संगठन की अवधारणा
संगठन का मतलब है तय करना कि कौन से काम करने हैं, उन्हें समूहों में बाँटना, सही लोगों को देना और तय करना कि कौन किसे रिपोर्ट करेगा, ताकि योजना काम में आ सके। यह नियोजन के ठीक बाद आता है।
संगठन की प्रक्रिया
- काम की पहचान और बँटवारा: पूरे काम को छोटे, साफ़ कामों में तोड़ना।
- विभागीकरण: एक जैसे कामों को इकाइयों (विभागों) में जोड़ना, काम, उत्पाद या क्षेत्र के आधार पर।
- कर्तव्य सौंपना: हर काम उस व्यक्ति को देना जो उसके लिए सबसे उपयुक्त है।
- रिपोर्टिंग संबंध तय करना: कौन किसे आदेश देगा और कौन किसे रिपोर्ट करेगा।
संगठन का महत्त्व
- विशिष्टीकरण के लाभ: एक ही काम बार-बार करके लोग विशेषज्ञ बनते हैं।
- काम के संबंधों में स्पष्टता: सबको अपना बॉस और कर्तव्य पता।
- साधनों का सबसे अच्छा उपयोग: दोहराव और बर्बादी नहीं।
- बदलाव के अनुसार ढलना: ज़रूरत पर ढाँचा बदला जा सकता है।
- प्रभावी प्रशासन: साफ़ भूमिकाओं से भ्रम नहीं।
- कर्मचारियों का विकास: भारार्पण से अधीनस्थ सीखते हैं।
- विस्तार में मदद: नए विभाग आसानी से जुड़ते हैं।
संगठन ढाँचा
संगठन ढाँचा पदों और रिपोर्टिंग रेखाओं का ढाँचा है, जिसे अक्सर चार्ट से दिखाते हैं। प्रबंध विस्तार यानी एक प्रबंधक कितने अधीनस्थ ठीक से संभाल सकता है; इससे ढाँचे के स्तर तय होते हैं।
कार्यात्मक ढाँचा
काम कार्य के प्रकार से जोड़े जाते हैं: उत्पादन, क्रय, विपणन, वित्त, मानव संसाधन। फ़ायदे: विशेषज्ञता, कम दोहराव, आसान नियंत्रण, आसान प्रशिक्षण। कमियाँ: विभाग अपने लक्ष्य देखते हैं, तालमेल कमज़ोर, लाभ की ज़िम्मेदारी तय करना कठिन, बदलाव धीमा। उपयुक्त: एक मुख्य उत्पाद वाली बड़ी फ़र्म।
प्रभागीय ढाँचा
काम उत्पाद (या क्षेत्र) से जोड़े जाते हैं। हर प्रभाग के अपने उत्पादन, विपणन और वित्त होते हैं। फ़ायदे: हर प्रभाग का मुखिया लाभ के लिए ज़िम्मेदार, तेज़ निर्णय, नया उत्पाद जोड़ना आसान, बहुमुखी प्रबंधक। कमियाँ: काम और खर्च का दोहराव, पैसे के लिए प्रभागों में टकराव, प्रभाग केवल अपना हित देखें। उपयुक्त: कई अलग उत्पादों वाली फ़र्म।
| आधार | कार्यात्मक | प्रभागीय |
|---|---|---|
| समूह का आधार | काम का प्रकार | उत्पाद या क्षेत्र |
| लाभ की ज़िम्मेदारी | तय करना कठिन | तय करना आसान |
| खर्च | कम | ज़्यादा (दोहराव) |
औपचारिक और अनौपचारिक संगठन
औपचारिक संगठन प्रबंधन द्वारा बनाया ढाँचा है, जिसमें तय पद, नियम और आदेश-श्रृंखला होती है। यह स्थिर और साफ़ है, पर धीमा और कठोर हो सकता है।
अनौपचारिक संगठन अपने आप बनता है जब लोग मिलते, बात करते और दोस्त बनते हैं। इसके लिखित नियम नहीं होते। ख़बरें अंगूरलता (ग्रेपवाइन) से तेज़ फैलती हैं। यह टीम भावना और सामाजिक ज़रूरतें पूरी करता है, पर अफ़वाहें फैला सकता है और बदलाव का विरोध कर सकता है।
| आधार | औपचारिक | अनौपचारिक |
|---|---|---|
| कौन बनाता है | प्रबंधन, सोच-समझकर | कर्मचारी, अपने आप |
| उद्देश्य | कंपनी के लक्ष्य | सामाजिक ज़रूरतें |
| नियम | लिखित | अलिखित |
| संचार | आदेश-श्रृंखला से | किसी भी दिशा में |
भारार्पण
भारार्पण का मतलब है प्रबंधक अपना कुछ काम और उसे करने का अधिकार अधीनस्थ को सौंपता है। प्रबंधक अपने बॉस के प्रति जवाबदेह बना रहता है।
भारार्पण के तत्व
- अधिकार: आदेश देने और निर्णय लेने का हक़। यह नीचे की ओर जाता है।
- उत्तरदायित्व: काम ठीक से करने का कर्तव्य। अधीनस्थ इसे स्वीकार करता है।
- जवाबदेही: अंतिम परिणाम का हिसाब देना। यह ऊपर की ओर जाती है और सौंपी नहीं जा सकती।
भारार्पण का महत्त्व
प्रबंधक बड़े कामों के लिए खाली होते हैं, अधीनस्थों का विकास और प्रेरणा होती है, फ़र्म का विस्तार आसान होता है, आदेश-श्रृंखला साफ़ बनती है और तालमेल बेहतर होता है।
विकेंद्रीकरण
विकेंद्रीकरण का मतलब है पूरे संगठन में निर्णय लेने की शक्ति निचले स्तरों तक फैलाना। केंद्रीकरण यानी ज़्यादातर निर्णय शीर्ष पर रखना। कोई फ़र्म पूरी तरह एक तरफ़ नहीं होती; यह मात्रा का सवाल है।
विकेंद्रीकरण का महत्त्व
- अधीनस्थों में पहल और आत्मविश्वास।
- भविष्य के प्रबंधक तैयार होते हैं।
- तेज़ निर्णय, क्योंकि समस्या के पास वाला व्यक्ति निर्णय लेता है।
- शीर्ष प्रबंधन बड़े कामों के लिए खाली।
- विस्तार में मदद और बेहतर नियंत्रण।
भारार्पण और विकेंद्रीकरण में अंतर
| आधार | भारार्पण | विकेंद्रीकरण |
|---|---|---|
| प्रकृति | ज़रूरी: हर प्रबंधक को करना पड़ता है | ऐच्छिक (शीर्ष प्रबंधन की नीति) |
| क्षेत्र | सीमित: एक प्रबंधक से एक अधीनस्थ | व्यापक: पूरा संगठन |
| स्वतंत्रता | कम; बॉस का नियंत्रण ज़्यादा | निर्णय की ज़्यादा स्वतंत्रता |
| उद्देश्य | प्रबंधक का बोझ घटाना | निचले स्तरों को ज़्यादा शक्ति देना |
करके देखें
अपने घर की रविवार वाली सफ़ाई लें। सारे काम लिखें (बँटवारा), उन्हें समूहों में जोड़ें (रसोई, कमरे, कपड़े), हर समूह एक व्यक्ति को दें, और तय करें कि काम कौन जाँचेगा। इसे चार्ट बनाकर दिखाएँ। फिर सोचें: क्या माता-पिता ने कैसे सफ़ाई करनी है, यह तय करने का अधिकार भी दिया, या केवल काम?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- संगठन प्रक्रिया: काम की पहचान व बँटवारा → विभागीकरण → कर्तव्य सौंपना → रिपोर्टिंग संबंध।
- कार्यात्मक = काम के प्रकार से; प्रभागीय = उत्पाद से।
- अधिकार नीचे जाता है; जवाबदेही ऊपर जाती है और सौंपी नहीं जा सकती।
- विकेंद्रीकरण = पूरे संगठन के सभी स्तरों तक फैला भारार्पण।
हल किए गए उदाहरण
1. केवल सीमेंट बनाने वाली कंपनी में क्रय, उत्पादन, बिक्री और वित्त विभाग हैं। यह कौन सा ढाँचा है?
कार्यात्मक ढाँचा, क्योंकि काम के प्रकार से विभाग बने हैं और मुख्य उत्पाद एक है।
2. एक समूह साबुन, बिस्कुट और सीमेंट बनाता है, हर एक की अपनी उत्पादन और बिक्री टीम है। कौन सा ढाँचा उपयुक्त है और क्यों?
प्रभागीय। उत्पाद बहुत अलग हैं, इसलिए हर एक को अपनी टीम चाहिए, और हर प्रभाग के मुखिया को उसके लाभ के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जा सकता है।
3. बिक्री प्रबंधक अधीनस्थ को 5% छूट देने का अधिकार देता है, पर उसकी ग़लती से नुकसान होता है। महाप्रबंधक को कौन जवाब देगा?
बिक्री प्रबंधक। जवाबदेही सौंपी नहीं जा सकती। अधीनस्थ बिक्री प्रबंधक को जवाब देगा, और बिक्री प्रबंधक महाप्रबंधक को।
4. अलग विभागों के कर्मचारी साथ क्रिकेट खेलते हैं और आधिकारिक सूचना से पहले नए बोनस की ख़बर फैला देते हैं। यह क्या है?
अनौपचारिक संगठन; ख़बर अंगूरलता (ग्रेपवाइन) से फैली।
5. एक रिटेल शृंखला हर दुकान के प्रबंधक को स्थानीय कीमत, भर्ती और स्टॉक तय करने देती है। यह भारार्पण है या विकेंद्रीकरण?
विकेंद्रीकरण, क्योंकि नीति के रूप में पूरे संगठन में निर्णय की शक्ति निचले स्तरों तक फैलाई गई है।
आम गलतियाँ
- कहना कि जवाबदेही सौंपी जा सकती है। केवल अधिकार सौंपा जाता है; जवाबदेही प्रबंधक के पास रहती है।
- भारार्पण को ऐच्छिक मानना। भारार्पण ज़रूरी है; विकेंद्रीकरण नीति का चुनाव है।
- अनौपचारिक संगठन को हमेशा हानिकारक मानना। यह संचार तेज़ करता है और टीम भावना बनाता है।
- ढाँचे उलझाना: उत्पाद के आधार पर समूह प्रभागीय है, कार्यात्मक नहीं।