कंपनी का अर्थ और विशेषताएँ
कंपनी किसी साझे उद्देश्य के लिए बना व्यक्तियों का स्वैच्छिक संघ है, जो कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत पंजीकृत होता है। यह अलग वैधानिक अस्तित्व, शाश्वत उत्तराधिकार और आम तौर पर सीमित दायित्व वाला कृत्रिम व्यक्ति है। इसकी पूँजी छोटी इकाइयों में बँटी होती है, जिन्हें अंश (शेयर) कहते हैं।
- कृत्रिम व्यक्ति: क़ानून से बनी; लोगों (निदेशकों) के ज़रिए काम करती है।
- अलग वैधानिक इकाई: अपने नाम से संपत्ति रख, उधार ले, मुक़दमा कर सकती और उस पर मुक़दमा हो सकता है।
- निर्माण: कई प्रलेख और क़ानूनी चरण चाहिए।
- शाश्वत उत्तराधिकार: सदस्यों की मृत्यु, अलग होने या दिवालियापन से असर नहीं।
- नियंत्रण: चुने हुए निदेशक मंडल द्वारा; अंशधारी रोज़ का काम नहीं चलाते।
- सीमित दायित्व: सदस्य अधिक से अधिक अपने शेयरों की बकाया राशि खोते हैं।
- सार्वमुद्रा: पहले इसके आधिकारिक हस्ताक्षर; अब (2015 से) ऐच्छिक।
- जोखिम वहन: जोखिम पूरी कंपनी उठाती है, जो कई अंशधारियों में बँटता है।
कंपनी के गुण और सीमाएँ
गुण
- सीमित दायित्व: लोगों को निवेश के लिए प्रोत्साहित करता है।
- हित का हस्तांतरण: शेयर आसानी से बेचे जा सकते हैं (सार्वजनिक कंपनी में)।
- शाश्वत अस्तित्व।
- विस्तार की संभावना: कई निवेशकों से बड़ी पूँजी और आसान बैंक क़र्ज़।
- पेशेवर प्रबंध: विशेषज्ञ रख सकती है।
सीमाएँ
- निर्माण में जटिलता: कई प्रलेख, समय और ख़र्च।
- गोपनीयता की कमी: खाते और रिपोर्ट साझा करने पड़ते हैं।
- अवैयक्तिक कार्य वातावरण: मालिक, प्रबंधक और कर्मचारी कम ही मिलते हैं।
- अनेक नियम: अंकेक्षण, बैठकें, फ़ाइलिंग।
- निर्णय में देरी: बातें कई स्तरों और मंडल से गुज़रती हैं।
- अल्पतंत्रीय प्रबंध: असल में कुछ निदेशक नियंत्रण रखते हैं।
- हितों का टकराव: अंशधारी, निदेशक, कर्मचारी और ऋणदाता अलग-अलग चीज़ें चाह सकते हैं।
निजी कंपनी, सार्वजनिक कंपनी और एक व्यक्ति कंपनी
| आधार | निजी कंपनी | सार्वजनिक कंपनी | एक व्यक्ति कंपनी (OPC) |
|---|---|---|---|
| सदस्य | कम से कम 2, अधिकतम 200 | कम से कम 7, अधिकतम सीमा नहीं | ठीक 1 (प्राकृतिक व्यक्ति, भारतीय नागरिक) |
| निदेशक | कम से कम 2 | कम से कम 3 | कम से कम 1 |
| शेयर हस्तांतरण | अंतर्नियमों से प्रतिबंधित | स्वतंत्र रूप से हस्तांतरणीय | सिर्फ़ अकेले सदस्य द्वारा |
| जनता को शेयर का निमंत्रण | अनुमति नहीं | अनुमति (प्रविवरण) | अनुमति नहीं |
| नाम के अंत में | प्राइवेट लिमिटेड | लिमिटेड | (OPC) प्राइवेट लिमिटेड |
| ख़ास बात | कम क़ानूनी नियम | सबसे ज़्यादा नियम और प्रकटीकरण | नामिती बताना ज़रूरी, जो सदस्य की मृत्यु पर संभाले |
जिस निजी कंपनी के अंतर्नियमों में ये प्रतिबंध न हों, या जो निजी कंपनी की शर्तें मानना छोड़ दे, उसे सार्वजनिक कंपनी माना जाता है।
कंपनी निर्माण के चरण
- प्रवर्तन: प्रवर्तक व्यवसाय का अवसर पहचानता है, जाँचता है कि वह चल सकता है या नहीं, नाम चुनता है (कंपनी रजिस्ट्रार से जाँच), सीमानियम के हस्ताक्षरकर्ता तय करता है और बैंकर, अंकेक्षक, वकील जैसे विशेषज्ञ नियुक्त करता है। वह मुख्य प्रलेख तैयार करता है।
- समामेलन: प्रलेखों और शुल्क के साथ कंपनी रजिस्ट्रार (ROC) के पास ऑनलाइन आवेदन होता है। संतुष्ट होने पर ROC समामेलन प्रमाणपत्र देता है, जो कंपनी का जन्म प्रमाणपत्र है, साथ में कॉर्पोरेट पहचान संख्या (CIN)। उसी दिन से कंपनी क़ानूनन अस्तित्व में आती है।
- पूँजी अभिदान: सार्वजनिक कंपनी प्रविवरण जारी करके जनता से पैसा जुटाती है (या निजी तौर पर जुटाए तो प्रविवरण के स्थान पर विवरण देती है)। उसे कम से कम न्यूनतम अभिदान (निर्गम का 90%) मिलना चाहिए, वरना पैसा लौटाना होता है। निजी कंपनी यह चरण छोड़ देती है।
- व्यापार प्रारंभ: व्यापार शुरू करने या उधार लेने से पहले, शेयर पूँजी वाली कंपनी को ROC के पास घोषणा दाखिल करनी होती है कि हर अभिदाता ने अपने शेयरों का भुगतान कर दिया है (समामेलन के 180 दिन के भीतर)।
मुख्य प्रलेख
पार्षद सीमानियम (MoA)
मुख्य प्रलेख, कंपनी का चार्टर। यह तय करता है कि कंपनी क्या-क्या कर सकती है। इसके वाक्य:
- नाम वाक्य: कंपनी का नाम।
- पंजीकृत कार्यालय वाक्य: जिस राज्य में कार्यालय है।
- उद्देश्य वाक्य: कंपनी किस काम के लिए बनी है। इसके बाहर वह क़ानूनन कुछ नहीं कर सकती।
- दायित्व वाक्य: सदस्यों का दायित्व सीमित है।
- पूँजी वाक्य: अधिकतम पूँजी जो वह जुटा सकती है (अधिकृत पूँजी)।
- संघ (अभिदान) वाक्य: हस्ताक्षरकर्ता कंपनी बनाने और शेयर लेने को सहमत हैं।
पार्षद अंतर्नियम (AoA)
आंतरिक प्रबंध के नियम: बैठकें, मतदान, निदेशक, लाभांश, शेयर हस्तांतरण। ये सीमानियम के भीतर काम करते हैं और उसके विरुद्ध नहीं जा सकते।
अन्य प्रलेख
- प्रस्तावित निदेशकों की सहमति।
- प्रस्तावित प्रबंध निदेशक से अनुबंध, यदि हो।
- घोषणा कि सारी क़ानूनी शर्तें पूरी हैं।
- पंजीकृत कार्यालय का प्रमाण और अभिदाताओं व निदेशकों की पहचान।
- प्रविवरण या प्रविवरण के स्थान पर विवरण (पूँजी अभिदान के चरण में)।
| आधार | सीमानियम | अंतर्नियम |
|---|---|---|
| उद्देश्य | उद्देश्य और अधिकार | आंतरिक नियम |
| स्थान | मुख्य प्रलेख | सीमानियम के अधीन |
| संबंध | कंपनी और बाहरी लोग | कंपनी और उसके सदस्य |
| सीमा से बाहर काम | व्यर्थ (पुष्टि नहीं हो सकती) | सदस्य पुष्टि कर सकते हैं |
व्यावसायिक संगठन के स्वरूप का चुनाव
कोई एक सबसे अच्छा स्वरूप नहीं है। इन बातों को जाँचकर चुनिए:
- लागत और शुरू करने में आसानी: एकल स्वामित्व सबसे सस्ता और आसान; कंपनी सबसे महँगी।
- दायित्व: घर बचाना चाहने वाले मालिक कंपनी या सहकारी समिति (सीमित दायित्व) चुनते हैं।
- निरंतरता: लंबी परियोजनाओं के लिए शाश्वत अस्तित्व चाहिए (कंपनी, सहकारी समिति)।
- प्रबंध योग्यता: कई हुनर चाहिए तो साझेदारी या कंपनी।
- ज़रूरी पूँजी: छोटी दुकान → एकल व्यापारी; मध्यम → साझेदारी; बड़ा कारख़ाना → कंपनी।
- नियंत्रण की मात्रा: पूरा नियंत्रण → एकल स्वामित्व; बँटा नियंत्रण → साझेदारी; स्वामित्व से अलग नियंत्रण → कंपनी।
- व्यवसाय की प्रकृति: व्यक्तिगत सेवा (दर्ज़ी, सैलून) के लिए एकल व्यापारी; बड़े पैमाने के उत्पादन के लिए कंपनी।
करके देखिए
3D के आख़िरी चरण में (a) चाय की दुकान, (b) तीन मित्रों की CA फर्म, (c) इस्पात संयंत्र के लिए स्लाइडर सेट कीजिए। हर एक के लिए सुझाया गया स्वरूप और एक कारण लिखिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- निजी: 2–200 सदस्य, 2 निदेशक; सार्वजनिक: 7+ सदस्य, 3 निदेशक; OPC: 1 सदस्य, 1 निदेशक
- चरण: प्रवर्तन → समामेलन → पूँजी अभिदान → व्यापार प्रारंभ
- न्यूनतम अभिदान = निर्गम का 90%
हल किए गए उदाहरण
1. एक सार्वजनिक कंपनी 10,00,000 शेयर प्रस्तावित करती है। आवंटन के लिए कम से कम कितने शेयरों के आवेदन चाहिए?
न्यूनतम अभिदान = 10,00,000 का 90% = 9,00,000 शेयर। इससे कम पर पैसा लौटाना होगा।
2. जूते बनाने के लिए बनी कंपनी होटल शुरू करती है, जो उद्देश्य वाक्य में नहीं है। क्या यह वैध है?
नहीं। सीमानियम के उद्देश्यों से बाहर का काम अधिकार-बाहर (अल्ट्रा वायर्स) और व्यर्थ है; सारे सदस्य मिलकर भी इसकी पुष्टि नहीं कर सकते। पहले उद्देश्य वाक्य क़ानूनी तरीक़े से बदलना होगा।
3. एक निजी कंपनी में 200 सदस्य हैं और वह 30 और जोड़ना चाहती है। उसे क्या करना होगा?
निजी कंपनी में अधिकतम 200 सदस्य हो सकते हैं, इसलिए उसे सार्वजनिक कंपनी में बदलना होगा।
4. अंशधारी अनिल के पास ₹10 वाले 1,000 शेयर हैं, जिन पर ₹6 प्रति शेयर चुकाए गए हैं। कंपनी डूब जाती है। उसका अधिकतम अतिरिक्त नुक़सान कितना है?
बकाया राशि = (10 − 6) × 1,000 = ₹4,000। उसका दायित्व इतने तक सीमित है।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि मालिक की मृत्यु पर कंपनी ख़त्म होती है। इसका उत्तराधिकार शाश्वत है।
- सीमानियम और अंतर्नियम में गड़बड़: सीमानियम = कंपनी क्या कर सकती है; अंतर्नियम = अंदर कैसे चलती है।
- यह सोचना कि निजी कंपनी को जनता से पूँजी जुटानी होती है। वह जनता को निमंत्रण दे ही नहीं सकती।
- लिखना कि कंपनी समामेलन वाले दिन ही बिना किसी घोषणा के व्यापार शुरू कर सकती है। शेयर पूँजी वाली कंपनी को पहले व्यापार प्रारंभ की घोषणा दाखिल करनी होती है।