करों के प्रकार और कंपनी के कर-कर्तव्य
कर (tax) वह पैसा है जो कानून के अनुसार लोगों और कंपनियों को सरकार को देना पड़ता है। सरकार इसे सड़क, स्कूल, अस्पताल और सुरक्षा पर ख़र्च करती है। कर दो तरह के होते हैं:
- प्रत्यक्ष कर: जो बोझ उठाता है वही देता है, जैसे कंपनी के मुनाफ़े पर कॉर्पोरेट कर और व्यक्ति पर आयकर।
- अप्रत्यक्ष कर: विक्रेता ख़रीदारों से वसूलते हैं, जैसे उपभोग कर (VAT या GST)।
कंपनी के कुछ कर्तव्य हैं: सही हिसाब रखना, कर-योग्य मुनाफ़ा निकालना, समय पर विवरण दाख़िल करना, कर चुकाना और कई साल तक रिकॉर्ड रखना। कंपनी क़ानूनी व्यक्ति है, इसलिए वह अपने नाम से कर देती है, मालिकों से अलग।
कॉर्पोरेट कर
कर-योग्य मुनाफ़ा लगभग बिक्री घटा मान्य ख़र्च होता है। कॉर्पोरेट कर = कर-योग्य मुनाफ़ा x कर दर। दर देश पर और कभी-कभी कंपनी के आकार पर निर्भर करती है। कुछ ख़र्च पूरे मान्य नहीं होते, इसलिए कर का मुनाफ़ा हिसाब के मुनाफ़े से अलग हो सकता है।
कॉर्पोरेट कर का विवरण भरना और भुगतान
ज़्यादातर देशों में चरण एक जैसे हैं:
- वित्तीय वर्ष ख़त्म होता है और खाते बंद होते हैं।
- कंपनी कर-योग्य मुनाफ़ा और कर निकालती है।
- वह तय तारीख़ से पहले विवरण (return) दाख़िल करती है, जिसमें आँकड़े होते हैं।
- वह तय तारीख़ तक कर चुकाती है। कई देश साल के बीच अग्रिम भुगतान भी माँगते हैं।
अगर कंपनी देर से विवरण भरे, देर से चुकाए या झूठे आँकड़े दे, तो ब्याज और जुर्माना लगता है, और गंभीर धोखाधड़ी अपराध है। अगर ज़्यादा कर चुका दिया हो, तो वापसी (refund) माँगी जा सकती है।
उपभोग कर का विवरण भरना और भुगतान
उपभोग कर (कई देशों में VAT या GST) माल और सेवाओं के दाम में जुड़ता है। ख़रीदार देता है, पर विक्रेता को उसे सरकार तक पहुँचाना होता है।
- आउटपुट टैक्स: कंपनी जो कर अपनी बिक्री पर वसूलती है।
- इनपुट टैक्स: कंपनी ने जो कर अपनी ख़रीद पर दिया।
- देय कर = आउटपुट टैक्स - इनपुट टैक्स।
10% पर उदाहरण: बिक्री 100 पर आउटपुट टैक्स 10। 50 के सामान पर इनपुट टैक्स 5 था। कंपनी 10 - 5 = 5 चुकाती है। इस तरह कर सिर्फ़ उस मूल्य पर लगता है जो कंपनी जोड़ती है। कंपनियाँ नियमित रूप से (मासिक, तिमाही या सालाना) उपभोग कर का विवरण भरती हैं और तय तारीख़ तक चुकाती हैं। कुछ देशों में बहुत छोटे विक्रेताओं को छूट मिल सकती है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मुनाफ़ा = बिक्री - ख़र्च
- कॉर्पोरेट कर = कर-योग्य मुनाफ़ा x कर दर
- कर सहित दाम = दाम x (1 + दर)
- देय उपभोग कर = आउटपुट टैक्स - इनपुट टैक्स
- मुख्य शब्द: प्रत्यक्ष कर, अप्रत्यक्ष कर, विवरण, इनपुट टैक्स, आउटपुट टैक्स
हल किए गए उदाहरण
1. बिक्री 200 और ख़र्च 140 है। कॉर्पोरेट कर दर 25% है। कर निकालो।
मुनाफ़ा = 200 - 140 = 60। कर = 60 x 25% = 15।
2. एक फ़ोन 10% उपभोग कर से पहले 500 का है। ख़रीदार कितना देगा?
कर = 500 का 10% = 50। ख़रीदार देगा 500 + 50 = 550।
3. एक दुकान ने बिक्री पर 80 उपभोग कर वसूला और ख़रीद पर 55 दिया। वह सरकार को कितना भेजेगी?
80 - 55 = 25।
4. एक कंपनी कर विवरण तय तारीख़ के 20 दिन बाद दाख़िल करती है। क्या हो सकता है?
बिना चुकाए कर पर ब्याज और जुर्माना देना पड़ सकता है, क्योंकि विवरण और भुगतान देर से हुए।
आम गलतियाँ
- दोनों करों को मिला देना: कॉर्पोरेट कर मुनाफ़े पर है, उपभोग कर बिक्री पर।
- सोचना कि दुकान उपभोग कर अपनी जेब से देती है। ख़रीदार देता है; दुकान सिर्फ़ आगे भेजती है।
- देय कर निकालते समय इनपुट टैक्स घटाना भूल जाना।
- कॉर्पोरेट कर मुनाफ़े की जगह बिक्री पर लगा देना।