गुणवत्ता का मतलब क्या है?
गुणवत्ता का मतलब है वस्तु या सेवा उद्देश्य के लायक हो (अपना काम करे) और ग्राहक की उम्मीद पूरी करे। सस्ता पेन भी अच्छी गुणवत्ता का है अगर अपनी कीमत पर ठीक लिखे।
गुणवत्ता के कई हिस्से हैं: भरोसेमंद होना, सुरक्षा, डिज़ाइन, टिकाऊपन (कितना चले) और बिक्री के बाद सेवा। सेवाओं में तेज़ी, अच्छा व्यवहार और पहली बार में सही काम भी।
गुणवत्ता क्यों ज़रूरी है
- ग्राहक बार-बार आते हैं और दूसरों को बताते हैं।
- कंपनी थोड़ी ज़्यादा कीमत ले सकती है।
- बर्बादी, वापसी और रिफ़ंड कम।
- असुरक्षित माल से कानूनी परेशानी कम।
खराब गुणवत्ता की लागत
कबाड़, दोबारा काम, रिफ़ंड, ग्राहक खोना, खराब ऑनलाइन रिव्यू और ब्रांड की बदनामी।
गुणवत्ता नियंत्रण बनाम गुणवत्ता आश्वासन
गुणवत्ता नियंत्रण (QC): निरीक्षक अंत में बना माल (या नमूने) जाँचकर खराब हटाते हैं। दोष बनने के बाद पकड़ा जाता है।
- + खराब माल ग्राहक तक कम पहुँचता है। चलाना आसान।
- − बर्बादी महँगी। कर्मचारी लापरवाह हो सकते हैं ("निरीक्षक पकड़ लेगा")। दोष रुकते नहीं।
गुणवत्ता आश्वासन (QA): ऐसी व्यवस्था जो कच्चे माल से डिलीवरी तक हर चरण पर जाँचे, ताकि दोष बने ही नहीं। कर्मचारी अपना काम खुद जाँचते हैं।
- + बर्बादी कम, समय के साथ लागत कम, कर्मचारी ज़िम्मेदार महसूस करते हैं।
- − प्रशिक्षण और शुरू करने में समय लगता है।
TQM, काइज़ेन और गुणवत्ता चक्र
कुल गुणवत्ता प्रबंधन (TQM): गुणवत्ता हर विभाग में, हर समय, हर किसी का काम है। लक्ष्य "शून्य दोष" और "पहली बार में सही"। हर कर्मचारी अगले व्यक्ति को अपना ग्राहक मानता है।
काइज़ेन (जापानी शब्द, मतलब "बेहतरी के लिए बदलाव"): कुछ बड़े बदलावों की जगह कर्मचारियों के सुझाए बहुत से छोटे, लगातार सुधार।
गुणवत्ता चक्र (quality circle): कर्मचारियों के छोटे समूह जो नियमित मिलकर गुणवत्ता की समस्याएँ ढूँढते और हल सुझाते हैं।
फ़ायदे: प्रेरित कर्मचारी, लगातार सुधार, कम दोष। दिक्कतें: प्रशिक्षण का खर्च, समय, बदलाव का विरोध, नतीजे धीरे दिखते हैं।
बेंचमार्किंग और गुणवत्ता मानक
बेंचमार्किंग: अपने उत्पाद या तरीकों की तुलना सबसे अच्छी कंपनियों से करना और अच्छे विचार अपनाना। मुश्किल: प्रतिद्वंद्वी जानकारी नहीं देते।
गुणवत्ता मानक गुणवत्ता व्यवस्था के तय नियम हैं। ISO 9001 अंतरराष्ट्रीय मानक है: बाहरी संस्था कंपनी की प्रक्रिया जाँचकर प्रमाणपत्र देती है। कई खरीदार सिर्फ़ प्रमाणित सप्लायर से माल लेते हैं। भारत में BIS चिह्न बताता है कि उत्पाद जाँचा हुआ है।
ग्राहक सेवा भी गुणवत्ता का हिस्सा है: स्टाफ़ प्रशिक्षण, जल्दी जवाब, आसान वापसी और फ़ीडबैक फ़ॉर्म।
करके देखो
10 कागज़ के हवाई जहाज़ बनाओ। पहले सिर्फ़ अंत में जाँचो: हर एक फेंको और गिनो कितने 3 m उड़े। अगले दौर में हर तह बनाते समय जाँचो (QA)। तीसरे दौर में दोस्त से एक छोटा सुधार सुझाव लो (काइज़ेन)। हर दौर में असफल जहाज़ और बर्बाद कागज़ गिनो। फिर यही विचार फ्री-प्ले में आज़माओ।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- गुणवत्ता: उद्देश्य के लायक और ग्राहक की उम्मीद पूरी
- गुणवत्ता नियंत्रण: बना माल जाँचो, खराब हटाओ
- गुणवत्ता आश्वासन: हर चरण पर जाँच से दोष रोको
- TQM: हर कोई गुणवत्ता का ज़िम्मेदार; शून्य दोष
- काइज़ेन: छोटे लगातार सुधार
- गुणवत्ता चक्र: समस्याएँ सुलझाने वाला कर्मचारी समूह
- बेंचमार्किंग: सबसे अच्छी कंपनियों के तरीके अपनाना
- दोष दर = खराब इकाइयाँ ÷ कुल इकाइयाँ × 100
हल किए गए उदाहरण
1. एक बेकरी अंत की जाँच में 600 में से 30 ब्रेड फेंकती है। दोष दर निकालो।
30 ÷ 600 × 100 = 5%।
2. बताओ: (क) भरने के बाद बोतलों का नमूना जाँचना; (ख) आटा आते ही जाँचना और बेकरों को खुद जाँचना सिखाना।
(क) गुणवत्ता नियंत्रण (अंत की जाँच)। (ख) गुणवत्ता आश्वासन (हर चरण में जाँच)।
3. एक फ़ोन कंपनी की वापसी दर 4% है; सबसे अच्छी कंपनी की 1%। वह क्या करे?
अग्रणी कंपनी से बेंचमार्किंग करे, खुद-जाँच वाला QA अपनाए, और वापसी के मुख्य कारण ढूँढने को गुणवत्ता चक्र शुरू करे।
4. होटल के लिए TQM का एक फ़ायदा और एक कमी बताओ।
फ़ायदा: हर कर्मचारी मेहमान के अनुभव की परवाह करता है, शिकायतें कम। कमी: सबको प्रशिक्षण देने में पैसा और समय लगता है।
आम गलतियाँ
- गुणवत्ता को "महँगा" या "लग्ज़री" समझना। गुणवत्ता = अपनी कीमत पर काम का।
- QC और QA को मिला देना। QC अंत में दोष पकड़ता है; QA हर चरण पर उन्हें रोकता है।
- काइज़ेन को एक बड़ा बदलाव समझना। यह बहुत से छोटे, लगातार बदलाव हैं।
- गुणवत्ता सुधारने की लागत भूल जाना: प्रशिक्षण, जाँच, समय और कर्मचारियों का विरोध।