व्यापार में शिष्टाचार क्यों ज़रूरी है
शिष्टाचार (manners) यानी व्यवहार के अच्छे तरीक़े। व्यापार में लोग आपके व्यवहार से कंपनी को परखते हैं। एक नम्र और साफ़ बोलने वाला इंसान पूरी कंपनी की अच्छी छवि बनाता है।
काम पर आप अकेले नहीं, एक टीम के सदस्य हैं। इसलिए साझा नियम मानो, परेशानी की ख़बर टीम को जल्दी दो और वादे निभाओ। अच्छे व्यवहार से आपका नेटवर्क (मेल-जोल) भी बढ़ता है। आज मिला इंसान कल ग्राहक, साझेदार या दोस्त बन सकता है।
स्वागत (reception) का शिष्टाचार
स्वागत यानी दफ़्तर या दुकान पर आने वालों का सत्कार।
- खड़े हो जाओ, मुस्कुराओ और मेहमान की ओर देखो।
- पहले आप अभिवादन करो (नमस्ते, झुककर प्रणाम या हाथ मिलाना, जो उचित हो)।
- नाम पूछो और किससे मिलना है, फिर सही व्यक्ति को बताओ।
- रास्ता दिखाओ। थोड़ा आगे चलो और कहाँ मुड़ना है बताओ।
- बैठने को कहो और पानी या चाय पूछो।
बैठने की जगह
सबसे वरिष्ठ मेहमान सम्मान की सीट पर बैठता है, जो दरवाज़े से सबसे दूर होती है। मेज़बान दरवाज़े के पास बैठता है। देश की परंपरा अलग हो सकती है, इसलिए पहले जान लो।
सामाजिक मेल-जोल का शिष्टाचार: कार्ड, उपहार, धन्यवाद
बिज़नेस कार्ड: कार्ड साफ़ रखो। दोनों हाथों से दो, नाम सामने वाले की ओर रहे। कार्ड मिले तो पढ़ो, नाम बोलो और सँभालकर रखो। उनके सामने उस पर कुछ मत लिखो।
परिचय: छोटे को बड़े से पहले मिलवाओ, यानी बड़े का नाम पहले लो।
धन्यवाद: मुलाक़ात या उपहार के बाद छोटा-सा धन्यवाद संदेश भेजो। उपहार छोटे रखो और कंपनी के नियम मानो, ताकि किसी पर दबाव न लगे।
ग्राहक सेवा का शिष्टाचार
ग्राहक चाहता है कि उसकी बात सुनी जाए। सुनो, खेद जताओ, हल करो का नियम अपनाओ।
- सुनो: बीच में मत टोको। सिर हिलाओ, ज़रूरी बातें लिखो।
- खेद जताओ: परेशानी के लिए माफ़ी माँगो, भले ग़लती आपकी न हो। यह दोष मानना नहीं, परवाह दिखाना है।
- हल करो: साफ़ बताओ क्या करोगे और कब तक। फिर कर दिखाओ।
फ़ोन और ईमेल
कुछ घंटियों में फ़ोन उठाओ, कंपनी और अपना नाम बताओ, धीरे बोलो। ईमेल में साफ़ विषय, अभिवादन, छोटी पंक्तियाँ और विनम्र अंत रखो। एक दिन के भीतर जवाब दो।
समय की पाबंदी
पाँच मिनट पहले पहुँचो। देर हो तो मीटिंग के समय से पहले फ़ोन करके माफ़ी माँगो।
खुद करो
दोस्त के साथ नाराज़ ग्राहक का अभिनय करो और सुनो-खेद-हल का अभ्यास करो। फिर भूमिकाएँ बदलो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- शिष्टाचार = अच्छी आदतें जो भरोसा बनाती हैं
- स्वागत = खड़े हो + मुस्कुराओ + नाम लो + रास्ता दिखाओ
- कार्ड = दोनों हाथों से दो और लो, पढ़ो
- सेवा = सुनो + खेद जताओ + हल करो
- समय की पाबंदी = 5 मिनट पहले पहुँचो; देर हो तो पहले बताओ
हल किए गए उदाहरण
1. एक विदेशी मेहमान आपकी दुकान में आता है। आप सबसे पहले कौन-से तीन काम करेंगे?
खड़े होकर, मुस्कुराकर पहले अभिवादन करूँगा। फिर नाम पूछूँगा और बैठने को कहूँगा।
2. आपको अपने मैनेजर को आए हुए ग्राहक से मिलवाना है। पहले किसका नाम लेंगे?
पहले ग्राहक का नाम लूँगा और मैनेजर को ग्राहक से मिलवाऊँगा, क्योंकि मेहमान सबसे सम्मानित होता है।
3. एक ग्राहक चिल्लाकर कहती है कि उसका पार्सल देर से आया। सुनो-खेद-हल के हिसाब से जवाब लिखो।
सुनो: उसे पूरी बात कहने दूँगा। खेद: देरी के लिए माफ़ी माँगूँगा। हल: अभी ट्रैकिंग देखकर एक घंटे में नई तारीख़ के साथ फ़ोन करूँगा।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि शिष्टाचार सिर्फ़ शब्दों का है। हाव-भाव, स्वर और समय भी गिने जाते हैं।
- कार्ड एक हाथ से देना या सीधा पीछे की जेब में रख लेना।
- नाराज़ ग्राहक को बीच में टोककर सफ़ाई देना। पहले सुनो।
- हर जगह एक ही रिवाज़ मान लेना। अभिवादन और बैठने की परंपरा देश के अनुसार देखो।