संगठन क्यों बनता है?
अकेला आदमी सब कुछ अच्छे से नहीं कर सकता। संगठन (organisation) ऐसे लोगों का समूह है जो ऐसे लक्ष्य के लिए मिलकर काम करते हैं जो एक आदमी के लिए बहुत बड़ा है।
- बेकर, ड्राइवर और विक्रेता मिलकर पूरे शहर को सेवा दे सकते हैं।
- हर कोई वही काम करता है जो उसे सबसे अच्छा आता है (इसे विशेषज्ञता कहते हैं)।
- साथ मिलकर ज़्यादा पैसा जुटा सकते हैं और ज़्यादा जोखिम उठा सकते हैं।
संगठन समाज की भी सेवा करते हैं: रोज़गार देते हैं, ज़रूरी चीज़ें बनाते हैं और कर देते हैं।
संगठनों के प्रकार और उन्हें बाँटने के तरीक़े
संगठनों को कई तरह से बाँटा जा सकता है।
लक्ष्य के अनुसार
- लाभ वाले संगठन (दुकान, कारख़ाने): मालिकों के लिए पैसा कमाना चाहते हैं।
- ग़ैर-लाभकारी संगठन (दान संस्थाएँ, क्लब): किसी उद्देश्य की सेवा करते हैं, मालिकों के लिए मुनाफ़ा नहीं रखते।
- सरकारी संगठन (सरकारी स्कूल, नगर कार्यालय): जनता को सेवाएँ देते हैं।
आकार के अनुसार
छोटे (कुछ लोग), मध्यम और बड़े (हज़ारों लोग)।
क्षेत्रक के अनुसार
खेती, उद्योग (चीज़ें बनाना) और सेवाएँ (बैंक, परिवहन, पढ़ाई)।
मालिक के अनुसार
निजी, सार्वजनिक (सरकारी) या मिश्रित।
एक व्यक्ति से क़ानूनी इकाई तक
क़ानूनी रूप (legal form) क़ानून को बताता है कि व्यवसाय का मालिक कौन है और कर्ज़ किसे चुकाना होगा।
- एकल स्वामी: एक व्यक्ति। व्यवसाय और मालिक एक ही हैं। असीमित दायित्व: कर्ज़ चुकाने के लिए निजी संपत्ति भी ली जा सकती है।
- साझेदारी: दो या ज़्यादा लोग काम, लाभ और जोखिम बाँटते हैं। साझेदारों का असीमित दायित्व।
- कंपनी: एक क़ानूनी इकाई, क़ानून की नज़र में अलग व्यक्ति। वह चीज़ें रख सकती है, अनुबंध कर सकती है और उस पर मुक़दमा हो सकता है। मालिक शेयरधारक होते हैं और उनका सीमित दायित्व होता है: वे सिर्फ़ लगाया हुआ पैसा खोते हैं।
- सहकारी समिति: कई सदस्य मिलकर मालिक होते हैं। एक सदस्य = एक वोट। सीमित दायित्व।
सीमित दायित्व क्यों ज़रूरी है: घर सुरक्षित हो तो लोग निवेश करने की हिम्मत करते हैं।
संगठन के ढाँचे
ढाँचा (structure) बताता है कि कौन किसे रिपोर्ट करता है। इसके चित्र को संगठन चार्ट कहते हैं।
- ऊँचा ढाँचा: कई स्तर, हर बॉस के नीचे कम लोग (छोटा नियंत्रण का दायरा)। नियंत्रण अच्छा, संदेश धीमे।
- सपाट ढाँचा: कम स्तर, हर बॉस के नीचे ज़्यादा लोग। तेज़ और क़रीबी, पर बॉस पर बोझ।
- विभाग (कार्यात्मक) ढाँचा: लोग काम के अनुसार बँटते हैं, जैसे बिक्री, उत्पादन, वित्त। विशेषज्ञ साथ रहते हैं, पर विभाग आपस में कम बात कर सकते हैं।
नियंत्रण का दायरा (span of control) = एक बॉस के सीधे नीचे कितने लोग हैं। आदेश की कड़ी = ऊपर से नीचे आदेश जाने का रास्ता। प्रत्यायोजन (delegation) = किसी नीचे वाले को काम और उसे करने का अधिकार देना।
प्रबंधन के कार्य और कर्मचारी
प्रबंधक संगठन को चलाते रहते हैं। वे चार काम बार-बार करते हैं:
- योजना: लक्ष्य और उन तक पहुँचने का तरीक़ा तय करना।
- संगठन: लोगों को काम, साधन और पैसा देना।
- नेतृत्व: लोगों को राह दिखाना और प्रेरित करना।
- नियंत्रण: नतीजों को योजना से मिलाना और कमी सुधारना।
कर्मचारी (personnel) वे लोग हैं जो संगठन में काम करते हैं। अच्छे प्रबंधक सही लोग रखते हैं, उन्हें सिखाते हैं और उनके साथ न्याय करते हैं।
नेतृत्व शैलियाँ
नेतृत्व शैली यह है कि नेता फ़ैसले कैसे लेता है और लोगों के साथ कैसा व्यवहार करता है।
- बॉस-प्रधान (निरंकुश): नेता अकेले तय करता है। तेज़, आपात स्थिति में अच्छा, पर लोग अनसुने महसूस कर सकते हैं।
- टीम-प्रधान (लोकतांत्रिक): नेता सुनता है, टीम विचार देती है, फिर साथ तय करते हैं। धीमा, पर लोग गर्व और ज़िम्मेदारी महसूस करते हैं।
- खुली छूट: नेता लक्ष्य देता है और लोगों को तरीक़ा चुनने देता है। कुशल लोगों के लिए अच्छा, नए लोगों के लिए जोखिम।
कोई एक शैली हमेशा सबसे अच्छी नहीं है। अच्छा नेता लोगों और हालात के हिसाब से शैली बदलता है।
संगठन के सिद्धांत, बाज़ार हिस्सेदारी और सच्चा दाम
पुराने विचार: लगभग 1900 में वैज्ञानिक प्रबंधन ने कहा "सबसे अच्छा तरीक़ा खोजो, मज़दूरों को सिखाओ, उत्पादन के हिसाब से दाम दो"। नौकरशाही ने साफ़ नियमों और स्तरों पर ज़ोर दिया। बाद में मानव-संबंध दृष्टि ने कहा कि ख़ुश और सम्मानित कर्मचारी बेहतर काम करते हैं।
आज के विचार: आधुनिक कंपनियाँ सपाट टीमें, प्रोजेक्ट और घर से काम का उपयोग करती हैं और कर्मचारियों को ज़्यादा बोलने देती हैं। सबसे अच्छा ढाँचा हालात पर निर्भर करता है (इसे परिस्थिति-विचार कहते हैं)।
बाज़ार हिस्सेदारी = (फ़र्म की बिक्री ÷ बाज़ार की कुल बिक्री) × 100%। यह दूसरों की तुलना में फ़र्म का आकार बताती है।
सच्चा दाम = दुकान का दाम और वे छिपी लागतें (जैसे प्रदूषण) जो लोगों और प्रकृति पर पड़ती हैं पर अभी किसी ने नहीं चुकाई।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- संगठन = लोग + साझा लक्ष्य + ढाँचा
- प्रबंधन के चार काम: योजना → संगठन → नेतृत्व → नियंत्रण (P-O-L-C)
- नियंत्रण का दायरा = एक प्रबंधक के सीधे नीचे के लोगों की संख्या
- बाज़ार हिस्सेदारी (%) = फ़र्म की बिक्री ÷ कुल बाज़ार बिक्री × 100
- सीमित दायित्व: मालिक अधिकतम लगाया पैसा खोता है; असीमित दायित्व: निजी संपत्ति भी जोखिम में
हल किए गए उदाहरण
1. आशा की सिलाई की दुकान अकेली उसकी है। एक ग्राहक ने ₹3 लाख का मुक़दमा किया। दुकान में ₹1 लाख है। क्या हो सकता है और आशा क्या बदल सकती है?
एकल स्वामी होने से उसका असीमित दायित्व है। दुकान का पैसा लगने के बाद ₹2 लाख और उसकी निजी संपत्ति से लिए जा सकते हैं। अगर वह कंपनी बना ले, तो कर्ज़ कंपनी पर होगा (आशा पर नहीं) और वह सिर्फ़ लगाया पैसा खोएगी।
2. एक फ़र्म में 1 प्रबंधक के नीचे 3 पर्यवेक्षक हैं और हर पर्यवेक्षक के नीचे 6 कर्मचारी। हर स्तर पर दायरा गिनो और कुल कर्मचारी बताओ।
स्तर: प्रबंधक, पर्यवेक्षक, कर्मचारी (3 स्तर)। प्रबंधक का दायरा = 3। हर पर्यवेक्षक का दायरा = 6। कुल कर्मचारी = 3 × 6 = 18। 3 स्तर और छोटे दायरे हैं, तो यह काफ़ी ऊँचा ढाँचा है।
3. रसोई में एक नया रसोइया आया है। मुख्य शेफ़ हर क़दम बोलकर बताता है। दूसरे दिन एक अनुभवी रसोइये से सिर्फ़ कहा गया "50 लोगों का खाना बनाओ"। शैलियाँ बताओ और क्या ठीक हैं?
पहला दिन: बॉस-प्रधान (निरंकुश)। नए व्यक्ति को साफ़ क़दम चाहिए, इसलिए ठीक है। दूसरा दिन: खुली छूट। अनुभवी रसोइया जानता है कैसे बनाना है, इसलिए ठीक है। सही शैली व्यक्ति पर निर्भर करती है।
4. एक शहर में दुकान X साल में ₹30 लाख बेचती है। बाज़ार की सब दुकानें मिलकर ₹200 लाख बेचती हैं। X की बाज़ार हिस्सेदारी निकालो।
बाज़ार हिस्सेदारी = 30 ÷ 200 × 100 = 15%।
आम गलतियाँ
- "कंपनी" और "फ़र्म" को एक मान लेना। फ़र्म कोई भी व्यवसाय है। कंपनी एक क़ानूनी रूप है जिसमें सीमित दायित्व होता है।
- सोचना कि सपाट ढाँचे में बॉस नहीं होता। बॉस होता है; बस स्तर कम और दायरा चौड़ा होता है।
- "संगठन" (काम और साधन बाँटना) और "नेतृत्व" (लोगों को प्रेरित करना) को मिला देना।
- मान लेना कि एक नेतृत्व शैली सबके लिए सबसे अच्छी है। सही शैली लोगों और काम पर निर्भर है।