National Year 10 Design and Technology
अध्याय: 2
1. 3.1 Core technical principles
3.1.1 New and emerging technologies · 3.1.2 Energy generation and storage · 3.1.3 Developments in new materials · 3.1.4 Systems approach to designing · 3.1.5 Mechanical devices · 3.1.6 Materials and their working properties
- नई और उभरती तकनीकें – नई तकनीकें बदलती हैं कि चीज़ें कैसे डिज़ाइन होती हैं, बनती हैं, बिकती हैं और फेंकी जाती हैं। उद्योग में: स्वचालन और रोबोट, CAD/CAM, लचीली उत्पादन प्रणाली, जस्ट-इन-टाइम (JIT) और लीन उत्पादन। उद्यम में: क्राउडफ़ंडिंग, ऑनलाइन बाज़ार, सहकारी समितियाँ और फ़ेयर ट्रेड। स्थिरता के लिए: सीमित और असीमित संसाधन, कचरे का निपटान, चक्रीय अर्थव्यवस्था। लोग और संस्कृति: नौकरियाँ, समावेशी डिज़ाइन, फ़ैशन, योजनाबद्ध अप्रचलन। अच्छा डिज़ाइनर फ़ायदे और नुकसान दोनों तौलता है।
- खनिज तथा ऊर्जा संसाधन – खनिज चट्टानों में मिलने वाले प्राकृतिक पदार्थ हैं। ये धात्विक (लौह या अलौह), अधात्विक या ऊर्जा खनिज होते हैं। ऊर्जा पारंपरिक स्रोतों (कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, बिजली) और गैर-पारंपरिक स्रोतों (सूर्य, पवन, परमाणु, बायोगैस, ज्वार, भूतापीय) से मिलती है। दोनों का संरक्षण ज़रूरी है।
- स्मार्ट और आधुनिक पदार्थ – स्मार्ट पदार्थ वह है जो आसपास कुछ बदलने पर (जैसे ताप, प्रकाश, बल या वोल्टेज) अपना कोई गुण बदल लेता है, जैसे आकार, रंग, पारदर्शिता या बिजली देना। यह बदलाव उत्क्रमणीय होता है, यानी उद्दीपक हटाने पर पदार्थ वापस पहले जैसा हो जाता है। मुख्य उदाहरण: निटिनॉल जैसी आकार-स्मृति मिश्रधातु गर्म होने पर याद रखा आकार ले लेती है; थर्मोक्रोमिक रंग ताप से बदलते हैं; फ़ोटोक्रोमिक पदार्थ UV में काले होते हैं; पीज़ोइलेक्ट्रिक क्रिस्टल दबाने पर वोल्टेज देते हैं। आधुनिक पदार्थ, जो ज़रूरी नहीं कि स्मार्ट हों, उनमें कार्बन-फ़ाइबर और काँच-फ़ाइबर कंपोज़िट, ग्राफ़ीन जैसे नैनो पदार्थ, तकनीकी और स्मार्ट वस्त्र, द्रव क्रिस्टल और पौधों से बने प्लास्टिक आते हैं। इंजीनियर गुण, कीमत और पर्यावरण पर असर देखकर पदार्थ चुनते हैं।
- नियंत्रण प्रणाली और फ़ीडबैक (Control Systems) – नियंत्रण प्रणाली किसी मशीन या प्रक्रम को हमारी इच्छा के अनुसार चलाती है। हर प्रणाली में इनपुट → प्रक्रम (नियंत्रक) → आउटपुट होता है। खुले लूप (open loop) में नियंत्रक परिणाम नहीं जाँचता (टाइमर वाला टोस्टर)। बंद लूप (closed loop) में सेंसर आउटपुट मापकर वापस भेजता है; नियंत्रक उसकी तुलना निर्धारित मान (set point) से करता है और त्रुटि ठीक करता है (थर्मोस्टैट, क्रूज़ कंट्रोल)। असली प्रणालियाँ सेंसर, नियंत्रक (इलेक्ट्रॉनिक परिपथ, माइक्रोकंट्रोलर या PLC) और एक्चुएटर (मोटर, हीटर, वाल्व, हवा वाले सिलिंडर) से बनती हैं। कई अब नेटवर्क से जुड़ी हैं (IoT, SCADA), ताकि दूर से देखी और चलाई जा सकें।
- यांत्रिकी: मशीनें गति और बल को कैसे बदलती हैं – यांत्रिकी (mechanism) एक इनपुट गति और बल लेकर अलग आउटपुट गति और बल देती है। गति चार तरह की होती है: घूर्णी, रेखीय, प्रत्यागामी और दोलनी। उत्तोलक आलंब पर घूमता है; यांत्रिक लाभ = भार ÷ प्रयास। गियर और घिरनी घूमने की गति आगे पहुँचाते हैं; गियर अनुपात = चालित दाँते ÷ चालक दाँते, और आउटपुट चाल = इनपुट चाल ÷ गियर अनुपात। आपस में फँसे गियर उल्टी दिशा में घूमते हैं; बेल्ट से दिशा वही रहती है। कैम, क्रैंक-स्लाइडर और रैक-पिनियन घूर्णी गति को सीधी या आगे-पीछे की गति में बदलते हैं। यांत्रिकी चाल के बदले बल देती है: जितना काम डालोगे, उससे ज़्यादा कभी नहीं मिलेगा।
- पदार्थ और उनके गुण: चीज़ें जिससे बनी हैं, उसी से क्यों बनी हैं – हर चीज़ ऐसे पदार्थ से बनती है जिसे उसके गुणों के लिए चुना गया है. मुख्य परिवार हैं: काग़ज़ और गत्ता, लकड़ी, धातु, पॉलिमर (प्लास्टिक) और वस्त्र. भौतिक गुण बताते हैं कि पदार्थ कैसा है (घनत्व, चालकता, गर्मी और पानी पर व्यवहार). कार्य गुण बताते हैं कि इस्तेमाल करने या आकार देने पर वह कैसा व्यवहार करता है (सामर्थ्य, कठोरता, चीमड़पन, प्रत्यास्थता, प्लास्टिकता, आघातवर्धनीयता, तन्यता). पदार्थ पेड़, अयस्क और कच्चे तेल जैसे प्राकृतिक स्रोतों से आते हैं और चादर, छड़, नली, तख़्ते जैसे मानक स्टॉक रूपों में बिकते हैं. डिज़ाइनर काम के हिसाब से गुण मिलाकर पदार्थ चुनता है, और साथ में क़ीमत, उपलब्धता, सुंदरता और पर्यावरण भी देखता है.
2. 3.2 Specialist technical principles
3.2.1 Selection of materials or components · 3.2.2 Forces and stresses · 3.2.3 Ecological and social footprint · 3.2.4 Sources and origins · 3.2.5 Using and working with materials · 3.2.6 Stock forms, types and sizes · 3.2.7 Scales of production · 3.2.8 Specialist techniques and processes · 3.2.9 Surface treatments and finishes
- पदार्थ और उनके गुण: चीज़ें जिससे बनी हैं, उसी से क्यों बनी हैं – हर चीज़ ऐसे पदार्थ से बनती है जिसे उसके गुणों के लिए चुना गया है. मुख्य परिवार हैं: काग़ज़ और गत्ता, लकड़ी, धातु, पॉलिमर (प्लास्टिक) और वस्त्र. भौतिक गुण बताते हैं कि पदार्थ कैसा है (घनत्व, चालकता, गर्मी और पानी पर व्यवहार). कार्य गुण बताते हैं कि इस्तेमाल करने या आकार देने पर वह कैसा व्यवहार करता है (सामर्थ्य, कठोरता, चीमड़पन, प्रत्यास्थता, प्लास्टिकता, आघातवर्धनीयता, तन्यता). पदार्थ पेड़, अयस्क और कच्चे तेल जैसे प्राकृतिक स्रोतों से आते हैं और चादर, छड़, नली, तख़्ते जैसे मानक स्टॉक रूपों में बिकते हैं. डिज़ाइनर काम के हिसाब से गुण मिलाकर पदार्थ चुनता है, और साथ में क़ीमत, उपलब्धता, सुंदरता और पर्यावरण भी देखता है.
- सामग्री पर बल और प्रतिबल – हर चीज़ पर बल लगते हैं। पाँच सबसे ज़रूरी हैं: तनाव (tension, खिंचाव, लंबा होना), संपीडन (compression, दबाव, छोटा होना), मुड़ना (bending, एक तरफ़ दबाव, दूसरी तरफ़ खिंचाव), ऐंठन (torsion, मरोड़) और अपरूपण (shear, परतें एक-दूसरे पर फिसलना)। प्रतिबल (stress) प्रति क्षेत्रफल बल है: σ = F ÷ A, इकाई N/m² (पास्कल) या N/mm² (MPa)। कोई हिस्सा कमज़ोर हो तो उसे मज़बूत करते हैं: आकार बदलकर (मोड़, पसलियाँ, नालीदार, I-सेक्शन, त्रिभुज) या परतें जोड़कर (लैमिनेट, वेबिंग, इंटरफ़ेसिंग)।
- सतत डिज़ाइन: लोगों और धरती के अनुकूल उत्पाद – सतत (टिकाऊ) डिज़ाइन का मतलब है ऐसे उत्पाद बनाना जो हमारी ज़रूरत पूरी करें और प्रकृति व लोगों को कम से कम नुकसान दें। हर उत्पाद का जीवन चक्र है: कच्चा माल, निर्माण, परिवहन, उपयोग और जीवन का अंत। जीवन चक्र आकलन हर चरण का पारिस्थितिक पदचिह्न (ऊर्जा, CO₂, पानी, कचरा) जोड़ता है। सामाजिक पदचिह्न मज़दूरों और समुदायों पर असर है: वेतन, सुरक्षा, बाल श्रम, उचित व्यापार। डिज़ाइनर छह R (पुनर्विचार, मना करना, कम करना, दोबारा उपयोग, मरम्मत, पुनर्चक्रण), मरम्मत और विघटन योग्य डिज़ाइन अपनाते हैं और नियोजित अप्रचलन से बचते हैं। इको डिज़ाइन आर्थिक पक्ष भी देखता है: उत्पाद सस्ता और बनाने लायक़ हो, इसलिए अच्छा डिज़ाइन पर्यावरण, समाज और अर्थव्यवस्था में संतुलन रखता है।
- उत्पादन के तरीके – कंपनी कितनी चीज़ें बनानी हैं, उसी से तरीका चुनती है। एकल (जॉब) उत्पादन ऑर्डर पर एक चीज़ बनाता है; बैच उत्पादन एक-जैसी चीज़ों का समूह बनाकर फिर बदलता है; मास (फ़्लो) उत्पादन पट्टी पर बहुत बड़ी गिनती बनाता है; सतत उत्पादन बिना रुके चलता है। लीन उत्पादन और जस्ट-इन-टाइम बर्बादी और स्टॉक घटाते हैं। गुणवत्ता नियंत्रण हर चीज़ को लक्ष्य माप और टॉलरेंस (जैसे 50 ± 0.5 mm) से जाँचता है, और गुणवत्ता आश्वासन हर चरण में गुणवत्ता डालता है।
- सतह उपचार और फ़िनिश – फ़िनिश किसी पदार्थ की सतह पर लगाई गई परत या किया गया उपचार है। फ़िनिश दो काम करती है: रक्षा (जंग, सड़न, पानी, धूप की UV किरणें, घिसाव, दाग़, आग से) और रूप या स्पर्श सुधारना (रंग, चमक, बनावट)। लकड़ी पर पेंट, वार्निश, तेल, मोम, स्टेन या परिरक्षक लगते हैं। धातुओं पर प्राइमर के ऊपर पेंट, पाउडर कोटिंग, ज़िंक से गैल्वनीकरण, विद्युत लेपन, और एल्युमिनियम पर एनोडाइज़िंग। कई पॉलिमर साँचे से ही स्वयं-फ़िनिश होते हैं, पर पॉलिश या छपाई हो सकती है। कागज़ और बोर्ड पर लैमिनेशन या वार्निश। कपड़ों पर जल-विकर्षक, अग्नि-मंदक, सिलवट-रोधी या ब्रश जैसी फ़िनिश, और लैमिनेटेड झिल्ली वाले कपड़े बारिश रोकते पर पसीने की भाप बाहर जाने देते हैं। फ़िनिश चुनते समय पदार्थ, उपयोग की जगह, लागत, लगाने का तरीका और पर्यावरण पर असर देखते हैं।