संयुक्त स्टॉक कंपनी की विशेषताएँ और अंग
संयुक्त स्टॉक कंपनी बहुत लोगों को शेयर बेचकर पैसा जुटाती है। इसकी मुख्य विशेषताएँ:
- क़ानूनी व्यक्ति। वह अपने नाम से चीज़ें रख सकती है, अनुबंध कर सकती है, मुक़दमा कर सकती है और उस पर मुक़दमा हो सकता है।
- सीमित दायित्व (limited liability)। शेयरधारक का नुकसान ज़्यादा से ज़्यादा शेयर में लगाए पैसे तक होता है। मालिक का घर सुरक्षित रहता है।
- शेयर बेचना आसान। शेयरधारक शेयर किसी और को बेच सकता है। कंपनी चलती रहती है।
- निरंतर जीवन। किसी शेयरधारक की मृत्यु पर भी कंपनी बनी रहती है।
अंग (जो फ़ैसले लेते हैं)
शेयरधारकों की आम सभा सबसे ऊपर है। वह निदेशक चुनती है और बड़े मामलों को मंज़ूरी देती है। निदेशक मंडल (बोर्ड) योजना बनाता है और प्रबंधकों पर नज़र रखता है। प्रबंधक रोज़ का काम करते हैं। कई देशों में लेखा-परीक्षक (auditor) हिसाब जाँचते हैं। नाम देश के हिसाब से बदलते हैं, पर बात वही है: मालिक, बोर्ड, प्रबंधक।
अनुबंध
अनुबंध (contract) वह समझौता है जिसे कानून लागू करवाता है। आमतौर पर इसके लिए चाहिए:
- एक पक्ष का प्रस्ताव (offer)।
- दूसरे पक्ष की स्वीकृति (acceptance)।
- दोनों ओर से कुछ मूल्य की चीज़ (माल के बदले पैसा)।
- दोनों पक्ष अपनी मर्ज़ी से और सहमत होने के योग्य हों (बच्चा न हो, दबाव न हो)।
- वैध उद्देश्य।
अगर कोई पक्ष वादा तोड़े तो इसे उल्लंघन (breach) कहते हैं। दूसरा पक्ष नुकसान की भरपाई (क्षतिपूर्ति) माँग सकता है या अदालत से कह सकता है कि दूसरा पक्ष वादा निभाए। कई अनुबंध मुँहज़बानी भी हो सकते हैं, पर लिखित को साबित करना बहुत आसान है।
पैसा जुटाना और वित्तीय लेन-देन
कंपनी को शुरू करने और बढ़ने के लिए पैसा चाहिए। इसके दो बड़े रास्ते हैं।
| इक्विटी (शेयर) | ऋण (लोन, बॉन्ड) | |
|---|---|---|
| पैसा कौन देता है | मालिक | ऋणदाता |
| क्या लौटाना है? | नहीं | हाँ, ब्याज के साथ |
| मुनाफ़े में हिस्सा | हाँ, मुनाफ़ा हो तो लाभांश | नहीं, सिर्फ़ तय ब्याज |
| चलाने में बोलने का हक़ | हाँ (वोट) | नहीं |
कंपनी अपने मुनाफ़े का कुछ हिस्सा भी रख सकती है (रोका हुआ मुनाफ़ा)। क्योंकि बहुत लोग कंपनी पर भरोसा करके पैसा देते हैं, कानून ईमानदार हिसाब और जनता को शेयर बेचते समय साफ़ जानकारी माँगता है।
पुनर्गठन, परिसमापन और पुनर्वास
कंपनियाँ रूप बदलती हैं और कभी-कभी डूबती भी हैं।
- पुनर्गठन: विलय (merger) यानी दो कंपनियाँ जुड़ती हैं, अधिग्रहण (acquisition) यानी एक दूसरी को ख़रीदती है, या विभाजन यानी एक कंपनी दो बनती है।
- पुनर्वास (बचाव): मुश्किल में फँसी कंपनी को कानूनी योजना मिलती है, जैसे चुकाने के लिए और समय या कम क़र्ज़, ताकि वह चलती रहे। इससे नौकरियाँ बचती हैं।
- परिसमापन (liquidation): कंपनी बंद की जाती है। परिसमापक उसकी संपत्ति बेचकर क़र्ज़ चुकाता है। ऋणदाताओं और दूसरे लेनदारों को पहले पैसा मिलता है। जो बचे वह शेयरधारकों को।
सीमित दायित्व के कारण, अगर पैसा कम पड़े तो शेयरधारक अपने शेयरों की क़ीमत खोते हैं, पर बाक़ी रक़म अपनी जेब से नहीं भरते।
निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना
जब बहुत विक्रेता होड़ करते हैं, तो दाम ठीक रहते हैं और गुणवत्ता सुधरती है। प्रतिस्पर्धा कानून (एंटीट्रस्ट या एकाधिकार-विरोधी कानून) इसे बचाता है। यह आमतौर पर रोकता है:
- कार्टेल: विक्रेता चुपके से दाम तय करें या बाज़ार बाँट लें।
- बोली में मिलीभगत: बोली लगाने वाले तय कर लें कि ठेका किसे मिलेगा।
- प्रभुत्व का दुरुपयोग: बहुत बड़ी कंपनी छोटे प्रतिद्वंद्वियों को अनुचित तरीक़े से कुचले।
- नुकसानदेह विलय: बड़े विलय की प्रतिस्पर्धा प्राधिकरण जाँच कर सकता है या रोक सकता है।
दोषियों पर जुर्माना लगता है और उन्हें रुकने का आदेश मिलता है। ग्राहकों को फ़ायदा होता है क्योंकि ईमानदार प्रतिद्वंद्वी दाम कम रखते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- स्वामित्व % = (आपके शेयर / कुल शेयर) x 100
- सीमित दायित्व: अधिकतम नुकसान = शेयर में लगाया पैसा
- अनुबंध = प्रस्ताव + स्वीकृति + मूल्य + स्वतंत्र सहमति + वैध उद्देश्य
- परिसमापन क्रम: पहले लेनदार, अंत में शेयरधारक
- मुख्य शब्द: शेयर, लाभांश, बोर्ड, विलय, अधिग्रहण, परिसमापन, कार्टेल
हल किए गए उदाहरण
1. एक कंपनी के 500 शेयर हैं। आशा के पास 125 हैं। कंपनी का कितना प्रतिशत उसका है?
125 / 500 = 0.25, यानी 25%।
2. रवि साइकिल 3,000 में बेचने का प्रस्ताव देता है। मीना कहती है "हाँ, मैं ख़रीदूँगी"। क्या अनुबंध हुआ? क्यों?
हाँ। प्रस्ताव (रवि), स्वीकृति (मीना) और दोनों ओर मूल्य (साइकिल और पैसा) है। दोनों अपनी मर्ज़ी से सहमत हैं और उद्देश्य वैध है।
3. एक कंपनी बंद होती है। उसकी संपत्ति 600 में बिकती है। बैंक का क़र्ज़ 500 है और शेयर पूँजी 300 थी। शेयरधारकों को कितना मिलेगा?
पहले लेनदारों को: 600 - 500 = 100 बचे। शेयरधारकों में 100 बँटेंगे, यानी वे अपने 300 में से 200 खो देते हैं।
4. तीन बेकरियाँ मिलकर एक ही रोटी का दाम 50 तय करती हैं। इसे क्या कहते हैं और एक नतीजा बताओ।
यह कार्टेल (दाम तय करना) है, जिसे प्रतिस्पर्धा कानून रोकता है। बेकरियों पर जुर्माना लग सकता है और उन्हें रुकने को कहा जाएगा।
आम गलतियाँ
- मालिक और कंपनी को एक ही व्यक्ति समझना। कानून में कंपनी अलग है।
- सोचना कि शेयरधारक रोज़ कंपनी चलाते हैं। यह काम बोर्ड और प्रबंधक करते हैं।
- शेयर और ऋण को एक जैसा मानना। ऋण लौटाना पड़ता है, शेयर नहीं।
- मानना कि बड़ी कंपनी हमेशा ग़ैरक़ानूनी है। सिर्फ़ अनुचित काम जैसे कार्टेल और दुरुपयोग रोके जाते हैं।