सहकारी समिति की अवधारणा और विशेषताएँ
सहकारिता का अर्थ है साझे उद्देश्य के लिए मिलकर काम करना। सहकारी समिति उन व्यक्तियों का स्वैच्छिक संगठन है जो अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए जुड़ते हैं। यह स्व-सहायता और आपसी सहायता के विचार पर चलती है।
विशेषताएँ
- स्वैच्छिक सदस्यता: लोग अपनी इच्छा से जुड़ और नोटिस देकर छोड़ सकते हैं। धर्म, जाति या लिंग का भेद नहीं।
- वैधानिक स्थिति: सहकारी समिति अधिनियम, 1912 या राज्य के सहकारी क़ानून के तहत पंजीकरण अनिवार्य। इसके बाद यह अलग वैधानिक इकाई बन जाती है: संपत्ति रख सकती है, अनुबंध कर सकती है, मुक़दमा कर सकती है और उस पर मुक़दमा हो सकता है।
- सीमित दायित्व: सदस्य अधिक से अधिक अपनी लगाई राशि खोते हैं।
- नियंत्रण: चुनी हुई प्रबंध समिति चलाती है। हर सदस्य का एक वोट, चाहे कितने भी शेयर हों।
- सेवा उद्देश्य: मुख्य लक्ष्य आपसी मदद है। बचत लाभांश के रूप में बँटती या सदस्यों के काम आती है।
सहकारी समिति के गुण
- मतदान में समानता: एक सदस्य, एक वोट।
- सदस्यों का सीमित दायित्व।
- स्थायी अस्तित्व: किसी सदस्य की मृत्यु, दिवालियापन या अलग होने से समिति ख़त्म नहीं होती।
- संचालन में मितव्ययिता: सदस्य अक्सर मुफ़्त काम करते हैं और बिचौलिये नहीं होते।
- सरकारी सहायता: कम कर, सब्सिडी और सस्ते क़र्ज़।
- बनाना आसान: बस 10 बालिग सदस्य और सरल पंजीकरण।
सहकारी समिति की सीमाएँ
- सीमित संसाधन: सदस्य कम साधन वाले होते हैं और लाभांश कम होता है, इसलिए पूँजी छोटी रहती है।
- प्रबंध में अकुशलता: कुशल प्रबंधकों को ऊँचा वेतन नहीं दे पाती।
- गोपनीयता की कमी: बातें बैठकों में खुलेआम होती हैं।
- सरकारी नियंत्रण: नियम, अंकेक्षण और रिपोर्ट से आज़ादी घटती है।
- मतभेद: सदस्यों के झगड़े काम धीमा कर सकते हैं।
सहकारी समितियों के प्रकार
| प्रकार | कौन जुड़ते हैं | उद्देश्य और तरीक़ा |
|---|---|---|
| उपभोक्ता सहकारी समिति | उपभोक्ता | निर्माताओं और थोक विक्रेताओं से सीधे बड़ी मात्रा में ख़रीदकर, बिचौलिये हटाकर, अच्छी गुणवत्ता का माल उचित दाम पर देना। बचत ख़रीद या पूँजी के आधार पर बँटती है। |
| उत्पादक सहकारी समिति | छोटे उत्पादक (बुनकर, कारीगर) | बड़े उद्योगों से छोटे उत्पादकों की रक्षा: कच्चा माल, औज़ार और मशीन देना और माल बेचने में मदद। |
| विपणन सहकारी समिति | बेचना चाहने वाले छोटे उत्पादक | सदस्यों का उत्पादन इकट्ठा कर अच्छे दाम पर बेचना और हर सदस्य के योगदान के अनुसार पैसा बाँटना। ये माल की छँटाई, पैकिंग और भंडारण भी कर सकती हैं। |
| कृषक सहकारी समिति | किसान | बड़े पैमाने की खेती के फ़ायदे: ट्रैक्टर, अच्छे बीज, खाद और सिंचाई साझा करना और उपज बढ़ाना। |
| साख सहकारी समिति | क़र्ज़ चाहने वाले | सदस्यों की अपनी बचत से सदस्यों को आसान, कम ब्याज पर क़र्ज़ देना और साहूकारों से बचाना। |
| सहकारी आवास समिति | कम आय वाले, घर चाहने वाले | कम लागत पर मकान या फ़्लैट बनाना और सदस्यों को किस्तों में भुगतान की सुविधा देना। |
करके देखिए
अपने पास की कोई सहकारी संस्था ढूँढिए (दूध डेयरी, बैंक, हाउसिंग सोसाइटी)। पूछिए: कौन जुड़ सकता है, हर सदस्य के कितने वोट हैं, और यह कौन-सी सेवा देती है?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- सहकारी समिति = स्वैच्छिक + पंजीकृत + सीमित दायित्व + एक सदस्य एक वोट + सेवा उद्देश्य
- बनाने के लिए कम से कम: 10 बालिग सदस्य
- क़ानून: सहकारी समिति अधिनियम, 1912 (या राज्य सहकारी अधिनियम)
हल किए गए उदाहरण
1. एक गाँव के बुनकर धागा और करघा नहीं ख़रीद पाते, और बड़ी मिल सस्ता कपड़ा बेचती है। उन्हें कौन-सी सहकारी समिति बनानी चाहिए?
उत्पादक सहकारी समिति: यह उनके लिए थोक में धागा और करघे ख़रीदेगी और मिल से मुक़ाबले में मदद करेगी।
2. एक सहकारी समिति में आशा के 50 शेयर हैं और बाबू के 2। दोनों के कितने वोट हैं?
एक-एक। वोट की ताक़त शेयरों पर निर्भर नहीं।
3. एक उपभोक्ता सहकारी समिति की बचत ₹60,000 है। सदस्यों ने ₹2,00,000 और ₹1,00,000 का माल ख़रीदा। अगर बचत ख़रीद के अनुपात में बँटे, तो हर एक को कितना मिलेगा?
अनुपात 2:1। पहले सदस्य को ₹40,000, दूसरे को ₹20,000।
4. एक सहकारी समिति पर ऐसा क़र्ज़ है जो वह चुका नहीं सकती। प्रिया ने ₹500 के शेयर ख़रीदे थे। वह अधिक से अधिक कितना खो सकती है?
₹500। दायित्व उसकी लगाई पूँजी तक सीमित है।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि सहकारी समिति में वोट शेयरों पर निर्भर हैं। हमेशा एक सदस्य, एक वोट।
- पंजीकरण को ऐच्छिक कहना। सहकारी समिति के लिए यह अनिवार्य है (साझेदारी के उलट)।
- विपणन और उपभोक्ता समिति में गड़बड़: विपणन सदस्यों को बेचने में, उपभोक्ता ख़रीदने में मदद करती है।
- यह सोचना कि सहकारी समिति कभी लाभ नहीं कमाती। बचत हो सकती है, पर मुख्य उद्देश्य सेवा है।