लोग व्यवसाय क्यों शुरू करते हैं
व्यवसाय ऐसी कोई भी संस्था है जो ग्राहकों को वस्तुएँ या सेवाएँ देती है।
लोग अलग-अलग कारणों से व्यवसाय शुरू करते हैं:
- लाभ कमाने के लिए (ख़र्च से ज़्यादा आय)
- आज़ादी: अपना मालिक ख़ुद बनने के लिए
- बाज़ार की किसी ज़रूरत या कमी को पूरा करने के लिए
- दूसरों की मदद के लिए (सामाजिक उद्यम या संस्था)
व्यवसाय रोज़गार देते और कर चुकाते हैं, इसलिए पूरे समाज की मदद करते हैं।
वस्तुएँ और सेवाएँ, ज़रूरतें और चाहतें
वस्तुएँ वे चीज़ें हैं जिन्हें छू सकते हैं: ब्रेड, फ़ोन, साइकिल।
सेवाएँ आपके लिए किए गए काम हैं: बाल कटाई, बस की सवारी, डॉक्टर की जाँच।
ज़रूरतें जीने के लिए अनिवार्य हैं: भोजन, पानी, घर, बुनियादी कपड़े।
चाहतें वे हैं जो अच्छी लगती हैं पर उनके बिना जी सकते हैं: वीडियो गेम, सिनेमा टिकट।
लोगों की चाहतें असीमित हैं पर पैसा सीमित, इसलिए व्यवसाय उन्हें पूरा करने की होड़ करते हैं।
उत्पादन के साधन और अवसर लागत
किसी भी उत्पाद को बनाने के लिए ज़रूरी संसाधन उत्पादन के साधन हैं:
- भूमि: प्राकृतिक संसाधन, जैसे जगह, पानी, खनिज। इनाम: किराया।
- श्रम: लोगों का शारीरिक और मानसिक काम। इनाम: मज़दूरी/वेतन।
- पूँजी: मनुष्य के बनाए औज़ार, मशीनें, इमारतें और उन्हें ख़रीदने का पैसा। इनाम: ब्याज।
- उद्यम: वह व्यक्ति जो बाक़ी साधनों को जोड़ता और जोखिम उठाता है। इनाम: लाभ।
साधन सीमित (दुर्लभ) हैं, इसलिए हर चुनाव में कुछ छोड़ना पड़ता है। अवसर लागत उस अगले सबसे अच्छे विकल्प का मूल्य है जिसे आपने नहीं चुना।
प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्र
- प्राथमिक क्षेत्र: प्रकृति से कच्चा माल लेता है। खेती, मछली पालन, वानिकी, खनन।
- द्वितीयक क्षेत्र: कच्चे माल से उत्पाद बनाता है। कारख़ाने, निर्माण, खाद्य प्रसंस्करण।
- तृतीयक क्षेत्र: सेवाएँ देता है। दुकानें, बैंक, होटल, परिवहन, स्कूल।
तीनों एक-दूसरे पर निर्भर हैं: किसान और बेकरी के बिना दुकान ब्रेड नहीं बेच सकती। ज़्यादातर अमीर देशों में अब ज़्यादातर लोग तृतीयक क्षेत्र में काम करते हैं।
उद्यमी, लक्ष्य और बदलती दुनिया
उद्यमी
उद्यमी व्यवसाय शुरू करता और चलाता है, साधन जुटाता है और पैसा डूबने का जोखिम उठाता है। आम गुण: जोखिम उठाने की हिम्मत, मेहनती, रचनात्मक, दृढ़ निश्चयी, मौक़ा पहचानने वाला। जोखिम का इनाम है लाभ, साथ में आज़ादी और संतोष।
व्यावसायिक लक्ष्य
नया व्यवसाय पहले टिके रहना चाहता है। बाद के लक्ष्य: लाभ, विस्तार, बाज़ार हिस्सा, ग्राहक संतुष्टि और सामाजिक या नैतिक लक्ष्य। लक्ष्य हर व्यवसाय में अलग होते हैं और समय के साथ बदलते हैं।
बदलती दुनिया में व्यवसाय
व्यवसाय को नई तकनीक (ऑनलाइन बिक्री, डिजिटल भुगतान), बदलती ग्राहक पसंद, अर्थव्यवस्था (आय, ब्याज दर) और नैतिक व पर्यावरण चिंताओं के अनुसार बदलना पड़ता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- लाभ = आय (राजस्व) − कुल लागत
- उत्पादन के साधन: भूमि (किराया), श्रम (मज़दूरी), पूँजी (ब्याज), उद्यम (लाभ)
- अवसर लागत = छोड़ा गया अगला सबसे अच्छा विकल्प
- वस्तु = मूर्त (छू सकते); सेवा = अमूर्त
- प्राथमिक → द्वितीयक → तृतीयक (उगाओ → बनाओ → सेवा दो)
हल किए गए उदाहरण
1. रिया के पास ₹40,000 हैं। वह अपने डिज़ाइन काम के लिए लैपटॉप या मार्केटिंग कोर्स ले सकती है। वह लैपटॉप लेती है। अवसर लागत क्या है?
मार्केटिंग कोर्स, क्योंकि वही छोड़ा गया अगला सबसे अच्छा विकल्प है।
2. क्षेत्र बताइए: (क) चाय बागान (ख) कार कारख़ाना (ग) होटल (घ) मछली पकड़ने की नाव।
(क) प्राथमिक, (ख) द्वितीयक, (ग) तृतीयक, (घ) प्राथमिक।
3. एक कैफ़े की हफ़्ते की आय ₹24,000 और लागत ₹19,000 है। लाभ बताइए और यह किस साधन का इनाम है?
लाभ = 24,000 − 19,000 = ₹5,000। लाभ उद्यम (उद्यमी के जोखिम) का इनाम है।
आम गलतियाँ
- पूँजी को सिर्फ़ पैसा समझना। उत्पादन के साधनों में पूँजी मुख्यतः मशीनें, औज़ार और इमारतें हैं।
- अवसर लागत को "छोड़ी गई हर चीज़" कहना। यह सिर्फ़ अगला सबसे अच्छा विकल्प है।
- दुकानों को द्वितीयक क्षेत्र में रखना। दुकान सेवा देती है, इसलिए तृतीयक।
- यह कहना कि हर व्यवसाय सिर्फ़ लाभ चाहता है। नए व्यवसाय टिके रहना चाहते हैं; संस्थाओं के सामाजिक लक्ष्य होते हैं।