विधिक इकाई क्या है?
विधिक इकाई (legal entity) वह है जिसे क़ानून 'व्यक्ति' मानता है: वह संपत्ति रख सकती है, अनुबंध कर सकती है, मुक़दमा कर सकती है और उस पर मुक़दमा हो सकता है। इंसान प्राकृतिक व्यक्ति है। कंपनी या LLP पंजीकरण से बना कृत्रिम विधिक व्यक्ति है।
- पृथक विधिक इकाई: कारोबार अपने मालिकों से अलग व्यक्ति है; उसके कर्ज़ उसके अपने हैं।
- असीमित दायित्व: कारोबार न चुका पाए तो मालिक की निजी संपत्ति (घर, बचत) से वसूली हो सकती है।
- सीमित दायित्व: मालिक केवल उतना खोता है जितना उसने लगाया या लगाने का वादा किया।
- शाश्वत उत्तराधिकार: मालिक मरे या छोड़ दे, तब भी इकाई चलती रहती है।
एकल स्वामित्व
एकल स्वामित्व में एक ही व्यक्ति मालिक होता है और वही चलाता है। शुरू करना सबसे आसान है: अक्सर बस स्थानीय लाइसेंस या कर पंजीकरण चाहिए।
- सारा लाभ और सारे फ़ैसले मालिक के।
- अलग विधिक इकाई नहीं: क़ानून में मालिक और कारोबार एक ही हैं।
- असीमित दायित्व: कारोबार का कर्ज़ निजी संपत्ति से वसूला जा सकता है।
- मालिक की मृत्यु या काम बंद करने पर ख़त्म; शाश्वत उत्तराधिकार नहीं।
- छोटी दुकान, ट्यूटर, फ़्रीलांसर के लिए ठीक; बड़ी पूँजी जुटाना कठिन।
साझेदारी
साझेदारी तब बनती है जब दो या ज़्यादा लोग ऐसे कारोबार का लाभ बाँटने को सहमत हों जिसे सब मिलकर, या कोई एक सबकी ओर से चलाए। भारत में यह भारतीय साझेदारी अधिनियम 1932 से चलती है।
- साझेदारी विलेख (deed): पूँजी, लाभ-अनुपात, ज़िम्मेदारियाँ और साझेदार के जाने पर क्या होगा, इसका लिखित समझौता। भारत में पंजीकरण ऐच्छिक है पर अदालत में मदद करता है।
- सदस्य: कम से कम 2; भारत में अधिकतम 50 (कंपनी नियमों के अनुसार)।
- असीमित और संयुक्त दायित्व: किसी भी साझेदार से पूरा कर्ज़ माँगा जा सकता है, फिर वह बाक़ी से उनका हिस्सा ले।
- परस्पर एजेंसी: हर साझेदार फ़र्म का एजेंट है; एक का कारोबारी काम सब पर लागू।
- अलग विधिक इकाई नहीं।
सीमित दायित्व साझेदारी (LLP)
LLP साझेदारी का लचीलापन और कंपनी की सुरक्षा मिलाती है। भारत में यह LLP अधिनियम 2008 से चलती है; कई देशों में ऐसे रूप हैं।
- अलग विधिक इकाई, शाश्वत उत्तराधिकार के साथ; अपने नाम से संपत्ति रख सकती है और मुक़दमा कर सकती है।
- सीमित दायित्व: साझेदार का जोखिम LLP समझौते में तय योगदान तक। दूसरे साझेदार की ग़लती के लिए वह ज़िम्मेदार नहीं।
- कम से कम 2 साझेदार और कम से कम 2 नामित साझेदार (designated partners) जो क़ानूनी काग़ज़ भरते हैं; अधिकतम सीमा नहीं।
- पंजीकरण और हर साल खाते-रिटर्न भरना ज़रूरी।
- चार्टर्ड अकाउंटेंट, वकील, सलाहकार जैसे पेशेवरों में लोकप्रिय।
प्राइवेट, पब्लिक और एक व्यक्ति कंपनी
कंपनी पंजीकरण से बना अलग विधिक व्यक्ति है (भारत में कंपनी अधिनियम 2013)। इसके मालिक शेयरधारक हैं और इसे निदेशक मंडल चलाता है। दायित्व आमतौर पर शेयरों तक सीमित।
प्राइवेट कंपनी
- भारत में कम से कम 2 और अधिकतम 200 सदस्य (कर्मचारी छोड़कर), कम से कम 2 निदेशक।
- शेयर हस्तांतरण पर रोक; जनता को शेयर ख़रीदने के लिए नहीं बुला सकती।
- नाम के अंत में 'प्राइवेट लिमिटेड'।
पब्लिक कंपनी
- कम से कम 7 सदस्य, कोई अधिकतम सीमा नहीं, कम से कम 3 निदेशक।
- जनता से पूँजी जुटा सकती है और शेयर बाज़ार में सूचीबद्ध हो सकती है; शेयर आसानी से बिकते हैं।
- कड़े नियम: ऑडिट, जानकारी देना, बोर्ड बैठकें। नाम के अंत में 'लिमिटेड'।
एक व्यक्ति कंपनी (OPC)
- सिर्फ़ एक सदस्य, फिर भी अलग विधिक इकाई और सीमित दायित्व।
- एक नामिती (nominee) बताना ज़रूरी, जो सदस्य की मृत्यु पर कंपनी सँभाले।
- अकेला संस्थापक बिना साझेदार के कंपनी जैसी सुरक्षा पा सकता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- एकल स्वामित्व: 1 मालिक · असीमित दायित्व · अलग इकाई नहीं
- साझेदारी: 2 से 50 साझेदार (भारत) · असीमित, संयुक्त दायित्व · विलेख
- LLP: 2+ साझेदार (2 नामित) · योगदान तक सीमित · अलग इकाई
- प्राइवेट कंपनी: 2 से 200 सदस्य · सीमित · शेयर जनता को नहीं
- पब्लिक कंपनी: 7+ सदस्य · सीमित · शेयर सूचीबद्ध हो सकते हैं
- OPC: 1 सदस्य + नामिती · सीमित · अलग इकाई
- मालिक का नुकसान (सीमित) ≤ लगाई पूँजी; (असीमित) = पूरा बकाया कर्ज़
हल किए गए उदाहरण
1. कारोबार पर ₹16 लाख कर्ज़ है और संपत्ति सिर्फ़ ₹10 लाख। मालिक की निजी संपत्ति से कितना वसूला जा सकता है अगर यह (क) एकल स्वामित्व (ख) LLP हो?
बकाया = 16 − 10 = ₹6 लाख। (क) एकल स्वामित्व: असीमित दायित्व, इसलिए पूरे ₹6 लाख मालिक की निजी संपत्ति से। (ख) LLP: सीमित दायित्व, तय योगदान से ज़्यादा कुछ नहीं; ₹6 लाख का नुकसान लेनदार उठाएँगे (धोखा न हो तो)।
2. रवि और सारा 1 : 1 में लाभ बाँटने वाले साझेदार हैं। फ़र्म पर ₹8 लाख कर्ज़ है, संपत्ति कुछ नहीं। सारा के पास पैसा नहीं। लेनदार रवि से कितना ले सकता है?
दायित्व संयुक्त और असीमित है, इसलिए पूरे ₹8 लाख रवि से लिए जा सकते हैं। बाद में रवि सारा से उसका हिस्सा (₹4 लाख) माँग सकता है।
3. एक स्टार्ट-अप संस्थापक अकेली है, सीमित दायित्व चाहती है और आगे कई निवेशक लाना चाहती है। अभी और बाद में कौन-सा रूप ठीक है?
अभी: एक व्यक्ति कंपनी (एक सदस्य, सीमित दायित्व, नामिती)। निवेशक आएँ तो प्राइवेट कंपनी में बदले; जनता को शेयर बेचने हों तो पब्लिक कंपनी बने।
आम गलतियाँ
- साझेदारी फ़र्म को अलग विधिक इकाई समझना। सामान्य साझेदारी में साझेदार ख़ुद ज़िम्मेदार हैं।
- LLP के साझेदारों का दायित्व असीमित बताना। LLP में यह तय योगदान तक सीमित है।
- संख्याएँ उलझाना: प्राइवेट कंपनी 2 से 200, पब्लिक कंपनी कम से कम 7 और कोई अधिकतम नहीं।
- यह मानना कि OPC में एक मालिक है इसलिए दायित्व असीमित है। यह कंपनी है, दायित्व सीमित है।