National Year 12 Design and Technology: Product Design
अध्याय: 1
1. 3.1 Technical principles
3.1.1 Materials and their applications · 3.1.2 Performance characteristics of materials · 3.1.3 Enhancement of materials · 3.1.4 Forming, redistribution and addition processes · 3.1.5 The use of finishes · 3.1.6 Modern industrial and commercial practice · 3.1.7 Digital design and manufacture · 3.1.8 Requirements for product design and development · 3.1.9 Health and safety · 3.1.10 Protecting designs and intellectual property · 3.1.11 Design for manufacturing, maintenance, repair and disposal · 3.1.12 Feasibility studies · 3.1.13 Enterprise and marketing · 3.1.14 Design communication
- पदार्थ और उनके गुण: चीज़ें जिससे बनी हैं, उसी से क्यों बनी हैं – हर चीज़ ऐसे पदार्थ से बनती है जिसे उसके गुणों के लिए चुना गया है. मुख्य परिवार हैं: काग़ज़ और गत्ता, लकड़ी, धातु, पॉलिमर (प्लास्टिक) और वस्त्र. भौतिक गुण बताते हैं कि पदार्थ कैसा है (घनत्व, चालकता, गर्मी और पानी पर व्यवहार). कार्य गुण बताते हैं कि इस्तेमाल करने या आकार देने पर वह कैसा व्यवहार करता है (सामर्थ्य, कठोरता, चीमड़पन, प्रत्यास्थता, प्लास्टिकता, आघातवर्धनीयता, तन्यता). पदार्थ पेड़, अयस्क और कच्चे तेल जैसे प्राकृतिक स्रोतों से आते हैं और चादर, छड़, नली, तख़्ते जैसे मानक स्टॉक रूपों में बिकते हैं. डिज़ाइनर काम के हिसाब से गुण मिलाकर पदार्थ चुनता है, और साथ में क़ीमत, उपलब्धता, सुंदरता और पर्यावरण भी देखता है.
- उत्पादन के तरीके – कंपनी कितनी चीज़ें बनानी हैं, उसी से तरीका चुनती है। एकल (जॉब) उत्पादन ऑर्डर पर एक चीज़ बनाता है; बैच उत्पादन एक-जैसी चीज़ों का समूह बनाकर फिर बदलता है; मास (फ़्लो) उत्पादन पट्टी पर बहुत बड़ी गिनती बनाता है; सतत उत्पादन बिना रुके चलता है। लीन उत्पादन और जस्ट-इन-टाइम बर्बादी और स्टॉक घटाते हैं। गुणवत्ता नियंत्रण हर चीज़ को लक्ष्य माप और टॉलरेंस (जैसे 50 ± 0.5 mm) से जाँचता है, और गुणवत्ता आश्वासन हर चरण में गुणवत्ता डालता है।
- सतह उपचार और फ़िनिश – फ़िनिश किसी पदार्थ की सतह पर लगाई गई परत या किया गया उपचार है। फ़िनिश दो काम करती है: रक्षा (जंग, सड़न, पानी, धूप की UV किरणें, घिसाव, दाग़, आग से) और रूप या स्पर्श सुधारना (रंग, चमक, बनावट)। लकड़ी पर पेंट, वार्निश, तेल, मोम, स्टेन या परिरक्षक लगते हैं। धातुओं पर प्राइमर के ऊपर पेंट, पाउडर कोटिंग, ज़िंक से गैल्वनीकरण, विद्युत लेपन, और एल्युमिनियम पर एनोडाइज़िंग। कई पॉलिमर साँचे से ही स्वयं-फ़िनिश होते हैं, पर पॉलिश या छपाई हो सकती है। कागज़ और बोर्ड पर लैमिनेशन या वार्निश। कपड़ों पर जल-विकर्षक, अग्नि-मंदक, सिलवट-रोधी या ब्रश जैसी फ़िनिश, और लैमिनेटेड झिल्ली वाले कपड़े बारिश रोकते पर पसीने की भाप बाहर जाने देते हैं। फ़िनिश चुनते समय पदार्थ, उपयोग की जगह, लागत, लगाने का तरीका और पर्यावरण पर असर देखते हैं।
- CAD/CAM: डिजिटल डिज़ाइन और निर्माण – CAD (कंप्यूटर-एडेड डिज़ाइन) का मतलब है कंप्यूटर पर किसी उत्पाद का सटीक 3D मॉडल बनाना और जाँचना। CAM (कंप्यूटर-एडेड मैन्युफ़ैक्चर) उस मॉडल को निर्देशों (टूलपाथ, जो G-कोड में सेव होता है) में बदलता है, जिन्हें कंप्यूटर से चलने वाली मशीन मानकर पुर्ज़ा बनाती है। CNC मिलिंग और लेथ पदार्थ काटकर हटाते हैं (सबट्रैक्टिव)। 3D प्रिंटर परतें जोड़ते हैं (एडिटिव)। लेज़र कटर सपाट शीट काटते हैं। CAD और CAM साथ हों तो पुर्ज़े सटीक, एक जैसे और जल्दी बदलने लायक बनते हैं, और डिज़ाइनर जल्दी प्रोटोटाइप बना पाते हैं (रैपिड प्रोटोटाइपिंग)। कमियाँ: महँगी मशीनें, प्रशिक्षण, और हाथ के हुनर का कम होना।
- डिज़ाइन प्रक्रिया: समस्या से उत्पाद तक – डिज़ाइन प्रक्रिया कदमों का एक चक्र है जिससे डिज़ाइनर असली लोगों की असली समस्या हल करते हैं: ज़रूरत की खोजबीन, उसे ब्रीफ़ और नापने लायक विनिर्देश में लिखना, कई विचार बनाना, प्रोटोटाइप बनाना, और विनिर्देश पर परीक्षण व मूल्यांकन। जो फ़ेल हो, वह आपको चक्र में वापस भेजता है। इस दोहराव को पुनरावृत्ति (iteration) कहते हैं, और लगभग हर उत्पाद, ऐप, इमारत और कलाकृति ऐसे ही बेहतर बनती है।
- स्वास्थ्य और सुरक्षा: ख़तरे, जोखिम और नियंत्रण – ख़तरा (hazard) वह चीज़ है जो नुकसान कर सकती है। जोखिम (risk) बताता है नुकसान कितना संभव है और कितना गंभीर होगा: जोखिम = संभावना × गंभीरता। जोखिम आकलन में ख़तरे ढूँढते हैं, किसे नुकसान हो सकता है तय करते हैं, अंक देते हैं, नियंत्रण जोड़ते हैं और बाद में दोबारा जाँचते हैं। नियंत्रण का क्रम: हटाना, बदलना, इंजीनियरिंग नियंत्रण, नियम और प्रशिक्षण, और आख़िर में PPE। सुरक्षा चिह्न रंग और आकार से बोलते हैं। वर्कशॉप, कला कक्ष और कार्यस्थल पर गार्ड, ताज़ी हवा, लेबल, खुले रास्ते और प्राथमिक उपचार चाहिए। ज़्यादातर देशों में क़ानून मालिक और कर्मचारी दोनों पर सुरक्षा की ज़िम्मेदारी डालते हैं।
- डेटा सुरक्षा और बौद्धिक संपदा अधिकार – बौद्धिक संपदा (IP) मन की रचना है, जैसे कहानी, गीत, प्रोग्राम, आविष्कार या लोगो। बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) निर्माता को उसके उपयोग पर नियंत्रण देते हैं। कॉपीराइट रचनात्मक कार्य (लेख, संगीत, कला, सॉफ़्टवेयर कोड) को बनते ही अपने-आप बचाता है; पेटेंट नए, उपयोगी आविष्कार को लगभग 20 साल बचाता है और इसके लिए आवेदन करना पड़ता है; ट्रेडमार्क ब्रांड नाम, लोगो और नारे बचाता है। साहित्यिक चोरी दूसरे का काम बिना श्रेय अपना बताना है। उल्लंघन सुरक्षित IP को बिना अनुमति इस्तेमाल करना है। सार्वजनिक लाइसेंस से निर्माता अपनी शर्तों पर साझा करते हैं: रचनात्मक कार्यों के लिए क्रिएटिव कॉमन्स (BY, SA, NC, ND), और सॉफ़्टवेयर के लिए GPL (कॉपीलेफ़्ट: बदला संस्करण खुला रहे) और Apache (उदार: नोटिस रखकर बंद उत्पाद में भी)।
- सतत डिज़ाइन: लोगों और धरती के अनुकूल उत्पाद – सतत (टिकाऊ) डिज़ाइन का मतलब है ऐसे उत्पाद बनाना जो हमारी ज़रूरत पूरी करें और प्रकृति व लोगों को कम से कम नुकसान दें। हर उत्पाद का जीवन चक्र है: कच्चा माल, निर्माण, परिवहन, उपयोग और जीवन का अंत। जीवन चक्र आकलन हर चरण का पारिस्थितिक पदचिह्न (ऊर्जा, CO₂, पानी, कचरा) जोड़ता है। सामाजिक पदचिह्न मज़दूरों और समुदायों पर असर है: वेतन, सुरक्षा, बाल श्रम, उचित व्यापार। डिज़ाइनर छह R (पुनर्विचार, मना करना, कम करना, दोबारा उपयोग, मरम्मत, पुनर्चक्रण), मरम्मत और विघटन योग्य डिज़ाइन अपनाते हैं और नियोजित अप्रचलन से बचते हैं। इको डिज़ाइन आर्थिक पक्ष भी देखता है: उत्पाद सस्ता और बनाने लायक़ हो, इसलिए अच्छा डिज़ाइन पर्यावरण, समाज और अर्थव्यवस्था में संतुलन रखता है।
- बाज़ार अनुसंधान: ग्राहक क्या चाहते हैं, यह पता करना – बाज़ार अनुसंधान का अर्थ है ग्राहकों, प्रतियोगियों और बाज़ार की जानकारी इकट्ठा करके उसका विश्लेषण करना, ताकि व्यवसाय बेहतर निर्णय ले और जोखिम घटे। प्राथमिक (क्षेत्र) अनुसंधान सर्वेक्षण, साक्षात्कार, अवलोकन, फ़ोकस समूह और परीक्षण विपणन से नया डेटा जुटाता है। द्वितीयक (डेस्क) अनुसंधान पहले से मौजूद डेटा, जैसे सरकारी आँकड़े, रिपोर्ट और वेबसाइटें, इस्तेमाल करता है। सबसे नहीं पूछ सकते, इसलिए नमूना चुनते हैं: यादृच्छिक, स्तरित, कोटा या सुविधा। डेटा मात्रात्मक (संख्याएँ) या गुणात्मक (राय और कारण) होता है। नतीजों से बाज़ार विभक्तिकरण, बाज़ार मानचित्र, ख़ाली जगह खोजने और मूल्य प्रस्ताव बनाने में मदद मिलती है। इसकी सीमाएँ भी हैं: पक्षपात, छोटे नमूने और पुराना डेटा।
- तकनीकी ड्राइंग: डिज़ाइन के विचार बताना – तकनीकी ड्राइंग एक साझा चित्र-भाषा है जो किसी वस्तु का सही आकार और माप दिखाती है। डिज़ाइनर हाथ से स्केच से शुरू करते हैं, फिर आइसोमेट्रिक या तिर्यक (ऑब्लीक) दृश्य से वस्तु को 3D में दिखाते हैं, और ऑर्थोग्राफ़िक प्रक्षेप (सामने, ऊपर, बगल के दृश्य) में मानक रेखाएँ, मिलीमीटर में माप और स्केल लगाते हैं ताकि कोई भी उसे बना सके। आज ज़्यादातर ड्राइंग CAD सॉफ़्टवेयर से बनती हैं।