National Year 12 Business
अध्याय: 6
1. 3.1 What is business?
3.1.1 Nature and purpose of business · 3.1.2 Business forms · 3.1.3 Business environment
- व्यवसाय के लक्ष्य और उद्देश्य – लक्ष्य (aim) एक सामान्य इच्छा है; उद्देश्य (objective) एक साफ़, मापने लायक निशाना है जिसकी समय-सीमा हो। मिशन बताता है कि व्यवसाय क्यों है। आम उद्देश्य हैं: बने रहना, लाभ, विकास और बाज़ार हिस्सा। नई कंपनी पहले टिकना चाहती है; जमी हुई कंपनी लाभ और विकास चाहती है। आकार, अर्थव्यवस्था, प्रतियोगिता और मालिकों की इच्छा के साथ उद्देश्य बदलते हैं। सफलता सिर्फ़ लाभ से नहीं, ग्राहक संतोष, कर्मचारियों की भलाई और पर्यावरण से भी मापी जाती है।
- एकल स्वामित्व, साझेदारी और संयुक्त हिंदू परिवार व्यवसाय – एकल स्वामित्व का मालिक और संचालक एक व्यक्ति होता है, जो पूरा लाभ लेता और असीमित दायित्व उठाता है। साझेदारी दो या ज़्यादा लोग समझौते के तहत चलाते हैं और लाभ बाँटते हैं; साझेदार कई तरह के होते हैं और लिखित विलेख व पंजीकरण उनकी रक्षा करते हैं। संयुक्त हिंदू परिवार व्यवसाय परिवार का सबसे बड़ा सदस्य, कर्ता, सबके लिए चलाता है; सदस्यता जन्म से मिलती है।
- व्यावसायिक पर्यावरण: अर्थ, आयाम और विमुद्रीकरण – व्यावसायिक पर्यावरण उन सभी बाहरी शक्तियों, व्यक्तियों और संस्थाओं का योग है जो फ़र्म पर असर डालती हैं पर जिन पर उसका नियंत्रण नहीं। यह गतिशील, अनिश्चित, जटिल, सापेक्ष है और इसमें जुड़ी हुई विशिष्ट व सामान्य शक्तियाँ हैं। इसे समझकर फ़र्म अवसर पहचानती है, ख़तरे देखती है और योजना बनाती है। इसके पाँच आयाम हैं: आर्थिक, सामाजिक, तकनीकी, राजनीतिक और कानूनी। नवंबर 2016 का विमुद्रीकरण इसका बड़ा उदाहरण है।
2. 3.2 Managers, leadership and decision making
3.2.1 Management and leadership · 3.2.2 Management decision making · 3.2.3 Stakeholders
- निर्देशन: लोगों से उनका सबसे अच्छा काम करवाना – निर्देशन प्रबंध का वह काम है जिसमें लोगों को राह दिखाई जाती है, प्रेरित किया जाता है, नेतृत्व दिया जाता है और बात समझाई जाती है। इसके चार तत्व हैं: पर्यवेक्षण, अभिप्रेरणा, नेतृत्व और संप्रेषण। मैस्लो बताते हैं कि ज़रूरतें पाँच सीढ़ियों में आती हैं। प्रोत्साहन मौद्रिक या अमौद्रिक होते हैं। नेता निरंकुश, लोकतांत्रिक या निर्बाध हो सकता है। संप्रेषण औपचारिक या अनौपचारिक होता है, और उसकी बाधाएँ आसान उपायों से हटती हैं।
- निर्णय लेना: सही चुनाव कैसे करें, कदम-दर-कदम – निर्णय लेना यानी दो या ज़्यादा विकल्पों में से सबसे अच्छा चुनना। अच्छा निर्णय कुछ चरणों में होता है: समस्या पहचानो, विकल्प खोजो, मानदंड तय करो, हर मानदंड को महत्व (weight) दो, अंक दो, चुनो, काम करो और फिर नतीजे की समीक्षा करो। डिसीजन मैट्रिक्स इसे आसान गिनती में बदल देता है।
- व्यवसाय के हितधारक – हितधारक (stakeholder) वह व्यक्ति या समूह है जिस पर व्यवसाय का असर पड़ता है या जो व्यवसाय पर असर डाल सकता है। आंतरिक हितधारक (मालिक, प्रबंधक, कर्मचारी) कंपनी के अंदर होते हैं; बाहरी (ग्राहक, आपूर्तिकर्ता, स्थानीय समुदाय, सरकार, ऋणदाता) बाहर। हर समूह कुछ अलग चाहता है, इसलिए एक फ़ैसला किसी को खुश और किसी को नाराज़ करता है: यही टकराव है। कंपनियाँ शक्ति और रुचि के आधार पर मानचित्रण करती हैं और बातचीत व सलाह से संबंध सँभालती हैं।
3. 3.3 Improving marketing performance
3.3.1 Marketing objectives · 3.3.2 Markets and customers · 3.3.3 Segmentation, targeting, positioning · 3.3.4 Marketing mix
- विपणन प्रबंध – विपणन का मतलब है ख़रीदारों की ज़रूरत पहचानना और मूल्य के बदले, लाभ के साथ, उसे पूरा करना। इसके कई कार्य हैं (अनुसंधान, योजना, ब्रांड, लेबल, पैकेजिंग, कीमत, संवर्धन, वितरण, सेवा) और पाँच विचारधाराएँ (उत्पादन, उत्पाद, विक्रय, विपणन, सामाजिक विपणन)। विपणन मिश्र 4P है: उत्पाद (ब्रांड, लेबल, पैकेजिंग के साथ), कीमत (लागत, माँग, प्रतियोगिता, सरकारी नियम, उद्देश्य और विपणन तरीकों से तय), स्थान (माध्यम और भौतिक वितरण) और संवर्धन (विज्ञापन, व्यक्तिगत विक्रय, विक्रय संवर्धन, जनसंपर्क)।
- बाज़ार अनुसंधान: ग्राहक क्या चाहते हैं, यह पता करना – बाज़ार अनुसंधान का अर्थ है ग्राहकों, प्रतियोगियों और बाज़ार की जानकारी इकट्ठा करके उसका विश्लेषण करना, ताकि व्यवसाय बेहतर निर्णय ले और जोखिम घटे। प्राथमिक (क्षेत्र) अनुसंधान सर्वेक्षण, साक्षात्कार, अवलोकन, फ़ोकस समूह और परीक्षण विपणन से नया डेटा जुटाता है। द्वितीयक (डेस्क) अनुसंधान पहले से मौजूद डेटा, जैसे सरकारी आँकड़े, रिपोर्ट और वेबसाइटें, इस्तेमाल करता है। सबसे नहीं पूछ सकते, इसलिए नमूना चुनते हैं: यादृच्छिक, स्तरित, कोटा या सुविधा। डेटा मात्रात्मक (संख्याएँ) या गुणात्मक (राय और कारण) होता है। नतीजों से बाज़ार विभक्तिकरण, बाज़ार मानचित्र, ख़ाली जगह खोजने और मूल्य प्रस्ताव बनाने में मदद मिलती है। इसकी सीमाएँ भी हैं: पक्षपात, छोटे नमूने और पुराना डेटा।
- बाज़ार विभक्तिकरण: बाँटना, चुनना और स्थिति बनाना – बाज़ार विभक्तिकरण = पूरे बाज़ार को समान ज़रूरतों और ख़रीद आदतों वाले ग्राहकों के छोटे समूहों (खंडों) में बाँटना। मुख्य आधार: भौगोलिक (कहाँ रहते हैं), जनांकिकीय (आयु, लिंग, आय, परिवार, व्यवसाय), मनोवैज्ञानिक (जीवनशैली, मूल्य, व्यक्तित्व) और व्यवहारगत (उपयोग दर, निष्ठा, चाहा गया लाभ, अवसर)। विभक्तिकरण से व्यवसाय ग्राहकों को समझता है, सही उत्पाद और कीमत बनाता है, प्रचार का पैसा समझदारी से ख़र्च करता है और ख़ाली जगह ढूँढता है। फिर वह लक्ष्य बाज़ार चुनता है: अविभेदित (जन), विभेदित (कई खंड) या केंद्रित (आला)। अंत में ब्रांड का स्थितिकरण करता है: प्रतियोगियों की तुलना में ग्राहकों के मन में साफ़ जगह, जो स्थितिकरण मानचित्र पर दिखती है और विपणन मिश्रण से मज़बूत होती है।
4. 3.4 Improving operational performance
3.4.1 Operational objectives · 3.4.2 Analysing operational performance · 3.4.3 Efficiency and productivity · 3.4.4 Improving quality · 3.4.5 Inventory and supply chains
- संचालन प्रबंधन: व्यवसाय वस्तुएँ और सेवाएँ कैसे बनाते हैं – संचालन प्रबंधन (operations management) यह है कि व्यवसाय इनपुट (कच्चा माल, मज़दूर, मशीनें, पैसा) को आउटपुट (वस्तुएँ और सेवाएँ) में सबसे अच्छे ढंग से कैसे बदलता है। उत्पादन जॉब (ऑर्डर पर एक चीज़), बैच (एक जैसी चीज़ों के समूह) या फ़्लो (लगातार बड़े पैमाने पर) हो सकता है। संचालन के उद्देश्य हैं: कम लागत, ऊँची गुणवत्ता, गति, लचीलापन और पर्यावरण की देखभाल। प्रदर्शन मापते हैं: क्षमता (अधिकतम उत्पादन), क्षमता उपयोग (उत्पादन ÷ क्षमता × 100), श्रम उत्पादकता (उत्पादन ÷ मज़दूर) और प्रति इकाई लागत (कुल लागत ÷ उत्पादन)। आपूर्ति शृंखला आपूर्तिकर्ता, कारख़ाना, दुकान और ग्राहक को जोड़ती है; पुश प्रवाह में पहले माल बनता है, पुल प्रवाह (just-in-time) में ऑर्डर आने पर। गुणवत्ता नियंत्रण तैयार माल जाँचता है; गुणवत्ता आश्वासन और निरंतर सुधार (kaizen) हर चरण पर ख़राबी रोकते हैं।
- उत्पादकता: हर आगत से ज़्यादा उत्पादन – उत्पादन (production) कुल बनी मात्रा है। उत्पादकता (productivity) हर इकाई आगत से मिलने वाला उत्पादन है, जैसे प्रति श्रमिक प्रति घंटा डिब्बे। श्रम उत्पादकता = उत्पादन ÷ श्रमिक (या श्रम-घंटे)। यह प्रशिक्षण, बेहतर मशीनें और तकनीक, प्रेरणा, अच्छी विधियाँ और विशिष्टीकरण से बढ़ती है। ज़्यादा उत्पादकता से प्रति इकाई लागत घटती है, मज़दूरी और लाभ बढ़ सकते हैं, और देश का विकास होता है। व्यवसाय क्षमता उपयोग (वास्तविक ÷ अधिकतम उत्पादन × 100) पर भी नज़र रखते हैं और श्रम-प्रधान या पूँजी-प्रधान तरीका चुनते हैं।
- व्यवसाय में गुणवत्ता प्रबंधन – गुणवत्ता का मतलब है कि वस्तु या सेवा अपना काम ठीक करे और ग्राहक की उम्मीद पूरी करे। कंपनियाँ गुणवत्ता तीन तरह से संभालती हैं: अंत में बने माल की जाँच (गुणवत्ता नियंत्रण), हर चरण पर जाँच (गुणवत्ता आश्वासन), और हर कर्मचारी से छोटे लगातार सुधार (TQM और काइज़ेन)। अच्छी गुणवत्ता से बिक्री और नाम बढ़ते हैं और बर्बादी घटती है, पर इसमें पैसा और प्रशिक्षण लगता है।
- आपूर्ति शृंखला और क्रय: आपूर्तिकर्ता, स्टॉक नियंत्रण और JIT – आपूर्ति शृंखला (supply chain) वे सभी व्यवसाय और कदम हैं जो किसी उत्पाद को कच्चे माल से अंतिम ग्राहक तक पहुँचाते हैं। माल आगे बढ़ता है; पैसा और जानकारी (ऑर्डर) पीछे जाते हैं। क्रय (procurement) यानी सही कीमत, गुणवत्ता और समय पर सही माल ख़रीदना। आपूर्तिकर्ता कीमत, गुणवत्ता, भरोसे और लचीलेपन पर चुने जाते हैं। स्टॉक के लिए या तो बफ़र स्टॉक रखते हैं (सुरक्षित पर महँगा) या जस्ट-इन-टाइम अपनाते हैं (भंडारण सस्ता पर देरी होने पर जोखिम)। पुनः आदेश स्तर = रोज़ का उपयोग × डिलीवरी समय + बफ़र स्टॉक। लॉजिस्टिक्स माल को सही जगह समय पर पहुँचाता है; आउटसोर्सिंग में काम दूसरी कंपनी को दिया जाता है।
5. 3.5 Improving financial performance
3.5.1 Financial objectives · 3.5.2 Analysing financial performance · 3.5.3 Sources of finance · 3.5.4 Improving cash flow and profit
- वित्तीय उद्देश्य: आय, लागत, लाभ, नकदी प्रवाह, ROCE और पूँजी संरचना – वित्तीय उद्देश्य व्यवसाय के पैसों से जुड़े साफ़ लक्ष्य हैं: आय (बिक्री मूल्य) के लक्ष्य, लागत घटाने के लक्ष्य, लाभ के लक्ष्य, पर्याप्त नकद रखने के लक्ष्य, निवेश स्तर और ROCE के लक्ष्य। ROCE = परिचालन लाभ ÷ नियोजित पूँजी × 100 बताता है कि लगाए पैसे पर कितना प्रतिफल मिला। पूँजी संरचना इक्विटी और दीर्घकालिक ऋण का मेल है; गियरिंग = गैर-चालू देयताएँ ÷ नियोजित पूँजी × 100, लगभग 50% से ऊपर उच्च।
- सम-विच्छेद विश्लेषण (Break-Even Analysis) – जब कुल आय कुल लागत के बराबर हो, यानी लाभ शून्य, तो व्यवसाय सम-विच्छेद पर है। हर बिकी इकाई अंशदान देती है = कीमत − प्रति इकाई परिवर्ती लागत, जो पहले स्थिर लागत चुकाता है। सम-विच्छेद मात्रा = स्थिर लागत ÷ प्रति इकाई अंशदान। इससे ज़्यादा बिक्री पर लाभ, कम पर हानि। सुरक्षा सीमा = असली बिक्री − सम-विच्छेद बिक्री। लक्ष्य लाभ के लिए (स्थिर लागत + लक्ष्य लाभ) ÷ अंशदान इकाइयाँ बेचनी होंगी।
- व्यावसायिक वित्त के स्रोत – हर व्यवसाय को लंबे समय की संपत्तियों (स्थायी पूँजी) और रोज़ के काम (कार्यशील पूँजी) के लिए पैसा चाहिए। यह पैसा दो बड़े स्रोतों से आता है: स्वामित्व निधि (समता अंश, पूर्वाधिकार अंश, प्रतिधारित आय), जिसे लौटाना नहीं पड़ता, और उधार निधि (ऋणपत्र, बॉन्ड, बैंक व वित्तीय संस्थाओं के ऋण, जन जमा, व्यापार साख, अंतर-निगमीय जमा), जिसे ब्याज के साथ लौटाना पड़ता है।
- नकद प्रवाह (Cash Flow) – नकद प्रवाह व्यवसाय में आने और जाने वाला पैसा है। शुद्ध नकद प्रवाह = नकद अंतर्वाह − नकद बहिर्वाह, और अंतिम शेष = शुरुआती शेष + शुद्ध नकद प्रवाह। नकद प्रवाह पूर्वानुमान इसे महीने-दर-महीने पहले से बताता है ताकि कमी जल्दी दिखे। कंपनी लाभ कमाते हुए भी नकद से खाली हो सकती है, इसलिए मैनेजर ओवरड्राफ़्ट, ग्राहकों से जल्दी वसूली, सप्लायरों को देर से भुगतान, कम माल, फ़ैक्टरिंग और बेचकर-किराये पर-लेने से नकद प्रवाह सुधारते हैं।
6. 3.6 Improving human resource performance
3.6.1 HR objectives · 3.6.2 Analysing HR performance · 3.6.3 Organisational design · 3.6.3 Workforce planning (managing the flow of people) · 3.6.4 Motivation and engagement · 3.6.5 Employer-employee relations
- मानव संसाधन प्रबंधन (HRM) – मानव संसाधन प्रबंधन व्यवसाय को चाहिए लोगों की योजना बनाना, उन्हें खोजना, विकसित करना, पुरस्कृत करना और बनाए रखना है। HR उद्देश्य: कर्मचारी जुड़ाव, प्रतिभा विकास, प्रशिक्षण, विविधता, मूल्यों का तालमेल और सही आकार का किफ़ायती कार्यबल। HR प्रदर्शन के माप: श्रम आवर्त (छोड़ने वाले ÷ औसत कर्मचारी × 100), प्रतिधारण दर, श्रम उत्पादकता (उत्पादन ÷ कर्मचारी), प्रति इकाई श्रम लागत और आय के % में कर्मचारी लागत। कठोर HRM कर्मचारियों को लागत, नरम HRM संपत्ति मानता है।
- संगठन: प्रक्रिया, ढाँचे, भारार्पण और विकेंद्रीकरण – संगठन का मतलब है काम, लोगों और साधनों को ऐसे जमाना कि योजना पूरी हो सके। इसके 4 चरण हैं: काम बाँटना, विभाग बनाना, कर्तव्य सौंपना और रिपोर्टिंग संबंध तय करना। इससे संगठन ढाँचा बनता है: कार्यात्मक (काम के प्रकार से) या प्रभागीय (उत्पाद से)। औपचारिक ढाँचे के साथ दोस्ती से अनौपचारिक ढाँचा भी बनता है। भारार्पण में अधिकार अधीनस्थ को दिया जाता है; विकेंद्रीकरण में निर्णय की शक्ति सभी स्तरों तक फैलती है।
- नियुक्तिकरण: भर्ती, चयन और प्रशिक्षण – नियुक्तिकरण का मतलब है पदों को सही लोगों से भरना और उन्हें कुशल बनाए रखना। यह मानव संसाधन प्रबंधन का भाग है। इसकी प्रक्रिया मानव शक्ति के अनुमान से शुरू होकर भर्ती, चयन, स्थापन, प्रशिक्षण, मूल्यांकन, पदोन्नति और पारिश्रमिक तक जाती है। भर्ती आंतरिक या बाहरी स्रोतों से आवेदक लाती है। चयन परीक्षा, साक्षात्कार और जाँच से सबसे अच्छे को चुनता है। प्रशिक्षण कार्य पर (प्रवेश, शिक्षुता, इंटर्नशिप, कोचिंग) या कार्य से पृथक (प्रकोष्ठ, कक्षा, केस स्टडी) होता है।
- निर्देशन: लोगों से उनका सबसे अच्छा काम करवाना – निर्देशन प्रबंध का वह काम है जिसमें लोगों को राह दिखाई जाती है, प्रेरित किया जाता है, नेतृत्व दिया जाता है और बात समझाई जाती है। इसके चार तत्व हैं: पर्यवेक्षण, अभिप्रेरणा, नेतृत्व और संप्रेषण। मैस्लो बताते हैं कि ज़रूरतें पाँच सीढ़ियों में आती हैं। प्रोत्साहन मौद्रिक या अमौद्रिक होते हैं। नेता निरंकुश, लोकतांत्रिक या निर्बाध हो सकता है। संप्रेषण औपचारिक या अनौपचारिक होता है, और उसकी बाधाएँ आसान उपायों से हटती हैं।
- औद्योगिक संबंध: नियोक्ता और कर्मचारी कैसे साथ चलते हैं – औद्योगिक संबंध (कर्मचारी संबंध भी कहते हैं) किसी व्यवसाय और उसके कर्मचारियों के बीच का रिश्ता है। अच्छे संबंध दोतरफ़ा संचार और कर्मचारियों को आवाज़ देने पर टिके होते हैं, चाहे वे ख़ुद बोलें या यूनियन और वर्क्स काउंसिल के ज़रिए। वेतन और शर्तें अक्सर सामूहिक सौदेबाज़ी से तय होती हैं। बातचीत टूटे तो हड़ताल जैसी औद्योगिक कार्रवाई हो सकती है; सुलह, मध्यस्थता या पंचनिर्णय जैसी निष्पक्ष मदद विवाद ख़त्म कर सकती है।