नियंत्रण की अवधारणा
नियंत्रण का अर्थ है यह पक्का करना कि काम योजना के अनुसार हो। प्रबंधक मानक (लक्ष्य) तय करता है, वास्तविक परिणाम देखता है, अंतर यानी विचलन ढूँढता है और उसे ठीक करता है।
विशेषताएँ
- यह लक्ष्य-केंद्रित है।
- यह लगातार चलने वाली प्रक्रिया है।
- यह सर्वव्यापी है: हर स्तर का हर प्रबंधक इसे करता है।
- यह पीछे भी देखता है (पुराना काम जाँचता है) और आगे भी (भविष्य सुधारता है)।
नियंत्रण का महत्व
- लक्ष्य पाने में मदद: गड़बड़ी की जल्दी चेतावनी।
- मानकों की सटीकता जाँचना: अगर सब लक्ष्य से चूकें, तो शायद लक्ष्य ही ग़लत है।
- संसाधनों का सही उपयोग: पैसे, माल और समय की बर्बादी घटती है।
- कर्मचारियों की प्रेरणा: उन्हें पता होता है क्या चाहिए और किस आधार पर जाँचा जाएगा।
- व्यवस्था और अनुशासन: बेईमानी और लापरवाही घटती है।
- समन्वय: सब विभाग एक जैसे मानकों पर चलते हैं।
नियोजन और नियंत्रण में संबंध
- नियोजन पहले आता है और लक्ष्य व मानक तय करता है। योजना के बिना जाँचने को कुछ नहीं।
- नियंत्रण बाद में जाँचता है कि योजना चल रही है या नहीं। नियंत्रण के बिना योजना बस एक उम्मीद है।
- नियोजन आगे देखता है। नियंत्रण पीछे देखता है (पुराना काम) और आगे भी (उसकी सीख अगली योजना सुधारती है)।
- इसलिए कहते हैं: बिना नियंत्रण के नियोजन अर्थहीन है, और बिना नियोजन के नियंत्रण अंधा है।
एक चक्र सोचिए: योजना → काम → जाँच → सुधार → बेहतर योजना।
नियंत्रण प्रक्रिया के चरण
- कार्य मानक निर्धारित करना: मात्रात्मक (संख्या में: प्रति इकाई लागत, रोज़ की इकाइयाँ) या गुणात्मक (शब्दों में: अच्छी छवि, विनम्र सेवा)।
- वास्तविक कार्य का मापन: गिनकर, नमूना जाँच, ख़ुद देखकर, रिपोर्ट से। मानक वाली इकाई में ही मापें।
- तुलना: विचलन = वास्तविक − मानक।
- विचलन का विश्लेषण: हर अंतर पर कार्रवाई ज़रूरी नहीं।
- महत्वपूर्ण बिंदु नियंत्रण: सिर्फ़ मुख्य परिणाम क्षेत्रों पर नज़र, जैसे श्रम लागत में 5% बढ़त, स्टेशनरी में 20% बढ़त से ज़्यादा अहम है।
- अपवाद द्वारा प्रबंध: सिर्फ़ तय सीमा से बड़े विचलन पर कार्रवाई; छोटे छोड़ दें। इससे प्रबंधक का समय बचता है।
- सुधारात्मक कार्रवाई: प्रशिक्षण, मशीन की मरम्मत, बेहतर माल, तरीका बदलना, या अवास्तविक मानक बदलना।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- विचलन = वास्तविक कार्य − मानक कार्य।
- विचलन % = (वास्तविक − मानक) ÷ मानक × 100।
- चरण: मानक → मापना → तुलना → विश्लेषण → सुधार।
- महत्वपूर्ण बिंदु नियंत्रण: सिर्फ़ मुख्य क्षेत्रों पर नज़र।
- अपवाद द्वारा प्रबंध: सिर्फ़ सीमा से बड़े विचलन पर कार्रवाई।
- नियोजन मानक तय करता है; नियंत्रण उन्हें जाँचता है।
हल किए गए उदाहरण
1. मानक उत्पादन रोज़ 500 इकाई है, वास्तविक 450। विचलन और विचलन % निकालें।
विचलन = 450 − 500 = −50 इकाई। विचलन % = −50 ÷ 500 × 100 = −10%।
2. मानक लागत ₹20 प्रति इकाई, वास्तविक ₹23। यह फ़र्म के लिए अच्छा है या बुरा? % निकालें।
₹3 ज़्यादा प्रति इकाई, यानी बुरा (लागत बढ़ी)। % = 3 ÷ 20 × 100 = 15% ज़्यादा।
3. फ़र्म ±5% विचलन की छूट देती है। बिक्री लक्ष्य ₹10,00,000, वास्तविक ₹9,60,000। क्या कार्रवाई हो?
विचलन −40,000 यानी −4%। यह ±5% के अंदर है, इसलिए अपवाद द्वारा प्रबंध के अनुसार कार्रवाई ज़रूरी नहीं।
4. कार फ़ैक्टरी में सफ़ाई सामान की लागत 20% और स्टील की 4% बढ़ी। किस पर ज़्यादा ध्यान?
स्टील पर। यह मुख्य परिणाम क्षेत्र है और कुल लागत का बड़ा हिस्सा है। यह महत्वपूर्ण बिंदु नियंत्रण है।
5. पुरानी मशीन बार-बार ख़राब होने से उत्पादन कम है। कौन-सा चरण, क्या कार्रवाई?
चरण 4 ने कारण ढूँढा। चरण 5: मशीन की मरम्मत या बदली।
6. सबसे अच्छे कर्मचारी भी 200 पीस रोज़ का लक्ष्य नहीं छू पाते। प्रबंधक क्या सोचे?
मानक ही अवास्तविक हो सकता है। नियंत्रण मानकों की सटीकता जाँचता है, इसलिए लक्ष्य बदलना पड़ सकता है।
आम गलतियाँ
- नियंत्रण को सज़ा देना समझना। यह जाँचना और सुधारना है।
- हर छोटे विचलन पर कार्रवाई करना। अपवाद द्वारा प्रबंध सिर्फ़ बड़े पर कहता है।
- कहना कि नियंत्रण सिर्फ़ पीछे देखता है। यह आगे भी देखता है।
- भूलना कि नियोजन पहले आता है।