कानून क्या है और किसलिए है?
कानून (विधि) नियमों की वह व्यवस्था है जिसे समाज राज्य के ज़रिए बनाता या मान्यता देता है और लागू करता है। इसका काम है व्यवस्था और शांति रखना, बिना हिंसा के विवाद सुलझाना, लोगों के अधिकारों और स्वतंत्रता की रक्षा करना, और जीवन को अनुमान योग्य बनाना (करने से पहले पता हो कि क्या मना है)।
विधि का शासन का मतलब है कि सरकार समेत सब कानून के अधीन हैं; कानून सार्वजनिक और स्पष्ट हैं; और स्वतंत्र अदालतें उन्हें सब पर बराबर लागू करती हैं। इससे समानता, न्याय, कुछ देशों में पंथनिरपेक्षता और एकजुटता (जैसे सामाजिक सुरक्षा कानून) जुड़े हैं।
विधिक नियम की विशेषताएँ
- सामान्य और अमूर्त: एक जैसी स्थिति के हर व्यक्ति पर लागू, किसी एक नाम के व्यक्ति पर नहीं।
- बाध्यकारी: असहमत होने पर भी मानना पड़ता है।
- राज्य द्वारा लागू: तोड़ने पर दंड/परिणाम हो सकता है: जुर्माना, हर्जाना, अनुबंध रद्द होना या अपराध में जेल।
- सक्षम सत्ता द्वारा तय प्रक्रिया से बना और प्रकाशित, ताकि लोग जान सकें।
स्कूल या खेल का नियम समूह के अंदर सामान्य और बाध्यकारी हो सकता है, पर उसे राज्य की अदालत लागू नहीं करती। यही मुख्य अंतर है।
कानून और नैतिकता
नैतिकता सही-गलत के बारे में किसी व्यक्ति या समाज के विचार हैं। कई कानून साझा नैतिकता से आते हैं (हत्या मत करो, चोरी मत करो)। पर:
- कुछ कानून नैतिक रूप से तटस्थ हैं (सड़क के एक ओर चलाना; तय तारीख तक कर विवरणी भरना)।
- कुछ नैतिक कर्तव्य कानून नहीं हैं (दयालु रहना, दोस्त से वादा निभाना, सहपाठी की मदद)।
- नैतिकता अंतरात्मा और समाज के दबाव से चलती है; कानून अदालत से।
- नैतिक विचार समय और समूह के साथ बदलते हैं; कानून औपचारिक प्रक्रिया से बदलता है, और नैतिक बहसें अक्सर कानून बदलवाती हैं।
कानून के स्रोत और उनका क्रम
- संविधान: सर्वोच्च कानून। यह राज्य बनाता है, शक्तियाँ बाँटता है और मूल अधिकार बताता है। उससे टकराने वाला कानून अदालत रद्द कर सकती है।
- अंतरराष्ट्रीय संधियाँ और क्षेत्रीय कानून (जैसे देशों के किसी क्षेत्रीय संघ का कानून), जिन्हें देश ने मानना स्वीकार किया है।
- अधिनियम (विधान) जो संसद या विधानसभा पारित करती है।
- नियम, आदेश और उपनियम जो सरकार या स्थानीय निकाय अधिनियम से मिली शक्ति से बनाते हैं।
पिरामिड के बगल में: न्यायिक निर्णय (पूर्व-निर्णय), ऊँची अदालतों के फ़ैसले जो आगे के मामलों का मार्ग दिखाते हैं (भारत और ब्रिटेन जैसे कॉमन-लॉ देशों में बहुत अहम), और रीति-रिवाज, लंबे समय से चली प्रथाएँ जिन्हें अदालत मानती है। विशेषज्ञों के लेख (विधि-शास्त्र) कानून समझाने में मदद करते हैं।
इस क्रम को मानकों का पदानुक्रम कहते हैं: निचला नियम हर ऊपर वाले नियम के अनुसार होना चाहिए।
विधिक व्यक्ति: अधिकार कौन रख सकता है?
विधिक विषय वह है जिसके अधिकार और कर्तव्य हो सकते हैं।
- प्राकृतिक व्यक्ति: हर इंसान, जन्म से मृत्यु तक। बच्चों के भी अधिकार हैं, पर वयस्कता की आयु (ज़्यादातर देशों में 18) तक कुछ काम (जैसे बड़े अनुबंध) के लिए माता-पिता या अभिभावक चाहिए।
- विधिक (न्यायिक) व्यक्ति: वे समूह जिन्हें कानून एक 'व्यक्ति' मानता है: कंपनी, संघ, NGO, मज़दूर संघ, नगर, राज्य। ये संपत्ति रख सकते हैं, अनुबंध कर सकते हैं, लोगों को नौकरी दे सकते हैं, मुक़दमा कर और झेल सकते हैं।
अदालत में अधिकार का दावा करने के लिए विधिक क्षमता और मामले में हित चाहिए; फिर तथ्य सबूत से साबित करने होते हैं।
रोज़मर्रा में कानून: अनुबंध, उपभोक्ता, अदालत
अनुबंध वह समझौता है जिसे कानून लागू करता है: प्रस्ताव, स्वीकृति, कुछ लेन-देन (प्रतिफल), दोनों पक्ष सक्षम और स्वेच्छा से सहमत, और उद्देश्य वैध। टिकट खरीदना, कमरा किराए पर लेना, फ़ोन प्लान, सब अनुबंध हैं।
उपभोक्ता संरक्षण कानून खरीदार को अधिकार देते हैं: सुरक्षित सामान, सच्ची जानकारी, उचित दाम, और ख़राब सामान पर उपाय (मरम्मत, बदलाव, पैसे वापस)। बिल संभालकर रखिए।
न्याय: विवाद स्वतंत्र अदालतों में जाते हैं। दीवानी मामले निजी विवाद (पैसा, संपत्ति) हैं; फ़ौजदारी मामले समाज के विरुद्ध अपराध। हर किसी को निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- विधिक नियम = सामान्य + बाध्यकारी + राज्य द्वारा लागू
- क्रम: संविधान > संधियाँ > अधिनियम > नियम/उपनियम
- अन्य स्रोत: न्यायिक निर्णय (पूर्व-निर्णय), रीति-रिवाज, विधि-शास्त्र
- विधिक विषय: प्राकृतिक व्यक्ति + विधिक (न्यायिक) व्यक्ति
- अनुबंध = प्रस्ताव + स्वीकृति + प्रतिफल + सक्षमता + स्वतंत्र सहमति + वैध उद्देश्य
हल किए गए उदाहरण
1. 'सोमवार को स्कूल ड्रेस पहनो' क्या कानून है?
नहीं। यह स्कूल के अंदर सामान्य और बाध्यकारी है, पर इसे राज्य नहीं, स्कूल बनाता है और अदालत लागू नहीं करती। परिणाम स्कूल देता है।
2. सरकार का नया नियम किसी अधिनियम के विरुद्ध है। क्या होगा?
अधिनियम क्रम में ऊपर है, इसलिए नियम को अदालत में चुनौती देकर रद्द कराया जा सकता है।
3. छाँटिए: (a) हत्या मत करो (b) वाहन का पंजीकरण कराओ (c) मदद करने वाले को धन्यवाद कहो।
(a) कानून और नैतिकता, (b) केवल कानून, (c) केवल नैतिकता/शिष्टाचार।
4. क्या कोई फ़ुटबॉल क्लब स्टेडियम का मालिक हो सकता है और बकाया बिल के लिए उस पर मुक़दमा हो सकता है?
हाँ, अगर वह कंपनी या संघ के रूप में पंजीकृत है। वह अपने अधिकार और कर्तव्य वाला विधिक व्यक्ति है।
आम गलतियाँ
- हर नियम को कानून मान लेना। केवल राज्य के बनाए या माने गए और अदालत से लागू नियम कानून हैं।
- कानून और नैतिकता को एक समझना। कुछ कानून नैतिक रूप से तटस्थ हैं और कई नैतिक कर्तव्य कानून नहीं।
- कंपनी को केवल उसके मालिक समझना। पंजीकृत कंपनी अलग विधिक व्यक्ति है।
- सोचना कि संसद कोई भी कानून बना सकती है। ज़्यादातर देशों में कानून संविधान के अनुसार होने चाहिए।