार अंशधारियों को दो प्राथमिकताएँ: तय दर से लाभांश इक्विटी से पहले, और कंपनी बंद होने पर पूँजी इक्विटी से पहले। आमतौर पर वोट नहीं। सावधान निवेशकों के लिए अच्छे। प्रकार: संचयी (न मिला लाभांश आगे जुड़ता है), शोध्य (समय बाद पैसा वापस), परिवर्तनीय (इक्विटी में बदल सकते हैं)।

प्रतिधारित आय

कंपनी सारा लाभ नहीं बाँटती। जो हिस्सा रखकर दोबारा लगाती है, वह प्रतिधारित आय (लाभ का पुनर्विनियोग) है। गुण: कोई लागत नहीं, बाहर वाला नहीं, काग़ज़ी काम नहीं, नियंत्रण वैसा ही। सीमा: लाभ घटता-बढ़ता है इसलिए रकम अनिश्चित; कम लाभांश से अंशधारी नाराज़ हो सकते हैं।

उधार निधि: लंबी अवधि

उधार निधि बाहर वालों से आती है। तय समय पर ब्याज के साथ लौटानी पड़ती है, घाटा हो तब भी। उधार देने वालों को नियंत्रण नहीं मिलता, पर वे आमतौर पर जमानत (संपत्ति की गारंटी) माँगते हैं।

ऋणपत्र और बॉन्ड

ऋणपत्र (डिबेंचर) कंपनी का लिखित वादा है कि उसने पैसा उधार लिया है और तय तारीख़ पर तय ब्याज के साथ लौटाएगी। ऋणपत्रधारी लेनदार हैं, मालिक नहीं। बॉन्ड भी ऐसे ही हैं, अक्सर सरकारी संस्थाएँ और बड़ी कंपनियाँ जारी करती हैं। गुण: ब्याज ख़र्च माना जाता है (कर बचता है), नियंत्रण मालिकों के पास। सीमा: तय ब्याज का बोझ, गिरवी संपत्ति खोने का डर।

व्यापारिक बैंकों से ऋण

बैंक छोटी, मध्यम और लंबी अवधि के ऋण और नकद साख देते हैं, आमतौर पर जमानत पर। जल्दी और गोपनीय, पर बहुत काग़ज़ और शर्तें।

वित्तीय संस्थाओं से ऋण

विशेष संस्थाएँ (IFCI, SIDBI, NABARD, राज्य वित्त निगम) नई परियोजनाओं और विस्तार के लिए लंबी अवधि का पैसा देती हैं, अक्सर सलाह भी। जब बैंक इतने लंबे समय के लिए न दें तब उपयोगी, पर प्रक्रिया धीमी।

उधार निधि: छोटी अवधि

जन जमा

कंपनी जनता से सीधे पैसा जमा करवाती है, आमतौर पर 3 साल तक। जमाकर्ता को बैंक बचत से थोड़ा ज़्यादा ब्याज मिलता है और कंपनी को बैंक ऋण से सस्ता पड़ता है। आसान, पर जनता के भरोसे और कानूनी सीमाओं पर निर्भर।

व्यापार साख

आपूर्तिकर्ता माल अभी देता है और भुगतान बाद में (जैसे 30 या 60 दिन) लेता है। खातों में लेनदार या देय बिल के रूप में दिखता है। गुण: कोई औपचारिकता नहीं, कार्यशील पूँजी में मदद। सीमा: ज़रूरत से ज़्यादा ख़रीद का लालच, सीमित रकम।

अंतर-निगमीय जमा (ICD)

फ़ालतू नकद वाली कंपनी दूसरी कंपनी के पास बिना जमानत थोड़े समय के लिए पैसा जमा करती है। अवधि एक दिन (माँग जमा), तीन महीने या छह महीने हो सकती है। जल्दी और अनौपचारिक, पर ब्याज ऊँचा हो सकता है।

स्रोत कैसे चुनें

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. कंपनी को ₹50 लाख चाहिए। ₹30 लाख इक्विटी से और ₹20 लाख 10% ऋणपत्रों से जुटाती है। घाटे में भी हर साल क्या देना पड़ेगा?

सिर्फ़ ऋणपत्र का ब्याज ज़रूरी है: 20 लाख × 10% = ₹2 लाख सालाना। इक्विटी लाभांश लाभ होने और घोषित होने पर ही।

2. वर्गीकरण करें: (क) ₹10 लाख की मशीन, (ख) इस महीने का कच्चा माल, (ग) मज़दूरी। स्थायी या कार्यशील पूँजी?

(क) स्थायी पूँजी (कई साल चलेगी)। (ख) और (ग) कार्यशील पूँजी (रोज़ का ख़र्च)।

3. आपूर्तिकर्ता दर्ज़ी को ₹80,000 का कपड़ा भेजता है और 45 दिन बाद पैसा माँगता है। यह कौन-सा स्रोत है?

व्यापार साख: माल अभी, भुगतान बाद में, आपूर्तिकर्ता से।

4. कंपनी ने ₹10 करोड़ लाभ कमाया, ₹4 करोड़ लाभांश दिया। प्रतिधारित आय कितनी और यह सस्ता स्रोत क्यों?

₹10 − ₹4 = ₹6 करोड़ रोका गया। सस्ता इसलिए कि न ब्याज, न जारी करने का ख़र्च, न नए मालिक।

5. बहुत स्थिर आय वाली कंपनी नए इक्विटी अंश की जगह ऋणपत्र क्यों पसंद करेगी?

स्थिर आय से तय ब्याज आसानी से दिया जा सकता है। ऋणपत्र नियंत्रण और लाभ नहीं बाँटते, और ब्याज कर-योग्य आय घटाता है, इसलिए मालिकों को ज़्यादा फ़ायदा।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. कंपनी के असली मालिक कौन हैं?
2. इनमें स्वामित्व निधि कौन-सी है?
3. कच्चा माल ख़रीदने और मज़दूरी देने का पैसा है:
4. ICD कौन करता है?
5. किस स्रोत पर घाटे वाले साल में भी तय ब्याज देना पड़ता है?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

व्यावसायिक वित्त के दो मुख्य स्रोत कौन-से हैं?

स्वामित्व निधि (समता अंश, पूर्वाधिकार अंश, प्रतिधारित आय) और उधार निधि (ऋणपत्र, बॉन्ड, ऋण, जन जमा, व्यापार साख, अंतर-निगमीय जमा)।

समता अंश और पूर्वाधिकार अंश में क्या अंतर है?

समता अंशधारी असली मालिक हैं, वोट का अधिकार और बदलता लाभांश। पूर्वाधिकार अंशधारियों को तय लाभांश और पूँजी पहले मिलती है, पर आमतौर पर वोट नहीं।

किस स्रोत की कोई लागत नहीं?

प्रतिधारित आय: कंपनी अपना बचाया लाभ लगाती है, कोई ब्याज या जारी करने का ख़र्च नहीं।

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