उत्पादन के पैमाने
- एकल (जॉब या बेस्पोक) उत्पादन: ग्राहक की ज़रूरत पर एक, अक्सर अनोखी चीज़। कुशल कारीगर, आम औज़ार, प्रति चीज़ लागत ज़्यादा, गुणवत्ता और पसंद ज़्यादा। जैसे पुल, ख़ास रसोई, प्रोटोटाइप।
- बैच उत्पादन: तय गिनती की एक-जैसी चीज़ें साथ बनती हैं, फिर मशीनें अगले बैच के लिए बदली जाती हैं। जिग, टेम्पलेट और साँचे काम आते हैं। लचीला है, पर बदलने में रुकावट का समय (डाउन टाइम) लगता है। जैसे ब्रेड, अलग-अलग साइज़ की स्कूल वर्दी, फ़र्नीचर।
- मास उत्पादन (फ़्लो / लाइन): असेंबली लाइन पर बहुत बड़ी गिनती की एक-जैसी चीज़ें। हर मज़दूर या रोबोट एक छोटा काम करता है। प्रति चीज़ लागत कम, पर शुरुआती ख़र्च बहुत बड़ा और विविधता कम। जैसे कार, फ़ोन, साइकिल।
- सतत उत्पादन: लाइन 24 घंटे चलती है क्योंकि रोकना महँगा है। जैसे तेल, स्टील, रसायन, काग़ज़, ठंडे पेय।
व्यवसाय अध्ययन में एकल को जॉब उत्पादन और मास/लाइन को फ़्लो उत्पादन कहते हैं।
लागत और तरीका चुनना
हर तरीके में एक सेट-अप (स्थिर) लागत होती है (मशीन, साँचे, औज़ार) और हर चीज़ पर परिवर्तनशील लागत (माल, मज़दूरी, बिजली)।
प्रति चीज़ लागत = सेट-अप लागत ÷ मात्रा + हर चीज़ की परिवर्तनशील लागत।
एकल में सेट-अप लगभग नहीं, पर हर चीज़ महँगी। मास में सेट-अप बहुत बड़ा, इसलिए वह तभी फ़ायदेमंद है जब मात्रा बहुत बड़ी हो: तब सेट-अप लाखों चीज़ों में बँट जाता है। इसे बड़े पैमाने की बचत (economy of scale) कहते हैं। तरीका चुनो: मात्रा, ग्राहकों को कितनी विविधता चाहिए, उपलब्ध कौशल और औज़ार, और समय-सीमा देखकर।
लीन उत्पादन, जस्ट-इन-टाइम और तकनीक
लीन उत्पादन का अर्थ है कम से कम बर्बादी में बनाना: समय, माल, स्टॉक, बेकार की आवाजाही और ख़राब पुर्ज़ों की बर्बादी। इसमें काइज़ेन (मज़दूरों के सुझाए छोटे-छोटे लगातार सुधार) और अच्छी व्यवस्था काम आती है।
जस्ट-इन-टाइम (JIT): माल ठीक ज़रूरत के समय आता है, इसलिए गोदाम में कम स्टॉक रहता है। जगह और पैसा बचता है, पर भरोसेमंद सप्लायर चाहिए; एक ट्रक देर से आया तो लाइन रुक सकती है। इसका उल्टा है जस्ट-इन-केस: बचाव के लिए स्टॉक रखना।
तकनीक: CAD (कंप्यूटर से डिज़ाइन) और CAM (कंप्यूटर से निर्माण: CNC मशीन, लेज़र कटर, 3D प्रिंटर), रोबोट और सेंसर उत्पादन को तेज़ और सटीक बनाते हैं, पर महँगे हैं और प्रशिक्षित लोग चाहिए। माल का सही उपयोग: शीट पर आकृतियाँ पास-पास रखना (नेस्टिंग), मानक साइज़ में काटना और बचे टुकड़े फिर से इस्तेमाल करना।
गुणवत्ता, टॉलरेंस और प्रक्रियाएँ
गुणवत्ता नियंत्रण (QC) तैयार चीज़ों या नमूनों को जाँचकर ख़राब को हटाता है। गुणवत्ता आश्वासन (QA) हर चरण में गुणवत्ता डालता है (प्रशिक्षित लोग, मानक, हर क़दम पर जाँच) ताकि ग़लती हो ही नहीं।
कोई पुर्ज़ा बिल्कुल सटीक नहीं बनता, इसलिए डिज़ाइनर टॉलरेंस देते हैं: लक्ष्य से कितना फ़र्क़ चलेगा। 50 ± 0.5 mm का अर्थ है 49.5 mm से 50.5 mm तक सब पास। गो/नो-गो गेज, कैलिपर और सेंसर यह जल्दी जाँचते हैं।
मुख्य प्रक्रियाएँ
- घटाना (माल हटाना): काटना, ड्रिल करना, मिलिंग, खराद।
- आकार बदलना: मोड़ना, ढलाई, साँचे में ढालना, फ़ोर्जिंग, प्रेस करना।
- जोड़ना: वेल्डिंग, गोंद (एडहेसिव), पेंच, नट-बोल्ट, रिवेट, 3D प्रिंटिंग।
ख़ुद करके देखो
काग़ज़ के 10 तारे दो बार बनाओ। पहले हर एक अलग काटो (एकल)। फिर गत्ते का टेम्पलेट बनाकर मोड़े हुए काग़ज़ से 10 साथ काटो (बैच)। दोनों का समय नापो। फिर हर तारे की चौड़ाई नापो: लक्ष्य 60 mm ± 2 mm हो तो कितने पास हुए? 3D के छठे चरण में मात्रा 1 से 10 लाख तक खिसकाओ और देखो सबसे अच्छा तरीका कैसे बदलता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- प्रति चीज़ लागत = सेट-अप लागत ÷ मात्रा + हर चीज़ की परिवर्तनशील लागत
- टॉलरेंस: लक्ष्य ± छूट (50 ± 0.5 mm → 49.5 से 50.5 mm)
- रिजेक्ट दर (%) = रिजेक्ट ÷ कुल जाँचे × 100
- एकल < बैच < मास < सतत (मात्रा बढ़ती, विविधता घटती)
हल किए गए उदाहरण
1. पुर्ज़ा 25 ± 0.2 mm का है। 24.9, 25.3, 24.7, 25.2 mm में कौन पास?
छूट 24.8 से 25.2 mm तक। 24.9 और 25.2 पास; 25.3 और 24.7 फ़ेल।
2. साँचा 20,000 का है और हर चीज़ 5 में बनती है। 100 और 10,000 चीज़ों पर प्रति चीज़ लागत निकालो।
100 पर: 20,000 ÷ 100 + 5 = 205। 10,000 पर: 20,000 ÷ 10,000 + 5 = 7। सेट-अप ज़्यादा चीज़ों में बँटे तो हर चीज़ बहुत सस्ती।
3. कंपनी 400 चीज़ें जाँचती है और 12 रिजेक्ट करती है। रिजेक्ट दर?
12 ÷ 400 × 100 = 3%।
4. कौन-सा तरीका: (क) 1 शादी का केक, (ख) 5 साइज़ में 300 ब्लेज़र, (ग) 20 लाख फ़ोन कवर, (घ) पेट्रोल?
(क) एकल, (ख) बैच, (ग) मास (फ़्लो), (घ) सतत।
आम गलतियाँ
- बैच को एक-एक करके बनाना समझना: बैच एक-जैसी चीज़ों का साथ बना समूह है।
- कहना कि मास उत्पादन हमेशा सस्ता है: वह सिर्फ़ बहुत बड़ी मात्रा पर प्रति चीज़ सस्ता है।
- गुणवत्ता नियंत्रण (अंत में जाँच) और गुणवत्ता आश्वासन (हर चरण में गुणवत्ता) को मिला देना।
- ± ग़लत पढ़ना: 50 ± 0.5 mm का अर्थ 49.5 से 50.5 है, 49 से 51 नहीं।